Psychological counselling centre

Psychological counselling centre Rehabilitation Psychologist

30/05/2026

"मनुष्य के सोच के "भाव" उनके "चेहरे" पर साफ दिखाई देते है, लेकिन वह छिपाने की कोशिश भी करता हैं, फिर भी उसकी आँखों में नमी के रुप मैं अर्ध छलके रहते है, जो व्यक्ति की मानसिक स्थिति को बयान करते हैं"।

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट -कंसल्टेंट

27/05/2026

"भावनाओं के बवंडर में हर व्यक्ति डूबने के लिए तैयार हैं, वह नहीं जानता कि बवंडर कितना भयानक हैं,समझाने पर न समझा हैं लेकिन बवंडर में जाने के बाद बर्बाद ही हैं "।

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट & कंसल्टेंट

26/05/2026

"मनुष्य का "सकारात्मक" "व्यवहार" ही उसके "व्यक्तित्व" का "निर्माण करता हैं" और उसकी "पहचान" समाज में कराता है"!

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट & कंसल्टेंट

24/05/2026
24/05/2026

"अगर किसी चीज का "वहम" जब एक बार "दिमाग" में बैठ जायें तो व्यक्ति का "जीना" "दुर्लभ" कर देता हैं, यह एक ऐसी "मानसिक" "बीमारी" है जो खुद को तो परेशान करती ही है, परिवार के अन्य सदस्यों को भी चैन से नहीं रहने देती हैं"।

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट कंसल्टेंट

22/05/2026

"जो दिखाई नहीं देतें हैं, वह हैं, "ईश्वर" और दूसरी हैं "अंतरात्मा" इन दोनों को ही किसी को दिखा नहीं सकते हैं क्योंकि ये वो अदृश्य शक्तियां है जो दिखाई नहीं देती हैं और अक्सर देखा गया है कि कभी - कभी सच चाह कर भी साबित नहीं किया जा सकता है।

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट & कंसल्टेंट

22/05/2026

"अंतर्मुखी" व्यक्ति आसानी से सभी से घुलमिल नहीं पाते हैं ,ये एकांत में रहना पसंद करते हैं और "बहिमुर्खी" व्यक्ति समाजिक होते हैं, जो आसानी से मेलजोल कर सकते हैं लेकिन अंतर्मुखी व्यक्ति अपनी बात शेयर नहीं कर पाने के कारण मौन रहते हैं,लेकिन ये विपरीत "परिस्थितियों" में "तनाव" महसूस करते हैं"।

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट & कंसल्टेंट

21/05/2026

"मन" और "आत्मा" में चल रहा "द्वन्द्व" कभी किसी को दिखाई नहीं देता हैं,इसलिए लोग अपनी इस "द्वन्द्वात्मक" "समस्या" को अकेले ही झेलते हैं और किसी से शेयर भी नहीं कर पाते हैं जिसके कारण व्यक्ति अन्दर ही अंदर टूट जाता हैऔर एक दिन अवसाद की चपेट में आ जाता हैं"!

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट & कंसल्टेंट

20/05/2026

"जिन्दगी को बहतर बनाना भी एक कला हैं और लोग इसी कला को बहतर नहीं बना पाते हैं, इंसान को अगर जीना कैसे है, ये कला आ जाये तो 8% समस्याओं से छुटकारा मिल सकता हैं"।

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट & कंसल्टेंट

20/05/2026

"मनुष्य के अंदर "भय" चिंता. "तनाव" व "नकारात्मक" विचारों का "गुच्छा" अगर "दिमाग" में रहता हैं, तो वह कभी भी अपनी बुद्धि और "क्षमता" का "आंकलन" नहीं कर सकता हैं और न ही जीवन की समस्याओं से कभी बहार निकल सकता हैं साथ ही व्यक्ति जीवन भर दुसरो पर ही निर्भर रहेगा"।

अमिता सिंह
साइकोलॉजिस्ट & कंसल्टेंट

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