Shashwat Ayurvedic Pharmacy

Shashwat Ayurvedic Pharmacy Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from Shashwat Ayurvedic Pharmacy, Medical Center, R. k puram haveliya jhusi prayagraj, Allahabad.

For a better future
For being healthy
With a nature
With India's oldest culture
With Our Ayurveda
With best suggestion


With
Vaidya Anil Kumar Pandey
B.A.M.S M.D.(A.M)
AYURVEDACHARYA

09/07/2026

कुटकी (Kutki) आयुर्वेद की एक बेहद चमत्कारी और प्रमुख जड़ी-बूटी है, जिसका वैज्ञानिक नाम Picrorhiza kurroa है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

यह मुख्य रूप से हिमालय के ऊंचे पहाड़ों (हिमालयन रीजन) में पाई जाती है। स्वाद में यह अत्यधिक कड़वी होती है, लेकिन सेहत के लिए इसे एक बेहतरीन नेचुरल डिटॉक्सिफायर और लिवर टॉनिक माना जाता है।

​यहाँ कुटकी, इसके उपयोग और फायदों के बारे में पूरी जानकारी दी गई है:

​1. कुटकी किन-किन चीजों में उपयोग होती है? (फायदे)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​कुटकी का उपयोग मुख्य रूप से शरीर के दोषों (विशेषकर पित्त और कफ) को शांत करने और निम्नलिखित समस्याओं में किया जाता है:

​लिवर के रोग (Liver Disorders): यह लिवर के लिए अमृत समान है। फैटी लिवर, पीलिया (Jaundice), लिवर सिरोसिस और सुस्त लिवर (Sluggish Liver) को ठीक करने में यह सबसे आगे है। यह लिवर के एंजाइम्स को संतुलित करती है।

​पाचन क्रिया और भूख बढ़ाना: जिन लोगों को भूख कम लगती है या खाना ठीक से नहीं पचता, उनके लिए कुटकी पाचक रस (Digestive Enzymes) को बढ़ाती है।

​क्रोनिक फीवर (पुरानी कमजोरी या बुखार): मलेरिया, डेंगू या ऐसा बुखार जो शरीर के अंदर बैठ गया हो और बार-बार आता हो, उसे जड़ से निकालने के लिए कुटकी का उपयोग किया जाता है।

​त्वचा रोग (Skin Diseases): रक्त साफ (Blood Purifier) करने के गुण के कारण यह सोरायसिस, एक्जिमा, चेहरे के कील-मुहासे और एलर्जी को दूर करती है।

​ब्लड शुगर कंट्रोल (Diabetes): यह इंसुलिन के स्तर को सुधारने और शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करती है।

​वजन घटाने में: यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करती है और टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालकर मोटापा कम करने में मदद करती है।

​2. कुटकी का उपयोग कैसे किया जाता है? (Upyog Kaise Karein)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​कुटकी का स्वाद बहुत कड़वा होता है, इसलिए इसे सीधे चबाना मुश्किल होता है। आयुर्वेद में इसका उपयोग अलग-अलग तरीकों से बताया गया है:

​कुटकी चूर्ण (Powder): आधा ग्राम से 1 ग्राम (एक चुटकी से थोड़ी ज्यादा) कुटकी चूर्ण को गुनगुने पानी या शहद के साथ दिन में दो बार खाना खाने के बाद लिया जा सकता है। (शहद इसके कड़वेपन को कम करता है)।

​काढ़ा (Decoction): कुटकी की जड़ के टुकड़ों को पानी में उबालकर, छानकर काढ़ा बनाकर पिया जाता है (विशेषकर बुखार और लिवर डिटॉक्स के लिए)।

​घी के साथ (Tikta Ghrita): आयुर्वेद में पित्त विकारों और त्वचा रोगों के लिए इसे गाय के घी के साथ मिलाकर भी दिया जाता है।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
​⚠️ नोट: कुटकी की तासीर ठंडी होती है और यह स्वभाव से रेचक (पेट साफ करने वाली) होती है। इसलिए इसकी अधिक मात्रा से दस्त (Diarrhea) लग सकते हैं।

​3. शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) के अनुसार इसके विशेष उपाय
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में शुद्धता और सही संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहाँ कुटकी को लेकर 4 सबसे प्रभावी और सटीक उपाय बताए जाते हैं, जिन्हें आप आसानी से उपयोग कर सकते हैं:

​उपाय 1: संपूर्ण लिवर डिटॉक्स (Liver Cleanse)

​विधि: आधा ग्राम कुटकी चूर्ण में आधा चम्मच भृंगराज चूर्ण या भूमि आंवला चूर्ण मिलाएं।

​कैसे लें: इसे सुबह खाली पेट गुनगुने पानी के साथ लें। यह लिवर की सूजन और फैटी लिवर को मात्र कुछ हफ्तों में ठीक करने की ताकत रखता है।

​उपाय 2: पुराना बुखार और सुस्ती दूर करने के लिए

​विधि: आधा ग्राम कुटकी चूर्ण को 1 चम्मच गिलोय के रस या गिलोय चूर्ण के साथ मिलाएं।

​कैसे लें: सुबह-शाम भोजन के बाद शहद के साथ इसे लेने से टाइफाइड या पुराने बुखार के कारण आई शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

​उपाय 3: खून की सफाई और चमकदार त्वचा (Skin Care)

​विधि: आधा ग्राम कुटकी चूर्ण को एक चम्मच मंजिष्ठा चूर्ण या नीम के पत्ते के रस के साथ मिलाएं।

​कैसे लें: रोज रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से लें। यह खून साफ करके चेहरे के दाग-धब्बे और दाने खत्म करता है।

​उपाय 4: कब्ज और पेट की गैस (Digestive Relief)

​विधि: आधा ग्राम कुटकी चूर्ण को आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण के साथ मिलाएं।

​कैसे लें: रात को सोते समय गुनगुने पानी से लें। इससे सुबह पेट पूरी तरह साफ होता है और पुरानी से पुरानी कब्ज दूर होती है।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
​एक जरूरी सलाह: यदि आप किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं या गर्भवती महिलाएं इसका सेवन करना चाहती हैं, तो हमेशा नजदीकी आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह के बाद ही खुराक तय करें।

Address jhusi Prayagraj
No. 8707602842

08/07/2026

त्रिफला आयुर्वेद का एक अत्यंत प्रसिद्ध और चमत्कारी रसायन माना जाता है। यह कोई अकेली जड़ी-बूटी नहीं है, बल्कि तीन औषधीय फलों का एक संतुलित मिश्रण है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​यहाँ त्रिफला, उसके उपयोग, लाभ और आपकी फार्मेसी के संदर्भ में पूरी जानकारी हिंदी में दी गई है:

​1. त्रिफला क्या है? (What is Triphala?)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​त्रिफला शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: 'त्रि' (तीन) और 'फला' (फल)। इसमें समान मात्रा में (या पारंपरिक अनुपातों में) निम्नलिखित तीन फलों के सूखे छिलकों का चूर्ण मिलाया जाता है:

​आंवला (Amla / Indian Gooseberry): यह विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जो इम्यूनिटी बढ़ाता है।

​बहेड़ा (Baheda / Bibhitaki): यह श्वसन प्रणाली (respiratory system) और बलगम की समस्याओं में कारगर है।

​हरड़ (Harad / Haritaki): इसे आयुर्वेद में 'जड़ी-बूटियों की मां' कहा जाता है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त और साफ करती है।

​2. यह किस-किस रोग में काम आता है और इसके लाभ? (Benefits & Uses)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​त्रिफला शरीर के तीनों दोषों—वात, पित्त और कफ—को संतुलित करता है। यह मुख्य रूप से निम्नलिखित रोगों और समस्याओं में काम आता है:

​कब्ज और पाचन की समस्याएं: यह पेट को साफ करने (Laxative) का काम करता है। पुरानी से पुरानी कब्ज, गैस, एसिडिटी और अपच में यह रामबाण है।

​आंखों की रोशनी के लिए: त्रिफला के पानी से आंखें धोने या इसे घी-शहद के साथ खाने से आंखों की ज्योति बढ़ती है और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं में आराम मिलता है।

​वजन घटाने में: यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेज करता है और हानिकारक टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकाल कर चर्बी कम करने में मदद करता है।

​इम्यूनिटी और एनर्जी बढ़ाना: इसके नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे बार-बार मौसमी बीमारियां नहीं होतीं।

​त्वचा और बालों के लिए: खून को साफ करने के कारण यह कील-मुंहासे कम करता है और बालों का झड़ना रोककर उन्हें चमकदार बनाता है।

​दांतों और मसूड़ों के रोग: त्रिफला के काढ़े से कुल्ला करने पर मसूड़ों की सूजन, पायरिया और मुंह की बदबू दूर होती है।

​3. शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) में इसके प्रकार और उपयोग
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​आपकी फार्मेसी में मरीजों की सुविधा और रोग की गंभीरता के अनुसार त्रिफला को कई रूपों (Formulations) में तैयार या प्रयुक्त किया जा सकता है:

​क. त्रिफला चूर्ण (Triphala Churn)

​क्या है: यह सबसे पारंपरिक और शुद्ध रूप है, जिसमें तीनों फलों का बारीक पाउडर होता है।

​मुख्य उपयोग: कब्ज दूर करने के लिए रात को गुनगुने पानी या दूध के साथ।

​ख. त्रिफला घृत (Triphala Ghrita)

​क्या है: त्रिफला को गाय के घी के साथ सिद्ध करके बनाया जाता है।

​मुख्य उपयोग: यह विशेष रूप से आंखों के रोगों (Netra Roga), कमजोरी और बालों की समस्याओं के लिए उत्तम माना जाता है।

​ग. त्रिफला गुग्गुल (Triphala Guggulu)

​क्या है: त्रिफला के साथ शुद्ध गुग्गुल और पीपल का मिश्रण किया जाता है।

​मुख्य उपयोग: यह जोड़ों के दर्द (Arthritis/Joint Pain), सूजन, बवासीर (Piles), भगंदर (Fistula) और शरीर की गांठों को सुखाने में बहुत असरदार है।

​घ. त्रिफला क्वाथ / काढ़ा (Triphala Kwath)

​क्या है: यह मोटा कुटा हुआ (जौकुट) मिश्रण होता है जिसे उबालकर काढ़ा बनाया जाता है।

​मुख्य उपयोग: त्वचा के घावों को धोने, बालों को धोने या मुंह के छालों के लिए कुल्ला (Gargle) करने में।

​4. त्रिफला का सेवन कैसे करें? (Dosage)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​पेट साफ करने और कब्ज के लिए: रात को सोते समय 3 से 5 ग्राम (आधा से एक चम्मच) चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें।

​शरीर को पुष्ट करने (रसायन के रूप में): सुबह खाली पेट हल्के गर्म पानी या शहद के साथ इसका सेवन किया जाता है।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
​नोट: हालांकि त्रिफला पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन गर्भवती महिलाओं या दस्त (Diarrhea) से पीड़ित व्यक्तियों को बिना चिकित्सीय परामर्श के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

07/07/2026

शतावरी (Shatavari) आयुर्वेद की एक बेहद चमत्कारी और प्रमुख जड़ी-बूटी है। इसका वैज्ञानिक नाम Asparagus racemosus है। आयुर्वेद में इसे "सौ रोगों को ठीक करने वाली" या "सौ पतियों वाली" भी कहा जाता है, जो मुख्य रूप से महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता (Fertility) और जीवन शक्ति को मजबूत करने की इसकी अद्भुत क्षमता को दर्शाता है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

हालांकि, यह पुरुषों के लिए भी उतनी ही फायदेमंद है।
​शतावरी के गुण, इसके काम करने का तरीका और इसके फायदों को नीचे विस्तार से समझाया गया है:

​1. शताब्दी के मुख्य गुण (Properties)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​Shashwat Ayurvedic Pharmacy और पारंपरिक आयुर्वेद के अनुसार, शतावरी में निम्नलिखित गुण पाए जाते हैं:

​रस (Taste): मधुर (मीठा) और तिक्त (कड़वा)।

​वीर्य (Potency): शीत (ठंडी तासीर)।

यह शरीर की अतिरिक्त गर्मी और पित्त को शांत करती है।

​विपाक (Post-digestive effect): मधुर।

​प्रभाव: यह एक बेहतरीन रसायन (Rejuvenator) है, जो शरीर की कोशिकाओं को नया जीवन देती है, और बल्य (Strength provider) है, जो शारीरिक कमजोरी को दूर करती है।

​2. यह शरीर में कैसे काम करता है? (Mechanism of Action)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​शतावरी मुख्य रूप से शरीर के पित्त (Heat) और वात (Air/Dryness) दोषों को संतुलित करने का काम करती है:

​हार्मोनल संतुलन (Hormonal Balance): इसमें प्राकृतिक रूप से Phytoestrogens (पौधों से मिलने वाला एस्ट्रोजन) होते हैं, जो महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करते हैं।

​सूजन और तनाव कम करना: यह शरीर में कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करती है और इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स कोशिकाओं को डैमेज होने से बचाते हैं।

​पोषण और नमी (Nourishment & Hydration): ठंडी तासीर और स्निग्ध (Oily/Moist) गुण के कारण यह शरीर के सूखेपन को दूर करती है और धातुओं (टिश्यूज) को पोषण देती है।

​3. यह किन-किन चीजों में काम आता है? (Key Benefits)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​क. महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए वरदान

​मां के दूध में वृद्धि (Galactagogue): डिलीवरी के बाद जो माताएं अपने शिशु को स्तनपान करा रही हैं, उनके लिए यह सर्वोत्तम है। यह प्रोलैक्टिन हार्मोन को बढ़ाकर दूध की मात्रा और गुणवत्ता में सुधार करती है।

​PCOD/PCOS और पीरियड्स की समस्याएं: अनियमित पीरियड्स, पेट में ऐंठन और भारी ब्लीडिंग को ठीक करती है।

​मेनोपॉज (Menopause): उम्र बढ़ने पर पीरियड्स बंद होने के दौरान होने वाली हॉट फ्लैशेस (अचानक गर्मी लगना), मूड स्विंग्स और रात में पसीना आने जैसी समस्याओं में राहत देती है।

​ख. पुरुषों के लिए फायदे

​शुक्र धातु की वृद्धि: यह पुरुषों में स्पर्म काउंट (शुक्राणुओं की संख्या) और उनकी गतिशीलता (Motility) को बढ़ाती है।

​शारीरिक ताकत: यह कमजोरी और थकान को दूर कर स्टैमिना (Stamina) बढ़ाती है।

​ग. अन्य सामान्य फायदे

​पाचन तंत्र (Digestion & Ulcers): एसिडिटी, सीने में जलन और पेट के अल्सर में यह रामबाण की तरह काम करती है क्योंकि यह पेट की अंदरूनी परत को ठंडक पहुंचाती है।

​तनाव और मानसिक स्वास्थ्य: यह दिमाग को शांत करती है, जिससे तनाव, एंग्जायटी (चिंता) दूर होती है और नींद अच्छी आती है।

​इम्युनिटी बढ़ाना: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करती है।

​4. उपचार, निवारण और सेवन की विधि (How to Consume)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​रोगों के निवारण और सामान्य स्वास्थ्य के लिए शतावरी का सेवन कई तरीकों से किया जा सकता है:

​शतावरी चूर्ण (Powder): आधा से एक छोटा चम्मच (3-6 ग्राम) शतावरी चूर्ण को गुनगुने दूध या शहद के साथ दिन में दो बार (सुबह और रात को) लिया जा सकता है।

​शतावरी कल्प (Shatavari Kalpa): यह चीनी के साथ मिला हुआ मिश्रण होता है, जिसे विशेष रूप से दूध में मिलाकर पीने के लिए बनाया जाता है (यह स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बहुत लोकप्रिय है)।

​शतावरी घृत (Medicated Ghee): स्त्री रोगों और पित्त से जुड़ी समस्याओं के निवारण के लिए डॉक्टर अक्सर शतावरी घृत की सलाह देते हैं।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
​महत्वपूर्ण नोट: यदि किसी को कफ (Cough/Cold) की बहुत ज्यादा समस्या रहती है या शरीर में भारीपन रहता है, तो ठंडी तासीर होने के कारण उन्हें इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
​क्या आप किसी विशेष समस्या या उपचार के लिए शतावरी के उपयोग के बारे में जानना चाहते हैं?

Address jhusi Prayagraj
No. 8707602842

03/07/2026

Ashwagandha (अश्वगंधा) आयुर्वेद की एक बहुत ही शक्तिशाली और प्रसिद्ध जड़ी-बूटी है। इसे "रसायन" माना गया है, जो शरीर और मन दोनों को युवा और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करती है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​आपके Shashwat Ayurvedic Pharmacy के संदर्भ में, इसके मूल फायदे (Key Benefits), उपयोग और सावधानियों को नीचे विस्तार से समझाया गया है:

​ # # Ashwagandha के प्रमुख मूल फायदे (Main Benefits)
​Shashwat Ayurvedic Pharmacy में अश्वगंधा के मुख्य रूप से निम्नलिखित मूल फायदों पर विशेष जोर दिया जाता है:

​तनाव और चिंता से मुक्ति (Stress & Anxiety Relief):
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

यह शरीर में कोर्टिसोल (Cortisol) यानी स्ट्रेस हार्मोन के स्तर को कम करता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है।

​शारीरिक ताकत और स्टैमिना (Strength & Stamina):
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

यह मांसपेशियों (Muscles) को मजबूत बनाता है, शारीरिक कमजोरी दूर करता है और एनर्जी लेवल को बूस्ट करता है।

​पुरुषों के स्वास्थ्य के लिए वरदान (Vigor & Vitality):
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

यह पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन को बढ़ाता है, शुक्राणुओं की गुणवत्ता (S***m Quality) में सुधार करता है और यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।

​बेहतर नींद (Insomnia Relief):
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

जिन लोगों को अनिद्रा या रात में बार-बार आंख खुलने की समस्या होती है, उनके लिए यह प्राकृतिक रूप से गहरी नींद लाने में मदद करता है।

​रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity Booster):
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्युनिटी बढ़ाते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव होता है।

​याददाश्त और एकाग्रता (Brain Function):
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
यह मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सुधारता है, जिससे फोकस और याद रखने की क्षमता (Memory) बढ़ती है।

​ # # # इसका उपयोग किन-किन परिस्थितियों में करना चाहिए? (Indications)

​अगर आप नीचे दी गई परिस्थितियों या समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो अश्वगंधा का सेवन आपके लिए बेहद फायदेमंद होगा:

​क्रोनिक स्ट्रेस या मानसिक थकान: ऑफिस या पर्सनल लाइफ के काम की वजह से होने वाले तनाव में।

​शारीरिक कमजोरी या वजन न बढ़ना: बीमारी के बाद आई कमजोरी को दूर करने या सही तरीके से वजन बढ़ाने के लिए।

​अनिद्रा (Insomnia): रात को ठीक से नींद न आने की स्थिति में।

​जोड़ों का दर्द और सूजन (Arthritis): इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत देते हैं।

​कमजोर इम्युनिटी: बार-बार बीमार पड़ने या सर्दी-खांसी होने की स्थिति में।

●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​ # # # सेवन करने का सही तरीका (Dosage & How to Use)
​चूर्ण (Powder): आधा से एक छोटा चम्मच (3-5 ग्राम) अश्वगंधा चूर्ण को रात में गुनगुने दूध और थोड़ी मिश्री या शहद के साथ लेना सबसे सबसे उत्तम माना जाता है।

​कैप्सूल/टैबलेट: अगर आप टैबलेट ले रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दिन में 1 या 2 टैबलेट पानी या दूध के साथ ले सकते हैं।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​⚠️ जरूरी सावधानी: गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और गंभीर अल्सर या थायराइड के मरीजों को बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
​क्या आप अश्वगंधा का उपयोग किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या के लिए करना चाहते हैं, या आप इसके किसी खास कॉम्बिनेशन (जैसे कैप्सूल या चूर्ण) के बारे में जानना चाहते हैं?

01/07/2026

हाँ, आयुर्वेद के अनुसार बिल्कुल संभव है! आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य ही यही है: "स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणं, आतुरस्य विकार प्रशमनं च" (यानी स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बीमार व्यक्ति के रोग को दूर करना)।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​शरीर को उम्र भर निरोगी रखने के लिए किसी चमत्कारिक दवा की नहीं, बल्कि सही जीवनशैली, सही खान-पान और सही आदतों की ज़रूरत होती है।

​इसे हम दो भागों में समझ सकते हैं—पहला कि आपको रोज़मर्रा की ज़िंदगी में क्या करना चाहिए, और दूसरा कि शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) इसमें आपकी कैसे मदद कर सकती है।

​1. जीवनभर निरोगी रहने के मूल नियम (दिनचर्या और ऋतुचर्या)
​शरीर में तीन दोष होते हैं—वात, पित्त और कफ। जब ये संतुलित रहते हैं, तो इंसान कभी बीमार नहीं पड़ता। इन्हें संतुलित रखने के लिए ये बातें अपनाएं:

​उषापान और दिनचर्या:
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

सुबह सूर्योदय से पहले उठें और गुनगुना पानी पीकर पेट साफ करें। इसे आयुर्वेद में 'उषापान' कहते हैं।

​आहार ही औषधि है:
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

भूख लगने पर ही खाएं। भोजन में छहों रसों (मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा, तीखा, कसैला) का संतुलन होना चाहिए। हमेशा ताजा और गर्म भोजन करें। मैदा, पैकेटबंद फूड और अत्यधिक ठंडी चीजों (फ्रीज का पानी/आइसक्रीम) से दूर रहें।

​विरुद्ध आहार से बचें:
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

दूध के साथ नमक, मछली या खट्टे फलों का सेवन न करें। यह शरीर में टॉक्सिन्स (आम) बनाता है।

​नियमित व्यायाम और योग:
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

रोज कम से कम 30-45 मिनट योग, प्राणायाम (जैसे अनुलोम-विलोम, कपालभाति) या टहलने की आदत डालें।

​पूरी नींद:
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

रात को समय पर सोएं (10 बजे तक) और 7-8 घंटे की गहरी नींद लें। रात को जागने से 'वात' बढ़ता है, जो बुढ़ापे को जल्दी लाता है।

​2. शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में उपचार और निवारण
​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी मुख्य रूप से निवारण (Prevention) और कायाकल्प (Rejuvenation) पर काम करती है, ताकि बीमारियां शरीर में प्रवेश ही न कर पाएं। यहाँ पर उपलब्ध शुद्ध जड़ी-बूटियाँ और औषधियाँ आपकी उम्र भर की सेहत को इस प्रकार संभाल सकती हैं:

​क) रसायन चिकित्सा (Anti-Aging & Immunity)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​आयुर्वेद में 'रसायन' उन औषधियों को कहते हैं जो धातुओं को पुष्ट करती हैं और बुढ़ापे को दूर रखती हैं। फार्मेसी के माध्यम से आप इनका उपयोग कर सकते हैं:

​अश्वगंधा (Ashwagandha): यह शरीर को ताकत देता है, स्ट्रेस हार्मोन (कोर्टिसोल) को कम करता है और मांसपेशियों व हड्डियों को जीवनभर मजबूत रखता है।

​शंखपुष्पी (Shankhpushpi): दिमागी ताकत, याददाश्त और न्यूरॉन्स की हेल्थ के लिए बेहतरीन है। यह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली मानसिक कमजोरी से बचाती है।

​च्यवनप्राश और आमलकी रसायन: विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर, जो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को हमेशा टॉप पर रखेंगे।

​ख) पाचन तंत्र का शुद्धिकरण (Gut Health)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​आयुर्वेद मानता है कि 90% बीमारियां पेट से शुरू होती हैं।
​त्रिफला (Triphala): शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी की त्रिफला जैसी औषधियां शरीर से रोज बनने वाले टॉक्सिन्स (मल और आम) को बाहर निकालती हैं। अगर पेट साफ रहेगा, तो खून साफ रहेगा और त्वचा व बाल हमेशा चमकदार बने रहेंगे।

​ग) वात-पित्त-कफ संतुलन और विशिष्ट निवारण
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​जोड़ों के दर्द (Joint Pain) से बचाव: उम्र बढ़ने पर वात रोग बढ़ते हैं। इसके लिए फार्मेसी में उपलब्ध शुद्ध तेलों (जैसे महानारायण तेल) से मालिश और वात-नाशक जड़ी-बूटियाँ हड्डियों को घिसने से बचाती हैं।

​लिवर और किडनी की सुरक्षा: पुनर्नवा, भूमिआंवला और कुटकी जैसी औषधियों के सही संतुलन से शरीर के फिल्टरिंग ऑर्गन्स (लिवर-किडनी) हमेशा नए जैसे काम करते हैं।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​संक्षेप में कहें तो:
​अगर आप शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी की शुद्ध औषधियों (जैसे त्रिफला, अश्वगंधा और शंखपुष्पी) को अपनी सही डाइट और लाइफस्टाइल के साथ जोड़ लेते हैं, तो शरीर की कोशिकाएं (Cells) खुद को रीजेनरेट करती रहेंगी। इससे आप न सिर्फ लंबी उम्र जिएंगे, बल्कि पूरी तरह ऊर्जावान और निरोगी रहेंगे।
​क्या आप किसी खास शारीरिक समस्या (जैसे पाचन, जोड़ों का दर्द, या कमजोरी) के निवारण के लिए विशिष्ट आयुर्वेदिक योग या दिनचर्या चार्ट के बारे में जानना चाहते हैं?

Address jhusi Prayagraj
No. 8707602842

29/06/2026

पुरुषों और महिलाओं में शारीरिक संरचना और हार्मोनल बदलावों के कारण कुछ बीमारियां अलग-अलग होती हैं, जबकि कुछ दोनों में सामान्य रूप से देखी जाती हैं। आयुर्वेद में इन सभी समस्याओं का जड़ से इलाज उपलब्ध है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​नीचे पुरुषों और महिलाओं की मुख्य बीमारियों, उनके लक्षण और शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) में उपलब्ध उपचारों की पूरी जानकारी हिंदी में दी गई है:

​1. पुरुषों की मुख्य बीमारियां, लक्षण और उपचार

बीमारी मुख्य लक्षण आयुर्वेदिक उपचार व जड़ी-बूटियां
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

शारीरिक कमजोरी व स्टैमिना की कमी (Sexual & Physical Weakness)

थकान, ऊर्जा की कमी, मानसिक तनाव, कमजोरी।

अश्वगंधा, सफेद मूसली, कौंच बीज, और शिलाजीत का उपयोग। यह शरीर को बल और ओज प्रदान करता है।

प्रोस्टेट की समस्या (BPH / Prostate Enlargement)

पेशाब रुक-रुक कर आना, बार-बार पेशाब लगना, रात में परेशानी होना।

गोक्षुरु (Gokshura), वरुणादि क्वाथ, और चंद्रप्रभा वटी जो सूजन और यूरिनरी ट्रैक को ठीक करती हैं।

लीवर और पेट की खराबी (फैटी लीवर, अपच)

भूख न लगना, पेट फूलना, गैस, सुस्ती।

कालमेघ, भुईंआंवला, और त्रिफला (Triphala) चूर्ण जो लीवर को डिटॉक्स करते हैं।

2. महिलाओं की मुख्य बीमारियां, लक्षण और उपचार

बीमारी मुख्य लक्षण आयुर्वेदिक उपचार व जड़ी-बूटियां
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

हार्मोनल असंतुलन (PCOS / PCOD)

पीरियड्स का अनियमित होना, चेहरे पर बाल आना, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स।

शतावरी (Shatavari), कचनार गुग्गुल, और अशोकारिष्ट जो हार्मोन को संतुलित करते हैं।

ल्यूकोरिया (सफेद पानी आना)

अत्यधिक कमजोरी, पीठ दर्द, चिड़चिड़ापन, सुस्ती।

लोध्र, अशोक की छाल, और पुष्यानुग चूर्ण का विशेष कॉम्बिनेशन।

खून की कमी (Anemia)व जोड़ों का दर्द

थकान, त्वचा का पीला पड़ना, सांस फूलना, घुटनों और कमर में दर्द।

मंडूर भस्म, पुनर्नवा, और जोड़ों के दर्द के लिए शल्लकी (Shallaki) व रास्नादि गुग्गुल।

3. मानसिक और सामान्य बीमारियां (दोनों के लिए)

​तनाव और अनिद्रा (Stress & Insomnia): आज की जीवनशैली में यह बहुत आम है।

​लक्षण: रात में नींद न आना, हर समय चिंता रहना, सिरदर्द।

​उपचार: शंखपुष्पी (Shankhpushpi), ब्राह्मी और जटामांसी का मिश्रण जो दिमाग को शांत करता है।

​बालों का झड़ना और त्वचा रोग:

​उपचार: भृंगराज, आमला, और नीम-मंजिष्ठा जैसे रक्त शोधक (Blood Purifiers)।

​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में कितने प्रकार के उपचार हैं?
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में शुद्ध और पारंपरिक पद्धतियों से तैयार किए गए मुख्य रूप से 5 प्रकार के उपचार और दवाइयां उपलब्ध हैं, जो वात, पित्त और कफ दोषों को संतुलित करके बीमारी को जड़ से खत्म करते हैं:

​1. चूर्ण और वटी (Powders & Tablets)

​विभिन्न शुद्ध जड़ी-बूटियों (जैसे अश्वगंधा, त्रिफला, शतावरी) के बारीक चूर्ण और घन वटी (Tablets) जो रोजमर्रा के इस्तेमाल और सटीक डोज़ के लिए तैयार की जाती हैं।

​2. आसव और अरिष्ट (Liquid Fermented Preparations)
​ये प्राकृतिक रूप से फर्मेंटेड लिक्विड दवाएं होती हैं (जैसे अशोकारिष्ट, दशमूलारिष्ट), जो शरीर में बहुत तेजी से अवशोषित (Absorb) होती हैं और पाचन व कमजोरी में रामबाण काम करती हैं।

​3. रस-रसायन और भस्म (Mineral & Herbo-mineral Medicines)
​गंभीर और पुरानी बीमारियों (क्रॉनिक डिसीज) के लिए शुद्ध की गई धातुओं और जड़ी-बूटियों के मिश्रण से बनी शक्तिशाली दवाएं, जो शरीर की इम्युनिटी और ताकत को तुरंत बढ़ाती हैं।

​4. सिद्ध तेल और घृत (Medicated Oils & Ghee)
​जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की ऐंठन और बालों की समस्याओं के लिए विशेष जड़ी-बूटियों से पकाए गए तेल (जैसे महानारायण तेल, भृंगराज तेल) और आंतरिक स्वास्थ्य के लिए औषधीय घी।

​5. क्वाथ और काढ़े (Herbal Decoctions)
​शरीर के टॉक्सिन्स (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने, इम्युनिटी बढ़ाने और श्वसन व पेट के विकारों को दूर करने के लिए विशेष काढ़े।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
​क्या आप किसी विशेष बीमारी या लक्षण के लिए सही कॉम्बिनेशन और डोज़ (खुराक) जानना चाहते हैं?

​पता: झुंसी, प्रयागराज (Jhusi, Prayagraj)
​संपर्क नंबर: 8707602842

26/06/2026

शरीर और मन की थकान (Fatigue) आज के समय में एक बहुत ही आम समस्या है। आयुर्वेद में थकान को 'श्रम' या 'क्लश' कहा जाता है, जो मुख्य रूप से शरीर में वात और पित्त दोष के असंतुलन या 'ओज' (इम्यूनिटी और ऊर्जा) की कमी के कारण होती है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​नीचे विस्तार से समझिए कि थकान क्यों होती है और शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी के दृष्टिकोण से इसके क्या आयुर्वेदिक उपचार हैं:

​थकान क्यों होती है? (Causes of Fatigue)
​आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान के अनुसार थकान के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

​अग्निमांद्य (धीमी पाचन क्रिया): जब हमारा पाचन तंत्र (अग्नि) कमजोर होता है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पचता। इससे शरीर में 'आम' (विषाक्त पदार्थ/Toxins) बनने लगते हैं, जो शरीर के स्रोतों (Channels) को ब्लॉक कर देते हैं और सुस्ती लाते हैं।

​धातु क्षय (पोषण की कमी): शरीर के सात धातुओं (रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, शुक्र) को सही पोषण न मिलने से ओज की कमी हो जाती है, जिससे कमजोरी महसूस होती है।

​असंतुलित जीवनशैली: बहुत अधिक मानसिक तनाव, रात में देर तक जागना (अनिद्रा), और समय पर भोजन न करना वात दोष को बढ़ाता है, जो शरीर को थका देता है।

​शारीरिक और मानसिक अतिश्रम: बिना आराम किए लगातार काम करने से मांसपेशियों और मस्तिष्क की ऊर्जा समाप्त होने लगती है।

​थकान दूर करने के आयुर्वेदिक उपचार (Ayurvedic Remedies)
​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी के माध्यम से आप अपनी जीवनशैली में इन प्रमुख जड़ी-बूटियों और उपायों को शामिल करके थकान से पूरी तरह राहत पा सकते हैं:

​1. ऊर्जा बढ़ाने वाली प्रमुख जड़ी-बूटियाँ (Ayurvedic Herbs)
​अश्वगंधा (Ashwagandha): यह एक बेहतरीन 'रसायन' (Rejuvenator) है। यह तनाव हार्मोन (Cortisol) को कम करता है, शारीरिक शक्ति बढ़ाता है और मानसिक थकान को दूर करता है। रात में आधा चम्मच अश्वगंधा चूर्ण गुनगुने दूध के साथ लें।

​शंखपुष्पी और ब्राह्मी (Shankhpushpi & Brahmi): यदि थकान मानसिक काम या तनाव की वजह से है, तो ये बूटियाँ मस्तिष्क को शांत करती हैं, एकाग्रता बढ़ाती हैं और अच्छी नींद लाने में मदद करती हैं।

​शतावरी (Shatavari): यह शरीर की सहनशक्ति (Stamina) को बढ़ाती है और मांसपेशियों को मजबूती देती है।

​2. पाचन ठीक करने के उपाय
​त्रिफला (Triphala): शरीर से 'आम' (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने के लिए रात में गुनगुने पानी के साथ त्रिफला चूर्ण लें। पेट साफ रहेगा तो शरीर में ऊर्जा का स्तर अपने आप बढ़ जाएगा।

​3. घरेलू और पारंपरिक उपाय
​औषधीय दूध: एक गिलास गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी, थोड़ा सा गाय का घी और मिश्री मिलाकर पीने से शरीर की थकावट तुरंत दूर होती है।

​अभ्यंग (Self-Massage): हफ्ते में कम से कम दो बार तिल के तेल या महानारायण तेल से शरीर (विशेषकर तलवों और सिर) की मालिश करें। इससे बढ़ा हुआ वात शांत होता है और थकान मिटती है।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
​संक्षेप में दिनचर्या में बदलाव:
​भरपूर पानी पिएं: शरीर में पानी की कमी (Dehydration) थकान का बहुत बड़ा कारण है।

​6-8 घंटे की नींद: रात को 10 बजे तक सोने की आदत डालें ताकि शरीर खुद को रीचार्ज कर सके।

​संतुलित आहार: ताजा, गर्म और सुपाच्य भोजन लें। पैकेट बंद या बासी खाने से बचें।
​क्या आप यह थकान किसी खास वजह (जैसे ऑफिस के काम का तनाव या शारीरिक कमजोरी) से महसूस कर रहे हैं, ताकि उसके अनुसार और सटीक उपाय बताए जा सकें?

बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination) एक आम समस्या है। आयुर्वेद में इसे 'बहुमूत्र' या 'प्रमेह' के अंतर्गत देखा जाता है।...
25/06/2026

बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination) एक आम समस्या है। आयुर्वेद में इसे 'बहुमूत्र' या 'प्रमेह' के अंतर्गत देखा जाता है। यह शरीर में किसी चीज की कमी, अधिकता या आंतरिक गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​आइए इसे पूरी तरह देवनागरी हिंदी में समझते हैं कि इसके क्या कारण हैं और शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी (Shashwat Ayurvedic Pharmacy) के नजरिए से इसका क्या इलाज और परहेज है।

​1. यह किस चीज की कमी या अधिकता की वजह से होता है?
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​शरीर में कुछ तत्वों के असंतुलन (Imbalance) से यह समस्या हो सकती है:

​वात और कफ दोष की अधिकता: आयुर्वेद के अनुसार, जब शरीर में वात (हवा) और कफ दोष बढ़ जाते हैं, तो मूत्राशय (Bladder) की मांसपेशियों पर नियंत्रण कमजोर हो जाता है।

​ब्लड शुगर (खून में चीनी) की अधिकता: यदि खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है (यानी डायबिटीज/मधुमेह), तो किडनी अतिरिक्त शुगर को बाहर निकालने के लिए बार-बार पेशाब बनाती है।

​यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI): पेशाब की नली या मूत्राशय में इन्फेक्शन या सूजन होने पर बार-बार पेशाब आने का अहसास होता है।

​प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना (पुरुषों में): उम्र के साथ पुरुषों में प्रोस्टेट ग्लैंड का आकार बढ़ने से मूत्राशय पर दबाव पड़ता है।

​पानी या लिक्विड की अधिकता: जरूरत से ज्यादा पानी, चाय या कॉफी पीने से भी ऐसा होता है।

​इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे पोटैशियम या कैल्शियम) का असंतुलन: शरीर में इन मिनरल्स की कमी या अधिकता से किडनी के कामकाज पर असर पड़ता है।

​2. शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी में इसका क्या उपचार है?
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​आयुर्वेद में ऐसी कई औषधियां और जड़ी-बूटियां हैं जो किडनी को ताकत देती हैं और पेशाब के वेग को सामान्य करती हैं। इस समस्या के लिए निम्नलिखित आयुर्वेदिक दवाएं सबसे कारगर मानी जाती हैं:

​चंद्रप्रभा वटी (Chandraprabha Vati): यह पेशाब से जुड़ी सभी समस्याओं, यूटीआई (UTI) और मूत्राशय की कमजोरी के लिए सबसे उत्तम दवा है।

​गोक्षुरादि गुग्गुलु (Gokshuradi Guggulu): यह किडनी और यूरिनरी ट्रैक्ट की सूजन और इन्फेक्शन को दूर करने में मदद करता है।

​शिलाजित (Shilajit): अगर यह समस्या बढ़ती उम्र, कमजोरी या शुगर की वजह से है, तो शिलाजीत मूत्राशय की मांसपेशियों को मजबूती देता है।

​हरिद्रा (हल्दी) और दारुहरिद्रा: यह शरीर में बढ़ी हुई शुगर को नियंत्रित करने और अंदरूनी इन्फेक्शन को खत्म करने में सहायक हैं।

​त्रिफला चूर्ण (Triphala Churna): शरीर से विषैले तत्वों (आम दोष) को बाहर निकालने के लिए रात को गुनगुने पानी के साथ इसका सेवन फायदेमंद होता है।

​विशेष ध्यान दें: हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति (वात, पित्त, कफ) अलग होती है। इसलिए शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी की किसी भी औषधि को शुरू करने से पहले एक बार वहां के विशेषज्ञ या वैद्य से नाड़ी परीक्षण व परामर्श जरूर लें।

​3. किस तरह की चीजें करने से यह ठीक होगा? (घरेलू उपाय और परहेज)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​दवाइयों के साथ-साथ अपनी दिनचर्या और खान-पान में ये बदलाव करने से जल्दी आराम मिलता है:

​क्या करें (फायदेमंद चीजें):

​आंवला और शहद: रोज सुबह एक चम्मच आंवले के रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से बार-बार पेशाब आने की समस्या में बहुत राहत मिलती है।

​पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज (कीगल एक्सरसाइज): इससे पेल्विक हिस्से की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पेशाब पर नियंत्रण बढ़ता है।

​गुनगुना पानी: ठंडे पानी की जगह सामान्य या हल्का गुनगुना पानी पिएं।

​मेथी और पालक: अपने भोजन में मेथी के बीज या हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करें।

​क्या न करें (इनसे बचें):

​चाय, कॉफी और अल्कोहल बंद करें: कैफीन और अल्कोहल 'डाययुरेटिक' होते हैं, यानी ये शरीर में तेजी से पेशाब बनाते हैं और ब्लैडर को उत्तेजित करते हैं।

​रात को ज्यादा पानी न पिएं: सोने से करीब 2 घंटे पहले पानी पीना कम कर दें, ताकि रात को बार-बार उठना न पड़े।

​ज्यादा तीखा और खट्टा खाना: तेज मसाले, मिर्च और खट्टी चीजों से मूत्राशय में जलन हो सकती है, इसलिए इनसे परहेज करें।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
​एक जरूरी सलाह: यदि यह समस्या कई दिनों से लगातार बनी हुई है, तो सबसे पहले एक बार Blood Sugar (Fasting & PP) और Urine Routine टेस्ट जरूर करवा लें। इससे समस्या की असली वजह का पता चल सकेगा और सही दिशा में इलाज हो पाएगा।

दाद, खाज और खुजली (Ringworm, Scabies, and Itching) त्वचा से जुड़ी बेहद आम समस्याएं हैं, जो दिखने में सामान्य लग सकती हैं...
23/06/2026

दाद, खाज और खुजली (Ringworm, Scabies, and Itching) त्वचा से जुड़ी बेहद आम समस्याएं हैं, जो दिखने में सामान्य लग सकती हैं लेकिन अगर सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह तेजी से फैलती हैं।
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​शाश्वत आयुर्वेदिक फार्मेसी की ओर से आइए इसे बेहद सरल भाषा में समझते हैं कि ये क्या हैं, क्यों होते हैं, और आयुर्वेद में इसका क्या स्थायी समाधान (निवारण) है।

​1. ये क्या हैं और कैसे होते हैं? (What & How)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​दाद (Ringworm): यह कोई कीड़ा नहीं है, बल्कि एक फंगल इन्फेक्शन (कवक संक्रमण) है। यह त्वचा पर लाल, गोल या अंडे के आकार के छल्ले (Rings) की तरह दिखता है, जिसके किनारों पर छोटी-छोटी फुंसियां या पपड़ी हो सकती है। इसमें बहुत तेज खुजली होती है।

​खाज (Scabies): यह एक सूक्ष्म परजीवी/कीड़े (Sarcoptes scabiei) के कारण होता है, जो त्वचा के अंदर अपनी जगह बना लेता है। इसमें रात के समय असहनीय खुजली होती है और उंगलियों के बीच में, कलाई पर या शरीर के मोड़ों पर छोटे-छोटे दाने हो जाते हैं।

​खुजली (Pruritus/Itching): यह कोई अलग बीमारी नहीं है, बल्कि त्वचा में सूखापन (Dryness), एलर्जी, पसीने या किसी संक्रमण का एक लक्षण है।

​2. होने के मुख्य कारण (Causes)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​आयुर्वेद के अनुसार, शरीर में वात और कफ दोष के असंतुलन और रक्त (Blood) की अशुद्धि के कारण त्वचा रोग होते हैं। इसके मुख्य व्यावहारिक कारण निम्नलिखित हैं:

​नमी और पसीना: गर्मियों और बरसात के मौसम में पसीना सूख न पाने के कारण फंगस तेजी से पनपता है।

​संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना: दाद और खाज छूत की बीमारियां हैं। किसी संक्रमित व्यक्ति के कपड़े, तौलिया, साबुन या बिस्तर का इस्तेमाल करने से यह तुरंत आपको भी हो सकता है।

​साफ-सफाई की कमी: रोज न नहाना, गंदे या गीले अंडरगारमेंट्स/कपड़े पहनना।

​कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Low Immunity): जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें यह इन्फेक्शन जल्दी जकड़ लेता है।

​गलत खान-पान: अत्यधिक तीखा, खट्टा, फास्ट फूड, तला-भुना या विरुद्ध आहार (जैसे दूध और मछली एक साथ खाना) खाने से खून में टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थ) बढ़ जाते हैं।

​3. आयुर्वेद में इसका निवारण और इलाज (Remedies & Prevention)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​आयुर्वेद में इसका इलाज अंदरूनी (रक्त की शुद्धि) और बाहरी (लेप/मलहम) दोनों तरीकों से किया जाता है।

​क) बाहरी उपाय (त्वचा पर लगाने के लिए)
​नीम और हल्दी का लेप: नीम के पत्तों को पीसकर उसमें थोड़ी हल्दी मिलाएं और प्रभावित जगह पर लगाएं। नीम
एंटी-बैक्टीरियल है और हल्दी एंटी-फंगल।

​नारियल तेल और कपूर: शुद्ध नारियल के तेल में थोड़ा सा कपूर मिलाकर दाद वाली जगह पर लगाने से खुजली और जलन में तुरंत आराम मिलता है।

​एलोवेरा (घृतकुमारी): ताजा एलोवेरा जेल लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और फंगस का बढ़ना रुकता है।

​ख) अंदरूनी उपाय (खून साफ करने के लिए)
​नीम के पत्ते: रोज सुबह खाली पेट नीम की 3-4 कोमल पत्तियां चबाने से खून साफ होता है।

​शाश्वत फार्मेसी के विशेष सुझाव: आयुर्वेद में इसके लिए गंधक रसायन, महामंजिष्ठादि क्वाथ / सिरप, और खदिरारिष्ट का उपयोग किया जाता है, जो त्वचा रोगों को जड़ से खत्म करने और रक्त को शुद्ध करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।

​4. क्या सावधानियां रखें? (Do's and Don'ts)
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●

​कपड़ों को उबालें: अपने कपड़ों, तौलिये और बेडशीट को गर्म पानी में धोएं और धूप में अच्छी तरह सुखाएं।

​ढीले कपड़े पहनें: सूती (Cotton) और ढीले कपड़े पहनें ताकि हवा लगती रहे और पसीना जमा न हो।

​खुजलाने से बचें: संक्रमित जगह को नाखूनों से न छुएं, नहीं तो यह शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल जाएगा। छूने के बाद हाथ साबुन से धोएं।

​साबुन का कम प्रयोग: केमिकल वाले साबुन की जगह नीम के साबुन या आयुर्वेदिक उबटन का प्रयोग करें।

■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■

​विशेष सलाह: दाद-खाज के लिए कभी भी बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से कोई भी स्टेरॉयड वाली क्रीम (Steroid Cream) न खरीदें। वे कुछ समय के लिए खुजली दबा देती हैं, लेकिन बाद में यह बीमारी और गंभीर होकर लौटती है।
​यदि यह समस्या पुरानी है या बार-बार हो रही है, तो सही आयुर्वेदिक घटकों और उचित खुराक (Dosage) के लिए आप हमसे संपर्क कर सकते हैं।

Address

R. K Puram Haveliya Jhusi Prayagraj
Allahabad
211019

Telephone

+918707602842

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shashwat Ayurvedic Pharmacy posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Shashwat Ayurvedic Pharmacy:

Shortcuts

Share

Category