15/08/2026
15 अगस्त के मंच से उठी एक सोच पर सवाल! 🇮🇳
15 अगस्त हमें आज़ादी, बराबरी और लोकतंत्र का संदेश देता है। लेकिन अगर किसी जिम्मेदार व्यक्ति की सोच यह हो जाए कि “स्टेज पर मेरे अलावा कोई दूसरा क्यों बैठे? मुझे छोड़कर किसी और को क्यों बुलाया गया?” तो सवाल सिर्फ एक मंच का नहीं, बल्कि सोच का बन जाता है।
लोकतंत्र में किसी एक व्यक्ति की मर्जी नहीं चलती।
यह गांव है, किसी एक व्यक्ति की जागीर नहीं।
अगर किसी को अपने सामने दूसरा व्यक्ति बैठना पसंद नहीं, अपनी बात का जवाब देने वाला पसंद नहीं और हर जगह सिर्फ अपनी ही बात मनवानी है, तो फिर सवाल उठता है—क्या बाकी लोगों के कोई अधिकार नहीं हैं?
सरपंच बनने का मतलब गांव पर राज करना नहीं होता। सरपंच का मतलब होता है गांव के हर व्यक्ति की आवाज सुनना, सबको साथ लेकर चलना और विरोध करने वाले की बात का भी सम्मान करना।
कल अगर चुनाव में भी यही सोच रही कि “मैं जो करूंगा वही सही होगा, मेरे सामने कोई सवाल करने वाला नहीं होना चाहिए,” तो गांव के लोगों को बहुत सोच-समझकर फैसला करना चाहिए।
क्योंकि मजबूत लोकतंत्र वह नहीं जहां एक व्यक्ति की चले, बल्कि वह है जहां हर व्यक्ति अपनी बात कह सके।
मिलकपुर के लोगों से बस एक सवाल है—
क्या हम किसी एक व्यक्ति को इतना अधिकार देना चाहते हैं कि वह तय करे कौन मंच पर बैठेगा, कौन बोलेगा और कौन उसके सामने खड़ा होगा?
गांव किसी एक का नहीं—मिलकपुर के हर नागरिक का है।
अधिकार भी सबका, सम्मान भी सबका और फैसला भी जनता का। 🇮🇳