13/09/2025
अहोई अष्टमी हर साल कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, जो करवा चौथ के चार दिन बाद पड़ती है। इस दिन माताएं अपनी संतान के स्वास्थ्य, लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए निर्जला व्रत करती हैं। व्रत का पारण तारों को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है। इस साल अहोई अष्टमी सोमवार, 13 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
इस दिन का शुभ मुहूर्त शाम 5:53 बजे से शाम 7:08 बजे तक रहेगा, जबकि तारों को अर्घ्य देने का समय शाम 6:17 बजे तक है। चंद्रोदय का समय रात 11:20 बजे होगा।
अहोई अष्टमी का महत्व अत्यंत है। इसे करने से संतान को लंबी आयु, स्वास्थ्य और सफलता का आशीर्वाद मिलता है। निसंतान महिलाओं के लिए यह व्रत संतान प्राप्ति में भी लाभकारी माना जाता है। व्रत के दौरान सबसे पहले शिव परिवार की पूजा-अर्चना करें और व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। कथा पढ़ते समय सात प्रकार के अनाज अपने हाथ में रखें और कथा समाप्ति पर इसे गाय को खिलाएं। पूजा के बाद सबसे पहले अपनी संतान को प्रसाद दें।
व्रत के नियमों का पालन भी आवश्यक है। अहोई अष्टमी के दिन मिट्टी से जुड़े काम या नुकीली चीजों जैसे सुई का उपयोग करना शुभ नहीं माना गया है। तारों को अर्घ्य देने के लिए स्टील के लोटे का उपयोग करें। इस दिन झगड़ा, किसी का अपमान या नकारात्मक विचार से बचें, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
इस अहोई अष्टमी पर माता अहोई का आशीर्वाद लेकर अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य और स्वास्थ्य की कामना करें।