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*समस्या और समाधान ......*क्या बीमारी दवाइयाँ डॉक्टरोंउदासी तनाव बैचैनी से परेशान हैतो हमारे पास प्रकृति समाधान है!❤️समस्...
18/09/2026

*समस्या और समाधान ......*
क्या बीमारी दवाइयाँ डॉक्टरों
उदासी तनाव बैचैनी से परेशान है
तो हमारे पास प्रकृति समाधान है!
❤️समस्या और समाधान ......*
*एक साथ ही जन्म लेते हैं ... क्योंकि ...*
*रात चाहे कितनी भी अंधेरी क्यों ना हो ...*
*उसके बाद सूर्य उदय होना निश्चित है ...!!*

*संसार का दूसरा नाम है समस्या और ...*
*ईश्वर का दूसरा नाम है समाधान ....*
*हर उलझन और हर तकलीफ में सदैव ...*
*अपने आराध्य का स्मरण करते रहिए ...*
*हर उलझन और हर तकलीफ का ...*
*समाधान निकल आएगा ...!!!*
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

Darshan Wellness Ashram                           प्रत्येक रविवार निशुलक शिवि…

16/09/2026

🌞 सभी रोगों का कारण पेट 🌞
💙पेट साफ़ तो रोग भी साफ़ ❤️
🪻NaturyFy your Body और पेट सफाई का जड़ से इलाज |
एक बार पढ़ लो, जिंदगी भर काम आएगा

अगर आपको इनमें से कोई भी है तो ये पोस्ट आपके लिए है -
👉 2-3 दिन में एक बार पेट साफ होना
👉 पेट साफ होने के बाद भी भारी लगना
👉 गैस, डकार, मरोड़ और सिर भारी रहना
👉 चेहरे पर पिंपल्स और मुंह में बदबू

कब्ज़ के असली 3 कारण जो कोई नहीं बताता:
1. पानी की कमी - आंत में पानी कम होगा तो मल पत्थर जैसा सूख जाएगा।
2. फाइबर की कमी - हम रोटी-सब्जी तो खाते हैं पर पपीता, छिलके वाली दाल, सलाद खाना छोड़ दिया है।
3. चूर्ण की आदत - कायम चूर्ण, सनाय पत्ती में Senna होता है। ये आंत को जबरदस्ती निचोड़ता है। 5-7 दिन बाद आंत खुद काम करना बंद कर देती है, फिर गैस और भयंकर ऐंठन शुरू होती है।

100% लाभकारी 4-स्टेप आयुर्वेदिक रूटीन:

स्टेप 1 - सुबह का जादू (5 मिनट):
सुबह 5-6 बजे उठते ही 2 गिलास गुनगुना पानी + 1 चम्मच देसी घी या 5 भीगी हुई मुनक्का का पानी। उसके बाद 5 मिनट टहलना। शौच को कभी मत रोकना।

स्टेप 2 - दिन का भोजन (सबसे जरूरी):
सुबह: 1 पपीता या अमरूद या 1 कटोरी पका पपीता
दोपहर: 2 रोटी + मूंग/मसूर की छिलके वाली दाल + लौकी-तोरई की सब्जी + 1 कटोरी छाछ में भुना जीरा

शाम 4 बजे: नारियल पानी या 1 चम्मच इसबगोल की भूसी गुनगुने पानी से (रोज नहीं, हफ्ते में 3 बार)

रात: सिर्फ दलिया / खिचड़ी / 1 रोटी + सब्जी, 8 बजे से पहले

स्टेप 3 - रात का टॉनिक (आंत को मजबूत करने वाला):
आधा चम्मच त्रिफला चूर्ण + आधा चम्मच सौंफ पाउडर गुनगुने पानी से। ये दस्तावर नहीं, आंत को ताकत देता है। कायम चूर्ण की तरह आदत नहीं बनाता।

स्टेप 4 - 2 छोटे नियम:
- खाने के बाद तुरंत पानी नहीं, 40 मिनट बाद पियो।
- रोज 20 मिनट चलना जरूरी है, चाहे घर में ही टहलो। पेट की मालिश - नाभि के चारों तरफ हल्के हाथ से 10 बार गोल-गोल।

कितने दिन में फायदा होगा?
- 1-2 दिन में गैस कम
- 3-4 दिन में पेट हल्का और रोज साफ
- 7 दिन में चेहरा साफ और नींद अच्छी

कब डॉक्टर के पास जाना है?
अगर मल के साथ खून, तेज बुखार, उल्टी, 7 दिन से बिल्कुल पेट साफ न होना, या अचानक वजन कम होना - तो तुरंत डॉक्टर जी से मिलें। ये पोस्ट सिर्फ घरेलू जानकारी के लिए है।

ये जानकारी अगर आपके किसी अपने के काम आ सके तो शेयर जरूर कर दीजिए, किसी का भला हो जाएगा।
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972
#प्रकृति #मोक्ष



12/09/2026

🙏🙏🙏🙏🙏🙏
🪷 *तीन गुरु*
बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे। उन के पास शिक्षा लेने हेतु दूर दूर से शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया, ” स्वामीजी आपके गुरु कौन हैं ?

आपने किस गुरु से शिक्षा प्राप्त की है ?”

महंत शिष्य का सवाल सुन मुस्कुराए और बोले, ” मेरे हजारो गुरु हैं ! यदि मै उनके नाम गिनाने बैठ जाऊ तो शायद महीनों लग जाए। लेकिन फिर भी मै अपने तीन गुरुओं के बारे में तुम्हें अवश्य बताऊंगा ।

मेरा पहला गुरु था एक चोर। एक बार मैं रास्ता भटक गया था और जब दूर किसी गाव में पंहुचा तो बहुत देर हो गयी थी। सब दुकाने और घर बंद हो चुके थे। लेकिन आख़िरकार मुझे एक आदमी मिला जो एक दीवार में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था।

मैंने उससे पूछा कि मैं कहां ठहर सकता हूं, तो वह बोला कि आधी रात गए इस समय आपको कहीं कोई भी आसरा मिलना बहुत मुश्किल होगा, लेकिन आप चाहें तो मेरे साथ आज की रात ठहर सकते हो। मैं एक चोर हूं और अगर एक चोर के साथ रहने में आपको कोई परेशानी नहीं है तो आप मेरे साथ रह सकते हैं।

मैं उसके साथ एक रात की जगह कुछ दिनों तक रुक गया ! वह हर रात मुझे कहता कि मैं अपने काम पर जाता हूं, आप आराम करो, प्रार्थना करो कि मुझे चोरी में आज अच्छा धन मिले।

जब वह काम से आता तो मैं उससे पूछता की कुछ मिला तुम्हें? तो वह कहता कि आज तो कुछ नहीं मिला पर अगर भगवान ने चाहा तो जल्द ही जरुर कुछ मिलेगा। वह कभी निराश और उदास नहीं होता था, और हमेशा मस्त रहता था। कुछ दिन बाद मैं उसको धन्यवाद करके वापस अपने घर आ गया।

मुझे ध्यान करते हुए सालों-साल बीत गए, तो कई बार ऐसे क्षण आते थे कि मैं बिलकुल हताश और निराश होकर साधना छोड़ लेने की ठान लेता था और तब अचानक मुझे उस चोर की याद आती जो रोज कहता था कि भगवान ने चाहा तो जल्द ही कुछ जरुर मिलेगा और इस तरह मैं हमेशा अपना ध्यान में लगाता और साधना में लीन रहता।

और मेरा दूसरा गुरु एक कुत्ता था। बहुत गर्मी वाले दिन थे, मैं कही जा रहा था और मैं बहुत प्यासा था, पानी की तलाश में घूम रहा था कि सामने से एक कुत्ता दौड़ता हुआ आया। वह भी बहुत प्यासा था। पास ही एक नदी थी। उस कुत्ते ने आगे जाकर नदी में झांका तो उसे एक और कुत्ता पानी में नजर आया जो की उसकी अपनी ही परछाई थी। कुत्ता उसे देख डर गया। वह परछाई को देखकर भौंकता और पीछे हट जाता, लेकिन बहुत प्यास लगने के कारण वह वापस पानी के पास लौट आता। अंततः, अपने डर के बावजूद वह नदी में कूद पड़ा और उसके कूदते ही वह परछाई भी गायब हो गई। उस कुत्ते के इस साहस को देख मुझे एक बहुत बड़ी सिख मिल गई। अपने डर के बावजूद व्यक्ति को छलांग लगा लेनी होती है। सफलता उसे ही मिलती है जो व्यक्ति डर का साहस से मुकाबला करता है।”

मेरा तीसरा गुरु एक छोटा बच्चा है। मैं एक गांव से गुजर रहा था कि मैंने देखा एक छोटा बच्चा एक जलती हुई मोमबत्ती पास के किसी मंदिर में रखने जा रहा? था। मजाक में ही मैंने उससे पूछा की क्या यह मोमबत्ती तुमने जलाई है ?
वह बोला, जी मैंने ही जलाई है। तो मैंने उससे कहा कि एक क्षण था जब यह मोमबत्ती बुझी हुई थी और फिर एक क्षण आया जब यह मोमबत्ती जल गई। क्या तुम मुझे वह स्त्रोत दिखा सकते हो जहां से वह ज्योति आई ?

”वह बच्चा हँसा और मोमबत्ती को फूंख मारकर बुझाते हुए बोला, अब आपने ज्योति को जाते हुए देखा है। कहां गई वह ? आप ही मुझे बताइए।“ “मेरा अहंकार चकनाचूर हो गया, मेरा ज्ञान जाता रहा। और उस क्षण मुझे अपनी ही मूढ़ता का एहसास हुआ। तब से मैंने कोरे ज्ञान से हाथ धो लिए।"

मुझे अपने जीवन में जहाँ से भी कुछ सीखने को मिला मेने उसे ही अपना गुरु समझा।
ज्ञान तो मिल गया, परंतु धारण तब हुआ जब मैंने इसे बाँटना शुरू किया।

हर समय हर ओर से सीखने को? तैयार रहना चाहिए । कभी किसी की बात का बुरा नहीं मानना चाहिए, किसी भी इंसान की कही हुई बात को ठंडे दिमाग से एकांत में बैठकर सोचना चाहिए कि उसने क्या कहा और क्यों कहा तब उसकी कही बातों से अपनी की हुई गलतियों को समझे और अपनी कमियों को दूर करें। जीवन का हर क्षण, हमें कुछ न कुछ सीखने का मौका देता है। हमें जीवन में हमेशा एक शिष्य बनकर अच्छी बातों को सीखते रहना चाहिए।

यह जीवन हमें आये दिन किसी न किसी रूप में किसी न किसी गुरु से मिलाता रहता है , यह हम पर निर्भर करता है कि क्या हम उस महंत की तरह एक शिष्य बनकर उस गुरु से मिलने वाली शिक्षा को ग्रहण कर पा रहे हैं कि नहीं..!!
🙏जय श्री कृष्ण जी 🙏
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, वो पर्याप्त है।।*
🌹जय श्री कृष्ण जी 🌹
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972
NaturyFy 2 HealthyFy

बिना दवाई सभी रोग औरसमस्या से मुक्तिWatch 👇this video &Consult Dr M K SharmaNaturopath Since 1972
31/08/2026

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Naturopath Since 1972

दर्शन आश्रम में महत्वपूर्ण प्राकृतिक चिकित्सा शिक्षा:प्राकृतिक चि...

05/08/2026

*꧁ || मोक्ष ध्यान गुरू परिवार ||꧂*
👉 *किसी भी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ईमानदारी, बुद्धिमत्ता, पूर्ण परिश्रम और ईश्वर पर विश्वास, ये चार साधन यदि हम अपना ले, तो जीवन सफल हो जाता है..!!*

*प्रत्येक व्यक्ति क्या चाहता है, जीवन में सफलता और आनन्द मिले।*

*यदि हम भी ऐसा ही चाहते हों, तो इस का सीधा सरल उपाय इस प्रकार से है, कि हम अपना जो भी लक्ष्य बनाते हैं, उसकी प्राप्ति के लिए अपना काम पूरी ईमानदारी से करें। सबसे पहली वस्तु है ईमानदारी से काम करना। झूठ छल कपट बिल्कुल नहीं करना।*

*दूसरी बात है बुद्धिमत्ता। बहुत से लोगों का निर्णय बुद्धिमत्तापूर्ण होता है। और बहुत से लोगों का निर्णय मूर्खतापूर्ण होता है। जो लोग सत्यग्राही होते हैं, हठी या अड़ियल नहीं होते, उनके निर्णय बुद्धिमत्ता पूर्ण होते हैं। वे अपने जीवन में सफल होते हैं। और जो हठी या अड़ियल होते हैं, अपनी ग़लत बात पर भी अड़े रहते हैं, सत्य को स्वीकार नहीं करते, उनके निर्णय मूर्खतापूर्ण होते हैं। ऐसे लोग अपने जीवन में असफल हो जाते हैं।*

*सफलता प्राप्त करने के लिए तीसरा कारण है, पूर्ण पुरुषार्थ करना। कामचोरी नहीं करना, काम से बचने का प्रयास नहीं करना। जमकर पुरुषार्थ करना।*

*और चौथी बात है ईश्वर विश्वास। ऊपर बताए तीन साधनों से हमें सफलता तो मिल जाएगी, परंतु आनन्द की प्राप्ति के लिए एक चौथा काम यह भी करना होगा कि हम ईश्वर पर भी विश्वास रखें, आस्तिक बनें। तब हमारी सफलता के साथ-साथ हमारा आनन्द और भी बढ़ेगा। जो लोग नास्तिक होते हैं, उन्हें ऊपर बताए तीन काम करने से जीवन में सफलता तो मिल जाती है, पर उसमें आनन्द की कुछ कमी बनी रहती है। वह कमी पूरी होती है ईश्वर विश्वास से। ईश्वर विश्वास करने का एक यह लाभ भी है, कि व्यक्ति में नम्रता सभ्यता आदि गुण भी बढ़ते हैं। और हठ मूर्खता तथा अभिमान आदि दोष भी छूट जाते हैं। इसलिए पूरी सफलता तभी माननी चाहिए, जब हमारे जीवन में ऊपर बताई चारों बातें हों।*

*इस प्रकार से जो व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ये चार साधन अपना लेता है, ईमानदारी, बुद्धिमत्ता, पूर्ण परिश्रम और ईश्वर विश्वास। बस, उसका जीवन सफल हो जाता है। उसके जीवन में आनन्द ही आनन्द हो जाता है।*

*यदि हम भी अपने जीवन में सफल और आनन्दित होना चाहते हों, तो ऊपर बताए इन चार साधनों को अपनाएं।*
*(सन्त महापुरूषों की ✍️ से)*
*बोलो जय श्री राधे श्याम*
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972
꧁𝒬☞︎︎︎🏠🏡🏠𝒬☞︎︎︎꧂

31/07/2026

*🙏🙏धन की दौड़ का अंत: एक सीख भरी कहानी*🙏🙏

एक छोटे से शहर में रमेश नाम का व्यापारी रहता था। ईमानदार, मेहनती और व्यवहार में मीठा। शहर के लोग उसकी तारीफ करते थे। पर उसकी एक आदत थी जिसने धीरे-धीरे उसकी पूरी जिंदगी बदल दी।

*उसे धन कमाने का जूनून था।*

सुबह 5 बजे दुकान खोलता और रात 11 बजे बंद करता। पत्नी कहती, "बच्चों की PTM है, चलोगे?"
वो हंसकर कहता, "अभी बिजनेस बढ़ रहा है। थोड़ा और कमा लें, फिर आराम से घूमेंगे।"
माँ-बाप फोन करते, "बेटा आ जाओ, बहुत दिन हो गए।"
जवाब वही, "माँ अभी मीटिंग है। अगले महीने पक्का आऊंगा।"

और वो "अगला महीना" कभी नहीं आया।

*दौड़ शुरू हुई*
धीरे-धीरे एक दुकान से 5 दुकानें हुईं। 5 से 10 हुईं। जमीनें खरीदीं, फ्लैट बनाए, बैंक बैलेंस करोड़ों में पहुंच गया। लोग कहते, "देखो रमेश को, मेहनत का फल मिला।"

पर घर में सन्नाटा बढ़ता गया।
बेटा-बेटी बड़े हो गए। उन्हें लगा पापा को उनसे ज्यादा नोटों से प्यार है, तो वो भी विदेश पढ़ने चले गए।
पत्नी की आंखों की चमक चली गई। वो अकेले पूजा करती, अकेले खाना खाती।
माँ-बाप बूढ़े होकर चले गए। रमेश श्मशान तक भी टाइम पर नहीं पहुंच पाया।

रमेश ने सोचा था, "पैसा आ जाएगा तो सब ठीक हो जाएगा।"
पर उसे पता ही नहीं चला कि *पैसा आते-आते उसके अपने दूर हो गए।*

*मोड़ आया*
एक दिन सीने में दर्द हुआ। डॉक्टर ने कहा, "रमेश जी, BP और शुगर बहुत हाई है। स्ट्रेस कम कीजिए। परिवार के साथ समय बिताइए वरना शरीर जवाब दे जाएगा।"
रमेश ने रिपोर्ट बंद करके अलमारी में रख दी और बोला, "अभी एक बड़ा टेंडर आना है। उसके बाद आराम करूंगा।"

कुछ महीने बाद वही हुआ जिसका डर था।
ऑफिस की कुर्सी पर फाइलें बिखरी थीं, कंप्यूटर पर Excel खुला था, और रमेश... बेहोश पड़ा था। अस्पताल ले जाने से पहले ही सांसें रुक गईं।

*अंत में क्या बचा?*
वसीयत खुली तो 4 करोड़ की संपत्ति, 3 मकान, 7 दुकानें।
पर अर्थी को कंधा देने वाले गिनती के लोग।
बेटा-बेटी वीडियो कॉल पर रो रहे थे, "पापा हमसे मिल क्यों नहीं पाए।"
रिश्तेदार संपत्ति का हिसाब लगा रहे थे।
और पत्नी... उसकी आंखों में सिर्फ एक सवाल था, *"क्या यही दौलत तुम्हें चाहिए थी?"*

रमेश ने पूरी जिंदगी कमाया, पर जीना भूल गया।

*गांव के बुजुर्ग ने उस दिन सबको एक बात कही:*
"बेटा, धन कमाना पाप नहीं है। धन से रोटी आती है, इलाज होता है, बच्चों की पढ़ाई होती है।
पर जब धन कमाने की दौड़ में आप अपने रिश्तों की सांसें तोड़ दो, स्वास्थ्य को दांव पर लगा दो, तो समझ लो आप हार गए।
*क्योंकि मरने के बाद बैंक बैलेंस स्वर्ग नहीं ले जाता। साथ जाते हैं आपके कर्म, आपका प्यार और वो पल जो आपने अपनों के साथ बिताए।"*

---

*इस कहानी से 3 बड़ी सीखें:*

1. *धन साधन है, साध्य नहीं*
पैसा कमाइए, पर इतना नहीं कि जीने के लिए ही समय न बचे।

2. *रिश्ते FD से ज्यादा जरूरी हैं*
कल का भरोसा नहीं। आज माँ से 5 मिनट बात कर लीजिए। बच्चे को गले लगा लीजिए।

3. *स्वास्थ्य ही असली अमीरी है*
करोड़ का बंगला भी नींद नहीं दे सकता, और खाली जेब वाला भी चैन से सो सकता है अगर मन शांत हो।

*आखिरी बात:*
दौड़िए जरूर, पर ऐसी दौड़ मत लगाइए जिसके अंत में लाइन पर कोई अपना ताली बजाने वाला ही न हो।
🙏🙏
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

09/07/2026

*श्री दत्त समर्थ*

कभी तानों में कटेगी,
कभी तारीफों में;
ये जिंदगी है यारों,
पल पल घटेगी !!
पाने को कुछ नहीं,
ले जाने को कुछ नहीं;
फिर भी क्यों चिंता करते हो,
इससे सिर्फ खूबसूरती घटेगी,
ये जिंदगी है यारों पल-पल घटेगी !
बार बार रफू करता रहता हूँ,..जिन्दगी की जेब !!
कम्बखत फिर भी,
निकल जाते हैं...,
खुशियों के कुछ लम्हें !!

-ज़िन्दगी में सारा झगड़ा ही...
ख़्वाहिशों का है !!
ना तो किसी को गम चाहिए,
ना ही किसी को कम चाहिए !!

खटखटाते रहिए दरवाजा...,
एक दूसरे के मन का;
मुलाकातें ना सही,
आहटें आती रहनी चाहिए !!

-उड़ जाएंगे एक दिन ...,
तस्वीर से रंगों की तरह !
हम वक्त की टहनी पर...,
बेठे हैं परिंदों की तरह !!

बोली बता देती है,इंसान कैसा है!
बहस बता देती है, ज्ञान कैसा है!
घमण्ड बता देता है, कितना पैसा है !
संस्कार बता देते है, परिवार कैसा है !!

-ना राज़* है... "ज़िन्दगी",
ना नाराज़ है... "ज़िन्दगी";
बस जो है, वो आज है, ज़िन्दगी!

मिलने को तो हर शख्स,
हमसे बड़े एहतराम से मिला,
पर जो भी मिला...,
किसी ना किसी काम से मिला !!

जीवन की किताबों पर,
बेशक नया कवर चढ़ाइये;
पर...बिखरे पन्नों को,
पहले प्यार से चिपकाइये !!!

*दंडवत प्रणाम*
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

09/07/2026

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
जीवन में सुखी होने का एक बहुत बड़ा उपाय है, 'संतोष का पालन करना.' *"संतोष का मतलब आलस्य करना नहीं है।"*
बहुत से लोग संतोष का अर्थ ठीक नहीं समझते। वे यह समझते हैं कि *"सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ कर बैठे रहो, जो हमारी किस्मत में लिखा है, वह तो भगवान हमें दे ही देगा। इसलिए ज्यादा भाग दौड़ करने से क्या लाभ?"* ऐसा सोच कर वे लोग पूर्ण पुरुषार्थ नहीं करते। *"सब कुछ किस्मत पर या भगवान पर छोड़ देते हैं। इसका नाम आलस्य है।"* आलस्य करना ठीक नहीं है। *"ऐसे आलसी लोग जीवन में कोई विशेष उन्नति नहीं कर पाते। बल्कि जो कुछ साधन संपत्ति उनके पास पूर्व कर्मों के अनुसार थी, उसे भी वे खो बैठते हैं।"*
संतोष का सही अर्थ है कि *"व्यक्ति अपनी उन्नति के लिए पूरा पुरुषार्थ करे। पढ़ाई लिखाई के क्षेत्र में नौकरी में व्यापार में परिवार में या समाज के किसी भी क्षेत्र में पूरी मेहनत करे। ईमानदारी और बुद्धिमत्ता से काम करे। उसके बाद उसे जितना फल मिले, उतने में प्रसन्न रहे। अधिक न मिलने की शिकायत न करे। इसका नाम संतोष है." "जो व्यक्ति संतोष का पालन करता है, वह सबसे उत्तम सुख को भोगता है।"*
*"अतः अपने जीवन में उन्नति करने के लिए सभी आवश्यक क्षेत्रों में अपना लक्ष्य बनाएं। योजनाएं बनाएं। साधन जुटाएं। पूरा पुरुषार्थ करें। ईमानदारी और बुद्धिमत्ता से काम करें। फिर जो भी और जितना भी फल मिले, उतने में प्रसन्न रहें। जितना मिला, उसका लाभ उठाएं।"* ऐसा सोचें, *"ईश्वर की कृपा से और माता पिता एवं समाज के सब लोगों के सहयोग से जितना भी मिला, यही बहुत है। हम इसी का लाभ लेकर अपने जीवन को आनंदित बनाएंगे।"*
*"पुरुषार्थ करने पर भी, जितना मिलना चाहिए था, यदि उतना नहीं मिल पाया, या कम मिल पाया, तो उसकी शिकायत न करें।"* उसके कारण तो अवश्य ढूंढें। *"अगली बार उन कारणों को दूर करें। पूरे उत्साह के साथ फिर से पुरुषार्थ करें। और फिर जितना मिले, उतने में फिर से प्रसन्न रहें।" "इसी का नाम संतोष है। इसी में सबसे उत्तम आनंद है।"*
*"यदि आप ऐसा कर लेंगे, तो आप सदा सुखी प्रसन्न संतुष्ट और आनंदित जीवन जी पाएंगे।" "यदि आप ऐसा संतोष नहीं करेंगे, तो आपको जीवन में जितना भी कुछ मिल जाए, तब भी आप जीवन भर असंतुष्ट एवं दुखी ही रहेंगे।"*
*"बहुत सी वस्तुएं मिलने पर भी आपके दुख का कारण फल का कम मात्रा में मिलना नहीं है, बल्कि आपका लोभ है।" "आप अपने लोभ के कारण दुखी हैं। यदि आप इस लोभ को छोड़ दें, और फल के रूप में प्राप्त वस्तुओं में संतोष कर लें, तो जितनी वस्तुएं आपको फल के रूप में मिली हैं, उतनी आपके जीवन को सुखी बनाने के लिए पर्याप्त हैं।" "इस बात पर बार-बार और विशेष रूप से चिंतन करें।"*
🌹जय श्री कृष्ण जी 🌹

09/07/2026

🌞❤️दुख चिंता विश्वास 💜🌞

दुःख पीछे की ओर देखता है।
और चिंता इधर-उधर देखती हैं। केवल विश्वास ही है जो हमेशा आगे की ओर देखता है l
इसलिए विश्वास की ज्योति कभी बुझने ना दे।
हमारे सारे रास्ते बंद हो जाए।
परंतु भगवान के सारे रास्ते खुले रहते हैं।
हर रास्ते पर विश्वास की जरूरत होती है।
बस मन में आस्था होना बहुत जरूरी है।
जहां श्रद्धा होती है वहां भावना जरूर होती है।
भगवान भाव का भुखा होता है।

भगवान को हमारे रूपए, पैसे, धन, दौलत ,से कोई मतलब नहीं है।

लीला चरित्र में इसका वर्णन मिलता है।
इसीलिए जो प्रभु के सामने झुकता है ।
वह सबको अच्छा लगता है ।
और जो सबके सामने झुकता है,
वह प्रभु को अच्छा लगता है।

भगवान श्री चक्रधरस्वामी जी का नाम स्मरण करते रहिए और
आगे बढ़ते रहे। जीवन संवर जाएगा सुधर जाएगा।
सभी धर्म प्रेमियों को सादर दंडवत प्रणाम। जयश्री चक्रधर स्वामी जी। 👍👍❤️🙏🙏
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

08/07/2026

*💫 यात्रा बहुत छोटी है 💫*

एक स्त्री बस में चढ़ी और एक पुरुष के बगल में बैठते समय उसके बैग से उसे चोट लग गई... लेकिन वह पुरुष चुप रहा, कुछ नहीं बोला।
जब वह व्यक्ति गुमसुम बैठा रहा, तो उस महिला ने पूछा – “मैंने आपको बैग से मारा, फिर आपने शिकायत क्यों नहीं की?”

उस पुरुष ने मुस्कुराकर उत्तर दिया-:
“इतनी छोटी-सी बात पर नाराज़ होने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि हमारी साथ की यात्रा बहुत छोटी है... मैं अगले स्टॉप पर ही उतर रहा हूँ...!”

इस उत्तर से महिला बहुत भावुक हुई। उसने उस पुरुष से माफी माँगी और मन ही मन सोचा कि *“यात्रा बहुत छोटी है” – ये शब्द सोने से लिखे जाने चाहिए।*

*हमें यह समझना चाहिए कि इस संसार में हमारा समय इतना कम है कि बेकार की बहस, जलन, दूसरों को माफ़ न करना, असंतोष और नकारात्मक भावनाओं में उलझना वास्तव में समय और ऊर्जा की मूर्खतापूर्ण बर्बादी है।*

👉 *किसी ने आपका दिल तोड़ा है? शांत रहिए... यात्रा बहुत छोटी है...!*

👉 *किसी ने धोखा दिया, धमकाया, अपमान किया आराम कीजिए – तनाव मत लीजिए...*
*यात्रा बहुत छोटी है...!*

👉 *किसी ने बेवजह आपका अपमान किया? शांत रहिए... नज़रअंदाज़ कीजिए...*
*यात्रा बहुत छोटी है...!*

👉 किसी ने अप्रिय टिप्पणी की?
*माफ़ कर दीजिए, नज़रअंदाज़ कीजिए, उन्हें अपनी दुआओं में रखिए और निःस्वार्थ प्रेम कीजिए...*
*यात्रा बहुत छोटी है...!*

*समस्याएँ तभी समस्या बनती हैं जब हम उन्हें मन में जगह देते हैं। याद रखिए, हमारा “साथ का सफ़र बहुत छोटा है”।*

*इस यात्रा की लंबाई किसी को नहीं पता...*
*कल किसने देखा है? यह सफ़र कब रुक जाएगा, कोई नहीं जानता।*

*तो आइए, अपने मित्रों, रिश्तेदारों और परिवार का सम्मान करें... उनका आदर करें...*
*हम दयालु, प्रेमपूर्ण और क्षमाशील बनें।*
*कृतज्ञता और आनंद से भरा जीवन जिएँ।*
*क्योंकि सचमुच हमारा साथ का सफ़र बहुत छोटा है...!*

*अपनी मुस्कान सभी के साथ बाँटिए...*
*अपनी ज़िंदगी को सुंदर और आनंदमय बनाइए...*
*क्योंकि चाहे समूह कितना ही बड़ा क्यों न हो,*
*हमारी यात्रा बहुत छोटी है...!*
*किसे कहाँ उतरना है, यह तो किसी को भी मालूम नहीं।*

हर कहानी के अंत में, हम उससे मिलने वाली महत्वपूर्ण सीख अपने शब्दों में प्रस्तुत करते हैं। ये सभी कहानियाँ सोशल मीडिया से साभार ली जाती हैं, लेकिन हम इनमें शिक्षाएँ जोड़ते हैं ताकि उनका प्रभाव और गहरा हो।
*सदैव प्रसन्न रहिये।*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
Dr M K Sharma
Naturopath Since 1972

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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