Richa Sharma astrologer

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07/08/2026

Fengshui works💐 Richa Sharma

18/07/2026

#आषाढ़माहगुप्तनवरात्रि
#शक्तिसाधना #देवीउपासना #महाशक्ति #आदिशक्ति #गुप्त #नवरात्रि

🟥 #रजस्वला  #स्त्रोत🟥यह स्तोत्र स्त्री के रजस्वला स्वरूप को अशुद्ध नहीं, बल्कि **सृष्टि की मूल शक्ति**, **महायोनि**, **आ...
23/06/2026

🟥 #रजस्वला #स्त्रोत🟥
यह स्तोत्र स्त्री के रजस्वला स्वरूप को अशुद्ध नहीं, बल्कि **सृष्टि की मूल शक्ति**, **महायोनि**, **आदिशक्ति** और **देवीस्वरूप** मानकर उसकी उपासना का तांत्रिक दर्शन प्रस्तुत करता है। इसमें स्त्री-शरीर, रजस्वला अवस्था और सृजन-शक्ति को ब्रह्मांडीय शक्ति के प्रतीक के रूप में सम्मान दिया गया है। यह मुख्यतः कौल, वाममार्ग और शाक्त तंत्र की परंपराओं से संबंधित माना जाता है, जहाँ रजस्वला स्त्री को देवी का साक्षात् स्वरूप समझा जाता है।
🟥ध्यान रहे कि यह वैदिक परंपरा का सामान्य स्तोत्र नहीं, बल्कि एक विशिष्ट तांत्रिक ग्रंथ का अंश है, इसलिए इसके अनेक श्लोक प्रतीकात्मक और रहस्यात्मक अर्थ रखते हैं।

यह स्तोत्र तांत्रिक परंपरा का एक अत्यंत गूढ़ और गोपनीय स्तोत्र है, जिसमें "रजस्वला" (मासिक धर्म अवस्था में स्त्री) को आदिशक्ति, सृष्टि-शक्ति और महायोनि के रूप में देखा गया है। इसमें कई श्लोक प्रतीकात्मक, तांत्रिक और रहस्यात्मक भाषा में हैं। इसलिए इसका अनुवाद शाब्दिक के साथ-साथ भावार्थ के रूप में करना अधिक उचित है।
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// रजस्वला स्तोत्रम् //

ध्यानम्-

बालार्ककोटि वर्णाभां भालचंद्र निभाननां।
अनंग बाण सहितां ध्याये देवि रजस्वलां।।

मंत्रम‌्-

ॐ रजस्वलायै हुं नमः ह्स्क्लीं ह्स्क्लौं ह्स्रौ: ह्स्र: ह्स्क्ल: रजस्वलायै नमः ।

स्तोत्रम् -

ॐ भगोदभवं जगतसर्वं त्रैलोक्य च सराचरं,
सप्तपाताल लोकं च सत्याकाशं भगोदभवं ।

कमलं च भगाकारं विरचिं कमलोदभवं,
भगवान भगरूपं च निर्मित भगदेवता ।

चतुराशीतिलक्षाणि जीव योनि समुदभवां,
तस्मादभगमहायोनि सृष्टिस्थिति लयात्मिकां ।

भगलिंगात्मक महाबीज त्रयं देवि आधते च,
रजस्वलां प्रणवादौ जपेन्मंत्रं त्रिवारं सर्व सिद्धिद ।

एवं रजस्वला विद्या पिता पुत्रं न कथ्यते,
दांभिकाय कृतघ्नाय गुरु द्रोहरताय च ।

द्यातकाय च दुष्टाय रजस्वला न दापयेत,
दीक्षिताय च शिष्याय एतत् मंत्र युताय च ।

दुर्जनाय च दुष्टयो स्त्रीनिंदक द्यातके स्तवं,
न दृश्यते देवी रजस्वलां कदाचन,
इदं स्तवं पठेत देवी आयुर्आरोग्य भाग्यं च तिष्ठति ।

श्री भैरव उवाच-

रजस्वला मुखम् दृष्टवा सर्वपापै: प्रमुत्यते ।
संभाषणं कुरुते राजसूयादिकं फलं भवते ।।

तस्या दर्शन मात्रेण लभेन्मुक्तिं चतुर्विधं।
तस्या संगममात्रेण त्रैलोक्योच्चाटन क्षम: ।।

श्रद्धया पूरितं तस्या भगे च चरणाबुंजं ।
न्यासं कृत्वा स्वदेहे च अनुलोमविलोमतः।।

मातृकान्यास स्वदेहे च कलाभि: क्रम षोडश ।
शिवरूपं विचिन्तयस्य भगपूजां समाचरेत ।।

कोटिजन्मार्जितैः पुण्यै भक्तायः पूजयेदभगं ।
विशेषात् पूजितो योनिः पुण्य संख्या न विद्यते ।।

महायत्नेन देवेशी पुष्पवंती सलक्षणा पूजिता देवता बुध्या संयुतं भगं ।।

नवपात्रं च विधिवत् रचये भक्तया यथेच्या ।
पिवते च सुरा ज्योतिमयीं जाउयंघ हरण क्षणात ।।

ब्रह्मी भूतं स्वयं भक्तया निर्विकल्पचेतसा ।
पुष्पीभूतं भगं पूज्यं मध्येलिंग विनिक्षिपेत् ।।

महापीठस्य मथने क्रियते जप पूर्वकं ।
यावद् अति सुखं भूयातवज्जप्तवा सुरेश्वरि ।।

विसर्जनं च पीठस्य पुनः पात्रं ।
एवं कृते तु वीराणां शिवतुल्यं भवेत ध्रुवं ।।

अत्यन्त गोपये देवी स्वयोनिर्परे यथा ।
न प्रकाश्य च कुत्रापि पुत्रायापिवरानने।।

प्रमादे न प्रकाश्येते सद्यो मृत्युर्नसंशयः ।
न लोके दुर्लभं देवी गोप्यं पूजा फलं महत ।।

भक्त्या च पठते वीरोपूजाते साधकोतमः ।
रतिकाले विशेषेण शिवतुल्यो भवेन्नरः।।

रतिकाल स्तव नित्यं स्मरेत् यः दुर्लभः रूपं दृश्यते च चराचरे ।
निंदति नरकं यांति कल्पकोटि न संशयः।
यदि भाग्यवशात दृष्टवा पुष्पाभितं भगं।।

शिवं दर्शनात फलमाप्नोति श्रृणुस्व कमला प्रिये ।
गजाश्वरथदानानि ग्रहणोंतत्फलं भवेत।।

रौप्य स्वर्ण तुलादानं लक्षकोटि गुणं फलम ।
भगलिंगार्चनं कृत्वा एकांते निश्चल वृते।।

स्वर्गपाताल लोकं च पूजनात्फल माप्नुयात ।
भगं दृष्टवा जपं कृत्वा स्वल्वमात्रं च ।।

कोटिधा पूजयित्वा वन्दयित्वा भावयित्वा ।
जपन्ति च ते धन्या सर्वलोकेषु पुण्यं पापं न लिप्यते ।।

तरन्ति तारयंति च निर्भयो यत्र कुत्र चित।
रूप यौवन लावण्या षोडशादति सुन्दरि ।।

रजोयुक्तं भगं दृष्टवा नमस्कृता च दण्डवत ।
सद्य पूजा तर्पयामि देवी ध्यात्वा पुनः पुनः ।।

एककालं द्विकालं त्रिकालं मध्यरात्रके ।
एकान्ते निश्चलस्थाने पूजयित्वा पठन्ति च ।।

अनेक कोटि विध्नानेन नाशयति नात्र संशयः ।
तदा समग्रफलद अन्यथा च न सिद्धयति ।।

सप्तकोटि महामंत्र सवर्गाः सा गणन्विता ।
सर्वे प्रसन्नमायांति क्रोध मोहादिकं त्यजेत् ।।

रजस्वला महास्तोत्रं यः पठेत प्रत्ययं सदा ।
जपार्चनादि होमान्तं प्रयोगं तं च सिद्धिदं ।।

रजस्वला विना स्तोत्रं नैव सिद्धयन्ति भूतले ।
सर्वे शक्ति महामंत्रा सायोत्कीलनस्तवं।।

एतत् परतर: श्रेष्ठः शाक्तानां नास्ति सुन्दरि ।
रजस्वला समीपे तु पठनं सर्वसिद्धिकृत ।।

सत्यं सत्यं सत्यं पुनः पुनः ।
सपुष्प भगपूजां च ब्रह्मलोकेSपि दुर्लभं ।।

अस्य स्तोत्र महात्म्यं मया वक्तुं न शक्यते ।
विरिच भगवान विष्णु: पठते च निरन्तरम् ।।

स्तोत्र पाठ प्रभावेन सृष्टि स्थितिकरोभवेत ।
तस्मात्सर्वप्रयत्नेन देवी गोप्यं न प्रकाश्येत ।।

स्मरेत् प्रथम पुष्पिणीं रुधिरबिंदु नीलाम्बरां ।
गृहीतमधुपात्र मदविधूर्ण नेत्रांसदा ।।

धनस्तन भरोन्नतांग गलित चूलिकां श्यामलां ।
वरिस्फुलतवल्लकीं विमलशंक ताटंकिनी ।।

भगं कुण्डं शिवोयोनिर्नलष्याभगाकुर ।
आज्यं वीर्यं मनोहोता इत्युक्ते भैरवागमे इति कालिकाप्रस्थे पुष्पिणी स्तोत्रं ।।

🟥थोड़ा प्रयास अर्थ समझने का कर रही हूं 🙏
# # ध्यान

**बालार्ककोटि वर्णाभां भालचंद्र निभाननां।
अनंग बाण सहितां ध्याये देवि रजस्वलां।।**

**भावार्थ:**
मैं उस रजस्वला देवी का ध्यान करता हूँ जिनका तेज करोड़ों उगते हुए सूर्य के समान है, जिनका मुख चंद्रमा के समान सुंदर है और जो कामदेव के पुष्पबाणों से युक्त हैं।

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# # प्रारम्भिक स्तुति

**ॐ भगोदभवं जगत्सर्वं त्रैलोक्यं च चराचरम्।**

**भावार्थ:**
समस्त जगत, तीनों लोक तथा समस्त चर और अचर प्राणी भग (योनि, अर्थात सृष्टि-द्वार) से उत्पन्न हुए हैं।

**सप्तपाताल लोकं च सत्याकाशं भगोदभवम्।**

सातों पाताल और सत्यलोक तक समस्त ब्रह्मांड उसी सृष्टि-शक्ति से प्रकट हुआ है।

**कमलं च भगाकारं विरञ्चिं कमलोद्भवम्।**

कमल भी भग के स्वरूप का प्रतीक है और ब्रह्मा कमल से उत्पन्न हुए हैं।

**भगवान् भगरूपं च निर्मिता भगदेवता।**

भगवान भी उसी सृजनशक्ति के स्वरूप हैं, और देवी उसी शक्ति की अधिष्ठात्री हैं।

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# # सृष्टि का आधार

**चतुराशीतिलक्षाणि जीवयोनि समुद्भवाः।**

84 लाख योनियों के सभी जीव उसी महाशक्ति से उत्पन्न हुए हैं।

**तस्माद् भगमहायोनिः सृष्टिस्थितिलयात्मिका।**

अतः महायोनि ही सृष्टि, पालन और संहार की मूल शक्ति है।

**भगलिंगात्मक महाबीजत्रयं देवी अधत्ते च।**

देवी स्त्री और पुरुष दोनों सृजन-तत्वों के मूल बीज को धारण करती हैं।

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# # विद्या की गोपनीयता

**एवं रजस्वला विद्या पिता पुत्रं न कथ्यते।**

यह विद्या अत्यंत गोपनीय है, इसे हर किसी को नहीं बताना चाहिए।

**दांभिकाय कृतघ्नाय गुरुद्रोहरताय च।**

अहंकारी, कृतघ्न और गुरु-द्रोही व्यक्ति को यह ज्ञान नहीं देना चाहिए।

**दीक्षिताय च शिष्याय...**

केवल योग्य, दीक्षित और श्रद्धावान शिष्य को ही यह विद्या प्रदान करनी चाहिए।

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# # फलश्रुति

**रजस्वला मुखं दृष्ट्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।**

रजस्वला देवी का दर्शन करने से पापों का क्षय होता है।

**संभाषणं कुरुते राजसूयादिकं फलं भवेत्।**

उनसे सम्मानपूर्वक वार्तालाप करने से महान यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है।

**तस्या दर्शनमात्रेण लभेन्मुक्तिं चतुर्विधाम्।**

केवल दर्शन से ही चार प्रकार की मुक्ति प्राप्त हो सकती है।

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# # पूजा का तात्पर्य

इस भाग में तांत्रिक साधना का वर्णन है, जहाँ स्त्री के रजस्वला स्वरूप को देवी के रूप में पूजने का विधान बताया गया है।

**भावार्थ:**
साधक को स्त्री में केवल देह नहीं, बल्कि आदिशक्ति का दर्शन करना चाहिए। श्रद्धा, शुद्ध भावना और देवीभाव से पूजा करने पर साधक शिवतुल्य स्थिति प्राप्त कर सकता है।

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# # गोपनीयता का निर्देश

**अत्यन्त गोपये देवी स्वयोनिर्परे यथा।**

जैसे व्यक्ति अपने अत्यंत निजी अंगों को गोपनीय रखता है, वैसे ही इस साधना को भी गोपनीय रखना चाहिए।

**प्रमादेन न प्रकाश्येत।**

अयोग्य व्यक्ति के सामने इसका प्रदर्शन या प्रचार नहीं करना चाहिए।

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# # स्तोत्र पाठ का फल

**रजस्वला महास्तोत्रं यः पठेत् प्रत्ययं सदा।**

जो श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसे मंत्र, जप, होम और तांत्रिक साधनाओं में सफलता मिलती है।

**रजस्वला विना स्तोत्रं नैव सिद्ध्यन्ति भूतले।**

इस परंपरा के अनुसार शक्ति-साधना की सिद्धि में इस स्तोत्र का विशेष महत्व बताया गया है।

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# # अंतिम ध्यान

**स्मरेत् प्रथमपुष्पिणीं रुधिरबिन्दु नीलाम्बराम्।**

उस देवी का स्मरण करें जो प्रथम रजस्वला अवस्था में हैं, नील वस्त्र धारण किए हुए हैं और जिनमें सृजनशक्ति प्रकट हो रही है।

**श्यामलां वरदां सुन्दरीम्।**

वे श्यामवर्णा, वर देने वाली और अत्यंत सुंदर आदिशक्ति हैं।

--- Richa Sharma
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21/03/2026

Navratri Day 3 maa Chandraghanta Richa Sharma astrologer

आजकल कुछ लोग कहते हैं — “मंत्र से भोजन नहीं बनाया जा सकता, गाड़ी नहीं चलती”… 🤔असल में यह सोच अधूरी समझ को दिखाती है। विज...
20/03/2026

आजकल कुछ लोग कहते हैं — “मंत्र से भोजन नहीं बनाया जा सकता, गाड़ी नहीं चलती”… 🤔
असल में यह सोच अधूरी समझ को दिखाती है। विज्ञान को सिर्फ मशीन और औज़ार तक सीमित मान लेना भी एक तरह की संकीर्ण सोच है। सच तो यह है कि विज्ञान और अध्यात्म दोनों मिलकर ही पूरी तस्वीर बनाते हैं ✨

जो लोग मंत्रों पर सवाल उठाते हैं, उन्हें यह समझना चाहिए कि ध्वनि की शक्ति को विज्ञान भी मानता है 🔬
उदाहरण के लिए, ध्वनि तरंगों से पानी के अंदर प्रकाश और ताप पैदा होने की प्रक्रिया (sonoluminescence) साबित करती है कि आवाज़ सिर्फ सुनाई देने वाली चीज़ नहीं, बल्कि ऊर्जा भी है ⚡

पौधों पर भी ध्वनि का असर होता है 🌱
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि पौधे ध्वनि तरंगों को महसूस कर सकते हैं। जब सकारात्मक ध्वनि या मंत्र सुनाए जाते हैं, तो उनकी वृद्धि और कोशिकीय गतिविधि बेहतर होती है। यह म्यूजिक थेरेपी जैसा ही एक रूप है 🎶

कुछ प्रयोगों में यह भी देखा गया है कि शब्दों का पानी पर असर पड़ता है 💧
अच्छे शब्दों से पानी की संरचना सुंदर बनती है, और नकारात्मक शब्दों से वह अव्यवस्थित हो जाती है।
क्योंकि हमारा शरीर भी अधिकतर पानी से बना है, इसलिए शब्द और ध्वनि का प्रभाव हम पर भी पड़ता है ✨

इसी तरह, जब यज्ञ या मंत्र उच्चारण किया जाता है, तो वह केवल धुआं नहीं बनाता, बल्कि एक विशेष ऊर्जा वातावरण तैयार करता है 🔥
यह ऊर्जा सूक्ष्म स्तर पर काम करती है, जिसे हम सीधे आंखों से नहीं देख पाते, लेकिन उसका प्रभाव होता है।

मंत्रों को नकारना वैसा ही है जैसे कोई कहे कि “इंटरनेट से गन्ना, चावल, गेहूं नहीं निकलता, तो इसका क्या उपयोग?” 🌐
इंटरनेट सीधे खाना नहीं देता, लेकिन उसी से पूरी दुनिया की व्यवस्था चलती है।
उसी तरह मंत्र भी सीधे भौतिक चीज़ें नहीं बनाते, लेकिन मन और चेतना को प्रभावित करते हैं 🧠

हमारा शरीर एक तरह का “हार्डवेयर” है और हमारा मन-चेतना “सॉफ्टवेयर” की तरह काम करता है 💻
मंत्र उस सॉफ्टवेयर को प्रभावित करते हैं — हमारी सोच, भावनाएं और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर बनाते हैं 💫

जैसे शादी के मंत्र केवल रस्म नहीं होते, बल्कि वे दो लोगों के मन और भावनाओं को जोड़ने का माध्यम होते हैं ❤️
आज की भाषा में कहें तो यह एक तरह की मानसिक और भावनात्मक “सिंक” प्रक्रिया है 🔗

यह सच है कि नौकरी पाने या जहाज उड़ाने के लिए मंत्र नहीं, बल्कि यंत्र और तकनीक की ज़रूरत होती है ✈️
लेकिन उन यंत्रों को चलाने के लिए जो एकाग्रता, बुद्धि और संकल्प चाहिए, उसे मजबूत करने में मंत्र मदद करते हैं 🔥

मंत्रों का उद्देश्य बाहरी दुनिया को बदलना नहीं, बल्कि हमारी अंदर की दुनिया को संतुलित और शक्तिशाली बनाना है 🧘‍♀️
और जब अंदर बदलाव आता है, तो उसका असर बाहर की दुनिया में भी दिखने लगता है ✨
इसलिए मंत्र को जादू या अंधविश्वास समझना ठीक नहीं।
वह एक ऐसी प्रक्रिया है जो ध्वनि, ऊर्जा और चेतना के माध्यम से हमारे जीवन को प्रभावित करती है 🌌

अंत में बस इतना समझ लीजिए —
मंत्र सीधे चमत्कार नहीं करते, लेकिन इंसान को ऐसा बना देते हैं जो चमत्कार कर सके ✨🙏
Ms. Richa Sharmaa

Spiritual Meditator (Yantra & Mantra)☀️
Researcher in Vedic Sciences🪔
Consulting in Cosmic Remedies & Spiritual Growth




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