Dr. Jyoti Dave

Dr. Jyoti Dave Clinical Biochemist, Health, Nutrition & fitness educationist, creative blog, vlogger.

03/08/2026

केवड़ेश्वर महाकाल मंदिर 🚩🙏
यह विशाल वटवृक्ष जो आप इस वीडियो में देख रहे हैं यह वृक्ष लगभग 300 से 400 वर्ष पुराना है। यह वृक्ष इतना विशाल है की देखने में समझ ही नहीं आता की मुख्य तना कौन सा है क्योंकि जो जड़े ऊपर से नीचे आई है, जमीन में जाकर फिर नये तने का रूप ले लिया है । यह विशाल वट वृक्ष हमारे सनातनी और आध्यात्मिक परंपरा का साक्षात प्रमाण है। हमारे ऋषि मुनियों ने वर्षों ऐसे सघन जंगलों में जहाँ तपस्या की है वहाँ पवित्र मंदिर बनाए गए। शुद्ध प्राण वायु और ऊर्जा से भरपूर हुए यह स्थल वाकई अद्भुत है
केवड़ेश्वर महाकाल के इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है, शिप्रा नदी का उद्गम है, गौशाला है और आसपास नीम, पीपल, बरगद जैसे अनेक विशाल घने पेड़ है।
आप परिवार के साथ अगर किसी अच्छे स्थान पर दर्शन कर अपना शांत समय व्यतीत करना चाहते हैं तो एक बार जरूर जाये और अपने बच्चों को यह विशाल वटवृक्ष, हमारे मंदिर और उससे जुड़ी हुई धर्म और सनातनी परंपरा के बारे में जरूर बताएं।

03/08/2026

भारत की मशहूर टाटा चाय कंपनी के "ताजमहल" ब्रांड ने विजयवाड़ा में एक बड़ा होर्डिंग लगाया है। जहां काफी बारिश होती है। इस होर्डिंग पर बड़े बड़े चम्मच लगे हैं। जब बारिश होती है तो इन चम्मचों में पानी जमा हो जाता है, जिसके वजन से चम्मच मुड़ कर सर्किट बोर्ड से टकराते हैं। जिसके कारण "मेघ मल्हार" राग अपनी मधुर धुन बजाने लगता है।
इस अदभुत पर्यावरण अनुकूल प्रयास पर ध्यान देते हुए *"गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स"* ने कंपनी को प्रशंसा प्रमाण पत्र दिया है। जिसमें इस होर्डिंग को दुनिया का सबसे बेहतरीन, सुंदर व "इको-फ्रेंडली होर्डिंग" घोषित किया गया है। है न भारत के लिए गर्व की बात 🇮🇳
What a brilliant idea.... Wah Taj.... Wah Tata

🐧🐾🐧 कल रात नेटफ्लिक्स पर मैंने एक बहुत ही सुंदर पिक्चर देखी "माय पेंगुइन फ्रेंड"। इस पिक्चर में एक मछुआरे की  असली कहानी...
30/07/2026

🐧🐾🐧 कल रात नेटफ्लिक्स पर मैंने एक बहुत ही सुंदर पिक्चर देखी "माय पेंगुइन फ्रेंड"। इस पिक्चर में एक मछुआरे की असली कहानी है । इसमें यह मछुआरा अपनी पत्नी और बच्चे के साथ एक छोटे से आईलैंड पर खुशी से रहते हैं। एक बार तूफान होने की वजह से इनकी नाव डूब जाती है और यह अपने बेटे को खो देता है और इस दर्द के साथ वह अपना जीवन व्यतीत कर रहा होता है । एक दिन इसे समुद्र किनारे पर एक पेंगुइन मिलता है जो कि के तेल में भीगा हुआ था और थोड़ा सा घायल हो चुका था तो यह मछुआरा उस पेंगुइन को बचाकर अपने घर ले आता है। यह पेंगुइन को खिलाता पिलाता उसके साथ खेलते, उसके घाव को मरहम पट्टी करता और इस तरीके से यह पेंगुइन एक तरीके से उनके बच्चे जैसा हो जाता है या यूं कहे उसका बेस्ट फ्रेंड बन जाता है।
आइलैंड के बच्चे भी इसे प्यार करने लगते और इसको नाम देते 'डिनदीम'। जब पेंगुइन पूरी तरह ठीक हो जाता है और मौसम बदलता है तो मछुआरा उसे फिर समुद्र में छोड़ देता है लेकिन 6 महीने के बाद वही पेंगुइन 5000 मिल का सफर तय करके वापस इसी मछुआरे के घर में आता है और वहां फिर कुछ समय उसके साथ रहता है अपनी चीजों के बीच में अपने छोटे से बनाए हुए घोसले में।
यह सिलसिला एक नहीं दो नहीं पूरे 8 वर्ष तक चलता है जब यह पेंगुइन मौसम बदलता है तो यह अपने पेंगुइन फैमिली के साथ चला जाता है और फिर जब मौसम फिर बदलता है तो जुलाई से दिसंबर तक यहां पर इस मछुआरे के पास रहता है और फिर दिसंबर के बाद जब उसे लगता है कि वह उसका टाइम है तो यह चला जाता है।
इस कहानी को बहुत ही सुंदर तरीके से दिखाया है पिक्चर देखकर मुझे यह लगा की एक प्राणी एक छोटा सा जानवर प्रेम को समझता है और वह इतना भावनात्मक रूप से उस परिवार से मछुआरे और उसकी पत्नी के साथ जुड़ जाता है कि वह उसके घर को ही अपना घर समझता है और 6 महीने के बाद वह इतनी लंबी दूरी तय करके अपने घर आता है।
कई बार हम बच्चों को बाहर पढ़ने के लिए भेजते हैं नौकरी के लिए भेजते हैं और बच्चे अपने जीवन में इतना रम जाते हैं अपने काम में इतना रम जाते हैं कि उन्हें घर की याद नहीं आती, उन्हें अपने माता-पिता की याद नहीं आती है।
माता-पिता आस लगाए हुए उनकी राह देखते रहते हैं कि कब हमारे बच्चे घर लौटेंगे। घर बच्चों से होता है वह उनका इंतजार करते हैं लेकिन बच्चे अपनी जिंदगी में इतना व्यस्त हो जाते हैं कि वह कई बार घर वापस आना भी कम कर देते हैं। माता-पिता सिर्फ इंतजार करते हैं टकटकी लगाए आस लगाए उनके वापस लौटने का कि वह कुछ दिन आए और उस घर को वापस घर जैसा बनाएं । बहुत सुंदर पिक्चर, बहुत सुंदर चित्रण, जरूर देखिए माय पेंगुइन फ्रेंड 🥰

29/07/2026
27/07/2026

🪔 कुछ लोग अपनी उम्र से नहीं अपने परिवार के अंतिम निर्णय से अमर हो जाते हैं।

25 वर्ष की उम्र शायद विदा लेने की नहीं होती। यह सपने पूरे करने की उम्र होती है, अपने परिवार का सहारा बनने की उम्र होती है। लेकिन इंदौर के बेटे गौरव दवे ने जाते-जाते ऐसी कहानी लिख दी, जिसे शहर कभी नहीं भूल पाएगा।

गौरव... तुम चले गए लेकिन अपने साथ कुछ भी लेकर नहीं गए। तुम अपना दिल छोड़ गए, अपनी धड़कन छोड़ गए, अपनी साँसों की उम्मीद छोड़ गए। तुम अपनी ज़िंदगी के हिस्से उन लोगों के लिए छोड़ गए, जिन्हें तुम जानते भी नहीं थे।

कितना अश्रुपूरित क्षण होता है वो जब किसी एक घर का चिराग बुझता है, और उसी पल कई दूसरे घरों में उम्मीद का सूरज उग जाता है। यह केवल अंगदान नहीं है, यह मृत्यु के बाद भी जीवन पर विश्वास करने का सबसे सुंदर साहस है।

आज इंदौर का 68वाँ ग्रीन कॉरिडोर बना, सड़कें खाली हुईं, सायरन बजे, लोग रास्ता देते रहे। लेकिन उन सायरनों के बीच एक माँ का मौन, पिता का दर्द, बहन की हिम्मत और भाई का टूटता हुआ मन भी सफर कर रहा था।

किसी भी माता-पिता के लिए अपने जवान बेटे को अंतिम विदाई देना जीवन का सबसे कठिन क्षण होता है। लेकिन दवे परिवार ने उस असहनीय पीड़ा के बीच भी मानवता को चुना। उन्होंने अपने बेटे को सिर्फ विदा नहीं किया, उन्होंने उसे कई ज़िंदगियों में हमेशा के लिए जीवित कर दिया और यही सबसे बड़ा परोपकार है।

हम अक्सर कहते हैं इंसान मरने के बाद क्या छोड़कर जाता है?

गौरव ने इसका जवाब दे दिया, वह अंग छोड़कर गया, लेकिन उससे कहीं अधिक, वह उम्मीद छोड़कर गया।

आज अहमदाबाद में किसी की धड़कन चल रही है, इंदौर में किसी को नया जीवन मिला, किसी माँ की आँखों में फिर उम्मीद लौटी होगी, किसी परिवार ने शायद वर्षों बाद मुस्कुराया होगा और इन सबके पीछे कहीं न कहीं गौरव अब भी ज़िंदा है।

हम अक्सर शहर के गौरव की बात बड़ी इमारतों, निवेश, पुरस्कारों और विकास से करते हैं। लेकिन किसी शहर का असली गौरव उसके लोग होते हैं। आज इंदौर का बेटा गौरव, सचमुच इंदौर का गौरव बन गया।

प्रिय गौरव... अलविदा दोस्त। हम तुम्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे। लेकिन आज पूरा शहर तुम्हें अपना मानकर विदा कर रहा है। तुम्हारा नाम केवल समाचार की हेडलाइन भर नहीं रहेगा, तुम उस धड़कन में रहोगे जिसे तुमने जीवन दिया। तुम उस परिवार की दुआओं में रहोगे जिसने अपने किसी प्रियजन को दूसरी ज़िंदगी मिलते देखी और तुम हमेशा इस शहर की आत्मा में रहोगे।

नमन है दवे परिवार को इंदौर का गौरव बढ़ाने के लिए...👏

टीम इंदौर टॉक की इंदौर के गौरव को विनम्र श्रद्धांजलि। 🪔

27/07/2026

भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने एक बार फिर इतिहास रच दिया। 🇮🇳🥇

जब पूरा देश अपने पहले स्वर्ण पदक की उम्मीद लगाए बैठा था, तब मीराबाई चानू ने रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन करते हुए 190 किलोग्राम कुल भार उठाकर 2026 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इस जीत के साथ मीराबाई लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन बनीं। यह उपलब्धि उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन और अदम्य आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े सपने और लगातार प्रयास हर चुनौती को जीत में बदल सकते हैं।

पूरा देश मीराबाई चानू की इस ऐतिहासिक सफलता पर गर्व महसूस कर रहा है। 🇮🇳



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Weightlifting

26/07/2026

Celebrating my 8th year on Facebook. Thank you for your continuing support. I could never have made it without you. 🙏🤗🎉

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