05/07/2026
देश में परिवार टूट रहे हैं, रिश्तों पर भरोसा कम होता जा रहा है... और समाज के बड़े चेहरे तीसरी शादी को सामान्य बनाकर पेश कर रहे हैं।
हर व्यक्ति को अपने निजी जीवन के फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन जब कोई सार्वजनिक व्यक्तित्व होता है, तो उसके निर्णय समाज में चर्चा और प्रभाव दोनों पैदा करते हैं।
ज़रूरत इस बात की है कि रिश्तों की स्थिरता, जिम्मेदारी और पारिवारिक मूल्यों पर भी उतनी ही बात हो, जितनी नई शादियों पर होती है।
भारत की ताकत केवल आधुनिकता में नहीं, बल्कि मजबूत परिवारों और संस्कारों में भी है। 🇮🇳