Adiwasi Tau: Online-Herbalist, Homeopath & Counselor

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Online Advance Paid-Health Care, Health Advisor & Counselor, Organic Herbs Supplier, Motivator, Homeopath, Herbalist And Social Activist. संचालक: निरोगधाम (आर्गेनिक जड़ी-बूटी उत्पादन, शोध, प्रयोग एवं वितरण केन्द्र), जयपुर। पीलिया की दवाई 100% फ्री। Online Advance Paid-Health Care, Health Advice-Counseling, Organic Herbs Supplier, मोटीवेटर, होम्योपैथ, हर्बलिस्ट, दाम्पत्य एवं वैवाहिक विवाद सलाहकार।

जड़ी-बूटियों पर शोध, प्रयोग, आर्गेनिक रीति से पैदावार, पात्र लोगों के साथ बीजों का मुफ्त आदान प्रदान करना। पीलिया की दवाई फ्री। सोशियन एक्टिविस्ट। विभिन्न विषयों पर सतत चिंतन, लेखन और व्याख्यान।
संचालक-निरोगधाम (ऑर्गेनिक देशी जड़ी-बूटी उत्पादन केन्द्र), धानक्या रोड, मूण्डियारामसर, सिरसी-बेगस रोड, जयपुर, राजस्थान।

पांच वर्ष की आयु से सफेद पानी और रात में पेशाब निकलनासमस्या:"ताऊजी, जय जोहार। मेरी बेटी की उम्र 12 वर्ष है। उसे पांच वर्...
31/07/2026

पांच वर्ष की आयु से सफेद पानी और रात में पेशाब निकलना

समस्या:

"ताऊजी, जय जोहार। मेरी बेटी की उम्र 12 वर्ष है। उसे पांच वर्ष की उम्र से सफेद पानी की समस्या है और वह महीने में कम से कम 15 दिन रात को सोते समय पेशाब कर देती है। वह बताती है कि उसे इसका पता ही नहीं चलता। हमने अनेक सरकारी और निजी अस्पतालों में दिखा दिया है। पांच वर्ष से लगातार दवा खिला रहे हैं, लेकिन कोई अंतर नहीं पड़ रहा। डॉक्टर कहते हैं कि बड़ी होने पर रात में पेशाब निकलना अपने आप छूट जाएगा। कृपया मार्गदर्शन करें और यदि कोई देसी जड़ी बूटी या होम्योपैथिक उपचार हो तो बताने का कष्ट करें। मैं आपका आभारी रहूंगा।"

समस्या का समाधान:

आपकी चिंता पूरी तरह उचित है। 12 वर्ष की उम्र में महीने की लगभग आधी रातों में अनजाने में पेशाब निकलना केवल आलस्य, लापरवाही या बच्ची की गलती नहीं है। इसे Nocturnal Enuresis (नॉक्टर्नल एन्यूरिसिस यानी सोते समय अनजाने में पेशाब निकलना) कहा जाता है। कई बच्चों में उम्र के साथ सुधार होता है, लेकिन इस उम्र में बार-बार समस्या बने रहने और पुराने उपचार से लाभ न मिलने पर केवल प्रतीक्षा करना पर्याप्त नहीं है। इसकी व्यवस्थित दोबारा जांच और सक्रिय उपचार जरूरी है।

दोनों समस्याओं की अलग-अलग जांच जरूरी है:

पांच वर्ष की उम्र से लगातार सफेद पानी आना सामान्य मानकर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। बच्चियों में बाहरी अंगों की जलन या सूजन, सफाई से जुड़ी समस्या, साबुन या रसायन से जलन, संक्रमण, पेट के कीड़े, मूत्र संक्रमण अथवा कभी-कभी कोई बाहरी वस्तु इसका कारण हो सकती है। दुर्गंध, खुजली, लालिमा, पेशाब में दर्द या खून मिला स्राव हो तो जांच और अधिक जरूरी हो जाती है। अब 12 वर्ष की उम्र में मासिक धर्म शुरू होने के आसपास थोड़ा साफ या सफेद स्राव प्राकृतिक भी हो सकता है, परंतु पांच वर्ष की उम्र से चली आ रही समस्या को केवल उम्र का सामान्य बदलाव नहीं माना जा सकता।

रात में पेशाब निकलने के पीछे मूत्राशय का धीरे विकसित होना, रात में अधिक पेशाब बनना, नींद से समय पर न जाग पाना और पारिवारिक प्रवृत्ति जैसे कारण हो सकते हैं। कब्ज, दिन में बार-बार या अचानक पेशाब लगना, पेशाब रोक न पाना, मूत्र संक्रमण, मधुमेह, बहुत अधिक प्यास, खर्राटे और नींद में सांस रुकने जैसी समस्याएं भी जांचने योग्य हैं।

अब क्या करवाना चाहिए?:

बच्ची को बाल रोग विशेषज्ञ के साथ बच्चों की मूत्र संबंधी समस्याओं के विशेषज्ञ तथा जरूरत पड़ने पर बाल स्त्री रोग विशेषज्ञ को दिखाएं। अब तक की सभी जांच रिपोर्टें और दवाइयां साथ ले जाएं। पेशाब की सामान्य और संक्रमण संबंधी जांच, खून में शर्करा, कब्ज, दिन के पेशाब की आदत, अत्यधिक प्यास, खर्राटे और सफेद पानी के स्वरूप की समीक्षा आवश्यक हो सकती है। बच्ची कितनी बार पानी पीती है, दिन और रात में कब पेशाब करती है तथा बिस्तर किस रात गीला हुआ, इसका कम से कम दो सप्ताह का लिखित विवरण डॉक्टर के लिए उपयोगी रहेगा।

घर पर क्या सावधानी रखें?:

बच्ची को डांटें, शर्मिंदा करें, उसकी बात दूसरों के सामने बताएं या बिस्तर गीला करने के लिए दंड बिल्कुल न दें। सोने से पहले शौचालय अवश्य भेजें, दिन में नियमित अंतराल पर पेशाब करने की आदत बनाएं और पर्याप्त पानी दिन के समय पिलाएं। रात में पानी पूरी तरह बंद न करें, लेकिन सोने से ठीक पहले बहुत अधिक तरल देने से बचें। कब्ज हो तो उसका उपचार कराएं। निजी अंग को साधारण पानी से धीरे धोएं, आगे से पीछे की ओर सफाई करें और सुगंधित साबुन, पाउडर, रसायन तथा बहुत तंग कपड़ों से बचाएं।

क्या देसी जड़ी बूटी या होम्योपैथिक उपचार दिया जा सकता है?:

बच्ची की उम्र, पांच वर्ष से सफेद पानी, लंबे समय से बिस्तर गीला होना और अनेक दवाइयों के बाद भी सुधार न होना देखते हुए विस्तृत केस हिस्ट्री तथा जरूरी जांच के बिना किसी जड़ी बूटी या होम्योपैथिक दवा का नाम बताना सुरक्षित नहीं होगा। हां ऐसे अनकों केसों में जिनमें बहुत छोटी उम्र की बच्चियों में सफेद पानी याली ल्यूकोरिया की समस्या के समाधान हेतु मैं वर्षों से Leucorrhea Care Kit No. 4 सेवन करवाता रहा हूं। परिणाम बहुत अच्छे हैं।

यदि बुखार, पेट या कमर में दर्द, पेशाब में जलन या खून, बहुत अधिक प्यास, वजन घटना, बदबूदार या खून मिला सफेद पानी, निजी अंग में चोट, दिन में भी पेशाब निकलना अथवा चलने में कमजोरी हो तो शीघ्र चिकित्सकीय जांच कराएं और जांच रिपोर्ट्स के साथ प्रॉपर उपचार हेतु किसी होम्योपैथ और हर्बलिस्ट से सम्पर्क करें। बच्ची को सबसे अधिक आवश्यकता इस भरोसे की है कि यह उसकी गलती नहीं है और समस्या का उपचार किया जा सकता है।

कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

यदि किसी पाठक के मन में कोई सवाल हो या किसी प्रकार की जटिल या पुरानी स्वास्थ्य समस्या अथवा काउंसलिंग की जरूरत हो साथ ही यदि आपको मेरी Online Sewa में विश्वास हो तो कृपया निम्न WhatsApp पर अपनी समस्या सही और व्यवस्थित रूप से लिखकर मुझ से भी सम्पर्क किया जा सकता है।

आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा (31.07.2026)
Adiwasi Tau: Online-Herbalist, Homeopath, Counselor, Writer and Director
Nirogdham (India's First Curative & Organic Herbal Center) Jaipur, RJ
फ्री परामर्श हेतु WhatsApp No.: 85 619 55 619 पर अपनी समस्या लिखें।

सात वर्ष पुरानी जुकाम की एलर्जी क्यों होती है और क्या इसका उपचार संभव है?समस्या:"सर, मुझे यह जानना है कि जुकाम की एलर्जी...
29/07/2026

सात वर्ष पुरानी जुकाम की एलर्जी क्यों होती है और क्या इसका उपचार संभव है?
समस्या:
"सर, मुझे यह जानना है कि जुकाम की एलर्जी क्यों होती है? मैं 36 वर्ष का हूं और पिछले सात वर्ष से अत्यधिक परेशान हूं। मैंने इसके इलाज पर बहुत समय और पैसा खर्च किया है, लेकिन अभी तक निराश ही हूं। क्या देसी जड़ी बूटियों और होम्योपैथिक दवाइयों से इस समस्या का इलाज संभव है?"
समस्या का समाधान:
आपकी सात वर्ष पुरानी परेशानी और उपचार में समय तथा पैसा लगाने के बाद भी राहत न मिलने से उत्पन्न निराशा स्वाभाविक है। फिर भी इसे असाध्य मानकर हार मानना उचित नहीं है। सबसे पहले यह स्पष्ट करना जरूरी है कि जिसे सामान्य भाषा में "जुकाम की एलर्जी" कहा जाता है, वह अकसर Allergic Rhinitis (एलर्जिक राइनाइटिस यानी किसी बाहरी पदार्थ के प्रति शरीर की अधिक प्रतिक्रिया से नाक में होने वाली एलर्जी) होती है। यह वायरस से होने वाले सामान्य जुकाम से अलग है।
इसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली धूल, घर की महीन धूल में रहने वाले कीट, फूलों के पराग, फफूंद, पशुओं के बाल या त्वचा के कण जैसे सामान्य पदार्थों को भी हानिकारक समझकर अधिक प्रतिक्रिया करने लगती है। इसके कारण बार-बार छींक आना, नाक से पानी बहना, नाक बंद होना, नाक या आंखों में खुजली और आंखों से पानी आना जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं। धुआं, तेज सुगंध, अगरबत्ती, मच्छर भगाने वाला धुआं, वायु प्रदूषण और मौसम में बदलाव पहले से संवेदनशील नाक की परेशानी को और बढ़ा सकते हैं।
सही कारण पहचानना क्यों जरूरी है?:
हर बार नाक बहना एलर्जी ही हो, यह जरूरी नहीं है। बार-बार संक्रमण, नाक की हड्डी का टेढ़ापन, नाक में मांस बढ़ना, साइनस की समस्या, कुछ दवाइयां और धुएं या रसायनों से होने वाली जलन भी ऐसे लक्षण दे सकती है। इसलिए सात वर्ष पुरानी समस्या में नाक-कान-गला विशेषज्ञ या एलर्जी विशेषज्ञ से नाक की जांच कराना जरूरी है। आवश्यकता होने पर त्वचा या खून की एलर्जी जांच से उन पदार्थों की पहचान की जा सकती है जिनसे लक्षण बढ़ते हैं।
तात्कालिक राहत और दैनिक बचाव:
धूल की सफाई करते समय अच्छी तरह फिट होने वाला मास्क लगाएं और सफाई के समय उस स्थान से दूर रहें। बिस्तर, तकिया और चादर नियमित रूप से गर्म पानी में धोकर धूप में सुखाएं। पुराने गद्दों, भारी पर्दों, कालीनों, नम दीवारों, फफूंद, धुएं और तेज सुगंध से यथासंभव बचें। बाहर से लौटने पर चेहरा और हाथ धोएं तथा कपड़े बदलें।
मेरा अनुभव है कि नाक को नमक मिले स्वच्छ पानी से धोना अनेक मरीजों में लक्षणों से राहत देता है, लेकिन इसके लिए केवल उबालकर ठंडा किया हुआ पानी ही प्रयोग करें। साधारण नल का पानी सीधे नाक में न डालें।
चिकित्सकीय उपचार:
डॉक्टर लक्षणों की गंभीरता के अनुसार एलर्जी कम करने वाली दवा, नाक में डालने वाला उचित स्प्रे अथवा अन्य उपचार दे सकते हैं। नाक में डालने वाले कुछ चिकित्सकीय स्प्रे नियमित और सही विधि से उपयोग करने पर लंबे समय से चली आ रही एलर्जी में प्रभावी होते हैं। सामान्य सर्दी-जुकाम वाला नाक खोलने का स्प्रे लंबे समय तक स्वयं प्रयोग करने से समस्या उलटे बढ़ सकती है। चुनिंदा मरीजों में Allergy Immunotherapy (एलर्जी इम्यूनोथेरेपी यानी जिस पदार्थ से एलर्जी हो, उसके प्रति शरीर की संवेदनशीलता धीरे-धीरे घटाने वाला विशेषज्ञ उपचार) पर भी विचार किया जा सकता है।
क्या देसी जड़ी बूटियों और होम्योपैथिक दवाइयों से उपचार संभव है?:
रोगी के लक्षण, एलर्जी बढ़ने का समय, मौसम, वातावरण, भोजन, नींद, पाचन, दूसरी बीमारियों और पहले लिए गए उपचार की विस्तृत जानकारी के आधार पर सुरक्षित प्रॉपर उपचार की योजना बनाई जा सकती है। अनेकों मरीजों को विस्तृत केस हिस्ट्री के बाद चुनी गई देसी जड़ी बूटियों या होम्योपैथिक दवाइयों से स्थिर राहत का मिलती है, लेकिन किसी विशेष जड़ी बूटी या होम्योपैथिक या अन्य दवा से नाक की एलर्जी के स्थायी उपचार का विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण अभी पर्याप्त नहीं है।
मेरी सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि सात वर्ष पुरानी एलर्जी में केवल दवा बदलते रहना समाधान नहीं है। लक्षण बढ़ाने वाले वास्तविक कारण की पहचान, घर और कार्यस्थल के वातावरण में सुधार, दवा का सही चयन और नियमित उपचार-इन चारों को साथ लेकर चलना पड़ता है। विस्तृत पूछताछ के बिना किसी एक दवा या जड़ी बूटी का नाम बता देना न तो सुरक्षित होगा और न ही आपकी पुरानी समस्या के साथ न्याय करेगा।
हां आप चाहें तो कुछ दिन हमारी ओर से उपलब्ध करवाए जाने वाले Allergy Care Combo का कम से कम 3 महीना सेवन कर सकते हैं। इसके नियमित सेवन से बहुत से मरीजों का स्थिर राहत मिली है।
यदि सांस फूलने लगे, सीने में घरघराहट हो, होंठ या गला सूजने लगे अथवा सांस लेने में अचानक कठिनाई हो तो इसे केवल नाक की एलर्जी न मानें और तुरंत अस्पताल पहुंचें।
कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
जरूरी होने पर सुरक्षित एवं सही इलाज और, या काउंसलिंग के लिए किसी अनुभवी उपचारक और, या काउंसलर से परामर्श करें।
यदि किसी पाठक के मन में कोई सवाल हो या किसी प्रकार की जटिल या पुरानी स्वास्थ्य समस्या अथवा काउंसलिंग की जरूरत हो साथ ही यदि आपको मेरी Online Sewa में विश्वास हो तो कृपया निम्न WhatsApp पर अपनी समस्या सही और व्यवस्थित रूप से लिखकर मुझ से भी सम्पर्क किया जा सकता है।
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जब एक ही घटना में बेटा, बहू, पोते और सम्पत्ति सब संकट में आ जाएं तो माता-पिता क्या करें?मुझे एक व्यक्ति ने निम्न समस्या ...
21/07/2026

जब एक ही घटना में बेटा, बहू, पोते और सम्पत्ति सब संकट में आ जाएं तो माता-पिता क्या करें?

मुझे एक व्यक्ति ने निम्न समस्या लिखकर भेजी है:

"ताऊजी प्रणाम। मैं आपको करीब 10 वर्ष से पढ़ता रहा हूं। आपकी सामाजिक एवं हेल्थ सम्बन्धी सेवाओं से बहुत प्रभावित हूं। आपकी पोस्ट शेयर भी करता रहता हूं। आप बहुतों की समस्याओं का समाधान करते हैं। मेरी भी एक समस्या है। यदि आप मेरा मार्गदर्शन करेंगे तो आपका आजीवन ऋणी रहूंगा और मुझ जैसे दुःखी दूसरे लोगों को भी सहारा मिलेगा।

मैं 67 वर्ष का हूं। मेरा एक बेटा था, जो सरकारी अधिकारी था। बेटे की शादी हुई। उसके दो बेटे हैं। बेटा नौकरी के कारण अपने बच्चों सहित अलग-अलग शहरों में रहता था। मैं बीमार रहता था, इसलिए मैंने अपने पुरखों की तथा अपनी समस्त सम्पत्ति बेटे के नाम कर दी थी।

सन 2022 में बेटा 39 वर्ष का था। अचानक जीवन में तूफान आ गया। बेटे द्वारा सरकारी बंगले में फांसी लगाकर आत्महत्या करने की खबर मिली। आप सोच सकते हैं कि हम पति-पत्नी पर क्या गुजरी होगी। बेटे की पत्नी ने पुलिस में रिपोर्ट की और हमने बेटे का अंतिम संस्कार किया। पुलिस ने मामला आत्महत्या का मानकर बंद कर दिया।

बेटे की जगह उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी, पेंशन तथा जमा राशि मिल गई। बेटे के नाम की सारी सम्पत्ति की भी बहू मालकिन हो गई। हमारे दोनों पोतों के साथ बहू ने नौकरी शुरू कर दी। बहू हमें लगातार फोन करती रहती। बीच-बीच में आकर संभालती और आर्थिक मदद के लिए भी पूछती, लेकिन मुझे पेंशन मिलती है, इसलिए मैंने उससे कभी कोई मदद नहीं ली। परमात्मा का दंड मानकर बेटे की मौत को होनी समझकर जीवन जीना शुरू कर दिया।

अचानक जनवरी 2026 में अखबार में खबर छपी कि एक किलर किसी दूसरे मामले में पकड़ा गया। उसने पुलिस को बताया कि मेरे बेटे ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि मेरी बहू और उसके प्रेमी ने मिलकर उसी किलर के माध्यम से मेरे बेटे की गला दबाकर हत्या करवाई तथा उसे पंखे से लटका दिया था। अब इन तीनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बहू के बिना हमारे पोते बहुत दुःखी रहते हैं।

इस हकीकत को जानकर मुझे हार्ट अटैक आ गया। मेरे हृदय में दो छल्ले (स्टेंट) डाले गए हैं। हम दोनों की स्थिति इतनी खराब है कि शब्दों में बयां नहीं कर सकता। न किसी से कुछ कह पाते हैं, न कुछ कर पा रहे हैं। रोने, घुटने और तनाव में बहुत बुरा हाल है।

एक ओर तो हमारे द्वारा बताए गए तथ्यों के अनुसार बहू पर बेटे की हत्या का आरोप है। दूसरी ओर हमारी सारी सम्पत्ति उसी के नाम है और तीसरी ओर वह हमारे पोतों की मां भी है। हालात बहुत विकट हैं। हमारा कोई सहारा नहीं है। इस घटना से दुःखी होकर बहू के पीहर पक्ष ने भी उससे हमेशा के लिए नाता तोड़ लिया है। इन हालातों में हम करें तो क्या करें? आप रास्ता दिखाइए। हमें अब क्या करना चाहिए?"

पहचान गोपनीय रखते हुए समाधान प्रस्तुत है।

इस प्रकार की घटना किसी भी माता-पिता के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक हो सकती है। यहां केवल बेटे को खोने का दुःख ही नहीं है, बल्कि उसके बाद सामने आई नई जानकारी, पोतों का भविष्य, पारिवारिक विश्वास का टूटना, सम्पत्ति की चिंता और बुढ़ापे का अकेलापन, ये सभी एक साथ मन पर भारी बोझ डाल रहे हैं। यदि घटनाएं वास्तव में वैसी ही हैं जैसा आपने लिखा है, तो स्वाभाविक है कि आपका मन, शरीर और भावनाएं गहरे आघात से गुजर रहे होंगे।

प्राथमिक परामर्श:

यदि घटनाएं वास्तव में वैसी ही हैं जैसा आपने बताया है, तो यह केवल पारिवारिक दुःख का विषय नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक, कानूनी और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी अत्यंत गंभीर परिस्थिति है। आपके हाल ही में हुए हार्ट अटैक, हृदय में स्टेंट, लगातार तनाव और अत्यधिक मानसिक आघात को देखते हुए Psychological Counseling यानी मनोवैज्ञानिक परामर्श (जिसमें व्यक्ति को गहरे मानसिक आघात, दुःख और तनाव से धीरे-धीरे बाहर निकलने में वैज्ञानिक तरीके से सहायता दी जाती है।) आपके लिए लाभदायक हो सकती है। यदि बेचैनी, घबराहट, नींद न आना, निराशा या जीवन से विरक्ति जैसी समस्याएं लगातार बनी रहें, तो Psychiatrist यानी मनोचिकित्सक (मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिकित्सक।) से भी समय रहते परामर्श लेना उचित रहेगा। साथ ही अपने हृदय रोग विशेषज्ञ के नियमित संपर्क में बने रहें, क्योंकि अत्यधिक मानसिक तनाव का प्रभाव हृदय पर भी पड़ सकता है।

समाधान:

सबसे पहले आप स्वयं को यह समझाइए कि इस समय आपके सामने एक नहीं, बल्कि कई बड़े संकट एक साथ खड़े हैं। यदि आप एक ही समय में बेटे की मृत्यु, न्याय की प्रक्रिया, सम्पत्ति, बहू, पोतों और अपने भविष्य के बारे में लगातार सोचते रहेंगे, तो आपका मन और शरीर दोनों टूट जाएंगे। इसलिए सबसे पहले अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दीजिए। यदि आप स्वस्थ रहेंगे, तभी अपने पोतों का सहारा बन सकेंगे और आगे के निर्णय भी सोच-समझकर ले पाएंगे।

यह भी स्वीकार करना आवश्यक है कि जो घटना घट चुकी है, उसे कोई बदल नहीं सकता। अब आपका ध्यान अतीत में बार-बार लौटने के बजाय वर्तमान और भविष्य पर होना चाहिए। न्याय का कार्य जांच एजेंसियों और न्यायालय का है। आप स्वयं को इस बोझ से मुक्त रखिए कि हर बात का निर्णय आपको ही करना है। जहां आवश्यक हो, कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग दीजिए, लेकिन पूरे दिन उसी चिंता में डूबे रहना आपके स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।

आपके दोनों पोते इस पूरी घटना के सबसे मासूम और सबसे अधिक मानसिक रूप से प्रभावित पक्ष हैं। उन्होंने अपने पिता को खोया, अब उनकी मां भी उनके साथ नहीं है। इसलिए उनके सामने कभी भी किसी के प्रति घृणा, बदले या कटुता की भाषा का प्रयोग न करें। उन्हें सुरक्षा, अपनापन, धैर्य और विश्वास का वातावरण देने का प्रयास करें। यदि बच्चे भावनात्मक रूप से सुरक्षित रहेंगे, तो भविष्य में इस आघात से बाहर निकलने की संभावना भी अधिक रहेगी।

अपने मन का दुःख भीतर दबाकर अकेले घुटते रहने के बजाय उसे किसी विश्वसनीय परिवारजन, शुभचिंतक या योग्य परामर्शदाता के साथ साझा करें। दुःख बांटने से समस्या समाप्त नहीं होती, लेकिन मन का बोझ अवश्य हल्का होने लगता है। कई लोग इसे कमजोरी समझते हैं, जबकि वास्तव में अपनी पीड़ा व्यक्त करना मानसिक मजबूती का संकेत है।

प्रतिदिन कम से कम 6 से 7 घंटे की गहरी नींद लेने का प्रयास करें। विशेष रूप से रात्रि 12 बजे से प्रातः 4 बजे के बीच की नींद शरीर और मस्तिष्क की प्राकृतिक मरम्मत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। सोने और जागने का समय नियमित रखें तथा देर रात तक तनावपूर्ण चर्चाओं, समाचारों या घटनाओं पर विचार करने से बचें।

अपने स्वास्थ्य की अनुमति के अनुसार प्रतिदिन 30 से 45 मिनट टहलें। हल्का योग, प्राणायाम और सरल शारीरिक गतिविधियां अपनाएं। सुबह की धूप में कुछ समय बैठें तथा अवसर मिलने पर प्रकृति के बीच शांत वातावरण में समय बिताएं। स्वच्छ और सुरक्षित स्थान पर 10 से 15 मिनट नंगे पैर चलना भी मानसिक शांति का अनुभव करा सकता है।

भोजन सात्त्विक, ताजा और समय पर लें। सुबह फल आधारित नाश्ता करें। दोपहर का भोजन लगभग 12:30 से 1:30 बजे के बीच तथा शाम का भोजन यथासंभव सूर्यास्त के आसपास लें। दोनों मुख्य भोजन से पहले सलाद लेने की आदत विकसित करें। अत्यधिक मिर्च-मसाले, अनियमित भोजन और भूखे रहने से बचें। यदि चाय, कॉफी या अन्य किसी नशे का सेवन करते हों, तो विशेषकर सुबह खाली पेट उनसे बचें और धीरे-धीरे उन्हें पूरी तरह छोड़ने का प्रयास करें।

अंत में स्वयं को बार-बार यह याद दिलाइए कि जीवन ने आपके साथ अत्यंत कठोर व्यवहार किया है, लेकिन अब भी आपके जीने का एक बड़ा कारण आपके पोते हैं। उन्हें आपके अनुभव, स्नेह और संरक्षण की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य को अपना संबल बनाइए। बशीर बद्र का एक प्रसिद्ध शेर है:

"उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,
न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए।"

इस कठिन समय में यही प्रयास कीजिए कि आपका दुःख आपके जीवन की अंतिम पहचान न बने, बल्कि आपके धैर्य, संयम और अपने पोतों के प्रति जिम्मेदारी की भावना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी ताकत बन जाए।

आप जिन तकलीफों से परेशान हैं, इनसे भी गंभीर समस्याओं और हालातों से जूझने वाले अनेक लोगों को मैंने सामान्य जीवन जीते देखा है। अत: सकारात्मक रहें, हिम्मत नहीं हारें और आत्मविश्वास बनाए रखें। आवश्यकता केवल अनुशासित दिनचर्या, संतुलित जीवनशैली और सलाह का नियमित पालन करने की है।

किसी भी पाठक के मन में कोई सवाल, उलझन या जिज्ञासा हो या किसी पुरानी, जटिल और लाइलाज समझी जाने वाली बीमारी का Online प्राकृतिक समाधान/काउंसलिंग चाहिए या घर बैठे Health Care Kit या जड़ी-बूटी या अर्क मंगवाना हो तो WhatsApp नंबर: 85-619-55-619 पर संपर्क करें। जोहार!

आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा (21.07.2026)
Adiwasi Tau: Online-Herbalist, Homeopath, Counselor, Writer and
Director Nirogdham (India's First Curative & Organic Herbal Center)
Mundiyaramsar, Sirsi-Begus Road, Jaipur-302041 (Rajasthan)
फ्री परामर्श हेतु लिखें: WhatsApp No.: 085619 55619

वनौषधि ज्ञान सार 'काना'
20/07/2026

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यदि करते हो पत्नी से प्यार तो 'प्रसव सुरक्षा चक्र' से क्यों इनकार?
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लकवा अचानक क्यों मारता है और उस समय क्या करना चाहिए?समस्या:"ताऊजी, आजकल लकवा के मामले बहुत बढ़ गए हैं। संभव हो तो एक लेख...
13/07/2026

लकवा अचानक क्यों मारता है और उस समय क्या करना चाहिए?

समस्या:

"ताऊजी, आजकल लकवा के मामले बहुत बढ़ गए हैं। संभव हो तो एक लेख के माध्यम से बताएं कि लकवा क्यों मारता है? इससे बचाव के क्या उपाय हैं और यदि किसी को लकवा मार ही जाए तो क्या करना चाहिए?"

समस्या का समाधान:

लकवा, जिसे चिकित्सा विज्ञान में Stroke (स्ट्रोक यानी मस्तिष्क में खून का बहाव रुकने या खून बहने से अचानक होने वाली गंभीर अवस्था) कहा जाता है, वास्तव में मस्तिष्क पर अचानक हुआ हमला है। इसमें या तो मस्तिष्क की किसी खून की नली में रुकावट आ जाती है या कोई नली फटकर खून बहने लगता है। दोनों ही स्थितियों में मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए लकवा केवल हाथ-पैर की बीमारी नहीं, बल्कि मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाने वाली और मरीज के जीवन के लिए गंभीर खतरा पैदा करने वाली आपात स्थिति है।

लकवा क्यों मारता है?:

अनियंत्रित बढ़ा हुआ रक्तचाप लकवा का बहुत बड़ा कारण है। इसके अलावा मधुमेह, बढ़ा हुआ खराब कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, अधिक नमक और असंतुलित भोजन, तंबाकू-धूम्रपान, अधिक शराब तथा हृदय की धड़कन की कुछ गड़बड़ियां भी खतरा बढ़ा सकती हैं। उम्र और परिवार में पहले किसी को लकवा होने जैसे कुछ कारण हमारे नियंत्रण में नहीं होते, लेकिन रक्तचाप, मधुमेह, बढ़ा हुआ खराब कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली जैसे कई प्रमुख कारणों को नियंत्रित करके लकवा का खतरा कम किया जा सकता है।

लकवा के संकेत तुरंत पहचानें:

अचानक चेहरे का एक भाग टेढ़ा पड़ना, एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन, बोली लड़खड़ाना या बात समझने में कठिनाई, अचानक दिखाई देने में परेशानी, संतुलन बिगड़ना या बिना स्पष्ट कारण बहुत तेज सिरदर्द होना लकवा के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण कुछ मिनट में अपने आप ठीक भी हो जाएं, तब भी उन्हें सामान्य कमजोरी, गैस, थकान या "नस दबने" की समस्या मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए।

लकवा मार जाए तो क्या करें?:

सबसे पहले लक्षण शुरू होने का सही समय नोट करें और मरीज को बिना देरी ऐसे अस्पताल पहुंचाएं जहां मस्तिष्क की तत्काल जांच और लकवा का आपात उपचार उपलब्ध हो। एम्बुलेंस उपलब्ध हो तो उसका उपयोग करें। लकवा में समय बहुत कीमती है- कुछ प्रकार के लकवे में शुरुआती घंटों के भीतर विशेष उपचार से मस्तिष्क को होने वाला नुकसान और स्थायी विकलांगता कम की जा सकती है।

मरीज को जबरन पानी, भोजन, गोली, चूर्ण, काढ़ा या कोई जड़ी बूटी न खिलाएं। स्वयं से Aspirin (एस्पिरिन यानी खून का थक्का बनने से रोकने वाली दवा) भी न दें, क्योंकि यदि मस्तिष्क में खून बह रहा हो तो इससे स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है। मालिश, तेल, झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में कीमती समय बिल्कुल न गंवाएं। पहले अस्पताल और जांच-उसके बाद ही सही उपचार का निर्णय होना चाहिए।

लकवा से बचाव के उपाय:

अपने रक्तचाप की नियमित जांच कराएं और बढ़ा हुआ हो तो उसे नियंत्रित रखें। मधुमेह और कोलेस्ट्रॉल की समय-समय पर जांच कराएं। तंबाकू और धूम्रपान से दूर रहें, नमक और बहुत अधिक तला-भुना भोजन कम करें, वजन नियंत्रित रखें और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलें या व्यायाम करें। डॉक्टर द्वारा दी गई रक्तचाप, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल या हृदय की दवा मनमर्जी से बंद न करें।

लकवा के बाद भी निराश होकर मरीज को बिस्तर पर छोड़ देना उचित नहीं है। समय पर उपचार के बाद Physiotherapy (फिजियोथेरेपी यानी शरीर की कमजोर गतिविधियों को अभ्यास द्वारा सुधारने की चिकित्सा), बोलने का अभ्यास और नियमित पुनर्वास से अनेक मरीजों में चलने-फिरने तथा रोजमर्रा के काम करने की क्षमता में अच्छा सुधार हो सकता है।

मेरी सबसे जरूरी सलाह यही है-लकवा में "देखते हैं, थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा" वाला विचार सबसे खतरनाक हो सकता है। चेहरा टेढ़ा हो, हाथ कमजोर पड़े या बोली लड़खड़ाए तो समय न गंवाएं। तुरंत अस्पताल पहुंचें। सही समय पर उठाया गया कदम किसी की जान और जीवनभर की अपंगता-दोनों के बीच का अंतर बन सकता है।

कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

जरूरी होने पर सुरक्षित एवं सही इलाज और, या काउंसलिंग के लिए किसी अनुभवी उपचारक और, या काउंसलर से परामर्श करें।

यदि किसी पाठक के मन में कोई सवाल हो या किसी प्रकार की जटिल या पुरानी स्वास्थ्य समस्या अथवा काउंसलिंग की जरूरत हो साथ ही यदि आपको मेरी Online Sewa में विश्वास हो तो कृपया निम्न WhatsApp पर अपनी समस्या सही और व्यवस्थित रूप से लिखकर मुझ से भी सम्पर्क किया जा सकता है।

आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा (13.07.2026)
Adiwasi Tau: Online-Herbalist, Homeopath, Counselor, Writer and Director
Nirogdham (India's First Curative & Organic Herbal Center) Jaipur, RJ
फ्री परामर्श हेतु WhatsApp No.: 85 619 55 619 पर अपनी समस्या लिखें।

क्या आमने-सामने मिले बिना सही उपचार संभव नहीं?एक साथी ने पूछा है:आदरणीय डॉ. साहब, साधारणतः यह देखा गया है कि डॉक्टर तथा ...
12/07/2026

क्या आमने-सामने मिले बिना सही उपचार संभव नहीं?
एक साथी ने पूछा है:
आदरणीय डॉ. साहब, साधारणतः यह देखा गया है कि डॉक्टर तथा मरीज के बीच आमने-सामने संवाद होना चाहिए, ताकि मरीज अपनी बीमारी के बारे में बेहिचक बता सके तथा डॉक्टर भी अपने विवेक से मरीज से आवश्यक जानकारी प्राप्त कर सके। अतः संभव हो तो आप फीस लेकर कम से कम गंभीर रोगियों का उपचार उनसे प्रत्यक्ष रूप से मिलकर *कर सकते हैं।
मेरा जवाब:
उक्त सवाल का जवाब मैं अनेक बार दे चुका हूं, लेकिन अब ग्रुप में कुछ नए लोग हो सकते हैं।
आदरणीय, आपने जो लिखा है, वह आपके लिए और उन सभी के दृष्टिकोण से सही हो सकता है, जिन्होंने कभी भी मेरी निर्धारित प्रक्रिया को अपनाकर प्रॉपर उपचार सेवाएं नहीं ली हैं। अन्यथा जिन्होंने ये सेवाएं ली हैं, वे ऐसा नहीं लिख सकते।
आदरणीय, दूसरी बात पर विचार करें: अरुणाचल, कश्मीर, तमिलनाडु या दमण-दीव का मेरा मरीज मुझसे व्यक्तिगत रूप से मिले बिना मेरी सेवाएं कैसे ले रहा है? आज कम से कम दो दर्जन से अधिक राज्यों के कई सौ मरीजों को मैं सेवाएं दे रहा हूं।
सच यह है कि आपने उक्त विचार मेरी उपचार प्रक्रिया को अपनाए या जाने बिना व्यक्त किए हैं। इसलिए ये एकपक्षीय हैं और इसके पीछे आपका वह मनोविज्ञान है, जो परंपरागत तरीके से संचालित होता है। जिसमें व्यक्ति घंटों बैठकर अपनी बारी का इंतजार करता है और मोटी फीस देकर भी उसे पांच मिनट से अधिक समय नहीं मिलता। जबकि मैं अपने मरीज से औसतन फोन पर 50 मिनट बात करता हूं। जरूरी होने पर वीडियो काल करता हूं और उपचार के दौरान मुझे लगता है कि मरीज से मिलना जरूरी है, तो उसे समय देकर मिलने बुलाता हूं। अभी कुछ दिन पूर्व जैसलमेर से एक महीला ​मरीज मिलकर गयी थी।
गंभीर रोगियों का उपचार:
मैं किसी भी ऐसे गंभीर रोगी का केस कतई नहीं लेता, जिसका जीवन संकट में हो और जिसे तत्काल सेवा की जरूरत हो, क्योंकि मेरे पास आपातकालीन सेवाएं नहीं हैं। फिर भी मेरे यहां 45 से 75 दिनों तक की वेटिंग रहती है।
तीसरी बात:
आदरणीय, मुझसे ही उपचार लेना किसी की बाध्यता नहीं है। मैं तो अल्पज्ञानी हूं। मुझसे हजारों गुना अधिक ज्ञान एवं अनुभव रखने वाले उपचारकों और विशेषज्ञों की इस देश में कोई कमी नहीं है।
आदरणीय, मैंने भारत सरकार की सेवा से 48 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्ति ली। जानते हैं—क्यों?
मेरा जवाब जानें:
गुलामी से मुक्ति और अपनी आजादी के लिए। यह उन लोगों को समझ नहीं आ सकता, जिनके जीवन का लक्ष्य ही येन-केन प्रकारेण सरकारी नौकरी हासिल करना है।
आदरणीय, मैं क्लीनिक खोलकर अपनी आजादी किसी भी कीमत पर नहीं खो सकता।
एक और बात:
यह और जानें कि मैं चाय, दूध, *घी, गुटका, बीड़ी, सिगरेट, दारू, मांस, मछली, पैक्ड फूड आदि में से किसी का भी सेवन नहीं करता।
ऐसे में मुझे रुपयों की अत्यंत आवश्यकता नहीं है। मेरा जीवन सहजता से चल रहा है। पेंशन भी मिलती है। दोनों बेटे अपना कमा-खा रहे हैं। न मैं उनसे लेता हूं और न उन्हें सामान्यतः मुझसे लेने की जरूरत पड़ती है।
अंतिम बात:
मेरी सेवाओं से मेरे मरीज संतुष्ट हैं और मैं संतुष्ट हूं। इससे अधिक कोई चाहत नहीं।
हां, कुछ लोग पानी में उतरे बिना ही तैरना सीखना चाहते हैं! जो संभव नहीं।
जोहार!
आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा: आदिवासी ताऊ
मुफ्त परामर्श हेतु वाट्सएप 85 619 55 619 पर लिखें।

कब्ज, गैस, उच्च रक्तचाप और तनावसमस्या:> "ताऊजी जय जोहार। मुझे अनेक प्रकार की तकलीफें थीं। मैंने आपसे अश्वगंधा, ब्राह्मी ...
08/07/2026

कब्ज, गैस, उच्च रक्तचाप और तनाव

समस्या:

> "ताऊजी जय जोहार। मुझे अनेक प्रकार की तकलीफें थीं। मैंने आपसे अश्वगंधा, ब्राह्मी अर्क और शंखपुष्पी का मिश्रित तीन बोतल अर्क तथा साथ में दो महीने का Super S*x Power & Stamina Combo मंगवाया था। मेरी याददाश्त, टेंशन, डिप्रेशन और यौन कमजोरी में बहुत फायदा हुआ। पैरों की भड़कन में भी आराम मिला है। मुझे लंबे समय से कब्ज और ऐसीडिटी की शिकायत रहती है। गैस चढ़ जाती है तो सिर दर्द भी होने लगता है। डॉक्टर ने हाई बीपी भी बताया है। सीढ़ी चढ़ते समय कभी-कभी सांस फूलती है। इसके लिए कोई अच्छी किट हो तो बताएं तथा जीवनशैली में बदलाव के लिए भी मार्गदर्शन दें। मैं पूरी तरह शाकाहारी हूं। केवल तीन कप चाय पीता हूं और कोई नशा नहीं करता। नाश्ता नहीं करता, केवल दो समय भोजन करता हूं। सुबह 7:30 बजे और शाम 6:00 बजे। मेरी उम्र 47 वर्ष, वजन 65 किलो तथा लंबाई 5 फुट 2 इंच है। दिनभर दफ्तर में बैठकर काम करता हूं। परिवार में कुछ विवाद हैं, उनका तनाव भी रहता है, लेकिन अब पहले से काफी आराम है। दफ्तर मोटरसाइकिल से जाता हूं।"

समस्या का समाधान:

सबसे पहले यह जानकर प्रसन्नता हुई कि अश्वगंधा, ब्राह्मी अर्क और शंखपुष्पी का मिश्रित अर्क एवं Super S*x Power & Stamina Combo का सेवन करने से आपकी याददाश्त, मानसिक तनाव, डिप्रेशन, यौन कमजोरी तथा पैरों की भड़कन जैसी समस्याओं में अच्छा लाभ मिला। यह इस बात का संकेत है कि हमारे अनुभवसिद्ध उत्पादों का धैर्य और नियमितता रूप से सेवन भी अच्छे परिणाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

आपकी वर्तमान जानकारी से ऐसा लगता है कि अब भी लंबे समय से बनी कब्ज, ऐसीडिटी, गैस, बैठे-बैठे काम करने, चाय पीने और भोजन की गलत आदत, पारिवारिक तनाव तथा उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियां मिलकर आपके पाचन और समग्र स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। सीढ़ी चढ़ते समय सांस फूलना भी ऐसा लक्षण है, जिसे सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। यह उच्च रक्तचाप, हृदय, फेफड़ों अथवा शारीरिक क्षमता से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए अपने चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय-समय पर आवश्यक जांच और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अवश्य करवाते रहें।

प्रसिद्ध दार्शनिक लाओ त्सु ने कहा है, "हजार मील की यात्रा भी एक कदम से शुरू होती है।" अर्थात बड़े बदलाव एक दिन में नहीं आते, बल्कि छोटे-छोटे नियमित प्रयास ही आगे चलकर बड़ा परिणाम देते हैं। आपने पहले भी स्वास्थ्य में सुधार का अनुभव किया है, इसलिए निराश होने के बजाय उसी नियमितता को आगे भी बनाए रखें और दोनों उत्पादों का सेवन जारी रखें।

यदि सुबह 7:30 बजे का भोजन नहीं ताजा मौसमी फलों का नाश्ता करें और दोपहर में पहला भोजन लें और उसे संतुलित, पौष्टिक और पर्याप्त रखें। यदि लंबे समय तक खाली पेट रहते हैं, तो यह आदत सुधारना जरूरी है। पर्याप्त पानी पिएं। भोजन में सलाद, मौसमी सब्जियां तथा रेशेदार भोजन (फाइबर अर्थात ऐसा भोजन जो मल को मुलायम बनाकर बाहर निकालने में सहायता करे) बढ़ाएं। लगातार बैठे रहने के बजाय प्रत्येक 45-60 मिनट में कुछ मिनट अवश्य टहलें। प्रतिदिन कम से कम 30-40 मिनट पैदल चलने या अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम करने का प्रयास करें। तीन कप चाय की मात्रा भी धीरे-धीरे बंद करना लाभदायक होगा। मानसिक तनाव कम करने के लिए प्रतिदिन कुछ समय गहरी सांस लेने, ध्यान अथवा मन को शांत रखने वाली किसी सकारात्मक गतिविधि के लिए अवश्य निकालें। इसके साथ साथ अश्वगंधा, ब्राह्मी अर्क और शंखपुष्पी का मिश्रित अर्क का सेवन निरंतर जारी रखें। यह बहुत सस्ता है।

जहां तक किसी किट का प्रश्न है, तो आपकी वर्तमान समस्याओं के लिए किसी एक देसी जड़ी बूटी आधारित किट का चयन करना उचित नहीं। आपकी संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति, वर्तमान दवाओं तथा आवश्यक चिकित्सकीय जानकारी को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत रूप से सम्पर्क करने पर आपकी पूरी जानकारी के आधार पर अधिक उपयुक्त मार्गदर्शन दिया जा सकता है। हां एसीडिटी के लिए आप चाहें तो Acidity Care Kit No. 30 मंगवा सकते हैं। इसके परिणाम बहुत उत्साहवर्धक हैं।

यदि कब्ज लगातार बनी रहे, गैस के साथ बार-बार तेज सिर दर्द हो, सांस फूलने की समस्या बढ़े, सीने में दर्द, चक्कर, अत्यधिक थकान अथवा अन्य कोई गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो बिना विलंब अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें।

कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।

यदि किसी पाठक को किसी प्रकार की जटिल या पुरानी स्वास्थ्य समस्या अथवा काउंसलिंग की जरूरत हो, Online Sewa में विश्वास हो तथा WhatsApp पर अपनी समस्या सही और व्यवस्थित रूप से लिखने में सक्षम हों, तो मुझ से भी WhatsApp पर सम्पर्क किया जा सकता है।

आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा (08.07.2026)
Adiwasi Tau: Online-Herbalist, Homeopath, Counselor, Writer and
Director Nirogdham (India's First Curative & Organic Herbal Center)
Jaipur-302041 (Rajasthan), फ्री परामर्श हेतु लिखे: WhatsApp No.: 085619 55619

सिर्फ दवा नहीं, सही दिनचर्या भी है उपचार का हिस्सा:"ताऊजी, मैंने आप से मेरी पत्नी के लिए सफेद पानी की किट नं. 4 मंगवाई थ...
08/07/2026

सिर्फ दवा नहीं, सही दिनचर्या भी है उपचार का हिस्सा:
"ताऊजी, मैंने आप से मेरी पत्नी के लिए सफेद पानी की किट नं. 4 मंगवाई थी। तीन महीने में उसकी आठ साल पुरानी बीमारी ठीक हो गई। आपका धन्यवाद। अब मेरे लिए उचित सलाह दीजिए। मेरा पेट वर्षों से बहुत खराब रहता है। कई बार दो दिन में एक बार ही लैट्रीन जाता हूं। मेरी उम्र 38 वर्ष है। वजन 80 किलो और लंबाई 5.4 फिट है। मैं शुद्ध शाकाहारी हूं, लेकिन सुबह से रात को सोने तक 5-6 कप चाय पी लेता हूं। इसके अलावा भाइयों द्वारा किए गए धोखे के कारण बहुत अधिक मानसिक तनाव भी रहता है। पिछले दो वर्षों से उच्च रक्तचाप (हाई बीपी अर्थात लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप) की नियमित दवा ले रहा हूं। उचित सलाह और मार्गदर्शन दें।"
समस्या का समाधान:
सबसे पहले यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आपकी पत्नी को सफेद पानी की तकलीफ में आराम मिला। मेरी सेवाओं पर विश्वास बनाए रखने के लिए आपका धन्यवाद।
आपने अपने बारे में जितनी जानकारी लिखी है, उससे ऐसा लगता है कि आपकी समस्या केवल पेट तक सीमित नहीं है। वर्षों से बनी कब्ज, दिनभर में 5-6 कप चाय पीने की आदत, लगातार मानसिक तनाव, सामान्य से अधिक वजन तथा उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियां एक साथ मिलकर आपके पाचन तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई कारण ऐसे हैं, जिनमें धीरे-धीरे सुधार किया जा सकता है।
प्रसिद्ध लेखक डेल कार्नेगी ने लिखा है, "चिंता कल के दुख को कम नहीं करती, बल्कि आज की शक्ति को कम कर देती है।" इसका अभिप्राय यह है कि जीवन में हुए अन्याय या धोखे को बार-बार मन में दोहराने से सबसे अधिक हानि स्वयं के स्वास्थ्य की ही होती है। लंबे समय तक बना मानसिक तनाव पाचन, नींद, रक्तचाप और पूरे शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जो बीत चुका है, उसे जीवन का अनुभव मानकर आगे बढ़ने का प्रयास करें। मन जितना शांत होगा, शरीर को स्वस्थ होने में उतनी ही सहायता मिलेगी।
अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे लेकिन नियमित बदलाव करें। पर्याप्त पानी पिएं। भोजन निश्चित समय पर करें। थाली में सलाद, मौसमी सब्जियां, साबुत अनाज तथा रेशेदार भोजन (फाइबर अर्थात ऐसा भोजन जो मल को मुलायम बनाकर आसानी से बाहर निकालने में सहायता करे) पर्याप्त मात्रा में शामिल करें। प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलें या हल्का व्यायाम करें। दिनभर में 5-6 कप चाय पीने की आदत को धीरे-धीरे घटाकर छोड़ने का प्रयास करें। इससे कब्ज, बेचैनी और नींद की गुणवत्ता में भी सुधार हो सकता है।
उच्च रक्तचाप की दवा बिना चिकित्सकीय सलाह के कभी बंद न करें। यदि कब्ज लगातार बनी रहे, मल में खून आए, पेट में लगातार दर्द हो, बिना कारण वजन कम होने लगे या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो शीघ्र अपने चिकित्सक से जांच कराएं। यदि मानसिक तनाव लंबे समय से बना हुआ है और उसके कारण दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है, तो किसी अनुभवी काउंसलर से मार्गदर्शन लेना भी लाभदायक रहेगा।
मेरे अनुभव में ऐसे मामलों में केवल दवा से नहीं, बल्कि सही उपचार, संतुलित भोजन, नियमित दिनचर्या, मानसिक शांति और धैर्य के साथ किए गए प्रयासों से अधिक अच्छे और स्थायी परिणाम मिलने की संभावना रहती है। इसलिए निराश होने के बजाय व्यवस्थित ढंग से उपचार और जीवनशैली सुधार, दोनों पर साथ-साथ ध्यान दें।
कृपया पूरक प्रश्न नहीं पूछें, क्योंकि पूरक सवालों के जवाब लिखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
सुरक्षित इलाज या काउंसलिंग के लिए किसी अनुभवी उपचारक या काउंसलर से परामर्श करें।
यदि किसी पाठक को किसी प्रकार की जटिल या पुरानी स्वास्थ्य समस्या अथवा काउंसलिंग की जरूरत हो, Online Sewa में विश्वास हो तथा WhatsApp पर अपनी समस्या सही और व्यवस्थित रूप से लिखने में सक्षम हों, तो मुझ से भी WhatsApp पर सम्पर्क किया जा सकता है।
आपका स्वास्थ्य रक्षक सखा (07.07.2026)
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