Amba Yagya

Amba Yagya सर्वप्रथम भगवान विष्णु ने इस यज्ञ को किया था। अब माँ भगवती की कृपा से यही यज्ञ जम्मू में होने जा रहा है।
BHAGWAN VISHNU HAS PRFORMED THIS YAGYA IN DEVLOK.

WE ARE PLANNING THIS EXCLUSIVE SPIRITUAL EVENT IN JAMMU.

जय माता दी। आप सबके सहयोग से एक करोड़ नवार्ण मन्त्र जप हो चुका है। सब जप करने वालों का हृदय से आभारी हूं।
28/08/2026

जय माता दी। आप सबके सहयोग से एक करोड़ नवार्ण मन्त्र जप हो चुका है। सब जप करने वालों का हृदय से आभारी हूं।

13/08/2026

jammu vich tera yag rachya

04/08/2026
26/07/2026

When was written Mahishasur Mardini Stotra and who wrote this? महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र कब लिखा गया

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र मां दुर्गा के एक स्वरूप मां भगवती का स्तोत्र माना जाता हैं। इसका पाठ करने से मां भगवती प्रसन्न ...
24/07/2026

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र मां दुर्गा के एक स्वरूप मां भगवती का स्तोत्र माना जाता हैं। इसका पाठ करने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों के हर कष्ट को दूर कर देती हैं। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी समस्या से पीड़ित है तो उसे महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। मां भगवती पर विश्वास रखने वाले जीवन की हर समस्याओं से उभर जाते हैं। वैसे तो रोजाना ही इस स्तोत्र का पाठ करना अच्छा माना जाता है, लेकिन नवरात्रि में इसका पाठ करने से मां भगवती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के लाभ
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र के लाभ
जानें इस स्तोत्र का महत्व

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र (Mahishasura Mardini Stotra)
महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र मां दुर्गा के एक स्वरूप मां भगवती का स्तोत्र माना जाता हैं। इसका पाठ करने से मां भगवती प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों के हर कष्ट को दूर कर देती हैं। माना जाता है कि अगर कोई व्यक्ति किसी समस्या से पीड़ित है तो उसे महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। मां भगवती पर विश्वास रखने वाले जीवन की हर समस्याओं से उभर जाते हैं। वैसे तो रोजाना ही इस स्तोत्र का पाठ करना अच्छा माना जाता है, लेकिन नवरात्रि में इसका पाठ करने से मां भगवती का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है।

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र किसने और क्यों लिखा ? (Who wrote Mahishasura Mardini Stotra and why?)
इस स्तोत्र को श्री आदि शंकराचार्य जी ने स्वयं लिखा है। महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र की उत्पत्ति के संबंध में एक कथा प्रचलित है, जोकि आदि गुरु के जीवन की एक घटना से जुड़ी है। कहा जाता है कि एक बार आदि गुरु शंकराचार्य जी अपने शिष्यों के साथ स्नान के लिए एक पतली गली से होकर मणिकर्णिका घाट (श्मशान घाट) जा रहे थे। रास्ते में एक स्त्री अपने मृत पति का सिर गोद में लिए बैठी रो रही थी। गली काफी पतली थी, जिस वजह से आगे जाने के​ लिए शव का हटाना आवश्यक था।
यह देख शंकराचार्य जी के शिष्यों ने उस स्त्री से उसके पति के शव को हटाकर रास्ता देने की प्रार्थना की, लेकिन स्त्री ने उसे अनसुना कर रोती रही। जिसके बाद खुद शंकराचार्य जी ने उससे शव हटाने का अनुरोध किया। उनका आग्रह सुन स्त्री बोली- हे संन्यासी! आप मुझसे बार-बार यह शव हटाने के लिए कह रहे हैं। आप इस शव को ही खुद हट जाने के लिए क्यों नहीं कहते? इसपर आचार्य जी ने कहा- हे देवी! आप शोक में यह भूल गईं हैं कि शव में स्वयं हटने की शक्ति नहीं है। जिसके बाद स्त्री ने कहा- महात्मन् आपकी दृष्टि में तो शक्ति निरपेक्ष ब्रह्म ही जगत का कर्ता है। फिर शक्ति के बिना यह शव क्यों नहीं हट सकता ?
स्त्री की ऐसी गंभीर, ज्ञानमय, रहस्यपूर्ण बात सुनकर आचार्य जी वहीं बैठ गए, उन्हें समाधि लग गई। समाधि में अपने अंत: चक्षु से शंकराचार्य जी ने देखा कि स्त्री रूप में सर्वत्र आद्या शक्ति महामाया लीला विलाप कर रही हैं। आचार्य जी का हृदय अनिवर्चनीय आनंद से भर गया और उनके मुख से मातृ वंदना की शब्दमयी धारा स्तोत्र बनकर निकल गई। इस प्रकार से महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र की उत्पत्ति हुई।
मान्यता है कि मां भगवती के महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र का पाठ करने से जातक के जीवन में आ रही परेशानियां दूर हो जाती हैं। जो व्यक्ति जीवन में शक्ति की कामना करता है, उसे इस स्त्रोत से मां भगवती की आराधना जरूर करनी चाहिए। मां भगवती की आराधना से बड़े से बड़ा कष्ट तुरंत दूर हो जाता है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि जो व्यक्ति दिन में एक बार भी मां महिषासुरमर्दिनी स्रोत का पाठ कर लेता है, उसके जीवन में कभी कोई परेशानी नहीं आती।
जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या स्रोत के पाठ से दूर हो जाती है।
मां भगवती के आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
स्तोत्र का नियमित पाठ करने से मनुष्य के सभी संकट का विनाश होता है।
पाठ करने से व्यक्ति को शक्ति, साहस और बल की प्राप्ति होती है।
जो व्यक्ति दिन में एक बार भी स्तोत्र का पाठ करता है तो उसे मृत्यु के बाद स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
जीवन सुखमय बनता है व घर परिवार में सुख शांति आती है।

भूतानि दुर्गा भुवनानि दुर्गास्त्रियो नराश्चापि पशुश्च दुर्गा ।यद् यद् हि दृश्यं खलु सैव दुर्गादुर्गास्वरूपादपरं न किञ्चि...
24/07/2026

भूतानि दुर्गा भुवनानि दुर्गा
स्त्रियो नराश्चापि पशुश्च दुर्गा ।
यद् यद् हि दृश्यं खलु सैव दुर्गा
दुर्गास्वरूपादपरं न किञ्चित् ॥
English Meaning
All beings are Durga, all the worlds are Durga; women, men, and even animals are manifestations of Durga. Whatever is seen is truly none other than Her. Beyond the divine form of Goddess Durga, nothing else exists.
हिन्दी अर्थ
समस्त प्राणी दुर्गा हैं, समस्त लोक दुर्गा हैं। स्त्री, पुरुष और पशु भी दुर्गा के ही स्वरूप हैं। जो कुछ भी दिखाई देता है, वह वास्तव में देवी दुर्गा ही हैं। उनके स्वरूप से अलग कुछ भी नहीं है।

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