ध्यान का विज्ञान Dhyan Ka Vigyan

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I'm a Spiritual Guide, Yoga Teacher, Life
Coach, and Certified Clinical Hypnosis
Practitioner.

आओ जी आओ 🧘 ध्यान का ध्यान रखें।.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

05/09/2026

दही हंडी सिर्फ खेल नहीं — साथ मिलकर बाधा तोड़ने और भीतर का सार पाने की कहानी है।

सेव कर लीजिए 📌 अगली बार जब कोई लक्ष्य असंभव लगे, याद आएगी ये बात।

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जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

जय श्री कृष्ण 🦚
.. ॐ शान्ति ...

Diet sahi ho to fayda double ho jaata hai, par sirf khana kaafi nahi, routine bhi sahi chahiye 🌱Subah ki shuruaat agar s...
06/08/2026

Diet sahi ho to fayda double ho jaata hai, par sirf khana kaafi nahi, routine bhi sahi chahiye 🌱
Subah ki shuruaat agar sahi ho, sahi khana + sahi movement, to pure din energy alag hi rehti hai.
Save kar lijiye ye plan, aur agar subah ke routine mein yoga bhi add karna chahte hain to DM karein "YOGA"

02/08/2026

"मुझे समझ ही नहीं आ रहा।"
यही अर्जुन ने भी कहा था। 🏹
पर कृष्ण उसके सामने खड़े नहीं थे — उसी रथ में बैठे थे। सारथी बनकर।
यह शरीर ही रथ है।
और सारथी — आपकी अपनी consciousness।
कृष्ण अभी भी आपके साथ हैं।
आपको उत्तर नहीं चाहिए।
उत्तर मानने का साहस चाहिए।
हर सिद्धि का आरंभ - एक संकल्प से।
भीतर का आंदोलन, भीतर से।।.. ॐ शान्ति ...
🙌
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

#भगवद्गीता #संकल्पसिद्धियोग #भीतरकाआंदोलन #शरीररूपीरथ #युवाशक्ति

29/07/2026

आज गुरु पूर्णिमा है। 🔱
और आज मैं देख रहा हूँ - युवा सड़कों पर है। नाराज़ है, बेचैन है, कुछ बदलना चाहता है।
लेकिन एक सच समझ लीजिए -
बाहर जो है, वह केवल भीड़ है।
भीड़ में चेहरा खो जाता है, आवाज़ किसी और के काम आ जाती है।
असली आंदोलन बाहर नहीं होता।
जो शक्ति आप बाहर ढूँढ रहे हैं - वह आपके भीतर है। अनंत है, असीम है… बस सोई हुई है।
उसे जगाना होगा।
इसीलिए आज से यह शृंखला आरंभ कर रहा हूँ।
न प्रवचन, न लंबा उपदेश - भगवद्गीता, वेदों और उपनिषदों से एक-एक सूत्र, और उसका आपके रोज़ के जीवन में उपयोग।
हर सिद्धि का आरंभ - एक संकल्प से।
भीतर का आंदोलन, भीतर से।।
पहला एपिसोड - कल। 🙏
फॉलो कीजिए, ताकि कोई अध्याय छूट न जाए।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)
#गुरुपूर्णिमा #भगवद्गीता #संकल्पसिद्धियोग #भीतरकाआंदोलन #गीतासार #उपनिषद #वेद #आत्मशक्ति #युवाशक्ति

मत छीनो मेरे खिलौने,मेरी हँसी मेरा बचपन।( "मत छीनो मेरे खिलौने…"ये सिर्फ एक कविता नहीं,एक चीख है उस बच्चे कीजिसने बारूद ...
24/04/2025

मत छीनो मेरे खिलौने,
मेरी हँसी मेरा बचपन।

( "मत छीनो मेरे खिलौने…"
ये सिर्फ एक कविता नहीं,
एक चीख है उस बच्चे की
जिसने बारूद में रंग खोजे।)

मत छीनो मेरे खिलौने,
मेरी हँसी, मेरा बचपन।
मत करो तुम वीरान,
मेरी जगह मेरा आंगन।
पहलगाम की सड़कों पर
टूटे हैं रंगों के सपने,
काँच की तरह बिखरे हैं
काग़ज़ की नावों के वचन।

बारूद की महक में अब
चॉकलेट भी लगती है सज़ा सी,
हर मोड़ पे मौत बैठी है
कहती है — "अब खेलो मुझसे।"

मेरी किताबें भी सहमी हैं,
हर अक्षर काँपता है डर से।
“अ से अमन” पढ़ने वाला मैं
अब “अ से आतंक” लिखता हूँ।
स्कूल की घंटी भी ख़ामोश है,
रंग-बिरंगे बस्ते — अब
बस गवाह हैं गोली की गूंज के।
जो मासूम कलियाँ थे कल तक,
आज सवाल बन गए हैं — “मैं क्यों?”

मेरे आँगन की मिट्टी अब
गुलाब नहीं उगाती,
सिर्फ़ माँ की दुआओं में
बची है ज़िंदगी की लौ।

जहाँ हर शाम “आओ खेलें” की सदा थी,
अब हर रोज़ “भागो” की गूंज है।
मैं नहीं चाहता टैंक को खिलौना बनाना,
मैं चाहता हूँ गुड्डे-गुड़ियों का जहाँ।

ओ ज़माने! सुनो मेरी सिसकी,
ये कोई एक बच्चे की पुकार नहीं,
पूरे कश्मीर का बचपन चीख रहा है।

हम नहीं चाहते बंदूक की भाषा,
हम चाहते हैं — लोरी, कहानियाँ,
और शाम को लौटता सूरज
जो डर से नहीं, उम्मीद से भरा हो।
ये मेरी लड़ाई नहीं, ये मानवता की जंग है।

जो आया था अमन लाने,
वही छीन रहा है चैन,
जो कहता था "ज़िंदाबाद",
वो ही बन गया है दहशत का नाम।

मत करो ऐसा इल्म का सौदा,
जहाँ बंदूकें पढ़ाई से भारी हो जाएँ।
खिलौने लौटाओ, ख़ुशियाँ लौटाओ,
वरना ये मासूम आँसू
तुम्हारी नींदें भी लूट लेंगे।
_____________________

करीब 30 साल पहले किसी आतंकवादी घटना पर ही मैंने ये कविता लिखी थी अब वैसी ही एक बड़ी घटना हुई है।
इस कविता को इसलिए अब की घटना को समावेश करके मैंने दोबारा लिखा है।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)


"जब काम बोझ लगे, तो भाव बदल दो..."कई बार हम अपने कर्तव्यों को निभाते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकिलोग हमसे उम्मीद करते हैं। या...
21/04/2025

"जब काम बोझ लगे, तो भाव बदल दो..."

कई बार हम अपने कर्तव्यों को निभाते हैं सिर्फ इसलिए क्योंकि
लोग हमसे उम्मीद करते हैं।
या
समाज का डर होता है कि लोग क्या कहेंगे?

धीरे-धीरे मन में ये भाव आने लगते हैं —
"मैं सबके लिए करता हूंँ, कोई मेरी कद्र नहीं करता..."
"मैंने इतना कुछ किया, फिर भी कोई सराहना नहीं करता..."

ऐसे में काम बोझ बन जाते हैं।
मन थकने लगता है। भावनाएं उलझने लगती हैं।

लेकिन जब वही काम हम अपने मन की सच्चाई,
अपने प्रेम और
आंतरिक खुशी से करते हैं,
तो वो बोझ नहीं, मुक्ति का माध्यम बन जाते हैं।

अब मैं कोई भी काम अपेक्षा से नहीं,
बल्कि इसलिए करता हूंँ क्योंकि
मुझे करने में आनंद आता है।

नज़रिया बदलिए, अनुभव बदल जाएगा।
काम वही रहेगा, पर अब वो प्रेम का रूप ले लेगा।
यही है सच्ची आत्म-स्वतंत्रता का रास्ता।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

#योगिकजीवन

"प्रभाव आता है परिस्थिति से,स्वभाव आता है स्थिति से।"बाहरी दुनिया की हलचल हमें प्रभावित कर सकती है — सुख, दुख, सफलता, अस...
20/04/2025

"प्रभाव आता है परिस्थिति से,
स्वभाव आता है स्थिति से।"

बाहरी दुनिया की हलचल हमें प्रभावित कर सकती है — सुख, दुख, सफलता, असफलता...
लेकिन हमारा असली स्वभाव — हमारी शान्ति, स्थिरता और करुणा — यह सब हमारी आंतरिक स्थिति से जन्म लेते हैं।

यदि हम भीतर से संतुलित हैं, तो कोई भी परिस्थिति हमें हिला नहीं सकती।
परिस्थिति चाहे जैसी भी हो,
जब स्थिति भीतर मजबूत हो, तो स्वभाव दिव्य हो जाता है।

योग, ध्यान और आत्म-चिंतन से अपनी "स्थिति" को इतना स्थिर बनाइएं,
कि कोई भी "परिस्थिति" आपको सिर्फ छूकर निकल जाए।
.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

#योग #स्वभाव #परिस्थिति

15/04/2025

सुबह का mindful breathing रुटीनदिन की शुरुआत 5–10 मिनट की गहरी साँसों (गहरी श्वास-प्रश्वास) के साथ करना शरीर को शांत करत...
14/04/2025

सुबह का mindful breathing रुटीन

दिन की शुरुआत 5–10 मिनट की गहरी साँसों (गहरी श्वास-प्रश्वास) के साथ करना शरीर को शांत करता है और मस्तिष्क को clarity देता है।
इससे पूरा दिन centered और खुशमिज़ाज बना रहता है।.. ॐ शान्ति ...
🧘
~ गुरुश्री
(संकल्प सिद्धि योग)

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