Harmony & Happiness

Harmony & Happiness All age counseling& family therapy,
marital counseling,behavior modification,psychological assessment

13/01/2026

सबसे खतरनाक बात, गैस लाइटिंग का शिकार व्यक्ति
अपनी पहचान तक भूलने लगता है।
गैस लाइटिंग से कैसे बचें?

अपने पिछली पोस्ट में गैस लाइटिंग किसे कहते हैं? के बारे में जाना था। आज हम जानेंगे गैस लाइटिंग से बचने के उपाय और ये गैस लाइटिंग आप पर किस प्रकार से इस्तेमाल की जाती है।

1. अपनी यादों पर भरोसा रखें।
लिखकर रखें — बातें, तारीखें, घटनाएँ। जिससे आप उसकी बातों को खारिज कर सकते हैं।

2. अपनी भावनाओं को मान दें।
अगर कुछ गलत लग रहा है, तो गलत है।

3. हर बात सफाई देकर न समझाएँ।
Gaslighter को सफाई नहीं, कंट्रोल चाहिए।
गैस लाइटर को आप कितनी भी सफाई देंगे न, तो सिर्फ कुछ समय के लिए ही रहेगा,
फिर वही ड्रामा।
क्योंकि उसे सिर्फ और सिर्फ आप पर कंट्रोल चाहिए होता है।

4. सीमाएँ (Boundaries) बनाएं।
“इस तरह बात मत करो” — साफ कहें।
लेकिन ध्यान रहे यह हर रिश्तों में नहीं होना चाहिए सिर्फ गैसलाइटर के लिए ही होनी चाहिए।

5. बाहर के लोगों से बात करें।
तीसरा नजरिया आँखें खोल देता है। जब भी आपको लगे कि आप खुद पर कंट्रोल खो रहे हो, तो आप को जरूर किसी तीसरे व्यक्ति की मदद लेनी चाहिए ,उसमें आपके परिवार के सदस्य हो सकते हैं आपके मित्र हो सकते हैं या कोई काउंसलर।

🖤 एक कड़वी सच्चाई।
जो आपको खुद पर शक करवाए, वो कभी आपका भला नहीं चाहता। चुप रहना हमेशा समझदारी नहीं होती,
कभी-कभी चुप रहना ही उनकी जीत होती है।

🖤 गैस लाइटिंग हम पर किस प्रकार से इस्तेमाल की जाती है?
गैस लाइटिंग कभी सीधे हमला नहीं करती,
वो धीरे-धीरे दिमाग़ में ज़हर घोलती है।

🕯️ ये तरीके सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाते हैं —

👉 सच से इनकार। आपने जो देखा, सुना, महसूस किया —उससे साफ़ मना कर दिया जाता है।
“ऐसा हुआ ही नहीं।”

👉याददाश्त पर वार। तुम्हें सही से याद नहीं रहता।
“तुम हमेशा भूल जाती हो।”

👉भावनाओं को छोटा दिखाना। इतना सोचने की ज़रूरत नहीं, तुम ओवर ड्रामा करती हो।

👉धीरे-धीरे आत्मविश्वास तोड़ना,पहले तारीफ़,फिर ताने,फिर अपमान —ताकि आप उसे छोड़ न पाएं।

👉गलती हमेशा आपकी बनाना। चाहे हालात कैसे भी हों, आख़िर में दोष आपके सिर पर आ ही जाता है।

👉अकेला करना। “कोई तुम्हें मेरे अलावा नहीं समझता।” “सब तुम्हारे खिलाफ हैं।”

👉चुप्पी को हथियार बनाना। बोलना बंद करके
आपको अपराधबोध में डालना।

👉 प्यार या रिश्ते का डर दिखाना “अगर मैं चला गया/गई तो…”डर को कंट्रोल में बदल देना।

याद रखिए —
🖤 गैस लाइटिंग उन्हीं पर काम करती है,जो दिल से भरोसा करते हैं। लेकिन जिस दिन आप इन तरीकों को पहचान लेते हैं, उसी दिन से आप पर किया गया खेल
कमज़ोर पड़ने लगता है।

👉अगली पोस्ट में हम देखेंगे की गैसलाइटिंग करने वाले को कैसे जवाब दें कि वह आप पर हावी

10/01/2026

GASLIGHTING......

गैस लाइटिंग (Gaslighting) क्या होता है?
गैस लाइटिंग एक खतरनाक मानसिक चाल है, जिसमें कोई व्यक्ति आपको धीरे-धीरे यह विश्वास दिलाने लगता है कि
आपकी याददाश्त, सोच, भावना और समझ ही गलत है।
इसका मकसद होता है:
आपको confused करना
आपके आत्मविश्वास को तोड़ना
आपको खुद पर शक करवाना
सामने वाले को कंट्रोल देना।

गैस लाइटिंग कैसे काम करती है?
यह अचानक नहीं होती, धीरे-धीरे ज़हर की तरह असर करती है।
पहले:
“तुम बहुत समझदार हो”
फिर:
“तुम चीज़ों को ज़्यादा सोचती हो”
अंत में:
“तुम्हें कुछ याद ही नहीं रहता, तुम्हारे दिमाग में ही गड़बड़ है”

गैस लाइटिंग के 10 साफ संकेत (पहचानिए)
1️⃣ अपनी याददाश्त पर शक होने लगे
आप सोचने लगें:
“शायद मैंने ही गलत समझा होगा…”
2️⃣ सामने वाला हमेशा कहे:
“मैंने ऐसा कहा ही नहीं”
“तुम कल्पना कर रही हो”
“तुम बहुत संवेदनशील हो”
3️⃣ आप हर बात के लिए खुद को दोष देने लगें
भले गलती आपकी न हो।
4️⃣ आपकी भावनाओं को छोटा दिखाया जाए
“इतनी सी बात पर रोना?”
“नाटक मत करो”
5️⃣ सामने वाला कभी जिम्मेदारी न ले
गलती हमेशा आपकी हो जाती है।
6️⃣ पहले अच्छा, फिर धीरे-धीरे अपमान
यही ट्रैप है — ताकि आप छोड़ न पाएं।
7️⃣ आपको दूसरों से काट दिया जाए
“वो तुम्हारे खिलाफ हैं”
“सिर्फ मैं ही तुम्हें समझता हूँ”
8️⃣ आप खुद को साबित करते-करते थक जाएँ
लेकिन सामने वाला कभी न माने।
9️⃣ आप डरने लगें बोलने से
क्योंकि हर बार बहस में आप ही “गलत” साबित होते हैं।
🔟 आप पहले जैसे नहीं रहे
आत्मविश्वास कम
चुप रहना
हर बात पर माफी माँगना।
आपको मेरी अगली पोस्ट में गैस लाइटिंग से कैसे बचें।
की कोई आपका इस्तेमाल न कर सके देखने को मिलेगा।

 #टॉक्सिक_आखिर_टॉक्सिक_कैसे_हुए 🌟🤯​क्या यह उनकी गलती है?​यहाँ एक बारीक रेखा (thin line) है..?🔥​कारण (Reason)– उनके साथ ज...
03/01/2026

#टॉक्सिक_आखिर_टॉक्सिक_कैसे_हुए 🌟🤯

​क्या यह उनकी गलती है?
​यहाँ एक बारीक रेखा (thin line) है..?

🔥​कारण (Reason)– उनके साथ जो हुआ, वह उनकी गलती नहीं थी (जैसे उनका बचपन या उनके साथ हुआ बुरा बर्ताव)।

🪷​जिम्मेदारी (Responsibility)– लेकिन बड़े होने के बाद, अपने व्यवहार को न सुधारना और दूसरों को मानसिक चोट पहुँचाना उनकी जिम्मेदारी है।

​अतीत आपके व्यवहार का 'कारण' हो सकता है, लेकिन वह दूसरों के साथ बुरा करने का 'बहाना' नहीं हो सकता।

✨​महत्वपूर्ण बात–आप किसी टॉक्सिक इंसान के पीछे का कारण समझ सकते हैं, लेकिन उसे "ठीक" करना आपकी जिम्मेदारी नहीं है। खुद को उनके व्यवहार से बचाना ही आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

31/12/2025

How to deal with narcissist person

जब आप “ना” कहना सीख जाती हो,
और सच में मज़बूत बन जाती हो ...

तब नार्सिसिस्ट का NEXT LEVEL MIND GAME शुरू होता है।

पहले वो सीधे हमला करता था,
या subtle guilt डालता था।
लेकिन अब… अब उसका तरीका और खतरनाक होता है।
इसका NEXT LEVEL गेम कुछ ऐसे होता है...

अचानक प्यार और softness दिखाना
वो जानता है कि अब आप उसकी manipulations को पहचान रही हैं।
तो वह दिखाता है अचानक प्यार, concern, compliments…
सिर्फ यह देखने के लिए कि आप emotionally फंस जाएँ।

Memory attack
“याद है हम कैसे थे?”
ये सिर्फ पुरानी यादों को weapon बनाना है,
ताकि आप अपने present में doubt feel करें।

Victim बनने का नाटक
“सबने मुझे छोड़ दिया”
ताकि आप फिर से उसकी caretaker बन जाओ,
और खुद की boundaries भूल जाओ।

Soft smear campaign
“वो बहुत cold हो गई है”
क्योंकि strong औरत narcissist को हमेशा threat लगती है।

Boundary testing
Random messages, calls, reactions…
सिर्फ यह देखने के लिए कि आप अभी भी reachable हो या नहीं।

Guilt ka weapon
“तुम पहले जैसी नहीं रही”
मतलब अब तुम मेरे control में नहीं हो।
ये guilt drop करके आपको emotionally manipulate करने की कोशिश है।

Hoovering
Kabhi regret, kabhi apology, kabhi future ke promises…
ताकि आपको फिर से अंदर खींच सके।
लेकिन ध्यान रहे— ये सब action के बिना खाली show है।

Psychological trap
आपकी ताक़त और “ना” का डर उसके अंदर panic पैदा करता है।
अब उसकी हर कोशिश यह देखना है कि आप उसकी खेल की शिकार बनीं या नहीं।

सच्चाई....
जो दिल से बदलता है, वो आपके “ना” का respect करता है।
जो केवल हार रहा है, वो नए-नए games बनाता है।
और यही उसका सबसे बड़ा डर है...

कि अब आप खुद के लिए खड़ी हो,
और उसकी manipulations को पहचानती हो।
इसलिए जब भी कोई narcissist next level mind game खेल रहा हो...

याद रखो..
आपका “ना” उसकी हार है।
आपकी मज़बूती उसकी असली weakness है।

अब वो सीधे चोट नहीं करता,
क्योंकि उसे पता है
आप अब टूटेंगी नहीं।
इसलिए वो दिमाग से खेलता है।
अचानक प्यार दिखाना,
पुरानी यादें,
खुद को victim बताना,
लोगों में आपको cold साबित करना,
random messages,
soft apology ..
सब सिर्फ एक ही मक़सद से।

अब सवाल ये नहीं कि वो क्या करेगा,

सवाल ये है कि आप खुद को कैसे बचाओगी।

खुद को बचाने के लिए ये सच याद रखो

Consistency देखो, शब्द नहीं
जो सच में बदला होता है
वो बार‑बार proof नहीं देता,
वो boundaries का सम्मान करता है।

“ना” के बाद guilt आए तो समझ लो
आप सही रास्ते पर हो।
गलत जगह से निकलते वक़्त
दिल भारी होता ही है।

Explanations देना बंद करो
जो आपको समझना चाहता है
उसे ज़्यादा सफ़ाई नहीं चाहिए।
और जो नहीं समझना चाहता,
वो कभी मानेगा नहीं।

Past की यादों को reality से तुलना करो
याद रखो ...
आप क्यों टूटी थीं,
किस वजह से अलग हुई थीं।

Boundaries = Self‑respect
Reply न देना बेरुख़ी नहीं,
खुद को बचाना है।

Silence को weakness मत समझो
खामोशी बहुत बार
सबसे ज़ोरदार जवाब होती है।

Apni healing को priority दो
आपका चैन, आपकी नींद,
आपकी mental peace ..
किसी भी इंसान से ज़्यादा कीमती है।

“Narcissist After ‘No’ .. यही वक्त होता है जब उनका असली खेल सामने आता है।
जो पहले आपके डर और भरोसे पर control करता था, अब आपकी ताक़त और boundaries देखकर panic करता है।”

क्या आप भी कभी उस मोड़ पर थीं,
जहाँ आपने डर के बावजूद “ना” कहा,
और अपनी ताक़त को साबित किया?

खुद के लिए खड़े हो जाओ।
अपने दर्द को अपनी ताक़त बनाओ।
और दिखा दो कि आपकी आवाज़ और boundaries
किसी के भी control में नहीं

" कुछ तो लोग कहेंगे,लोगों का काम है कहना..जिसने खुलकर कहा,कि, ' मैं ठीक नहीं हूं, मेरा दिमाग मेरे विपरीत जा रहा है,मेरा ...
22/07/2025

" कुछ तो लोग कहेंगे,
लोगों का काम है कहना..

जिसने खुलकर कहा,
कि, ' मैं ठीक नहीं हूं, मेरा दिमाग मेरे विपरीत जा रहा है,
मेरा संतुलन बिगड़ रहा है!'
हम उसे भी दुत्कारते हैं,
कहते हैं, ' डिप्रेशन भी अब फैशन है! '
और जितना हो सके उस व्यक्ति को अपमानित करने का, उसके खिलाफ जजमेंट देने का कोई मौका नहीं छोड़ते!

और जो अपनी मानसिक हालत छिपाते छिपाते, हार मान जाता है, आत्म हत्या कर छुटकारा पाने का प्रयास करते हैं,
उस भी हम कोसते हैं,
' बोला क्यों नहीं? बात क्यों नहीं की? सांझा तो करता हमसे!'
और फिर एक और जजमेंट दे देते हैं,
' ये तो कमज़ोर निकला '

बात सिर्फ इतनी है,
चुनाव हमेशा से हमारे हाथों में ही होता है,
हर पड़ाव पर नई चुनौतियां हमारा इंतजार करती हैं,
जब भी लगे, कि अब आराम चाहिए,
थोड़ा पीछे हट बात करो,
डरो मत, शब्दों के खेल से क्या डरना,
खुल कर बोलो..

बात से मसला न हल हो, तो मदद के लिए हाथ बढाओ,
कुछ हो जाने का वेट मत करो,
पहले ही अपनी जीवन शैली को सुधारो!

Harmony and Happiness 🌹🌹🌹

SILIENCE Can silence lead to finding self? Silence is a journey in itself. A quiet journey that ends up in finding your ...
19/07/2025

SILIENCE

Can silence lead to finding self?

Silence is a journey in itself. A quiet journey that ends up in finding your own soul.

In the chaos of life, we usually forget the real purpose of our lives. Our mind gets confused because we hear different voices coming from all the directions and these voices control our mind so much, that we lose the ability to think on our own. We become a puppet of someone else’s mind. When life brings you into the silent phase, there is a message it wants to give. It wants you to slow down and rethink about your life and your priorities. It gives you an opportunity to connect with your inner self.

Spend quiet time with yourself. Silence is the time to reconsider the purpose of your life and to reconsider with your inner needs.

🌹🌹HARMONY AND HAPPINESS 🌹🌹

18/07/2025
A trigger is not the problem—It is your mind’s way of showing you where pain still lives.It is an emotional reaction to ...
17/07/2025

A trigger is not the problem—
It is your mind’s way of showing you where pain still lives.

It is an emotional reaction to something in the present
that touches an unresolved experience from the past.

You are not overreacting.
You are remembering—
And your body is asking you to finally heal what was left behind.. ........

21/06/2025

हमेशा मुस्कराना ज़रूरी नहीं होता
— जब पॉजिटिविटी भी बोझ बन जाती है
"सब ठीक हो जाएगा।"
"कम से कम ऐसा तो नहीं हुआ।"
"सोचो, इससे बुरा भी हो सकता था।"
"मुस्कुराओ, सब अच्छा है।"

कितनी बार ये वाक्य हमारे कानों में पड़े हैं — दोस्त से, रिश्तेदार से, कभी खुद से भी। और पहली नज़र में ये वाक्य सहारा लगते हैं, जैसे डूबते को एक शब्दों की लकड़ी मिल गई हो। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये शब्द, ये ‘पॉजिटिविटी’, किसी दिन हमारे लिए एक बोझ बन जाए?

हां, पॉजिटिविटी भी टॉक्सिक हो सकती है। अजीब लगता है, लेकिन सच है।

हम इंसान हैं। हमारे भीतर दुख, गुस्सा, असंतोष, थकान, भय — ये सब भावनाएं होती हैं, और इनका बाहर आना, महसूस किया जाना, रिश्तों में जगह पाना ज़रूरी है। लेकिन जब समाज या हमारे अपने ही हमसे यह अपेक्षा करने लगते हैं कि हम हर हाल में ‘सकारात्मक’ रहें — तब यह उम्मीद एक बोझ बन जाती है। और यही बोझ धीरे-धीरे हमें अपनी सच्ची भावनाओं से काट देता है।

किसी के खो जाने पर, दिल टूटने पर, नौकरी छूटने पर या सिर्फ थक कर बैठ जाने की इच्छा में भी अगर हमें सिर्फ "पॉजिटिव रहने" की सलाह मिलती है — तो यह हमारी टूटन को नामंज़ूर करना होता है।

"टॉक्सिक पॉजिटिविटी" दरअसल वही है — जब किसी की सच्ची तकलीफ़ को, उनके दर्द को, उनकी कमज़ोरी को यह कहकर ढांपने की कोशिश की जाती है कि "तुम्हें तो खुश रहना चाहिए", "इसमें भी कुछ अच्छा देखो", "कम से कम तुम ज़िंदा हो"।

इसे समझना ऐसे है, जैसे किसी के गहरे ज़ख्म पर फूल चिपका देना — यह सुंदर तो दिखेगा, पर भीतर से रिसता खून अब भी वहीं है।

रिश्तों में यह और भी खतरनाक हो जाता है। जब कोई अपना टूट रहा हो, और हम उसे उसकी भावनाओं को जीने की जगह सिर्फ ‘सकारात्मक सोचने’ की सीख दे रहे हों — तब वह खुद को अकेला महसूस करने लगता है। उसे लगता है कि उसका दुख स्वीकार्य नहीं है, वह स्वयं ‘कमज़ोर’ है।

कभी-कभी तो हम खुद अपने भीतर यह टॉक्सिक पॉजिटिविटी पाल लेते हैं। अपने आप से कहते हैं — "रोना नहीं है", "मज़बूत बनो", "मैं फील नहीं कर सकता", "जो बीत गया वो गया"। लेकिन हमारा मन रोना चाहता है, सिसकना चाहता है, थककर रुकना चाहता है।

क्या होगा अगर हम सिर्फ कुछ पल के लिए "असली" हो जाएं?
अगर हम अपने आंसुओं को बहने दें, अपने किसी प्रियजन से कहें — "मैं आज टूट रहा हूँ", और वह हमें जवाब में सिर्फ गले से लगा ले, बिना कोई सलाह दिए?

हमारे रिश्तों की गहराई वहीं से शुरू होती है — जब हम एक-दूसरे को सुनते हैं, महसूस करते हैं, और यह अधिकार देते हैं कि "तुम आज कमजोर हो सकते हो।"

हम यह क्यों भूल जाते हैं कि प्रकाश की अहमियत तभी है जब अंधेरे को भी जगह दी जाए?

सकारात्मक सोच अच्छी बात है, लेकिन जब यह हमारी संवेदनाओं, हमारी थकान, हमारी असलियत को दबा देती है — तब यह एक मुखौटा बन जाती है। एक ऐसा नकाब, जिसे उतारते-उतारते लोग थक जाते हैं।

हमारे अपनों को, हमारे बच्चों को, हमारे साथियों को यह बताना ज़रूरी है कि जीवन में सब कुछ ठीक होना ज़रूरी नहीं।
कभी-कभी ‘ठीक नहीं होना’ भी ठीक होता है.......

For those who have children with that toxic individual. Co-parenting with a narcissist isn’t just difficult—it’s nearly ...
11/05/2025

For those who have children with that toxic individual.

Co-parenting with a narcissist isn’t just difficult—it’s nearly impossible.

True co-parenting requires cooperation, mutual respect, and a shared commitment to putting the child’s needs first. A narcissist, however, thrives on control, conflict, and manipulation, making healthy collaboration unrealistic.

That’s why the only real option is parallel parenting—a structured approach where each parent disengages from the other as much as possible. Setting firm boundaries helps minimize direct interaction.

Communication is limited to essential matters, often in writing, to reduce the narcissist’s ability to gaslight, twist words, or create unnecessary drama. Decision-making happens independently within each parent’s time, preventing constant battles over trivial issues.

The goal isn’t to have a seamless, cooperative relationship—it’s to protect your peace and your child’s well-being.

While the narcissist may continue their attempts to provoke or control, your best defense is refusing to engage in their chaos. Instead, focus on creating a stable, healthy environment when your child is with you, ensuring they have at least one emotionally safe space.

20/04/2025

How to starve a Narcissist

No emotions
Short Response
Minimal Interaction
No contact

HOW TO STARVE A NARCISSIST:**

NO emotions. Show them that their manipulations no longer trigger you. Narcissists feed on emotional reactions — anger, sadness, frustration — because it gives them power and control. When you stay calm and unbothered, you cut off their fuel source.

SHORT responses. Keep communication brief and to the point. Don’t explain, justify, or engage in arguments. The less you say, the less they can twist.

MINIMAL interaction. Avoid unnecessary conversations. Grey rock them — be as boring and unresponsive as a stone.

NO contact. The ultimate power move. Block, delete, walk away. Starve them of attention until they vanish completely. Healing begins here.

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