26/02/2026
!! श्री स्वामी समर्थ !!
क्या आप जानते है??
कोलेस्ट्रॉल क्या है? (आयुर्वेद के अनुसार)
आधुनिक विज्ञान में “Cholesterol” शब्द मिलता है, लेकिन प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता और भावप्रकाश निघंटु में सीधे “कोलेस्ट्रॉल” शब्द नहीं मिलता।
* आयुर्वेद में इसके समान जो स्थिति बताई गई है, उसे मेद धातु की वृद्धि (मेदवृद्धि) और कफ दोष की अधिकता से जोड़ा जाता है।
* जब शरीर में मेद धातु (फैट टिश्यू) असंतुलित होकर बढ़ जाती है और अग्नि (पाचन शक्ति) कमजोर हो जाती है, तब शरीर में चिकनाई, भारीपन और नाड़ियों में अवरोध जैसी स्थिति बनती है। यही अवस्था आधुनिक भाषा में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से मिलती-जुलती मानी जा सकती है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
* अधिक मधुर (मीठा), गुरु (भारी), स्निग्ध (चिकना) भोजन
* कम शारीरिक गतिविधि
* दिन में सोना
* जंक और तला-भुना खाना
* इन कारणों से कफ और मेद बढ़ते हैं, जिससे हृदय और रक्तवाहिनियों में अवरोध हो सकता है।
* चरक संहिता में “अतिस्थूलता” (मोटापा) और मेदवृद्धि के कारण व लक्षण विस्तार से बताए गए हैं, जो हाई कोलेस्ट्रॉल की अवधारणा से संबंधित माने जाते हैं।
* आयुर्वेद में कोलेस्ट्रॉल शब्द नहीं है, लेकिन इसकी स्थिति को मेद धातु वृद्धि और कफ दोष असंतुलन के रूप में समझाया गया है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, और अग्नि को मजबूत रखना इसका मुख्य समाधान बताया गया है। हमारेपास अमृत ज्यूस मोरिंगा ड्रॉप से आप अपना कॉलोस्ट्रॉल का पुरी तरह राहत पा सकते है ओ भी सिर्फ 30 से 60 दिन मे.. तुरंत संपर्क करें.. Dr S/T SNEHA 🩺 099757 27629