04/07/2026
🟠माँ बगलामुखी का प्राकट्य🟠
माँ बगलामुखी दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या मानी जाती हैं। तांत्रिक ग्रंथों के अनुसार जब एक भीषण प्रलयकारी तूफ़ान से सृष्टि संकट में पड़ गई, तब भगवान विष्णु ने देवी की आराधना की। उनकी तपस्या से हरिद्रा (हल्दी) सरोवर से स्वर्णिम तेज के साथ माँ बगलामुखी प्रकट हुईं और अपने स्तंभन (रोकने) की दिव्य शक्ति से उस विनाशकारी संकट को शांत किया।
माँ बगलामुखी किसका रूप हैं?
माँ बगलामुखी को आदिशक्ति का उग्र एवं तांत्रिक स्वरूप माना जाता है। वे शत्रुओं की वाणी, बुद्धि और दुष्ट शक्तियों का स्तंभन करने वाली देवी हैं। इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है।
अवतार लेने का कारण
माँ बगलामुखी ने अवतार धारण किया ताकि—
अधर्म और दुष्ट शक्तियों का नाश हो।
भक्तों को शत्रु, न्यायालय, विवाद और षड्यंत्र से रक्षा मिले।
नकारात्मक शक्तियों की गति और वाणी का स्तंभन हो।
धर्म और सत्य की रक्षा बनी रहे।
श्री बगलामुखी अष्टकम्
नमस्ते बगलां देवीं पीतवस्त्रां सुशोभिताम्।
पीताभरणसंयुक्तां पीतगन्धानुलेपनाम्॥
गदाहस्तां महाशक्तिं शत्रुजिह्वां धरां शुभाम्।
भक्तानां भयहारिणीं सर्वसिद्धिप्रदां भजे॥
त्रिनेत्रां वरदां देवीं पीतपद्मासने स्थिताम्।
सर्वदुष्टविनाशाय सर्वमङ्गलकारिणीम्॥
वाक्स्तम्भकरीं देवीं बुद्धिस्तम्भप्रदायिनीम्।
शत्रुसैन्यविनाशाय बगलां प्रणमाम्यहम्॥
पीतपुष्पप्रियां देवीं पीतमाल्यविभूषिताम्।
पीतचन्दनलिप्ताङ्गीं भक्ताभीष्टफलप्रदाम्॥
करालवदनां देवीं करुणामृतसागराम्।
भक्तरक्षां सदा कुर्वे बगलां शरणं मम॥
सर्वरोगहरां देवीं सर्वसंपत्प्रदायिनीम्।
सर्वसिद्धिप्रदां नित्यं बगलां प्रणमाम्यहम्॥
या पठेदष्टकं भक्त्या श्रद्धया संयुतो नरः।
शत्रुनाशं लभेन्नित्यं विजयम् सुखमेव च॥
विशेष महत्व
माँ बगलामुखी की उपासना विशेष रूप से शत्रु-विजय, न्यायालय में सफलता, वाणी पर नियंत्रण, तांत्रिक बाधा से रक्षा, साहस और आत्मबल की प्राप्ति के लिए की जाती है। उनकी साधना सदैव योग्य गुरु के मार्गदर्शन में ही करनी चाहिए l