Balram Sharma Astrologer Santokhgarh

Balram Sharma  Astrologer  Santokhgarh ASTROLOGER & VEDIC KUNDALI GUIDANCE
REMEDIES
(1)

जय माता दी 🙏
12/05/2026

जय माता दी 🙏

जय जय सीताराम जय जय वीर हनुमान❤️🙏
02/04/2026

जय जय सीताराम जय जय वीर हनुमान❤️🙏

01/04/2026

श्री नेपाल पशुपति यात्रा 🙏👍❤️

01/04/2026

नेपाल पशुपति यात्रा का आनंद लेते भगत

25/03/2026

*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
*🌞दिनांक - 25 मार्च 2026
*⛅दिन - बुधवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - चैत्र*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - सप्तमी दोपहर 01:50 तक तत्पश्चात् अष्टमी*
*⛅नक्षत्र - मृगशिरा शाम 05:33 तक तत्पश्चात् आर्दा*
*⛅योग - सौभाग्य रात्रि 03:09 मार्च 26 तक तत्पश्चात् शोभन*
*⛅राहुकाल - दोपहर 12:33 से दोपहर 02:05 तक
*⛅सूर्योदय - 06:26*
*⛅सूर्यास्त - 06:40
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:52 से प्रातः 05:39 तक
*⛅अभिजीत मुहूर्त - कोई नहीं*
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:09 से मध्यरात्रि 12:56 तक
*🌥️व्रत पर्व विवरण - बुधवारी अष्टमी (दोपहर 01:50 से 26 मार्च सूर्योदय तक) व सर्वार्थसिद्धि योग (प्रातः 06:26 से शाम 05:33 तक)*
*🌥️विशेष - सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है तथा शरीर का नाश होता है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹 सदगृहस्थों के आठ लक्षण 🔹*

*🔸 सदगृहस्थों के लक्षण बताते हुए महर्षि अत्रि कहते हैं कि अनसूया, शौच, मंगल, अनायास, अस्पृहा, दम, दान तथा दया – ये आठ श्रेष्ठ विप्रों तथा सदगृहस्थों के लक्षण हैं । यहाँ इनका संक्षिप्त परिचय दिया जा रहा हैः*

*🔸अनसूयाः जो गुणवानों के गुणों का खंडन नहीं करता, स्वल्प गुण रखने वालों की भी प्रशंसा करता है और दूसरों के दोषों को देखकर उनका परिहास नहीं करता – यह भाव अनसूया कहलाता है ।*

*🔸 शौचः अभक्ष्य-भक्षण का परित्याग, निंदित व्यक्तियों का संसर्ग न करना तथा आचार – (शौचाचार-सदाचार) विचार का परिपालन – यह शौच कहलाता है)*

*🔸 मंगलः श्रेष्ठ व्यक्तियों तथा शास्त्रमर्यादित प्रशंसनीय आचरण का नित्य व्यवहार, अप्रशस्त (निंदनीय) आचरण का परित्याग – इसे धर्म के तत्त्व को जानने वाले महर्षियों द्वारा ʹमंगलʹ नाम से कहा गया है ।*

*🔸 अनायासः जिस शुभ अथवा अशुभ कर्म के द्वारा शरीर पीड़ित होता हो, ऐसे व्यवहार को बहुत अधिक न करना अथवा सहज भाव से आसानीपूर्वक किया जा सके उसे करने का भाव ʹअनायासʹ कहलाता है ।*

*🔸 अस्पृहाः स्वयं अपने-आप प्राप्त हुए पदार्थ में सदा संतुष्ट रहना और दूसरे की स्त्री की अभिलाषा नहीं रखना – यह भाव ʹअस्पृहाʹ कहलाता है ।*

*🔸 दमः जो दूसरे के द्वारा उत्पन्न बाह्य (शारीरिक) अथवा आध्यात्मिक दुःख या कष्ट के प्रतिकारस्वरूप उस पर न तो कोई कोप करता है और न उसे मारने की चेष्टा करता है अर्थात् कियी भी प्रकार से न तो स्वयं उद्वेग की स्थिति में होता है और न दूसरे को उद्वेलित करता है, उसका यह समता में स्थित रहने का भाव ʹदमʹ कहलाता है ।*

*🔸 दानः ʹप्रत्येक दिन दान देना कर्तव्य हैʹ - यह समझकर अपने स्वल्प में भी अंतरात्मा से प्रसन्न होकर प्रयत्नपूर्वक यत्किंचित देना ʹदानʹ कहलाता है ।*

*🔸 दयाः दूसरे में, अपने बंधुवर्ग में, मित्र में, शत्रु में, तथा द्वेष करने वाले में अर्थात् सम्पूर्ण चराचर संसार में एवं सभी प्राणियों में अपने समान ही सुख-दुःख की प्रतीति करना और सबमें आत्मभाव-परमात्मभाव समझकर सबको अपने ही समान समझकर प्रीति का व्यवहार करना – ऐसा भाव ʹदयाʹ कहलाता है । महर्षि अत्रि कहते हैं, इन लक्षणों से युक्त शुद्ध सदगृहस्थ अपने उत्तम धर्माचरण से श्रेष्ठ स्थान को प्राप्त कर लेता है, पुनः उसका जन्म नहीं होता और वह मुक्त हो जाता हैः*

*यश्चैतैर्लक्षणैर्युक्तो गृहस्थोઽपि भवेद् द्विजः।*
*स गच्छति परं स्थानं जायते नेह वै पुनः।।*

23/03/2026

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 24 मार्च 2026*
*⛅दिन - मंगलवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - चैत्र*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - षष्ठी शाम 04:07 तक तत्पश्चात् सप्तमी*
*⛅नक्षत्र - रोहिणी शाम 07:05 तक तत्पश्चात् मृगशिरा*
*⛅योग - प्रीति सुबह 09:07 तक, तत्पश्चात् आयुष्मान प्रातः 06:02 मार्च 25 तक, तत्पश्चात् सौभाग्य*
*⛅राहुकाल - दोपहर 03:36 से शाम 05:08 तक
*⛅सूर्योदय - 06:27*
*⛅सूर्यास्त - 06:39
*⛅दिशा शूल - उत्तर दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:53 से प्रातः 05:40 तक
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:09 से दोपहर 12:58 तक
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:09 से मध्यरात्रि 12:58 तक
*🌥️व्रत पर्व विवरण - यमुना छठ, रोहिणी व्रत, द्विपुष्कर योग (शाम 07:05 से प्रातः 06:25 मार्च 25 तक)*
*🌥️विशेष - षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुंह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹आहार-सम्बन्धी कुछ आवश्यक नियम🔹*

*🔸 १- सदैव अपने कार्यके अनुसार आहार लेना चाहिये । यदि आपको कठोर शारीरिक परिश्रम करना पड़ता है तो अधिक पौष्टिक आहार लेवें । यदि आप हलका शारीरिक परिश्रम करते हैं तो हलका सुपाच्य आहार लेवें ।*

*🔸 २- प्रतिदिन निश्चित समयपर ही भोजन करना चाहिये ।*

*🔸 ३- भोजनको मुँहमें डालते ही निगले नहीं, बल्कि खूब चबाकर खायें, इससे भोजन शीघ्र पचता है ।*

*🔸 ४- भोजन करनेमें शीघ्रता न करें और न ही बातोंमें व्यस्त रहें ।*

*🔸 ५- अधिक मिर्च-मसालोंसे युक्त तथा चटपटे और तले हुए खाद्य पदार्थ न खायें। इससे पाचन-तन्त्रके रोगविकार उत्पन्न होते हैं ।*

*🔸 ६- आहार ग्रहण करनेके पश्चात् कुछ देर आराम अवश्य करें ।*

*🔸 ७- भोजनके मध्य अथवा तुरंत बाद पानी न पीयें । उचित तो यही है कि भोजन करनेके कुछ देर बाद पानी पिया जाय, किंतु यदि आवश्यक हो तो खानेके बाद बहुत कम मात्रामें पानी पी लेवें और इसके बाद कुछ देर ठहरकर ही पानी पीयें ।*

*🔸 ८- ध्यान रखें, कोई भी खाद्य पदार्थ बहुत गरम या बहुत ठंडा न खायें और न ही गरम खानेके साथ या बादमें ठंडा पानी पीयें ।*

*🔸 ९- आहार लेते समय अपना मन-मस्तिष्क चिन्तामुक्त रखें ।*

*🔸 १०- भोजनके बाद पाचक चूर्ण या ऐसा ही कोई भी अन्य औषध-पदार्थ सेवन करनेकी आदत कभी न डालें । इससे पाचन-शक्ति कमजोर हो जाती है ।*

*🔸 ११- रात्रि को सोते समय यदि सम्भव हो तो गरम ( गुनगुना ) दूधका सेवन करें ।*

*🔸 १२- भोजनोपरान्त यदि फलोंका सेवन किया जाय तो यह न केवल शक्तिवर्द्धक होता है, बल्कि इससे भोजन शीघ्र पच भी जाता है ।*

*🔸 १३- जितनी भूख हो, उतना ही भोजन करें। स्वादिष्ठ पकवान अधिक मात्रामें खानेका लालच अन्ततः अहितकर होता है ।*

*🔸 १४- रात्रिके समय दही या लस्सीका सेवन न करें ।*

23/03/2026

*卐~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~卐*
*🌞दिनांक - 23 मार्च 2026*
*⛅दिन - सोमवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - चैत्र*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - पंचमी शाम 06:38 तक तत्पश्चात् षष्ठी*
*⛅नक्षत्र - कृत्तिका रात्रि 08:49 तक तत्पश्चात् रोहिणी*
*⛅योग - विष्कम्भ दोपहर 12:22 तक तत्पश्चात् प्रीति*
*⛅राहुकाल - सुबह 08:00 से सुबह 09:31 तक
*⛅सूर्योदय - 06:28*
*⛅सूर्यास्त - 06:39
*⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:54 से प्रातः 05:41 तक
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:09 से दोपहर 12:58 तक
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:10 से मध्यरात्रि 12:57 तक
*🌥️व्रत पर्व विवरण - लक्ष्मी पंचमी, स्कन्द षष्ठी, मासिक कार्तिगाई, शहीद दिवस, सर्वार्थसिद्धि योग (रात्रि 08:49 से प्रातः 06:27 मार्च 24 तक)*
*🌥️विशेष - पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹 आर्थिक परेशानी हो तो... 🔹*

*स्कंद पुराण में लिखा है चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी को लक्ष्मी माता के 12 मंत्र बोलकर, शांत बैठकर मानसिक पूजा करे और उनको नमन करें तो उसको भगवती लक्ष्मी प्राप्त होती है, घर में लक्ष्मी स्थायी हो जाती हैं । उसके घर से आर्थिक समस्याएँ धीरे धीरे किनारा करती हैं । बारह मंत्र इस प्रकार हैं –*

*🌹ॐ ऐश्‍वर्यै नम:*
*🌹ॐ कमलायै नम:*
*🌹ॐ लक्ष्मयै नम:*
*🌹ॐ चलायै नम:*
*🌹ॐ भुत्यै नम:*
*🌹ॐ हरिप्रियायै नम:*
*🌹ॐ पद्मायै नम:*
*🌹ॐ पद्माल्यायै नम:*
*🌹ॐ संपत्यै नम:*
*🌹ॐ ऊच्चयै नम:*
*🌹ॐ श्रीयै नम:*
*🌹ॐ पद्मधारिन्यै नम:*

*सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्ति प्रदायिनि । मंत्रपूर्ते सदा देवि महालक्ष्मी नमोस्तुते*
*द्वादश एतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्यय पठेत । स्थिरा लक्ष्मीर्भवेतस्य पुत्रदाराबिभिस:*
*उसके घर में लक्ष्मी स्थिर हो जाती है । जो इन बारह नामों को इन दिनों में पठन करें ।*

23 मार्च 2026 चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏 आज के विशेष दर्शन पिण्डी रूप में विराजमान माता श्री नयना देवी जी वि...
23/03/2026

23 मार्च 2026 चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ 🙏 आज के विशेष दर्शन पिण्डी रूप में विराजमान माता श्री नयना देवी जी विश्व विख्यात शक्तिपीठ 🚩🚩

22/03/2026

जय मां ज्वाला! उनकी असीम कृपा आप पर और आपके परिवार पर सदा बनी रहे।
मां आदि शक्ति आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करें और आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं।
।। ओम ह्रीं श्रीं ज्वालामुख्ये नमः ।।🙏❤️👍

22/03/2026

*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞*
*⛅दिनांक - 22 मार्च 2026*
*⛅दिन - रविवार*
*⛅विक्रम संवत् - 2083*
*⛅अयन - उत्तरायण*
*⛅ऋतु - वसंत*
*⛅मास - चैत्र*
*⛅पक्ष - शुक्ल*
*⛅तिथि - चतुर्थी रात्रि 09:16 तक तत्पश्चात् पंचमी*
*⛅नक्षत्र - भरणी रात्रि 10:42 तक तत्पश्चात् कृत्तिका*
*⛅योग - वैधृति दोपहर 03:42 तक तत्पश्चात् विष्कम्भ*
*⛅राहुकाल - शाम 05:07 से शाम 06:39 तक
*⛅सूर्योदय - 06:29*
*⛅सूर्यास्त - 06:39
*⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में*
*⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:54 से प्रातः 05:42 तक
*⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:10 से दोपहर 12:58 तक
*⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:10 से मध्यरात्रि 12:57 तक
*🌥️व्रत पर्व विवरण - विनायक चतुर्थी*
*🌥️विशेष - चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)*

*🔹आरती में कपूर का उपयोग क्यों ?🔹*

*🔸सनातन संस्कृति में पुरातन काल से आरती में कपूर जलाने की परम्परा है । आरती के बाद आरती के ऊपर हाथ घुमाकर अपनी आँखों पर लगाते हैं, जिससे दृष्टी -इन्द्रिय सक्रिय हो जाती है । सत्संग -वचनामृत में आता है : “आरती करते हैं तो कपूर जलाते हैं । कपूर वातावरण को शुद्ध करता है, पवित्र वातावरण की आभा पैदा करता है । घर में देव-दोष है, पितृ -दोष हैं, वास्तु -दोष हैं, भूत -पिशाच का दोष है या किसीको बुरे सपने आते हैं तो कपूर की ऊर्जा उन दोषों को नष्ट कर देती है ।*

*🔸बोलते हैं कि संध्या होती है तो दैत्य-राक्षस हमला करते हैं इसलिए शंख , घंट बजाना चाहिए, कपूर जलाना चाहिए, आरती-पूजा करनी चाहिए अर्थात संध्या के समय और सुबह के समय वातावरण में विशिष्ट एवं विभिन्न प्रकार के जीवाणु होते हैं जो श्वासोच्छवास के द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश करके हमारी जीवनरक्षक जीवनरक्षक कोशिकाओं से लड़ते हैं । तो देव-असुर संग्राम होता है, देव माने सात्त्विक कण और असुर माने तामसी कण । कपूर की सुगंधि से हानिकारक जीवाणु एवं विषाण रूपी राक्षस भाग जाते हैं ।*

*🔸वातावरण में जो अशुद्ध आभा है इससे तामसी अथवा निगुरे लोग जरा-जरा बात में खिन्न होते हैं, पीड़ित होते हैं लेकिन कपूर और आरती का उपयोग करनेवालों के घरों में ऐसे कीटाणुओं का, ऐसो हलकी आभा का प्रभाव नहीं टिक सकता है ।*

*🔸अत: घर में कभी-कभी कपूर जलाना चाहिए, गूगल का धूप करना चाहिए । कभी-कभी कपूर की १ – २ छोटी-छोटी गोली मसल के घर में छिटक देनी चाहिए । उसकी हवा से ऋणायान बनते हैं, जो हितकारी हैं । वर्तमान के माहौल में घर में दीया जलाना अथवा कपूर की कभी-कभी आरती कर लेना अच्छा है ।*

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#99 Ward No 7 Near Lovely Ornaments
Santokhgarh
174301

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