22/08/2026
आर्विक, अयांश और मां डॉ. किरण ने सुल्तानपुर को दिलाई वैश्विक पहचान, गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सहभागिता
सुल्तानपुर। सेंटेला मैरिस कॉन्वेंट स्कूल, सुल्तानपुर के छात्र आर्विक रेबेलो और अयांश रेबेलो तथा उनकी मां डॉ. किरण रेबेलो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के “सबसे बड़ी पठन एवं श्रवण प्रतियोगिता” के कीर्तिमान प्रयास में सहभागिता कर अपने परिवार, विद्यालय और सुल्तानपुर का गौरव बढ़ाया है।
यह अंतरराष्ट्रीय कीर्तिमान प्रयास Ebek Language Laboratories Pvt. Ltd. द्वारा भारत और श्रीलंका में आयोजित किया गया। इस विशेष प्रयास में सहभागिता के लिए आर्विक, अयांश और डॉ. किरण रेबेलो को पदक एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कम आयु में बच्चों की इस उपलब्धि को पढ़ने की आदत और सीखने की रुचि को बढ़ावा देने वाला प्रेरणादायक कदम माना जा रहा है।
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर
डिजिटल युग में बच्चों के बढ़ते मोबाइल और अन्य डिजिटल उपकरणों के उपयोग के बीच डॉ. किरण रेबेलो अपने बच्चों को नियमित रूप से पुस्तक-पठन, चित्रकला, खेलकूद तथा अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करती हैं। उनका मानना है कि बच्चों का विकास केवल पुस्तकीय शिक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। पढ़ने की आदत, रचनात्मक सोच, कला, खेल, कल्पनाशक्ति और नई चीजें सीखने की जिज्ञासा उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
डॉ. किरण रेबेलो ने कहा कि बच्चों को बचपन से ही पुस्तकों से जोड़ना आवश्यक है। “यह हमारे परिवार के लिए गर्व और खुशी का क्षण है। मैं चाहती हूं कि मेरे बच्चे मोबाइल की दुनिया तक सीमित न रहें, बल्कि पुस्तकों, कला, खेल और ज्ञान की दुनिया से भी जुड़े रहें। उचित मार्गदर्शन और प्रोत्साहन से बच्चे कम उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।”
सुल्तानपुर के लिए गौरव का क्षण
आर्विक और अयांश की यह उपलब्धि उनके परिवार और विद्यालय के साथ-साथ पूरे सुल्तानपुर के लिए गौरव का विषय है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस कीर्तिमान प्रयास में सुल्तानपुर के बच्चों की सहभागिता ने यह संदेश दिया है कि छोटे शहरों के बच्चे भी अपनी प्रतिभा, मेहनत और लगन के बल पर बड़े मंचों तक पहुंच सकते हैं।
यह उपलब्धि बच्चों में पढ़ने की संस्कृति, ज्ञान के प्रति रुचि और आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण है। साथ ही यह अभिभावकों को भी प्रेरित करती है कि वे बच्चों को केवल शैक्षणिक सफलता तक सीमित न रखकर उन्हें पुस्तक-पठन, कला, खेल और रचनात्मक गतिविधियों के लिए पर्याप्त अवसर दें।
आर्विक रेबेलो और अयांश रेबेलो की यह उपलब्धि उनके विद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है। उनकी सफलता निश्चित रूप से अन्य विद्यार्थियों को पढ़ने, सीखने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगी।