16/09/2024
*03 अक्टूबर 2024 - नवरात्रारंभ: कलश स्थापना प्रथम दिवस!
पितृ_पक्ष श्राद्ध व तर्पण
*देव तर्पण पूरब दिशा की ओर, ऋषि तर्पण उत्तर दिशा की ओर और पितृ तर्पण दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। देवताओं को एक, ऋषियों को दो और पितृों को तीन बार जलाजंलि देनी चाहिए।*
*तर्पण कैलेंडर 2024
15 सितम्बर 2024 प्रथम ऋषि तर्पण
*16 सितम्बर 2024 द्वितीय ऋषि तर्पण*
17 सितम्बर 2024 पूर्णिमा श्राद्ध / तृतीय ऋषि तर्पण
*18 सितम्बर 2024 प्रतिपदा श्राद्ध / तर्पण*
19 सितम्बर 2024 द्वितीय श्राद्ध / तर्पण
*20 सितम्बर 2024 तृतिया श्राद्ध / तर्पण*
21 सितम्बर 2024 चतुर्थी श्राद्ध / तर्पण
*22 सितम्बर 2024 पंचमी श्राद्ध / तर्पण*
23 सितम्बर 2024
षष्ठी श्राद्ध / तर्पण
*24 सितम्बर 2024 सप्तमी श्राद्ध / तर्पण*
25 सितम्बर 2024 अष्टमी श्राद्ध / तर्पण
*26 सितम्बर 2024 नवमी श्राद्ध / तर्पण*
27 सितम्बर 2024 दशमी श्राद्ध / तर्पण
*28 सितम्बर 2024 एकादशी श्राद्ध / तर्पण*
29 सितम्बर 2024 द्वादशी श्राद्ध / तर्पण
*30 सितम्बर 2024 त्रयोदशी श्राद्ध / तर्पण*
01 अक्टूबर 2023 चतुर्दशी श्राद्ध / तर्पण
*02 अक्टूबर 2023 - सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध / तर्पण, महालया अमावस्या*
हमारे पूर्वज हमारे अस्तित्व की नींव है,
उनके कृतज्ञता का सम्मान करने का एक पल भी न छूटे..
*अनंत कोटि कोटि नमन
पूर्वजों का आशीर्वाद सबको प्राप्त हो।
*श्राद्ध किसे कहते हैं....?*
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श्रद्धार्थमिंद श्राद्धम्।
श्रद्धया इदं श्राद्धम्॥
पितरों के उद्देश्य से विधिपूर्वक जो कर्म श्रद्धा से किया जाता है उसे #श्राद्ध कहते हैं।
क्या करें ?
शास्त्रों में मनुष्य के लिए देवऋण, ऋषिऋण और पितृऋण उतारना आवश्यक है।
*अतः पितृऋण से मुक्ति हेतु श्राद्ध करके हम मुक्ति को प्राप्त हो सकते हैं।*
*पितृपक्ष में श्राद्ध कब करें......?*
पितृपक्ष में मृत व्यक्ति की जो तिथि आये, उस तिथि पर मुख्य रूप से पार्वण श्राद्ध करने का विधान है।
सोलह दिनों तक पितरों को तर्पण करें और विशेष तिथि को श्राद्ध करें (जिस दिन उनका स्वर्गवास हुआ हो)।
यदि किसी को पितरों के स्वर्गवास का दिन ज्ञात न हो तो वे अमावस्या को श्राद्ध करें।इस श्राद्ध को पार्वण श्राद्ध कहते हैं।
पार्वण श्राद्ध का समय-
पूर्वाह्णे दैविकं श्राद्धमपराह्णेतु पार्वणम्।
एकोदिष्टं तु मध्याह्ने प्रातर्वृद्धि- निमित्तकम्॥
*अत: पार्वण श्राद्ध अपराह्ण में (अर्थात् लगभग 2pm) बजे करना चाहिए।*
श्राद्ध का महत्त्व:-
महर्षि जाबालि कहते हैं-
पुत्रानायुस्तथाऽऽरोग्यमैश्वर्यमतुलं तथा।
प्राप्नोति पञ्चेमान् कृत्वा श्राद्धं कामांश्च पुष्कलान्॥
अर्थात् पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पुत्र, आयु,आरोग्य,अतुल एैश्वर्य और अभिलाषित वस्तुओं की प्राप्ति होती है।
*श्राद्ध न करने पर:-*
महर्षि काण्वायिनि कहते हैं-
वृश्चिके समनुप्राप्ते पितरो दैवतै: सह।
नि:श्वस्य प्रतिगच्छन्ति शापं दत्वाबुदारुणम्॥
अर्थात्:- *सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश करते तक यदि श्राद्ध न किया जाए तो पितर गृहस्थ को दारुण शाप देकर पितृलोक लौट जाते हैं।
आचार्य शिव बाबू पाण्डेय
श्री अयोध्या धाम
9208205585
8601891986