Bhavishyaphal Sitaron Se Hal

Bhavishyaphal Sitaron Se Hal Manufacturers of Radha Krishna And other God Godess Dress Shringar, Idol, Pura food Products, Clothes etc.

Pure Tulsi Kanthi Mala made with pure Tulsi Beads Now Available buy now
26/09/2024

Pure Tulsi Kanthi Mala made with pure Tulsi Beads Now Available buy now

Digital Counter Machine for J*p order Today
17/09/2024

Digital Counter Machine for J*p order Today

Radha Raman cutout best quality
13/09/2024

Radha Raman cutout best quality

Ashram collections Laddu Gopal Dress Green colour Banarasi Cloth with gota Size 6 number Beutiful dress with Bandi
11/09/2024

Ashram collections Laddu Gopal Dress Green colour Banarasi Cloth with gota Size 6 number Beutiful dress with Bandi

14/12/2021

16 दिसम्बर 2021 से खरमास अर्थात मलमास प्रारंभ हो रहे हैं। इस माह में किसी भी प्रकार के शुभ कार्य वर्जित हैं जैसे विवाह सगाई मुंडन कान का छेद अन इस प्रकार की कोई भी मंगल कार्य इस समय नहीं किए जाते हैं।

इस वर्ष सूर्य का यह अंतिम राशि परिवर्तन है पंचांग के अनुसार 16 दिसंबर 2021 को प्रातः 3:28 पर सूर्य अपने मित्र राशि धनु राशि में प्रवेश करेंगे और 14 जनवरी 2022 दोपहर 2:29 तक इसी राशि में गोचर करेंगे

मार्गशीर्ष और पौष मास के बीच हर वर्ष खरमास आता है

इसे हम खरमास या मलमास के नाम से जानते हैं

जब सूर्य गोचरवश धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो इसे धनु संक्रांति व मीन संक्रांति कहा जाता है।

सूर्य किसी भी राशि में लगभग एक माह तक रहते हैं। सूर्य के धनु राशि व मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास कहा जाता है।


🌏खरमास प्रारंभ एवं समाप्त होने की तिथि :-*

• 16 दिसंबर 2021 मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष से शुरू हो रहा खरमास।
• मकर संक्रांति 14 जनवरी 2022 पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि के दिन खरमास समाप्त होगा।

मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी 2022 को मनाया जाएगा।मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही मांगलिक और शुभ कार्य आरंभ हो जाएंगे।

🐚खरमास को अशुभ मानने के पीछे की मान्यता :-*

एक बार सूर्य देवता अपने सात घोड़ों के रथ पर सवार होकर ब्राह्मांड की परिक्रमा कर रहे थे।
इस दौरान उन्हें कहीं पर भी रूकने की इजाजत नहीं थी। यदि इस दौरान वो रूक जाते तो जनजीवन भी ठहर जाता। परिक्रमा शुरू की गई,
लेकिन लगातार चलते रहने के कारण उनके रथ में जुते घोड़े थक जाते हैं, और घोड़ों को प्यास लग जाती है।
घोड़ों की उस दयनीय दशा को देखकर सूर्यदेव को उनकी चिंता हो गई। और वो घोड़ों को लेकर एक तालाब के किनारे चले गए, ताकि घोड़ों को पानी पिला सकें।
लेकिन उन्हें तभी यह आभास हुआ कि अगर रथ रूका तो अनर्थ हो जाएगा। क्योंकि रथ के रूकते ही पूरा जनजीवन भी ठहर जाता।
घोड़ों का सौभाग्य ही था कि उस तालाब के किनारे दो खर मौजूद थे। और खर गधे को कहा जाता है।
भगवान सूर्यदेव की नजर उन गधों पर पड़ी और उन्होंने अपने घोड़ों को वहीं तालाब के किनारे पानी पीने और विश्राम करने के लिए छोड़ दिया, और घोड़ों की जगह पर खर यानि गधों को अपने रथ में जोड़ लिया।
लेकिन खरों के चलने की गति धीमी होने के कारण रथ की गति भी धीमी हो गई। फिर भी जैसे तैसे एक मास का चक्र पूरा हो गया।
उधर तब तक घोड़ों को काफी आराम मिल चुका था। इस तरह यह क्रम चलता रहता है।

हर सौर वर्ष में एक सौर मास खर मास कहलाता है। जिसे मलमास के नाम से भी जाना जाता है।

खरमास के उपाय :-*

★ खरमास के महीने में पूजा-पाठ धर्म-कर्म, मंत्र जाप, भागवत गीता, श्रीराम की कथा, पूजा, कथावाचन, और विष्णु भगवान की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।
★ दान, पुण्य, जप, और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर हो जाते हैं।.
★ इस मास में भगवान शिव की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है।
★ शिवजी के अलावा खरमास में भगवान विष्णु की पूजा भी फलदायी मानी जाती है।
★ खरमास के महीने में सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है।
★ ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन, शहद लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
ऐसा करना बहुत शुभ फलदायी होता है।

Dial Pandit ji

Address

Vrindavan Mathura
Mumbai
281121

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Bhavishyaphal Sitaron Se Hal posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share