Yog Bharati

Yog Bharati Yoga, meditation and holistic health guidance for inner growth, wellbeing and conscious living — by Acharya B. S. ‘Yogi’ Team.

योग केवल Physical Workout नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित, प्रसन्न और तनावमुक्त जीवन जीने की कला है।यदि आप घर बैठे एक अनुभवी...
02/08/2026

योग केवल Physical Workout नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित, प्रसन्न और तनावमुक्त जीवन जीने की कला है।

यदि आप घर बैठे एक अनुभवी योगाचार्य के मार्गदर्शन में योगाभ्यास करना चाहते हैं, तो Yog Bharati की Live Interactive Online Yoga Classes आपके लिए हैं।

अधिक संख्या वाले Online Yoga Classes में स्टूडेंट्स पर व्यक्तिगत ध्यान देना संभव नहीं होता। इसलिए हम प्रत्येक बैच को केवल 20 प्रतिभागियों तक सीमित रखते हैं।

👥 Maximum 20 Participants per Batch

🕔 Morning

Batch 1: 5:00–6:00 AM

Batch 2: 6:00–7:00 AM

🌇 Evening

Batch 1: 5:00–6:00 PM

Batch 2: 6:00–7:00 PM

🎁 1-Day Free Introductory Class

💰 ₹1500 per Month

Led by Aacharya B. S. 'Yogi'

20+ Years of Experience in Therapeutic Yoga

📌 Medium: Hindi (with simple English where required)

📲 क्लास में रजिस्ट्रेशन के लिए WhatsApp पर संदेश भेजें।

+91 63941 63581

🌐 yogbharati.com

🌅 Start Your Morning with Yogaयोग केवल शरीर को सक्रिय करने का अभ्यास नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत संतुलन, ऊर्जा और सजगता के...
12/07/2026

🌅 Start Your Morning with Yoga

योग केवल शरीर को सक्रिय करने का अभ्यास नहीं, बल्कि दिन की शुरुआत संतुलन, ऊर्जा और सजगता के साथ करने की एक अनुशासित प्रक्रिया है। यदि आप एक अनुभवी योगाचार्य के मार्गदर्शन में नियमित योगाभ्यास करना चाहते हैं, तो यह बैच आपके लिए है।

अधिकतर बड़े बैचों में संचालित होने वाली ऑनलाइन योग कक्षाओं में प्रतिभागियों पर व्यक्तिगत ध्यान देना संभव नहीं होता। इसलिए हम प्रत्येक बैच को केवल 20 प्रतिभागियों तक सीमित रखते हैं।

यह रिकॉर्डेड वीडियो या एकतरफा ऑनलाइन क्लास नहीं, बल्कि एक Live Interactive Online Yoga Class है, जहाँ अभ्यास के दौरान शिक्षक प्रत्येक प्रतिभागी के अभ्यास पर दृष्टि रखता है और आवश्यकतानुसार मार्गदर्शन एवं सुझाव देता है।

📅 Starting from 1 August
🕠 Morning | 5:30 – 6:30
👥 Maximum 20 Participants
🎁 3-Day Complimentary Trial
💰 ₹1500 / Month

Led by Aacharya B. S. 'Yogi'
(20+ Years of Experience in Therapeutic Yoga)

📌 Medium: Hindi (with simple English where required)

यदि आप अपने दिन की शुरुआत योग से करना चाहते हैं, तो WhatsApp पर "Yoga" लिखकर संदेश भेजें।

📲 WhatsApp: +91 63941 63581
🌐 yogbharati.com

10/07/2026

शीतली प्राणायाम (भाग 3)
हर प्राणायाम की तरह शीतली प्राणायाम में भी उचित सावधानी और संतुलित अभ्यास आवश्यक है।




#योग

10/07/2026

कार्यस्थल की चुनौतियों का यौगिक समाधान (भाग 4)

आज के कार्यस्थलों में अधिकांश कर्मचारी लंबे समय तक निरंतर कार्य करते हैं। व्यस्त दिनचर्या, लगातार मानसिक सक्रियता और हमेशा उपलब्ध रहने की अपेक्षा के कारण शरीर और मन को पर्याप्त विश्रांति का अवसर नहीं मिल पाता। धीरे-धीरे यह स्थिति केवल थकान तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर और मन की स्वाभाविक पुनर्स्थापन प्रक्रिया भी प्रभावित होने लगती है।

कई बार पर्याप्त समय तक आराम करने के बाद भी लोग स्वयं को पूरी तरह तरोताज़ा महसूस नहीं करते। अक्सर जिसे लोग विश्राम समझते हैं, वह वास्तविक विश्रांति की अवस्था नहीं होती। मन की गति, तंत्रिका तंत्र की सक्रियता और मांसपेशियों का तनाव बना रहने के कारण पर्याप्त समय तक आराम करने के बाद भी शरीर और मन को वास्तविक विश्रांति नहीं मिल पाती। अधिकांश लोग इस अंतर को समझ नहीं पाते और इसे सामान्य थकान मानकर अनदेखा कर देते हैं।

जब यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो उसका प्रभाव व्यक्ति के दैनिक कार्यों पर स्पष्ट दिखाई देने लगता है। कार्य की गुणवत्ता, एकाग्रता, निर्णय क्षमता तथा सहकर्मियों और टीम के साथ समन्वय प्रभावित होने लगता है। ऐसी परिस्थितियों में केवल सामान्य विश्राम पर्याप्त नहीं होता। आवश्यकता होती है ऐसी व्यवस्थित विश्रांति विधियों की, जो शरीर, मन और तंत्रिका तंत्र को वास्तविक विश्रांति और पुनर्स्थापन की अवस्था तक पहुँचा सकें।

ऐसी परिस्थितियों में योग की विश्रांति-आधारित विधियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यौगिक श्वसन, कायास्थैर्यम, QRT (Quick Relaxation Technique) तथा योग निद्रा जैसी विधियाँ शरीर, मन और तंत्रिका तंत्र को व्यवस्थित रूप से विश्रांति की अवस्था तक पहुँचाकर शरीर और मन की स्वाभाविक पुनर्स्थापन प्रक्रिया को सहयोग देती हैं। प्रायः देखा जाता है कि जिन संस्थानों में नियमित corporate yoga and wellness sessions आयोजित किए जाते हैं, वहाँ कर्मचारी दिनभर के कार्य के बाद भी अधिक ऊर्जावान और मानसिक रूप से संतुलित रहते हैं।

आज के परिवेश में विश्रांति और पुनर्स्थापन विलासिता नहीं, बल्कि कार्यक्षमता की अनिवार्य आवश्यकता हैं। इसलिए corporate yoga and wellness sessions को केवल एक अतिरिक्त व्यय नहीं, बल्कि स्वस्थ, सक्षम और प्रभावी कार्यस्थल के निर्माण में एक सार्थक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

02/07/2026

कार्यस्थल की चुनौतियों का यौगिक समाधान (भाग 3)

आज अधिकांश कार्यस्थल डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो चुके हैं। लगातार स्क्रीन पर कार्य करना, अनेक applications के बीच बार-बार परिवर्तन, निरंतर notifications तथा एक साथ कई कार्यों को संभालने की प्रवृत्ति कर्मचारियों से लगातार मानसिक सजगता की अपेक्षा करती है। परिणामस्वरूप मानसिक थकान धीरे-धीरे कार्यस्थलों की एक सामान्य चुनौती बनती जा रही है।

कई बार पर्याप्त विश्राम के बाद भी लोग स्वयं को तरोताज़ा महसूस नहीं करते। साधारण कार्यों में भी उन्हें अपेक्षा से अधिक प्रयास करना पड़ता है, बार-बार ध्यान भंग होता है और किसी एक कार्य पर लंबे समय तक एकाग्र नहीं रह पाते। शुरुआत में अधिकांश लोग इन संकेतों को सामान्य व्यस्तता का हिस्सा मानकर अनदेखा कर देते हैं। आगे चलकर यही स्थिति उनके कार्य की गति, गुणवत्ता और निर्णय क्षमता को बुरी तरह प्रभावित करने लगती है। जब तक वे इसका संज्ञान लेते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।

इस प्रकार की मानसिक थकान का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। इससे सहकर्मियों और टीम के साथ समन्वय, कार्य की गुणवत्ता और उत्पादकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। परिणामस्वरूप कार्यस्थल का समग्र वातावरण भी बिगड़ने लगता है। इसलिए मानसिक थकान को केवल कर्मचारियों की व्यक्तिगत समस्या नहीं समझना चाहिए। अंततः गिरती कार्यक्षमता, घटती उत्पादकता और बिगड़ती कार्य-संस्कृति के रूप में इसकी सबसे बड़ी कीमत संस्थान को ही चुकानी पड़ती है।

कार्यस्थल पर कर्मचारियों के तनाव व मानसिक थकान को कम करने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यौगिक श्वसन, कायास्थैर्यम तथा QRT (Quick Relaxation Technique) जैसे अभ्यास मानसिक थकान के मूल कारणों पर कार्य करते हैं। मैंने देखा है कि जिन संस्थानों में नियमित corporate yoga and wellness sessions आयोजित किए जाते हैं, वहाँ कर्मचारी अधिक एकाग्र, मानसिक रूप से स्पष्ट तथा कार्य के प्रति अधिक सजग रहते हैं। इससे न केवल कार्य की गुणवत्ता में सुधार होता है और टीम का समन्वय बेहतर होता है, बल्कि कार्यस्थल की समग्र कार्य-संस्कृति भी अधिक सकारात्मक और संतुलित बनती है।

आज के परिवेश में कर्मचारियों की मानसिक सजगता और एकाग्रता किसी भी संस्थान की महत्वपूर्ण कार्यशील पूँजी है। इसके अभाव में कोई भी संस्थान न तो सुचारु रूप से कार्य कर सकता है और न ही आगे बढ़ सकता है। इसलिए corporate yoga and wellness sessions को केवल एक अतिरिक्त व्यय नहीं, बल्कि स्वस्थ, सक्षम और प्रभावी कार्यस्थल के निर्माण में एक सार्थक निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए।

अगल भाग:- कार्यस्थल पर विश्रांति और पुनर्स्थापन

योगाभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश (भाग 3)योगाभ्यास की वास्तविक गुणवत्ता केवल शरीर की गति में नहीं, बल्कि सजगता, सावधा...
01/07/2026

योगाभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश (भाग 3)

योगाभ्यास की वास्तविक गुणवत्ता केवल शरीर की गति में नहीं, बल्कि सजगता, सावधानी और नियमितता में भी निहित होती है।

13. सजगता और एकाग्रता
अभ्यास के दौरान शरीर, श्वास और आंतरिक अनुभूति पर ध्यान रखें। यांत्रिक ढंग से अभ्यास करने के बजाय सजगता के साथ अभ्यास करें।

14. स्वास्थ्य संबंधी सावधानी
यदि किसी प्रकार की बीमारी या दीर्घकालिक समस्या हो, तो अभ्यास प्रारंभ करने से पूर्व प्रशिक्षक को अवश्य सूचित करें। चल रही चिकित्सा में बिना चिकित्सकीय परामर्श के परिवर्तन न करें।

15. विशेष अवस्थाएं
• मासिक धर्म के दौरान कुछ विशेष आसनों से बचें
• गर्भावस्था में केवल प्रशिक्षित मार्गदर्शन में ही अभ्यास करें
• उच्च रक्तचाप, चक्कर आदि स्थितियों में कुछ आसनों से परहेज आवश्यक हो सकता है

16. वातावरण एवं शारीरिक अवस्था
अत्यधिक थकान, तेज धूप या शरीर के अत्यधिक गरम होने की स्थिति में तुरंत अभ्यास न करें।

17. शिक्षक या गुरु का महत्व
योगाभ्यास का प्रारंभ किसी अनुभवी शिक्षक के मार्गदर्शन में करना अधिक सुरक्षित और लाभकारी होता है। केवल इंटरनेट या पुस्तकों के आधार पर अभ्यास करना कभी-कभी हानिकारक भी हो सकता है।

18. नियमितता और अनुशासन
योगाभ्यास में नियमितता सबसे महत्वपूर्ण है। अभ्यास को धीरे-धीरे बढ़ाएं और संतुलित ढंग से निरंतर जारी रखें।

योग एक क्रमिक प्रक्रिया है — धैर्य, सजगता और निरंतरता इसके मुख्य आधार हैं।

28/06/2026

कार्यस्थल की चुनौतियों का यौगिक समाधान (भाग 2)

आज के कार्यस्थलों में तनाव एक सामान्य चुनौती बन चुका है। लगातार deadlines, targets, performance expectations तथा digital connectivity के कारण बहुत से कर्मचारी दिनभर मानसिक दबाव में कार्य करते हैं। तनाव का प्रभाव केवल मन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि शरीर की अनेक क्रियाओं में भी दिखाई देता है। श्वास उनमें से एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

दिलचस्प बात यह है कि अधिकांश लोग अपने तनाव को उतनी स्पष्टता से नहीं पहचान पाते, जितनी स्पष्टता से उनकी श्वास उसे व्यक्त कर रही होती है। मानसिक दबाव बढ़ने पर श्वास प्रायः उथली, तेज अथवा असंतुलित होने लगती है। लगातार स्क्रीन पर कार्य करना, लंबे समय तक बैठे रहना, श्वास के प्रति असजगता तथा कुछ कार्यस्थलों में सीमित वायु संचार जैसी परिस्थितियाँ इस स्थिति को और बढ़ा सकती हैं।

कार्यस्थलों में तनाव के परिणाम अपेक्षाकृत आसानी से दिखाई दे जाते हैं, लेकिन उसके प्रारंभिक संकेत प्रायः अनदेखे रह जाते हैं। जब तक थकान, चिड़चिड़ापन, कार्य में रुचि कम होना अथवा कार्यक्षमता में गिरावट जैसे लक्षण सामने आते हैं, तब तक समस्या अक्सर काफी आगे बढ़ चुकी होती है। लगातार तनाव की स्थिति में कार्य करना केवल मानसिक थकान ही नहीं बढ़ाता, बल्कि निर्णय क्षमता, प्रतिक्रिया शैली तथा सहकर्मियों के साथ व्यवहार को भी प्रभावित कर सकता है। परिणामस्वरूप इसका प्रभाव व्यक्तिगत स्तर से आगे बढ़कर पूरे कार्य वातावरण पर दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि कार्यस्थल पर निवारक स्वास्थ्य उपायों को केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि एक आवश्यकता के रूप में देखने की जरूरत है।

ऐसी परिस्थितियों में सुव्यवस्थित corporate yoga and wellness sessions महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। श्वास सजगता, सरल श्वास अभ्यास, विश्रांति तकनीक तथा mindfulness आधारित अभ्यास कर्मचारियों को अपनी श्वास और मानसिक स्थिति के बीच संबंध को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। यही समझ तनाव के प्रारंभिक संकेतों को पहचानने तथा अधिक संतुलित और सजग प्रतिक्रिया विकसित करने में प्रभावी सिद्ध होती है।

Workplace yoga sessions का उद्देश्य केवल तनाव कम करना नहीं होता। उनका उद्देश्य कर्मचारियों को स्वयं के प्रति अधिक सजग बनाना, तनाव के प्रभावों को समय रहते पहचानना तथा दैनिक कार्य दबावों के बीच बेहतर मानसिक संतुलन बनाए रखने में सक्षम बनाना भी होता है। दीर्घकालिक दृष्टि से इस प्रकार के नियमित अभ्यास कर्मचारियों के स्वास्थ्य, कार्यक्षमता तथा कार्यस्थल की समग्र कार्य-संस्कृति पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

अगले भाग में: डिजिटल कार्यस्थलों में मानसिक थकान

05/06/2026

कार्यस्थल की चुनौतियों का यौगिक समाधान (भाग 1)

बैठकर काम करने वाली जीवनशैली और शारीरिक जकड़न

लंबे समय तक लगातार स्क्रीन के सामने बैठकर काम करना आज के व्यावसायिक जीवन में सामान्य बात है। कार्यस्थल पर अक्सर कर्मचारी दिनभर लगभग एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं और शरीर का पर्याप्त संचालन नहीं हो पाता। इसके कारण धीरे-धीरे गर्दन, कंधों, पीठ, कमर तथा कूल्हों के आसपास जकड़न और तनाव के लक्षण दिखाई देने लगते हैं।

यदि शुरुआत में ही इस ओर ध्यान न दिया जाए तो समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। बहुत से लोगों में neck pain, shoulder pain, back pain तथा lower back discomfort जैसी समस्याएँ विकसित होने लगती हैं। कुछ मामलों में cervical spondylosis, frozen shoulder या slip disc जैसी स्थितियाँ भी देखने को मिलती हैं। इन समस्याओं का प्रभाव केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी कार्यक्षमता, एकाग्रता और overall work efficiency पर भी पड़ता है।

वर्तमान समय में अनेक organizations workplace wellness को अभी भी optional activity की तरह देखती हैं। जबकि लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता, मानसिक दबाव और लगातार postural strain का प्रभाव धीरे-धीरे employee well-being, efficiency तथा workplace productivity पर दिखाई देने लगता है। विशेष रूप से desk-based work environments में यह समस्या अधिक स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।

ऐसी परिस्थितियों में structured corporate yoga and wellness sessions preventive support system की तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। Chair yoga, guided movement practices, posture awareness, breathing awareness तथा relaxation techniques पर आधारित sessions कर्मचारियों को लंबे समय तक बैठे रहने से उत्पन्न physical strain को कम करने, movement awareness विकसित करने तथा बेहतर work posture बनाए रखने में प्रभावी सिद्ध होते हैं।

नियमित workplace yoga sessions का उद्देश्य केवल stretching या temporary relaxation तक सीमित नहीं होता। उनका उद्देश्य कर्मचारियों में healthier work habits, physical awareness तथा balanced work routines के प्रति सजगता विकसित करना भी होता है। दीर्घकालिक दृष्टि से इस प्रकार की awareness-based wellness initiatives का सकारात्मक प्रभाव employee well-being, workplace efficiency तथा overall work culture पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

अगले भाग में: श्वसन सजगता और तनाव नियंत्रण

योगाभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश (भाग 2)योगाभ्यास केवल आसनों तक सीमित नहीं है। अभ्यास की विधि, श्वास, विश्राम और संत...
21/05/2026

योगाभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश (भाग 2)

योगाभ्यास केवल आसनों तक सीमित नहीं है। अभ्यास की विधि, श्वास, विश्राम और संतुलित क्रम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

7. अभ्यास का क्रम
संतुलित अभ्यास के लिए सामान्य क्रम इस प्रकार रखें:
आसन → प्राणायाम → विश्राम → ध्यान
आवश्यकतानुसार विपरीत आसनों का भी अभ्यास करें।

8. श्वास-प्रश्वास
श्वास सामान्यतः नाक से ही लें और छोड़ें। अनावश्यक रूप से श्वास को न रोकें। अभ्यास के साथ श्वास का समन्वय बनाए रखें।

9. प्रयास और सीमा
अभ्यास करते समय शरीर पर अनावश्यक बल या दबाव न डालें। आसनों को झटके या तेजी से न करें। अपनी क्षमता के अनुसार ही अभ्यास करें।

10. विश्राम
अभ्यास के बीच या अंत में विश्राम अवश्य करें। विशेषकर थकान होने पर शवासन करना लाभकारी होता है।

11. अभ्यास के बाद आहार
अभ्यास के लगभग 30 मिनट बाद हल्का जलपान लिया जा सकता है। पूर्ण भोजन कुछ समय बाद ही करें।

12. स्नान
अभ्यास के बाद तुरंत स्नान नहीं करना चाहिए। शरीर को सामान्य अवस्था में आने दें, फिर स्नान करें।

संतुलित अभ्यास, उचित विश्राम और नियंत्रित प्रयास योगाभ्यास को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाते हैं।

(भाग 3 में सजगता, स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां और नियमित अभ्यास के महत्व पर चर्चा की जाएगी।)

योगाभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश (भाग 1)योगाभ्यास को सुरक्षित, प्रभावी, निरापद और लाभकारी बनाने के लिए अनुशासन, सजगत...
11/05/2026

योगाभ्यास के लिए सामान्य दिशानिर्देश (भाग 1)

योगाभ्यास को सुरक्षित, प्रभावी, निरापद और लाभकारी बनाने के लिए अनुशासन, सजगता और सही विधि का ज्ञान अनिवार्य है। नये साधक को अभ्यास प्रारंभ करने से पूर्व कुछ मूलभूत बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए।

1. अभ्यास का समय
यद्यपि योग का अभ्यास दिन में किसी भी उपयुक्त समय पर किया जा सकता है, परंतु भोजन के तुरंत बाद नहीं करना चाहिए। प्रातःकाल तथा सायंकाल अभ्यास के लिए अधिक उपयुक्त माने जाते हैं।

2. खाली पेट अभ्यास
अभ्यास सदैव खाली पेट करना चाहिए। पूर्ण भोजन के बाद कम से कम 3–4 घंटे तथा अल्पाहार के बाद 1–2 घंटे का अंतर रखें।

3. शौच एवं शरीर की तैयारी
अभ्यास से पहले मलत्याग व मूत्राशय को खाली कर लेना उचित रहता है। इससे अभ्यास में सहजता बनी रहती है।

4. स्थान का चयन
अभ्यास के लिए स्वच्छ, शांत और हवादार स्थान चुनें। धूल, धुआं, तेज हवा या शोर-शराबे वाले वातावरण में अभ्यास न करें।

5. अभ्यास का आसन (मैट)
अभ्यास समतल भूमि पर, दरी, चटाई या कंबल बिछाकर करें। बहुत नरम या असमतल स्थान पर अभ्यास करने से संतुलन प्रभावित हो सकता है।

6. वस्त्र
ढीले, हल्के और आरामदायक वस्त्र पहनें ताकि शरीर की गति में कोई बाधा न आए।

योगाभ्यास के लिए एक उचित वातावरण और तैयारी सुरक्षित एवं संतुलित अभ्यास का आधार बनाती है।

(अभ्यास क्रम, श्वास, विश्राम और अभ्यास के बाद की सावधानियों पर चर्चा भाग 2 में)

Address

Yapral

Opening Hours

Monday 9am - 8pm
Tuesday 9am - 8pm
Wednesday 9am - 8pm
Thursday 9am - 8pm
Friday 9am - 8pm
Saturday 9am - 8pm

Telephone

+916394163581

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Yog Bharati posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Practice

Send a message to Yog Bharati:

Shortcuts

Share