21/04/2023
।।Buddha Amrut Vani ।।
"अक्कोच्छि मं अवधि मं, अजिनि मं अहासि मे।
ये च तं उपनय्हन्ति, वेरं तेसं न सम्मति॥"
अमुक व्यक्ति ने मुझ पर आक्रोश किया, मुझे मारा, मुझे कराया, मुझे लूट लिया- जो कोई व्यक्ति उसी के बारे में बार बार सोच कर मन में गाँठ बांधता है, उसका वैर शान्त नहीं होता।
"अक्कोच्छि मं अवधि मं, अजिनि मं अहासि मे।
ये च तं नुपनय्हन्ति, वेरं तेसूपसम्मति॥"
अमुक व्यक्ति ने मुझ पर आक्रोश किया, मुझे मारा, मुझे कराया, मुझे लूट लिया- जो कोई व्यक्ति उसी के बारे में बार बार न सोच कर मन में गाँठ नहीं बांधता, उसका वैर शान्त होता है।
(धम्मपद गाथा - 3, 4 - ये गाथाएं जेतवनाराम में तिस्स स्थविर को उद्देश्य कर कही है।)