Buddha's Meditation in Hindi

Buddha's Meditation in Hindi बुद्ध ने ध्यान से परम शांति प्राप्ति की और वही शांति का मार्ग हमें बताया, आईये उसी ध्यान को सीखते है

21/04/2023

।।Buddha Amrut Vani ।।

"अक्‍कोच्छि मं अवधि मं, अजिनि मं अहासि मे।
ये च तं उपनय्हन्ति, वेरं तेसं न सम्मति॥"

अमुक व्यक्ति ने मुझ पर आक्रोश किया, मुझे मारा, मुझे कराया, मुझे लूट लिया- जो कोई व्यक्ति उसी के बारे में बार बार सोच कर मन में गाँठ बांधता है, उसका वैर शान्त नहीं होता।

"अक्‍कोच्छि मं अवधि मं, अजिनि मं अहासि मे।
ये च तं नुपनय्हन्ति, वेरं तेसूपसम्मति॥"

अमुक व्यक्ति ने मुझ पर आक्रोश किया, मुझे मारा, मुझे कराया, मुझे लूट लिया- जो कोई व्यक्ति उसी के बारे में बार बार न सोच कर मन में गाँठ नहीं बांधता, उसका वैर शान्त होता है।
(धम्मपद गाथा - 3, 4 - ये गाथाएं जेतवनाराम में तिस्स स्थविर को उद्देश्य कर कही है।)

15/04/2023

नमो बुध्दाय !
हमारे भगवान बुद्ध को बावरी ब्राह्मण का शिष्य अजित माणवक प्रश्न पूछता है -
यह छह इन्द्रिय रूपी लोक किससे ढका हुआ है? छह इन्द्रिय रूपी लोक किससे प्रकाशित नहीं होता? इन छह इन्द्रिय रूपी लोक का आलेपन किसे कहते हैं? इन छह इन्द्रिय रूपी लोक में महाभय क्या है?

भगवान उत्तर देते हैं -
अविद्या से यह छह इन्द्रिय रूपी लोक ढका हुआ है । लोभ और प्रमाद के कारण ही प्रकाशित नहीं होता। तृष्णा इन छह छह इन्द्रिय रूपी लोक का आलेपन कहता हूँ। और इसके लिए बुढापा , रोग, मरण आदि दुख आना इसके लिए महाभय है।

अजित माणवक आगे प्रश्न पूछता है -
इन सभी छह इन्द्रियों में तृष्णा की नदी स्त्रोत बहती है, इन तृष्णा स्त्रोत का निवारण करने का उपाय क्या है? इन तृष्णा स्त्रोत को संयमित करने तथा पूर्णतः बन्द करने के उपाय के बारे में बताइये !

भगवान उत्तर देते हैं -
लोक में जो तृष्णा की नदियाँ स्त्रोत है स्मृति उसका निवारण करने का उपाय है, और इन तृष्णा स्त्रोत को संयमित करने तथा पूर्णतः बन्द करने के लिए विपश्यना प्रज्ञा ही है कहता हूँ।

अजित माणवक आगे प्रश्न पूछता है -
हे मार्श ! प्रज्ञा , स्मृति और नाम रुप कहा पूर्णतः निरुद्ध होते हैं आप से यह पूछता हूँ आप इसे बताएँ?

भगवान उत्तर देते हैं -
अजित तूने जो मुझे प्रश्न पूछा है उसे मैं बताता हूँ जहाँ नाम ( संज्ञा, वेदना, स्पर्श, चेतना, मनसिकार) रुप ( चार महाभूतों से बना शरीर) पूर्णतः यानी बिना शेष रहे निरुद्ध होता है वहाँ विज्ञान पूर्णतः निरुद्ध होता है, विज्ञान के पूर्णतः निरुद्ध होने पर इन सबका निरोध हो जाता है।

इसे ही निब्बान कहते हैं। इसे अवबोध करने के लिए क्रमशः विपश्यना भावना का अभ्यास करें।
वीर्य करने वाले व्यक्ति ही निब्बान की ओर अभिमुख होते हैं। सबके लिए रास्ता खुला है। आइये अपना मंगल साध ले।
सबका कल्याण हो।

तथागत बुद्ध की शिक्षा के अनुसार ध्यान अभ्यास सीखे और अपने मन के स्वामी बने। परम शांति आपका हमेशा अनुगमन करेगी। सचमुच मन ...
29/03/2023

तथागत बुद्ध की शिक्षा के अनुसार ध्यान अभ्यास सीखे और अपने मन के स्वामी बने। परम शांति आपका हमेशा अनुगमन करेगी। सचमुच मन का दमन करना सुखावह है।

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