Danvantri aushadhaley

Danvantri aushadhaley Ayurveda has eight ways to diagnose illness, called Nadi (pulse), Mootra (urine), Mala (stool), Jihv

30/08/2026
26/08/2026

आयुर्वेद को विश्व व्यापी लोकप्रिय तथा लोकोपयोगी बनाने के लिए...
*************
( जैसे #योग को पूरी दुनिया में पहुंचाया , उसी तरह)

#उपाय --:--

भारत सरकार 100 देशों के साथ MOU साइन करे

प्रत्येक देश के सबसे बड़े शहर के पास " एक वर्ल्ड क्लास आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल" 50 UG seats, 100 bed hospital स्थापित करे। उस देश की सरकार ज़मीन मुहैया करवाए तथा आयुर्वेद चिकित्सा एवं शिक्षा हेतु अपने यहां कानूनी प्रावधान करें।

उक्त आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को चलाने के लिए भारत सरकार प्रधानाचार्य, शिक्षक , मेडिकल आफीसर्स तथा संपूर्ण स्टाफ को डेप्यूटेशन पर उस देश में नियुक्त करें।

मान लीजिए भोपाल लखनऊ दिल्ली के काय-चिकित्सा के प्रोफेसर साहब का तबादला टोक्यो, मास्को, बर्लिन, लंदन, बीजिंग, न्यूयॉर्क, जोहानिसबर्ग आदि जगहों पर होता है और वे वहां जाकर उक्त आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में कार्य करते हैं......!! इसी तरह सभी आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी एवं अन्य स्टाफ को भी डेप्यूटेशन पर समय-समय पर विदेशी सेटअप पर तैनाती मिलेगी और भारत देश का आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज विदेशी जमीन पर चलता रहेगा।

उक्त आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में दवाईयां भारत से ही भेजीं जाएंगी और जरूरत का साजो-सामान भी ।

50 seats में दाखिला के लिए पूरे विश्व में एक प्रतियोगी परीक्षा करवाई जाएगी। परीक्षा केंद्र सभी देशों में रखे जाएंगे। परीक्षा में उत्तीर्ण छात्रों को BAMS में दाखिला मिलेगा और उन्हें विश्व का कौनसा कालेज मिलता है ये‌ उनका स्कोर तय करेगा ।
मान लीजिए पटना के छात्र को टोक्यो वाला कालेज मिला तो उसे टोक्यो जाकर बीएएमएस करना होगा।

उक्त विदेशी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज से पास हुए स्नातक को भारत देश के अंदर नौकरियों में दस फीसदी सीटों पर आरक्षण दिया जाएगा। और स्टडी देश में प्रैक्टिस करने की अनुमति भी वहां की सरकार से दिलवाई जाएगी।

ये प्रोजेक्ट लोकप्रिय होता है तो भारत सरकार विदेशी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या में इजाफा करती जाएगी।

" आयुर्वेद पढ़ो पढ़ाओ, लोकप्रिय लोकोपयोगी बनाओ" पूरी दुनिया में आयुर्वेद पहुंचेगा ।।

सुझाव कैसा लगा
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मोहन बृजेश: मेरे हिसाब से दो संशोधन जरूरी हैं
1-कोई भी कच्ची पक्की दवा बिना लैबोरेट्री टेस्ट के नहीं प्रयोग की जाएगी
******
दूसरा
हर लाइलाज रोगी को पंचकर्म आदि के सहारे से ठीक करने का पूरा प्रयास किया जाएगा
तथा हर व्यक्ति को आयुर्वेदिक संहितानुसार अक्षय आयु का साधन भोगी बनाया जाएगा
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6395063320
एवं
9456404916

19/08/2026

आयुर्वेद
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को किसी भी पैथी के साथ ना तो घाल मेल की गुन्जायश है
और न कदम ताल की आवश्यकता है
केवल आयुर्वेद अपने पूर्ण चिकित्सा कौशल के साथ प्रयोग किया जाए
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तो वह दिन दूर नहीं कि हम दुनिया के हर लाइलाज रोगी को पूर्ण स्वस्थ कर अक्षय आयु का साधक भोगी बना देंगे
*******
किसी को भी दुनिया में इस विषय में कोई शंका हो वह मुझसे चाहे जो फोन पर चर्चा कर सकता है मेरा खुल चेलेंज है 63950 63320 एवं 94564 04916 धन्यवाद

18/08/2026

🌿 **सेवा का अवसर** 🌿

"विश्व आयुर्वेद शोध संस्थान" - हाथरस
को एक कर्मठ, ईमानदार और कंप्यूटर जानने वाले
**युवा कार्यकर्ता/ब्रह्मचारी** की आवश्यकता है।

**काम:**
1. ट्रस्ट का ऑफिस व कंप्यूटर का काम
2. लोगों से मिलकर आयुर्वेद व गौसेवा के लिए सहयोग लेना
3. सोशल मीडिया व UPI से दान की व्यवस्था

**योग्यता:** 12वीं पास, ईमानदार, सेवा भावी
**सुविधा:** मानदेय + भोजन + रहने की व्यवस्था

उद्देश्य: ला-इलाज रोगियों को आयुर्वेद से नया जीवन देना

इच्छुक व्यक्ति संपर्क करें:
वैद्य मोहन बृजेश
63950 63320 / 94564 04916
ग्राम छोंक, हाथरस
जय धन्वन्तरि 🙏

17/08/2026

अरे कैसे ही करायें
करायें तो सही
आप अपने शास्त्रीय व्यवस्था अनुसार करते रहिए
कम से कम पंचकर्म पर आदमी आए तो सही
यह निश्चित है कि केवल आप अपनी शास्त्रीय व्यवस्था अनुसार करिए
उसका हर तरह लाभ मिलेगा
स्नेहन अभ्यंग और स्वेदन
लगभग सब में करायें
इनके बिना कुछ मत करिए
पूर्व कर्म और पश्चात कर्म भी
शास्त्रानुसार अपने क्लीनिक पर बुलाकर स्वयं दीजिए
उससेआस्था व्यवस्था व्यापार आपको सब कुछ मिलेगा
और बाद में संसर्जन कर्म आदि सब कुछ करिये
तो शरीर में वयस्थापना और रोग निर्हरण
संरक्षण अर्थात कहीं न कहीं कुछ ना कुछ काम करेगा
एक प्रचलन को बढ़ने दो आपस की चर्चाओं में उस विषय को छोड़ो मत रोको मत ऐसा मेरा विचार है
और
आप जैसे विद्वान जैसा करेंगे मैं कुछ नहीं कह सकता हूं
मेरा तो
भाव के लिए एक भाव है
भाव कुभाव अनख आलस हू किसी भी तरीके से अपनी परंपराएं समाज में प्रचलन में निकल कर आए तो निश्चित उसका लाभ मिलेगा
*****
एक बात और बता दूं प्रचलन में ऐसा देखने में आ रहा है कि दुनिया को विश्वास हो गया है कि कहीं कोई रोग किसी भी तरह ठीक नहीं हो रहा है
इलाज केवलएक परंपरा बन गई है
मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूं
यदि हमने पंच कर्म का सहारा लेते हुए
चिकित्सा की तो निश्चित रूप से
दुनिया का हर लाइलज रोगी पूर्ण स्वस्थ हो जाएगा
और स्वस्थ बना रहेगा
ऐसा मेरे दिमाग में आजकल घूम रहा है
6395063 एवं 94564 04916 धन्यवाद

09/08/2026

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*मेमोरेंडम - विचार हेतु*
*विषय: "वैद्य मोहन बृजेश विश्व आयुर्वेद संस्थान" ट्रस्ट की रूपरेखा एवं भूमिकाएं*

आदरणीय स्थाई ट्रस्टीगण,
सादर प्रणाम।

हम सब मिलकर ग्राम छोंक में एक विश्वस्तरीय आयुर्वेदिक अस्पताल बनाने जा रहे हैं। रजिस्ट्री से पहले कृपया निम्न बिंदुओं पर विचार कर अपनी सहमति दें।

*1. ट्रस्ट का नाम व उद्देश्य*
*नाम:* वैद्य मोहन बृजेश विश्व आयुर्वेद संस्थान
*मुख्य उद्देश्य:*
1. विश्व के किसी भी कोने का ला-इलाज रोगी भी आयुर्वेद, पंचकर्म से पूर्ण स्वस्थ होकर "अक्षय आयु का साधक भोगी" बने।
2. 100 बेड का NABH स्तर का इंडोर अस्पताल। *बिना मान्यता के अस्पताल प्रारंभ नहीं होगा।*
3. गरीबों को निशुल्क/रियायती चिकित्सा।

*2. ट्रस्टियों की 2 श्रेणी*
*A. स्थाई/आजीवन ट्रस्टी - --- लोग* यह श्रेणी हम सबकी राय से और बढ़ाई जा सकती है
- संस्थापक: वैद्य मोहन बृजेश जी
- अन्य: डॉ. दिनेश भारद्वाज, गिरजा शंकर जी, राम सिंह जी, शरद तिवारी जी, राम शर्मा, उदय पुंढीर------
- *भूमिका:* नीति बनाना, नए दानदाता ट्रस्टी को बहुमत से चुनना, ऑडिट देखना।
- *वित्तीय बाध्यता:* कोई नहीं। केवल मार्गदर्शन।

*B. दानदाता ट्रस्टी*
- *पात्रता:* जो व्यक्ति/संस्था प्रत्येक माह न्यूनतम ₹1,00,000 सहयोग दे।
- *भूमिका:* सहयोग के बदले ट्रस्टी बनना। बैठकों में सलाह दे सकते हैं।
- *शर्त:* लगातार 2 माह सहयोग न देने पर सदस्यता स्वतः समाप्त।

*3. संस्थापक का विशेष योगदान - वैद्य मोहन बृजेश जी*
1. *भूमि:* अस्पताल हेतु अपनी भूमि जीरो किराए पर देंगे।
2. *समय:* संपूर्ण परामर्श निशुल्क। ट्रस्ट से कोई वेतन/मानदेय नहीं लेंगे।
3. *दवाएं:* अपनी बनाई दवाएं ट्रस्ट को बिक्री भाव पर देंगे।
4. *संपत्ति:* यदि कभी ट्रस्ट भंग हो, तो अचल संपत्ति - भवन व भूमि - संस्थापक की होगी। चल संपत्ति दान कर दी जाएगी।

*4. प्रबंधन के नियम*
1. *नए ट्रस्टी:* जोड़ने का अधिकार केवल स्थाई ट्रस्टियों के बहुमत से।
2. *बैंक:* खाता प्रबंध ट्रस्टी + 1 स्थाई ट्रस्टी के संयुक्त हस्ताक्षर से चलेगा।
3. *पारदर्शिता:* वार्षिक ऑडिट, 80G, 12A सब होगा।

*5. हम सब से अपेक्षा*
आपसे केवल समय, सलाह और मान-सम्मान चाहिए। पैसा नहीं।
आपके नाम से ये संस्थान देश-विदेश में जाना जाएगा।

---

*कृपया बताएं:*
1. क्या आप उपरोक्त सभी बिंदुओं से सहमत हैं?
2. कोई संशोधन सुझाव हो तो बताएं।
3. सहमत होने पर रजिस्ट्री की तारीख तय करेंगे।

आपके उत्तर की प्रतीक्षा में
*वैद्य मोहन बृजेश*
प्रबंध ट्रस्टी

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07/08/2026

एक तरफ तो हम कहते हैं कि हमने खड़े-खड़े सिर जोड़ दिया था
आज हम उंगली जोड़ने की हिम्मत नहीं दिखा सकते हैं आयुर्वेद विद्यालयों में हम कितना प्रैक्टिकल अपने छात्र को कराते हैं
और बाजार में कितनी दवाएं शुद्ध हैं
यह दोनों विचारणीय विषय हैं
इस सब को ठीक करने के लिए सरकार को एन ए बी एच
स्तर के आयुर्वेद के इंडोर अस्पताल बनाकर चलाने पड़ेंगे वैद्यों को सौंपने पड़ेंगे
वित्तीय व्यवस्थाएं सब सरकार चलाएगी
आज एलोपैथी पर जितना सरकार खर्च कर रही है
उतना यदि आयुर्वेद पर किया जाए तो हम आयुर्वेद के अतीत को साकार करके दिखा सकते हैं
किसी भी प्रकार का लाइलाज रोगी भर्ती करके स्वस्थ करना और उसको अक्षय आयु का साधक भोगी बनाना
यह दो आयुर्वेद के लक्ष्य घोषित करने पड़ेंगे
कोई भी सीमा मर्यादा प्रतिबंध किसी भी प्रकार का हमारे ऊपर लागू नहीं होगा
दूसरी पैथी का सहारा किसी भी तरह न लेने का प्रतिबंध अवश्य होगा
सभी जांच के साधन आईसीयू आदि सब हमारे पास उपलब्ध होंगे
कोई भी दवा बिना लैबोरेट्री टेस्ट के न बनेगी न बाहर से ली जाएगी
अपनी संहिताओं के आधार पर ही प्रत्येक रोगी का अलग-अलग औषधि अन्न विहार तय किया जाएगा न की मॉडर्न की नकल पर
प्रत्येक रोगी को पंचकर्म व्यवस्था समय और आवश्यकता अनुसार आवश्यक कराई जाएगी
संपूर्ण स्टाफ को वेतन आदि सभी सुविधाएं एलोपैथी के बराबर ही दी जाएगी
आयुर्वेद शब्द वापस करके आयुर्वेद विभाग मंत्री ग्रांट बजट गजट इंस्टिट्यूट विभाग व्यवहार सब कुछ एलोपैथी के बराबर किया जाए
क्रमशः
वैद्य मोहन बृजेश आयुर्वेदाचार्य
63950 63320 एवं 94564 04916एक तरफ तो हम कहते हैं कि हमने खड़े-खड़े सिर जोड़ दिया था
आज हम उंगली जोड़ने की हिम्मत नहीं दिखा सकते हैं आयुर्वेद विद्यालयों में हम कितना प्रैक्टिकल अपने छात्र को कराते हैं
और बाजार में कितनी दवाएं शुद्ध हैं
यह दोनों विचारणीय विषय हैं
इस सब को ठीक करने के लिए सरकार को एन ए बी एच
स्तर के आयुर्वेद के इंडोर अस्पताल बनाकर चलाने पड़ेंगे वैद्यों को सौंपने पड़ेंगे
वित्तीय व्यवस्थाएं सब सरकार चलाएगी
आज एलोपैथी पर जितना सरकार खर्च कर रही है
उतना यदि आयुर्वेद पर किया जाए तो हम आयुर्वेद के अतीत को साकार करके दिखा सकते हैं
किसी भी प्रकार का लाइलाज रोगी भर्ती करके स्वस्थ करना और उसको अक्षय आयु का साधक भोगी बनाना
यह दो आयुर्वेद के लक्ष्य घोषित करने पड़ेंगे
कोई भी सीमा मर्यादा प्रतिबंध किसी भी प्रकार का हमारे ऊपर लागू नहीं होगा
दूसरी पैथी का सहारा किसी भी तरह न लेने का प्रतिबंध अवश्य होगा
सभी जांच के साधन आईसीयू आदि सब हमारे पास उपलब्ध होंगे
कोई भी दवा बिना लैबोरेट्री टेस्ट के न बनेगी न बाहर से ली जाएगी
अपनी संहिताओं के आधार पर ही प्रत्येक रोगी का अलग-अलग औषधि अन्न विहार तय किया जाएगा न की मॉडर्न की नकल पर
प्रत्येक रोगी को पंचकर्म व्यवस्था समय और आवश्यकता अनुसार आवश्यक कराई जाएगी
संपूर्ण स्टाफ को वेतन आदि सभी सुविधाएं एलोपैथी के बराबर ही दी जाएगी
आयुर्वेद शब्द वापस करके आयुर्वेद विभाग मंत्री ग्रांट बजट गजट इंस्टिट्यूट विभाग व्यवहार सब कुछ एलोपैथी के बराबर किया जाए
क्रमशः
वैद्य मोहन बृजेश आयुर्वेदाचार्य
63950 63320 एवं 94564 04916

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सादाबाद गेट
Democratic Republic Of The
204101

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