29/07/2026
गुरुपूर्णिमा के इस पवित्र अवसर पर प्रस्तुत है एक ऐसी कहानी, जहाँ ज्ञान का प्रकाश गुरु से शिष्य तक पहुँचकर एक नई चिकित्सा‑क्रांति का जन्म करता है। यह कथा है डॉ. सत्य पाल की — होम्योपैथी और स्पैजिरिक विज्ञान के उस महान आचार्य की, जिनकी लिखी पुस्तकें दुनिया भर के कॉलेजों में पढ़ाई जाती हैं और जिन्हें BJAIN जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक ने प्रकाशित किया। जैसे महान चिकित्सकों के साथ कार्य किया। भारत के राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित पद्मश्री स्वर्गीय डॉ. जुगल किशोर उनके घनिष्ठ मित्र थे और उन्होंने Analogy of Pain का परिचय लिखा, जबकि BJAIN के संस्थापक Prem Nath Jain ने कहा कि Pocket Manual दशकों बाद भी उतना ही उपयोगी है।
उनकी जीवन‑यात्रा में वह क्षण भी आया जब उन्हें paralysis attack हुआ और होल्सोटा अस्पताल में allopathy लेने से इनकार करने पर उन्हें अस्पताल के बाहर अकेले छोड़ दिया गया। एक वृद्ध गुरु, लकवे से जूझते हुए, लेकिन अपने मार्ग पर अडिग। उसी कठिन समय में ईश्वर ने उन्हें विनोद कुमार का पता दिया। विनोद और उनके माता‑पिता ने उन्हें अपने घर में रखा, सेवा की, और स्पैजिरिक औषधियों के द्वारा वे फिर से पूर्णतः स्वस्थ हुए — यह अपने आप में एक चमकता हुआ चमत्कार था।
इसके बाद विनोद कुमार ने तीन वर्षों तक इस पूरी प्रणाली को गहराई से सीखा और अपने गुरु के वचनों को पूरा किया। आज स्पैजिरिक प्रणाली — जो होम्योपैथी या complex homeopathy नहीं है बल्कि एक स्वतंत्र plant‑compound science है — दुनिया के 14 देशों में अपनी रोशनी फैला रही है। यह रोशनी डॉ. सत्य पाल की है। यह रोशनी विनोद कुमार की श्रद्धा है। यह रोशनी गुरु‑शिष्य परंपरा की अमर ज्योति है।
यह वीडियो उसी प्रकाश को समर्पित है —
जहाँ गुरु अंधकार हटाकर ज्ञान देता है,
और शिष्य उस ज्ञान को दुनिया तक पहुँचाकर अपनी श्रद्धा अर्पित करता है।
यही है गुरुपूर्णिमा का सच्चा अर्थ।
गुरुपूर्णिमा के इस पवित्र अवसर पर प्रस्तुत है एक ऐसी कहानी, जहाँ ज्...