17/05/2026
प्रतीक यादव के निधन के बाद चर्चा में आया Pulmonary Embolism: डॉ. अश्विन यादव बोले, “अचानक सांस फूलना सामान्य बात नहीं हो सकती”
हाल ही में प्रतीक यादव के निधन की खबर के बाद Pulmonary Embolism यानी फेफड़ों में खून का थक्का फंसने वाली गंभीर बीमारी एक बार फिर चर्चा में है। आमतौर पर लोग अचानक सांस फूलने, सीने में दर्द या घबराहट को गैस, कमजोरी या हार्ट की सामान्य समस्या समझकर टाल देते हैं, लेकिन कई बार यही लक्षण एक जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी का संकेत हो सकते हैं।
आगरा के वरिष्ठ चेस्ट, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अश्विन यादव ने बताया कि Pulmonary Embolism ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के किसी हिस्से, खासकर पैरों की गहरी नसों में बना खून का थक्का टूटकर फेफड़ों की रक्त वाहिका में जाकर फंस जाता है। इससे फेफड़ों में खून का प्रवाह रुक सकता है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। अगर थक्का बड़ा हो या इलाज में देरी हो जाए, तो मरीज की हालत कुछ ही मिनटों में गंभीर हो सकती है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि मरीज पहले बिल्कुल सामान्य दिख सकता है
डॉ. यादव के अनुसार, Pulmonary Embolism कई बार अचानक शुरू होता है। मरीज बातचीत कर रहा होता है, चल-फिर रहा होता है, लेकिन अचानक सांस फूलना, सीने में दर्द, तेज धड़कन, बेचैनी, पसीना, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षण आ सकते हैं। ऐसे लक्षणों को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर किसी व्यक्ति को अचानक सांस लेने में परेशानी हो, ऑक्सीजन लेवल गिरने लगे, सीने में दर्द हो या धड़कन तेज हो जाए, तो इसे सामान्य घबराहट या गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुरंत डॉक्टर या नजदीकी इमरजेंसी से संपर्क करना चाहिए।”
लंबे समय तक बैठे रहना भी बन सकता है खतरा
आज की जीवनशैली में लंबे समय तक ऑफिस में बैठना, लगातार लैपटॉप पर काम करना, लंबी कार यात्रा या फ्लाइट, व्यायाम की कमी, मोटापा और धूम्रपान जैसे कारण ब्लड क्लॉट बनने के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। कई बार पैरों की नसों में बना थक्का यानी DVT बाद में फेफड़ों तक पहुंचकर Pulmonary Embolism का कारण बन सकता है।
डॉ. अश्विन यादव ने बताया कि बड़ी सर्जरी के बाद, लंबे समय तक बेड रेस्ट, कैंसर, हार्ट डिजीज, गर्भावस्था, हार्मोनल दवाओं का इस्तेमाल, मोटापा और पहले से clotting tendency वाले मरीजों में इसका खतरा अधिक होता है।
इन संकेतों को तुरंत पहचानें
अगर अचानक सांस फूलने लगे, सीने में तेज दर्द हो, दिल की धड़कन बहुत तेज हो जाए, चक्कर या बेहोशी महसूस हो, ऑक्सीजन लेवल गिरने लगे, खांसी के साथ खून आए या पैर में सूजन और दर्द के बाद सांस की परेशानी शुरू हो, तो यह Pulmonary Embolism का संकेत हो सकता है।
खासकर अगर मरीज ने हाल ही में लंबी यात्रा की हो, सर्जरी हुई हो, लंबे समय तक बिस्तर पर रहा हो या पैर में दर्द-सूजन रही हो, तो ऐसे लक्षणों को emergency मानना चाहिए।
समय पर जांच और इलाज से बच सकती है जान
Pulmonary Embolism की पुष्टि के लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार CT Pulmonary Angiography, D-dimer test, Doppler ultrasound, ECG, Echocardiography और Oxygen saturation monitoring जैसी जांचें कर सकते हैं।
इलाज में blood thinner medicines, oxygen support और गंभीर मामलों में clot dissolving medicines या ICU care की जरूरत पड़ सकती है। सही समय पर इलाज मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
डॉ. अश्विन यादव की सलाह
“लंबे समय तक बैठे न रहें। हर 1-2 घंटे में उठकर थोड़ा चलें। पर्याप्त पानी पिएं। धूम्रपान से बचें। वजन नियंत्रित रखें। लंबी यात्रा के दौरान पैरों को हिलाते रहें। और सबसे जरूरी, अचानक सांस फूलना या सीने में दर्द हो तो देरी न करें।”
Pulmonary Embolism एक ऐसी बीमारी है जिसमें जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। लक्षणों को समय पर पहचानना और तुरंत इलाज लेना मरीज की जान बचा सकता है।
डॉ. अश्विन यादव
MBBS, DNB
IDCCM, FCCP, AMRD Harvard, USA
Ex-Consultant: Medanta Hospital, Lucknow
Ex-Asst. Professor: S.N. Medical College, Agra
Chest, Allergy and Sleep Care Clinic
Near Samarpan Blood Bank, Delhi Gate, Agra
Contact: 7819918198, 9927005959