Dr.Bhupendra Singh indoliya

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सही समय पर ग़लत जगह से निकला जाना भी ….. एक आशीर्वाद ही है !!!
30/12/2025

सही समय पर ग़लत जगह से निकला जाना भी ….. एक आशीर्वाद ही है !!!

14/08/2025

सत्य व्यक्ति से किया गया छल हमारे विनाश के सभी द्वार खोल देता है !!!

09/08/2025

वक्त ख़राब हो तो अस्तबल के घोड़े भी ….. रणभूमि के घोड़े को युद्ध का ज्ञान देने लगते हैं !!!

07/08/2025

समस्या से भागना,समस्या का प्रारंभ है…..समस्या का सामना करना,समस्या के अंत का प्रारंभ है ….. !!!

मेरी प्यारी बेटी, जन्मदिन की अनंत मंगल शुभकामनाएँ। तुम मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत तोहफ़ा हो। तुम्हारी मुस्कान मेरी ताकत ह...
04/08/2025

मेरी प्यारी बेटी, जन्मदिन की अनंत मंगल शुभकामनाएँ। तुम मेरे जीवन का सबसे खूबसूरत तोहफ़ा हो। तुम्हारी मुस्कान मेरी ताकत है, और तुम्हारी खुशियाँ मेरी प्रार्थनाओं में सबसे ऊपर हैं। ईश्वर तुम्हें दीर्घायु, ढेर सारा प्यार और जीवन की हर खुशी दे।

03/08/2025

मूर्ख को कभी दोस्त न बनाएं….. और दोस्त को कभी मूर्ख न बनाएं !!!

हमें उन पर भरोसा था ….. उन्हें लगा हम उनके भरोसे हैं !!!
03/08/2025

हमें उन पर भरोसा था ….. उन्हें लगा हम उनके भरोसे हैं !!!

01/02/2022
एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे ।   वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे ।  थोड़ी देर में वहां ...
18/04/2021

एक बार दो आदमी एक मंदिर के पास बैठे गपशप कर रहे थे । वहां अंधेरा छा रहा था और बादल मंडरा रहे थे । थोड़ी देर में वहां एक आदमी आया और वो भी उन दोनों के साथ बैठकर गपशप करने लगा । कुछ देर बाद वो आदमी बोला उसे बहुत भूख लग रही है, उन दोनों को भी भूख लगने लगी थी । पहला आदमी बोला मेरे पास 3 रोटी हैं, दूसरा बोला मेरे पास 5 रोटी हैं, हम तीनों मिल बांट कर खा लेते हैं। उसके बाद सवाल आया कि 8 (3+5) रोटी तीन आदमियों में कैसे बांट पाएंगे ??_

_♦पहले आदमी ने राय दी कि ऐसा करते हैं कि हर रोटी के 3 टुकडे करते हैं, अर्थात 8 रोटी के 24 टुकडे (8 X 3 = 24) हो जाएंगे और हम तीनों में 8 - 8 टुकड़े बराबर बराबर बंट जाएंगे। तीनों को उसकी राय अच्छी लगी और 8 रोटी के 24 टुकडे करके प्रत्येक ने 8 - 8 रोटी के टुकड़े खाकर भूख शांत की और फिर बारिश के कारण मंदिर के प्रांगण में ही सो गए । सुबह उठने पर तीसरे आदमी ने उनके उपकार के लिए दोनों को धन्यवाद दिया और प्रेम से 8 रोटी के टुकड़ों के बदले दोनों को उपहार स्वरूप 8 सोने की गिन्नी देकर अपने घर की ओर चला गया । उसके जाने के बाद दूसरे आदमी ने पहले आदमी से कहा हम दोनों 4 - 4 गिन्नी बांट लेते हैं । पहला आदमी बोला नहीं मेरी 3 रोटी थी और तुम्हारी 5 रोटी थी, अतः मैं 3 गिन्नी लुंगा, तुम्हें 5 गिन्नी रखनी होगी । इस पर दोनों में बहस होने लगी ।_

_♦इसके बाद वे दोनों समाधान के लिये मंदिर के पुजारी के पास गए और उन्हें समस्या बताई तथा समाधान के लिए प्रार्थना की ।_
_पुजारी भी असमंजस में पड़ गया, दोनों दूसरे को ज्यादा देने के लिये लड़ रहे है । पुजारी ने कहा तुम लोग ये 8 गिन्नियाँ मेरे पास छोड़ जाओ और मुझे सोचने का समय दो, मैं कल सवेरे जवाब दे पाऊंगा । पुजारी को दिल में वैसे तो दूसरे आदमी की 3-5 की बात ठीक लग रही थी पर फिर भी वह गहराई से सोचते-सोचते गहरी नींद में सो गया। कुछ देर बाद उसके सपने में भगवान प्रगट हुए तो पुजारी ने सब बातें बताई और न्यायिक मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की और बताया कि मेरे ख्याल से 3 - 5 बंटवारा ही उचित लगता है ।_

_♦भगवान मुस्कुरा कर बोले- नहीं, पहले आदमी को 1 गिन्नी मिलनी चाहिए और दूसरे आदमी को 7 गिन्नी मिलनी चाहिए । भगवान की बात सुनकर पुजारी अचंभित हो गया और अचरज से पूछा- *प्रभु, ऐसा कैसे ?* भगवन फिर एक बार मुस्कुराए और बोले :_

_♦इसमें कोई शंका नहीं कि पहले आदमी ने अपनी 3 रोटी के 9 टुकड़े किये परंतु उन 9 में से उसने सिर्फ 1 बांटा और 8 टुकड़े स्वयं खाया अर्थात उसका *त्याग* सिर्फ 1 रोटी के टुकड़े का था इसलिए वो सिर्फ 1 गिन्नी का ही हकदार है । दूसरे आदमी ने अपनी 5 रोटी के 15 टुकड़े किये जिसमें से 8 टुकड़े उसने स्वयं खाऐ और 7 टुकड़े उसने बांट दिए । इसलिए वो न्यायानुसार 7 गिन्नी का हकदार है .. ये ही मेरा गणित है और ये ही मेरा न्याय है ! ईश्वर की न्याय का सटिक विश्लेषण सुनकर पुजारी नतमस्तक हो गया।_

_♦इस कहानी का सार ये ही है कि हमारी वस्तुस्थिति को देखने की, समझने की दृष्टि और ईश्वर का दृष्टिकोण एकदम भिन्न है । हम ईश्वरीय न्यायलीला को जानने समझने में सर्वथा अज्ञानी हैं ।_
_हम अपने त्याग का गुणगान करते है, परंतु ईश्वर हमारे त्याग की तुलना हमारे सामर्थ्य एवं भोग तौर कर यथोचित निर्णय करते हैं । *यह महत्वपूर्ण नहीं है कि हम कितने धन संपन्न है, महत्वपूर्ण यहीं है कि हमारे सेवाभाव कार्य में त्याग कितना है।



Courtesy.................

31/12/2020

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