Ambaji Upasak Jyotish

Ambaji Upasak Jyotish jio aur jine do

**શ્રી.અંબાજી ઉપાસક જ્યોતિષ* .9737168423 *ઓનલાઇન નકલી ** *જ્યોતિષીઓ ,તાંત્રિકો ,અઘોરીઓ,થી સાવચેત** *રહો.* ,***** *@*જેવુ...
26/05/2026

**શ્રી.અંબાજી ઉપાસક જ્યોતિષ* .9737168423 *ઓનલાઇન નકલી ** *જ્યોતિષીઓ ,તાંત્રિકો ,અઘોરીઓ,થી સાવચેત** *રહો.* ,***** *@*જેવું જોઈએ તેવું થશે.@* *ઘરે બેઠા બેઠા ફોન થી કામ કરવામાં* *આવસે* 1 *. વશીકરણ* 2. *લવ પ્રોબ્લેમ /લવમેરેજ*વશીકરણ.* 3. *મોહિની વશીકરણ.* 4. *રીસાયેલા બોયફ્રેન્ડ કે ગર્લફ્રેન્ડ ** ને *મનાવવા માટે એક* *વાર ખાસ મલો** 5. *તૂટેલા પ્રેમ સંબંધ ફરી જોડવા* માટે મલો 6. *રિશાયેલી પિહર ગયેલી તમારી* *પત્ની ને પાછી લાવી શકાય* છે 7. *તૂટેલા જૂના માં જૂના સંબંધ* ફરી જોડનાર 8. *ગે અને લેસ્બિયન સેક્સ* વશીકરણ 9. *શત્રુનાશ અને મુઠ્ચોટ પાકે પાયે* કરી આપું 10. *છૂટાછેડા કરવાના /રોકવાના* હોય તો 11. *કોઈ પણ કાર્યસિદ્ધિ કરવા* માટે વશીકરણ કરવામાં આવે છે. 12. *તમારી ધારેલી વ્યક્તિનું મિલન* કરાવી આપું. 13. *સંતાન નું સારું શિક્ષણ અને* *ભણતર માટે સરસ્વતી* વશીકરણ *વિદ્યાપ્રાપ્તિ વિધિ* 14. *વિદેશમાં રહેતા ભાઈ બહેનો* નું *કામ ફોન થી કરી આપીશ* *શ્રદ્ધા અને વિશ્વાસ રાખીને જ કૉલ* કરતા *મારું કરેલું કાર્ય અતૂટ રહેશે* કૉલ 9737168423 જય માતાજી અંબાજી સોનું ભલું કરો 🙏🙏🙏🙏🙏























શ્રી અંબાજી ઉપાસક  ખાનદાની જ્યોતિષ વિક્રમ ભાઈ શાસ્ત્રી 3પીઢી જુની પેઢી અમદાવાદ માં******"*********ઓનલાઈન નકલી અને વગર ના...
14/05/2026

શ્રી અંબાજી ઉપાસક ખાનદાની જ્યોતિષ
વિક્રમ ભાઈ શાસ્ત્રી 3પીઢી જુની પેઢી અમદાવાદ માં
******"*********
ઓનલાઈન નકલી અને વગર નામ - સરનામા વાળા લોભામણી બાતો કરતા ફ્રોડ જ્યોતિષ થી બચો.
**************
જીવન ને લગતી તમામ સમસ્યાઓ નું ચમત્કારિત દેવી શક્તિ સાધના થી નિવારણ કરવા માં આવશે.
******************
જેમ કે
1. લગ્ન સગાઈ માં વિલંબ થઈ રહ્યો છે
2. શું તમને અતૂટ લવ વશીકરણ કરવું જોવે છે
3. શુ તમને લવ મેરેજ માટે પેરેન્ટ્સ હા પડાવી છે|
4. Ex લવ પાછું પામવું છે?
5. શું લવ માં રિજેક્શન મળ્યું છે?
6. શું તમને Gf/Bf મેરેજ માટે ના પાડે છે?
7. તૂટેલા લગ્ન કે સગાઈ પાછી જોડવા માંગો છો?
8. શું તમને એક્સ્ટ્રા મેરિટલ રિલેશન માં બ્રેકઅપ થયું છે
9. શું તમને પતિ પત્નિ વચે જાતીય સંબંધો વિશે પ્રોબ્લેમ આવે છે?
10. પતિ પત્નિ વચે અણબનાવ ચાલે છે?
11. ફસાયેલા નાણા અને ઉધારી કડાવા ની છે?
12. શું પતિ કે પત્ની રિસાઈ ને બેઠા મનાવા છે?
13. શું તમારી સંતાન ક્યાંક ખોટા પ્રેમ માં ફસાયેલી છે?
14.ઘર થી ભાગેલા છોકરા છોકરી પાછા લાવા છે?
15. સંતાન નું ભણતર માં પ્રોબ્લેમ આવે છે?
16. શું તમારું લવ વન સાઇડ છે?
17. શું છૂટાછેડા લેવાના/રોકવાના છે?























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टाइटैनिक की त्रासदी फ़िल्म की वजह से अमर हो गई। लेकिन यह बात जानी-मानी है कि जहाज़ पर मौजूद 39% महिलाएँ बच गईं, भले ही ल...
01/05/2026

टाइटैनिक की त्रासदी फ़िल्म की वजह से अमर हो गई। लेकिन यह बात जानी-मानी है कि जहाज़ पर मौजूद 39% महिलाएँ बच गईं, भले ही लाइफ़बोट कम थीं; लेकिन पुरुषों में से सिर्फ़ 39% ही बच पाए! वहाँ अमीर, ताक़तवर, आकर्षक और संभ्रांत पुरुष थे जिन्होंने फ़र्स्ट क्लास केबिन बुक किए थे। संकट की घड़ी में, 'A क्लास' का दिखावा सामने आया, लेकिन लिंग-संबंधी नियम अटल रहा: पहले महिलाएँ और बच्चे। ज़्यादातर पुरुषों ने बिना किसी शिकायत के, डूबते हुए जहाज़ पर चुपचाप खड़े रहकर मौत को गले लगा लिया! जिन महिलाओं के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया, उन्हें यह एहसास होना चाहिए कि वे इस सम्मान की हक़दार हैं—बिना किसी तर्क-वितर्क के! हालाँकि, इसके लिए न कोई कैमरा था, न कोई 'लाइक' या तालियाँ, और न ही कोई मुआवज़ा। इतिहास गवाह है कि इंसान अपनी मेहनत और तकलीफ़ों से जो कुछ भी बनाता है—अगर उसके कोई संतान न हो—तो भी उसे सीना तानकर खड़ा रहना पड़ता है। अगर वह रोते-बिलखते भाग खड़ा हो, तो दुनिया ताना मारेगी; लेकिन अगर वह एक 'मर्द' की तरह डटा रहे, तो उसका मान बढ़ता है! लेकिन अक्सर, नुक़सान का सबसे बड़ा हिस्सा पुरुषों के ही हिस्से आता है। फिर भी, अगर आप महिलाओं को 'पढ़' और 'राह दिखा' नहीं सकते—यानी अगर आप उन्हें समझ नहीं सकते और उन्हें अपने साथ (ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि प्यार से) नहीं ले चल सकते—तो आपकी ज़िंदगी की नैया भी डगमगा जाएगी। और ज़्यादातर मामलों में, अगर आपको वैसा ही साथ और सहारा न मिले जिसकी आप उम्मीद करते हैं—तो आप भीतर से टूटकर बर्बाद हो जाते हैं और डूब जाते हैं। और ऐसे में, कोई भी इसे 'वीरगति' नहीं मानता, और न ही कोई आपके ऊपर फूल चढ़ाता है। बल्कि, काँटों की तरह चुभने वाले ताने ही सुनने को मिलते हैं!


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#वशीकरण

🔱 माँ बगलामुखी – स्तंभन शक्ति की अद्भुत महाविद्या 🔱सृष्टि के एक काल में जब प्रचंड आंधी और तूफ़ान ने तीनों लोकों को कंपा ...
29/04/2026

🔱 माँ बगलामुखी – स्तंभन शक्ति की अद्भुत महाविद्या 🔱

सृष्टि के एक काल में जब प्रचंड आंधी और तूफ़ान ने तीनों लोकों को कंपा दिया, मंत्र निष्प्रभावी होने लगे और अधर्म की शक्तियाँ बढ़ने लगीं, तब देवताओं ने आदिशक्ति का आह्वान किया। उस समय हर दिशा पीत प्रकाश से भर उठी और उस दिव्य तेज से प्रकट हुईं — माँ बगलामुखी।

उनका स्वरूप शांत अपितु अत्यंत प्रभावशाली था। पीले वस्त्र, स्वर्ण आभा, और अद्वितीय तेज से वे सम्पूर्ण ब्रह्मांड को स्थिर कर देती हैं। उन्होंने अपने दिव्य संकल्प से उस प्रलयकारी तूफ़ान को थाम लिया — यही उनकी स्तंभन शक्ति का प्रथम प्रकट रूप था।

कथा में वर्णन आता है कि एक अत्यंत शक्तिशाली असुर, जिसकी वाणी में ऐसी शक्ति थी कि वह जिसे भी शाप देता, वह तत्काल नष्ट हो जाता। देवता भी उससे भयभीत हो गए। तब माँ बगलामुखी ने उसे युद्ध में पकड़कर उसकी जीभ को रोक दिया। उसी क्षण उसकी शक्ति समाप्त हो गई।

यह दृश्य केवल युद्ध नहीं था, बल्कि एक गूढ़ संकेत था —
वाणी, विचार और क्रिया को नियंत्रित कर लेना ही परम विजय है।
माँ बगलामुखी को “पीताम्बरा देवी” भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है। वे दस महाविद्याओं में से एक हैं और विशेष रूप से शत्रु स्तंभन, वाक् नियंत्रण, न्याय विजय और तांत्रिक साधना के लिए पूजित होती हैं।

🕉️ स्वरूप और प्रतीक
माँ का पीत वर्ण → स्थिरता, शक्ति और तेज का प्रतीक
शत्रु की जिह्वा पकड़ना → वाणी पर पूर्ण नियंत्रण
गदा धारण करना → दुष्ट शक्ति का अंत
कमल आसन → दिव्य शांति और आध्यात्मिक संतुलन

🔱 साधना का महत्व
माँ बगलामुखी की साधना साधक को केवल बाहरी शत्रुओं से ही नहीं बचाती, अपितु भीतर के शत्रुओं — भय, भ्रम, क्रोध, नकारात्मकता — को भी शांत करती है।
जो साधक सच्चे भाव से माँ का स्मरण करता है, उसकी बाधाएँ स्वयं रुकने लगती हैं, विरोधी शक्तियाँ शांत हो जाती हैं और जीवन में विजय का मार्ग खुलता है।

🕉️ दिव्य मंत्र (स्तंभन शक्ति मंत्र)
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय।
जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा॥

📿 विशेष जानकारी
माँ बगलामुखी की पूजा में पीले वस्त्र, हल्दी, चना दाल, पीले फूल का विशेष महत्व है।
उनका प्रमुख तीर्थ स्थान मध्यप्रदेश के दतिया और हिमाचल के बैंकहण्डी (कांगड़ा) में प्रसिद्ध है।
मंगलवार और गुरुवार को उनकी उपासना अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

साधना में शुद्धता और गुरु मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक माना गया है।
जो भी साधक माँ बगलामुखी की शरण में जाता है, उसके जीवन के तूफ़ान शांत हो जाते हैं।
वाणी में शक्ति आती है, शत्रु स्वयं शांत हो जाते हैं और साधक के भीतर अडिग आत्मबल जागृत हो जाता है।
माँ की कृपा से असंभव भी संभव हो जाता है… 🔱

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सतयुग के एक अद्भुत प्रसंग में जब समस्त सृष्टि भीषण तूफान से कांप उठी, तब स्वयं भगवान विष्णु भी चिंतित हो उठे। प्रकृति का...
29/04/2026

सतयुग के एक अद्भुत प्रसंग में जब समस्त सृष्टि भीषण तूफान से कांप उठी, तब स्वयं भगवान विष्णु भी चिंतित हो उठे। प्रकृति का संतुलन डगमगाने लगा था, तब उन्होंने सौराष्ट्र क्षेत्र में हरिद्रा सरोवर के तट पर कठोर तपस्या आरंभ की। उसी तप के तेज से उस पवित्र सरोवर से प्रकट हुईं अद्भुत शक्ति की अधिष्ठात्री देवी — मां बगलामुखी। हरिद्रा अर्थात हल्दी, इसलिए मां के वस्त्र, पूजन सामग्री और साधना का प्रत्येक तत्व पीले रंग में ही प्रतिष्ठित होता है।

तंत्र शास्त्रों में वर्णित दस महाविद्याओं में मां बगलामुखी का स्थान अत्यंत विशिष्ट और प्रभावशाली माना गया है। काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला — इन सभी में मां बगलामुखी वह शक्ति हैं जो शत्रु के वचन, बुद्धि और गति को स्थिर करने की सामर्थ्य रखती हैं। यही कारण है कि इन्हें स्तम्भन शक्ति की देवी कहा जाता है।

साधना के समय साधक को अत्यंत अनुशासन में रहना होता है। ब्रह्मचर्य का पालन, पीले वस्त्रों का धारण, संयमित आहार और रात्रि के गूढ़ समय में मंत्र जाप — यह सब साधना को सिद्धि की ओर ले जाता है। साधना का समय रात्रि 10 बजे से प्रातः 4 बजे के मध्य सबसे प्रभावी माना गया है, जब वातावरण सूक्ष्म शक्तियों से परिपूर्ण होता है। दीपक की बाती तक को हल्दी में रंगकर उपयोग करना इस साधना की विशिष्टता को दर्शाता है।

मंत्र सिद्धि के लिए चने की दाल से निर्मित यंत्र का पूजन किया जाता है, और यदि संभव हो तो ताम्रपत्र या रजत पत्र पर इसे अंकित कर स्थापित किया जाता है। यह केवल एक पूजन विधि नहीं, अपितु ऊर्जा के केंद्र को जागृत करने की प्रक्रिया है।

ऋषि नारद द्वारा स्थापित इस ब्रह्मास्त्र विद्या का विनियोग, आवाहन और ध्यान साधक को देवी के साक्षात् सान्निध्य में ले जाने का माध्यम बनता है। ध्यान में मां बगलामुखी को स्वर्णमयी आभा से युक्त, त्रिनेत्रधारी, पीताम्बर वस्त्रों में, हाथों में गदा, पाश और वज्र धारण किए हुए, त्रिलोक को स्तम्भित करने वाली शक्ति के रूप में देखा जाता है।

उनका 36 अक्षरों वाला यह मंत्र अत्यंत प्रभावशाली और गूढ़ माना गया है —
ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।

इस मंत्र के एक लाख जप से साधना की सिद्धि प्राप्त होती है, और पूर्णता के पश्चात दशांश यज्ञ तथा तर्पण करना अनिवार्य माना गया है। अधिक उच्च सिद्धि के लिए पांच लाख जप तक का विधान भी बताया गया है।

मां बगलामुखी का यंत्र विशेष रूप से न्यायिक मामलों, शत्रु बाधा और जीवन में उन्नति के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। यह केवल एक आध्यात्मिक साधन नहीं, अपितु ऐसी दिव्य शक्ति का केंद्र है जो साधक के चारों ओर सुरक्षा और विजय का कवच निर्मित करता है।
जो साधक श्रद्धा, नियम और पूर्ण विश्वास के साथ इस साधना को करता है, उसके लिए असंभव भी संभव हो जाता है।
Mobile 9737168423

**rasadhna

अंबाजी ज्योतिष अहमदाबाद 9737168423✨ स्वर्ण लक्ष्मी प्रयोग — धन आकर्षण का दिव्य रहस्य ✨कई व्यक्तियों के जीवन में अचानक ऐस...
29/04/2026

अंबाजी ज्योतिष अहमदाबाद 9737168423
✨ स्वर्ण लक्ष्मी प्रयोग — धन आकर्षण का
दिव्य रहस्य ✨
कई व्यक्तियों के जीवन में अचानक ऐसे अवरोध उत्पन्न हो जाते हैं, जिनका कारण समझ पाना सरल नहीं होता। कितना भी प्रयास कर लिया जाए, धन का आगमन रुक जाता है। कुछ साधकों का स्थापित व्यापार अचानक ठप हो जाता है, तो कुछ को भारी नुकसान झेलते हुए कर्ज के बोझ में दबना पड़ता है। कई बार ऐसा भी होता है कि धन आता है, लेकिन टिकता नहीं, बार-बार हानि ही प्राप्त होती है।
इन परिस्थितियों के पीछे केवल बाहरी कारण ही नहीं होते, अपितु सूक्ष्म स्तर पर कार्य करने वाले तंत्र दोष, ग्रह दोष या पितृ एवं कुलदेवी दोष गहराई से जुड़े होते हैं। जब ये दोष सक्रिय होते हैं, तो व्यक्ति की उन्नति रुक जाती है और जीवन की दिशा प्रभावित होने लगती है।

अनेक साधक जब समाधान की खोज में आते हैं और विधिपूर्वक इन दोषों का निवारण किया जाता है, तब आश्चर्यजनक रूप से उनकी समस्याएं जड़ से समाप्त होने लगती हैं। जहां पहले रुकावट थी, वहां मार्ग खुलने लगते हैं, जहां हानि थी, वहां स्थिरता और लाभ का प्रवाह बनने लगता है।

तंत्र शास्त्र में ऐसे कई प्रबल अनुष्ठान बताए गए हैं, जो इन अदृश्य अवरोधों को समाप्त कर जीवन में पुनः संतुलन और समृद्धि स्थापित करते हैं। यदि इन अनुष्ठानों को पूर्ण विधि-विधान, श्रद्धा और नियम के साथ किया जाए, तो निश्चित रूप से जीवन की दशा और दिशा दोनों में परिवर्तन संभव है।

इन्हीं प्रबल साधनाओं में एक अत्यंत प्रभावशाली साधना है — स्वर्ण लक्ष्मी प्रयोग। यह प्रयोग मां लक्ष्मी के स्वर्ण स्वरूप का आह्वान कर जीवन में धन, वैभव और स्थायी समृद्धि को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। इसमें साधक लक्ष्मी को स्वर्ण आभा से युक्त, कमल पर विराजमान और स्वर्ण वर्षा करते हुए ध्यान करता है, जिससे आकर्षण और स्थिरता दोनों शक्तियां सक्रिय होती हैं।

इस प्रयोग के लिए साधक को पवित्रता और नियम का विशेष ध्यान रखना होता है। शुक्रवार अथवा दीपावली की रात्रि को उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर लक्ष्मी यंत्र स्थापित किया जाता है। दीप प्रज्वलित कर मां का ध्यान किया जाता है और “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः” मंत्र का जप किया जाता है। यह जप कम से कम 108 या 1008 बार किया जाता है, जिससे ऊर्जा क्रमशः जागृत होने लगती है।

यह प्रयोग एक दिन से लेकर 41 दिनों तक किया जा सकता है और इसके परिणाम अत्यंत सटीक माने गए हैं। नियमित साधना से धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलते हैं, रुका हुआ पैसा वापस आने लगता है, व्यापार में वृद्धि होती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट दिखाई देने लगते हैं।

ध्यान रखने योग्य बात यह है कि यह साधना केवल शुद्ध मन, श्रद्धा और सदाचार के साथ ही करनी चाहिए। गलत उद्देश्य या लालच के साथ किया गया प्रयोग अपेक्षित फल नहीं देता। जब साधक का संकल्प शुद्ध होता है, तभी लक्ष्मी का स्थायी निवास संभव होता है।
जब यह साधना सिद्धि की ओर बढ़ती है, तब जीवन में अचानक अवसर, धन के स्रोत और सौभाग्य के संकेत मिलने लगते हैं। यही वह क्षण होता है जब व्यक्ति की दशा और दिशा दोनों बदलने लगती हैं, और साधक अपने जीवन में वास्तविक समृद्धि का अनुभव करता हैl
अंबाजी ज्योतिष अहमदाबाद कॉल 9737168423 , # tatainvestment
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श्री अंबाजी उपासक ज्योतिष 9737168423 पुराणों में वर्णित है कि भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण कर देवत...
29/04/2026

श्री अंबाजी उपासक ज्योतिष 9737168423
पुराणों में वर्णित है कि भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत प्रदान किया था। यह तिथि उसी दिव्य लीला की स्मृति में मनाई जाती है, जो धर्म, बुद्धि और मायाशक्ति की अद्भुत अभिव्यक्ति है।
ऐसा विश्वास है कि आज के दिन पृथ्वी पर सूक्ष्म रूप से अमृतमयी ऊर्जा का संचार होता है, जो साधक के जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खोलता है।

आज प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। इसके बाद श्रद्धा-भाव से भगवान विष्णु की पूजा करें और उन्हें पवित्र तुलसी के पत्ते अर्पित करें, क्योंकि तुलसी अर्पण के बिना विष्णु पूजा अधूरी मानी जाती है।
यदि संभव हो तो आज व्रत अवश्य रखें। दिनभर सात्विकता बनाए रखें, बाहरी भोजन से बचें और मन, वचन तथा कर्म की शुद्धि का विशेष ध्यान रखें। व्रत के दौरान अल्पाहार लिया जा सकता है।
आज दिनभर इस दिव्य मंत्र का जप करने से विशेष पुण्य और कृपा प्राप्त होती है—

“ॐ नमो भगवती मोहिनी एकादश्यै नमः”

यह मंत्र साधक के जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

रात्रि में । यह साधना भगवान की विशेष कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है।
, अपितु आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति के माध्यम से जीवन को दिव्यता की ओर ले जाने का एक दुर्लभ अवसर है। 🙏

विद्युतमानस यंत्र एक अत्यंत सूक्ष्म तांत्रिक यंत्र माना जाता है, जिसका संबंध मन, ऊर्जा और विचार तरंगों को नियंत्रित करने...
28/04/2026

विद्युतमानस यंत्र एक अत्यंत सूक्ष्म तांत्रिक यंत्र माना जाता है, जिसका संबंध मन, ऊर्जा और विचार तरंगों को नियंत्रित करने से जोड़ा जाता है। “विद्युत” अर्थात ऊर्जा और “मानस” अर्थात मन—इन दोनों के संयोग से यह यंत्र साधक के मानसिक क्षेत्र को स्थिर, तेज और प्रभावशाली बनाने का माध्यम बनता है। तांत्रिक परंपरा में इसे मानसिक विद्युत शक्ति को जाग्रत करने वाला साधन कहा गया है, जो व्यक्ति के विचारों को दिशा देने और आकर्षण शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है।

यह यंत्र मुख्यतः मन को केंद्रित करने, ध्यान में स्थिरता लाने, संकल्प शक्ति बढ़ाने और सूक्ष्म अनुभूति को जाग्रत करने के लिए उपयोग किया जाता है। कुछ साधनाओं में इसे वशीकरण, आकर्षण और संवाद शक्ति को प्रबल करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह विचार तरंगों को प्रभावी बनाने की क्षमता से जोड़ा जाता है। जो व्यक्ति लगातार मानसिक अशांति, भ्रम या निर्णय लेने में कमजोरी अनुभव करता है, उसके लिए यह यंत्र सहायक माना जाता है।

इसके लाभों की बात करें तो यह मन को स्थिर करता है, ध्यान में गहराई लाता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा को संतुलित करता है। साधक के भीतर एक प्रकार की तेजस्विता और आकर्षण उत्पन्न होने लगता है, जिससे उसके शब्द और विचार अधिक प्रभावशाली बनते हैं। आध्यात्मिक साधना में यह यंत्र अंतर्ज्ञान को भी जाग्रत करने में सहायक माना गया है।
लेकिन हर शक्ति के साथ सावधानी आवश्यक होती है। यदि इस यंत्र का उपयोग गलत उद्देश्य या असंयमित मन से किया जाए तो मानसिक असंतुलन, अधिक विचारों का दबाव या बेचैनी उत्पन्न हो सकती है। बिना गुरु मार्गदर्शन के गहरी तांत्रिक साधना में इसका प्रयोग करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि यह मन के सूक्ष्म स्तर पर कार्य करता है और गलत प्रयोग से विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं।

यह यंत्र विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त माना जाता है जो साधना, ध्यान, तंत्र या मनोवैज्ञानिक शक्ति को विकसित करना चाहते हैं। सामान्य व्यक्ति भी इसे रख सकता है, लेकिन केवल शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा के उद्देश्य से ही इसका उपयोग करना चाहिए।

इसे रखने का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। विद्युतमानस यंत्र को घर के पूजा स्थल, ध्यान कक्ष या अध्ययन स्थान में रखा जाना चाहिए, जहाँ शांति और पवित्रता बनी रहे। इसे सीधे जमीन पर नहीं रखना चाहिए, बल्कि लकड़ी या धातु के आसन पर स्थापित करना उचित होता है। साधना के समय इसे अपने सामने रखकर ध्यान करना अधिक प्रभावी माना जाता है।

अंततः यह यंत्र केवल धातु या रेखाओं का बना हुआ एक चित्र नहीं है, बल्कि यह मन की ऊर्जा को दिशा देने वाला एक माध्यम है। सही भावना, संयम और श्रद्धा के साथ इसका उपयोग किया जाए तो यह साधक के जीवन में अद्भुत परिवर्तन ला सकता है, अन्यथा यह केवल एक सामान्य यंत्र बनकर रह जाता है।

नमामीशमीशान

श्री अंबाजी उपासक ज्योतिष अहमदाबाद कॉल 9737168423काशी के पवित्र घाटों पर सांझ ढल रही थी। गंगा की धारा स्वर्णिम आभा में च...
28/04/2026

श्री अंबाजी उपासक ज्योतिष अहमदाबाद कॉल 9737168423काशी के पवित्र घाटों पर सांझ ढल रही थी। गंगा की धारा स्वर्णिम आभा में चमक रही थी, मानो स्वयं देवताओं ने उस क्षण को दिव्य बना दिया हो। उसी शांत, अलौकिक वातावरण में शिव और पार्वती विराजमान थे — जैसे समय भी उनके प्रेम के आगे ठहर गया हो।

माता पार्वती शिव के कंधे पर सिर रखे, अत्यंत शांति और स्नेह में लीन थीं। शिवजी की जटाओं से बहती गंगा, उनके हृदय की निर्मलता का प्रतीक थी। उनके नेत्रों में संसार का वैराग्य था, अपितु पार्वती के लिए उनमें अपार प्रेम भी झलक रहा था।

पार्वती ने धीमे स्वर में पूछा —
“प्रभु, आप तो विरक्त हैं, फिर भी मेरे प्रति इतना प्रेम कैसे?”

शिव मुस्कुराए, उनकी आँखों में करुणा और गहराई थी।
“देवी, मेरा वैराग्य संसार के लिए है, अपितु मेरा प्रेम केवल तुम्हारे लिए है।
तुम शक्ति हो, मैं शिव हूँ। बिना तुम्हारे मैं शून्य हूँ।”

गंगा की लहरें उस संवाद को सुनकर जैसे और भी मधुर हो उठीं।
उस क्षण काशी के घाटों पर प्रेम का एक ऐसा सत्य प्रकट हुआ —
कि सच्चा प्रेम अधिकार नहीं, अपितु समर्पण होता है।
जहाँ अहंकार नहीं, केवल एक-दूसरे में पूर्ण विलय होता है।

पार्वती ने शिव का हाथ थामते हुए कहा —
“तो क्या हमारा प्रेम कभी समाप्त नहीं होगा?”

शिव ने त्रिशूल के पास बैठते हुए उत्तर दिया —
“यह प्रेम शरीर का नहीं, आत्मा का है।
और आत्मा अनंत है… इसलिए हमारा प्रेम भी अनंत है।”

उस दिव्य क्षण में, काशी की वायु में एक मंत्र गूंज उठा —
जो केवल शब्द नहीं, बल्कि प्रेम की ऊर्जा था।

प्रेम मंत्र:
ॐ नमः शिवायै च नमः शिवाय।
शिवे प्रेम, शक्तौ समर्पणं।
अहं त्यक्त्वा, त्वमेव सर्वम्॥

जो भी इस मंत्र को सच्चे हृदय से जपता है,
उसके जीवन में प्रेम केवल आकर्षण नहीं,
अपितु आत्मिक बंधन बन जाता है।

काशी के घाट आज भी उस प्रेम के साक्षी हैं —
जहाँ शिव और पार्वती का मिलन हमें सिखाता है
कि सच्चा प्रेम कभी मांगता नहीं…
वह केवल देता है, और सदा के लिए अमर हो जाता है।

नमामीशमीशान
#शिव #पार्वती #काशी

Call me anytime anyproblem solution મા ત્રિપુરા સુંદરીનું મંત્રમુગ્ધ કરનારું સૌંદર્ય માત્ર ભૌતિક જ નથી, પરંતુ ઊંડી આધ્યા...
28/04/2026

Call me anytime anyproblem solution મા ત્રિપુરા સુંદરીનું મંત્રમુગ્ધ કરનારું સૌંદર્ય માત્ર ભૌતિક જ નથી, પરંતુ ઊંડી આધ્યાત્મિકતા છે, જે ત્રણેય લોકમાં ફેલાયેલી કૃપા, શાણપણ અને દૈવી શક્તિના પરમ સુમેળનું પ્રતીક છે. સંપૂર્ણ સુંદરતા (સૌંદર્ય) ના અવતાર તરીકે ઓળખાતી, તે એક શાંત છતાં મનમોહક આભા ફેલાવે છે જે આત્માને ઉચ્ચ ચેતના તરફ ખેંચે છે. દૈવી સિંહાસન પર બેઠેલી, આકાશી આભૂષણોથી શણગારેલી, અને શેરડીના ધનુષ્ય અને ફૂલના તીર જેવા પ્રતીકો ધારણ કરેલી, તે સૌમ્ય છતાં શક્તિશાળી માધ્યમો દ્વારા મન, ઇન્દ્રિયો અને ઇચ્છાઓ પર નિયંત્રણનું પ્રતિનિધિત્વ કરે છે. દેવીના ઉગ્ર સ્વરૂપોથી વિપરીત, તેની સુંદરતા શાંત અને જ્ઞાનપ્રદ છે, જે ભક્તોને ભય કે વિનાશ કરતાં પ્રેમ (પ્રેમ) અને આંતરિક સંતુલન દ્વારા માર્ગદર્શન આપે છે. તેનું દૈવી આકર્ષણ એ સત્યને પ્રતિબિંબિત કરે છે કે વાસ્તવિક સુંદરતા ચેતનાની શુદ્ધતા અને આધ્યાત્મિક જાગૃતિમાં રહેલી છે, જ્યાં સાધકને ખ્યાલ આવે છે કે બધા આકર્ષણ અને આનંદનો સ્ત્રોત અંદર દૈવી માતાની શાશ્વત હાજરી છે.

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