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13/11/2021

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जानें, किस समस्या के लिए कौन से मंत्र का जाप करना फलदायक होता है। 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वास...
07/11/2021

जानें, किस समस्या के लिए कौन से मंत्र का जाप करना फलदायक होता है।
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मंत्र जाप मम दृढ़ बिस्वासा। पंचम भजन सो बेद प्रकासा॥
छठ दम सील बिरति बहु करमा। निरत निरंतर सज्जन धरमा॥

भावार्थ

मेरे (राम) मंत्र का जाप और मुझमें दृढ़ विश्वास- यह पाँचवीं भक्ति है, जो वेदों में प्रसिद्ध है। छठी भक्ति है इंद्रियों का निग्रह, शील (अच्छा स्वभाव या चरित्र), बहुत कार्यों से वैराग्य और निरंतर संत पुरुषों के धर्म (आचरण) में लगे रहना॥ (मानस)

सबसे पहले ये ध्यान रखें कि मंत्र आस्था से जुड़ा है और यदि आपका मन इन मंत्रों को स्वीकार करता है तभी इसका जाप करें। मंत्र जप करते समय शांत चित्त रहने का प्रयास करें। आंखें यथासंभव बंद रखें और ध्यान दोनों आंखों के मध्य ही केन्द्रित रखें। वातावरण को अगरबत्ती, धूप या सुंगंधित पदार्थों का प्रयोग करके सुगंधित रखें। दोनों कानों के पीछे इत्र या परफ्यूम लगा लें। ईश्वर और स्वयं पर विश्वास आवश्यक है।

मंत्र शब्द का निर्माण मन से हुआ है। मन के द्वारा और मन के लिए। मन के द्वारा यानी मनन करके और मन के लिए यानी ‘मननेन त्रायते इति मन्त्रः’ जो मनन करने पर त्राण यानी लक्ष्य पूर्ति कर दे, उसे मन्त्र कहते हैं। मंत्र अक्षरों एवं शब्दों के समूह से बनने वाली वह ध्वनि है जो हमारे लौकिक और पारलौकिक हितों को सिद्ध करने के लिए प्रयुक्त होती है। यह सृष्टि प्रकाश और शब्द द्वारा निर्मित और संचालित मानी जाती है। इन दोनों में से कोई भी ऊर्जा एक-दूसरे के बिना सक्रिय नहीं हो सकती और शब्द मंत्र का ही स्वरूप है। आप किसी कार्य को या तो स्वयं करते हैं या निर्देश देते हैं। आप निर्देश या तो लिखित स्वरूप में देते हैं या मौखिक रूप में देते हैं। मौखिक रूप में दिए गए निर्देश को हम मंत्र भी कह सकते हैं। हर शब्द और अपशब्द एक मंत्र ही है। इसीलिए अपशब्दों एवं नकारात्मक शब्दों और वचनों के प्रयोग से हमें बचना चाहिए।

किसी भी मंत्र के जाप से पूर्व संबंधित देवता व गणपति के ध्यान के साथ गुरु का ध्यान, स्मरण और पूजन आवश्यक है। यदि कोई गुरु न हो तो जिस ग्रंथ से आपको मंत्र प्राप्त हुए हैं उस ग्रंथ के लेखक को अथवा शिव को मन में ही प्रणाम करें।

कभी-कभार ऐसा होता है कि आपकी गलती न होने पर भी उस कर्म के लिए आपको ही जिम्मेदार ठहराया जाता है। बेवजह के लांछन से आपका मन परेशान हो उठता है। ऐसे में इस मंत्र का जाप आपको इस समस्या से मुक्ति दिला सकता है।

ॐ ह्रीं घृणी: सूर्याय आदित्य श्रीं ।।

ॐ ह्रौं जूँ सः क्लीं क्लीं क्लीं ।।

किसी भी कृष्ण पक्ष के प्रथम रविवार से स्नान उपरांत कम से कम 5 माला प्रतिदिन करे।

जप समय सूर्योदय से 3 घंटे तक।

किसी ग्रह के फेर, भय और शंका से आप घिरे रहते हैं। ऐसे में जब कोई अपना घर से निकलता है तो अनिष्ट की आशंका मन में सताने लगती है। इस वक्त भगवान का स्मरण करते हुए आप इस मंत्र का जाप कर सकते हैं।

ॐ जूँ सः (पूरा नाम) पालय पालय सः जूँ ॐ ॐ ॐ।।

किसी भी पक्ष के प्रथम सोमवार अथवा शनिवार से स्नान उपरांत कम से कम 5 माला प्रतिदिन करे।
जप समय सूर्योदय से 3 घंटे तक।

👉 यदि आप किसी मुसीबत में पड़े हों और आपको न चाहते हुए भी मौत का भय सता रहा हो तो इस मंत्र का जाप करना शुरू कर दें।

ॐ ह्रौं जूँ सः।। ॐ त्र्यम्बकं यजामहेसुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

किसी भी पक्ष के प्रथम सोमवार अथवा शनिवार से स्नान उपरांत कम से कम 5 माला प्रतिदिन करे।
जप समय सूर्योदय से 3 घंटे या सूर्यास्त के समय।

👉यदि आप अपने करियर में खुद को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं तो इस मंत्र का जाप फलदायक साबित हो सकता है।

ॐ भूर्भुव: स्वः। तत्सवितुर् वरेण्यं ।।भर्गो देवस्य धीमहि। धियो योनः प्रचोदयात् क्लीं क्लीं क्लीं क्लीं ।।

किसी भी पक्ष के प्रथम रविवार अथवा गुरुवार से स्नान उपरांत कम से कम 5 माला प्रतिदिन करे।
जप समय सूर्योदय से 3 घंटे तक।

जब किसी भी कारणों से मन खिन्न हो और आपका मन आपके कंट्रोल में न आ रहा हो तो यह मंत्र आपको शांति प्रदान करेगा।

ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः पृथ्वी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः ।वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्वं शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

किसी भी पक्ष के किसी भी वार आरम्भ कर स्नान उपरांत कम से कम 5 माला प्रतिदिन करे।
जप समय सूर्योदय से 3 घंटे तक।

👉कोई बड़ी डील बनते-बनते बिगड़ने की कगार पर हो या फिर कोई नुकसान का भय हो तो इस मंत्र का जाप करें।

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि देवि परं सुखम् ।रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ॥

👉इम्तिहान अच्छा तो हुआ, लेकिन इसमें कामयाब होने के लिए अब भी कुछ करना चाहते हों तो यह पढ़ें।

ऐं ह्रीं ऐं॥ विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तञ्च मां कुरु ।रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ऐं ऐं ऐं॥

इसके अतिरिक्त यदि व्यक्ति अगर अपनी राशि के अनुसार मंत्र जाप करे तो निसंदेह शीघ्र सफलता मिलती है। मंत्र पाठ से व्यक्ति कई प्रकार के संकट से मुक्त रहता है। आर्थिक रूप से संपन्न हो जाता है।

साथ ही जो लोग आपकी राह में बाधा उत्पन्न करते हैं वह भी कमजोर हो जाते हैं। प्रस्तुत है आपकी राशि के अनुसार अचूक दिव्य मंत्र, इसे जपने के पश्चात किसी अन्य पूजा या तंत्र की आवश्यकता नहीं है।

मेष – Aries: ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीनारायण नम:

वृषभ – Ta**us: ॐ गौपालायै उत्तर ध्वजाय नम:

मिथुन – Gemini: ॐ क्लीं कृष्णायै नम:

कर्क – Cancer: ॐ हिरण्यगर्भायै अव्यक्त रूपिणे नम:

सिंह – Leo: ॐ क्लीं ब्रह्मणे जगदाधारायै नम:

कन्या – Virgo: ॐ नमो प्रीं पीताम्बरायै नम:

तुला – Libra: ॐ तत्व निरंजनाय तारक रामायै नम:

वृश्चिक – Scorpio: ॐ नारायणाय सुरसिंहायै नम:

धनु – Sagittarius: ॐ श्रीं देवकीकृष्णाय ऊर्ध्वषंतायै नम:

मकर- Capricon : ॐ श्रीं वत्सलायै नम:

कुंभ – Aquarius: ॐ श्रीं उपेन्द्रायै अच्युताय नम:

मीन – Pisces: ॐ क्लीं उद्धृताय उद्धारिणे नम:
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*ऋण मुक्ति साधना -*मंत्र - ॐ गणेश ऋणं छिंधि वरेण्यम हुं नमः फट।।जो भी व्यक्ति किसी ऋण से बहुत ज्यादा पीड़ित है और कर्ज चु...
27/10/2021

*ऋण मुक्ति साधना -*

मंत्र - ॐ गणेश ऋणं छिंधि वरेण्यम हुं नमः फट।।

जो भी व्यक्ति किसी ऋण से बहुत ज्यादा पीड़ित है और कर्ज चुका नही पा रहा हर तरफ से हार चुका है और कोई रास्ता नही दिख वह नीचे दी गयी विधि को अपनाएं।

सुबह और शाम में गुरुओं को प्रणाम करके ध्यान करें और ऊपर दिए हुए मन्त्र की 3 माला जप करे रुद्राक्ष की माला से और माता बगलामुखी का कवच और सहस्त्रनाम।पाठ करें फिर पुनः ध्यान करें और छमा याचना कर के उठ जाए।

दिया घी का जलेगा गाय के घी का और उसको दाहिने तरफ रखें आगे से।

आसन और वस्त्र पिला उपयोग करे।।

कुछ ही समय के अंदर आपको इस प्रयोग का असर दिखेगा वो भी उत्तम परिणाम है
इसके साथ ऋणमोचन मंगल श्रोत भी करे ।
*परिश्रम और ईमानदारी उतनी ही आवश्यक है।*

व्हाट्सएप नंबर 9484890271

Satisfied with Astrology remedies ✨🙏🏼
25/10/2021

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Husband wife together again after 7yrs !💝
25/10/2021

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21/10/2021

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*गुरुवार के दिन इन उपायों को करने से भगवान विष्णु होते हैं प्रसन्न*

गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है. भगवान विष्णु को जगत का पालनहार भी माना जाता है. हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार गुरुवार को भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने से जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है. बृहस्पति देव को बुद्धि का कारक भी माना गया है अत: गुरुवार को विष्णु भगवान की पूजा करने से ज्ञान में भी वृद्धि होती है.

इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता है कि विष्‍णु जी की पूजा से सभी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं और अच्‍छा स्‍वास्‍थ भी प्राप्‍त होता है. आइए आपको बताते हैं गुरुवार को भगवान विष्णु की पूजा कैसे करें और कौन से उपाय अपनाएं.

*विष्णु जी की पूजा विधि*

• सबसे पहले गुरुवार के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें. उसके बाद स्नान कर साफ कपड़े पहनें.

• किसी चौकी पर साफ वस्त्र बिछाकर उस पर भगवान विष्णु जी की प्रतिमा स्थापित करें.

• विष्णु जी को पीली चीजें अत्याधिक प्रिय है. इसलिए भगवान विष्णु को पीले फूल और पीले फल का भोग लगाएं.

• इसके बाद भगवान विष्णु जी को धूप व दीप दिखाएं. विष्णु जी की आरती जरूर करें.

• गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है. इसलिए इस दिन केले के वृक्ष की पूजा अवश्य करें.

*गुरुवार के उपाय*

• मान्यता है कि गुरुवार के दिन मंदिर में केसर और चने की दाल का दान करने से लाभ मिलता है. इसी के साथ गुरुवार को माथे पर तिलक लगाना भी लाभदायक होता है.

• कहते हैं कि गुरुवार के दिन अगर धार्मिक पुस्तकों का दान किया जाए तो बृहस्पति देव का आर्शीवाद प्राप्त होता है और शिक्षा में आ रही सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं.

• गुरु के दोष को दूर करने के लिए गुरुवार के दिन नहाने के पानी में चुटकी भर हल्दी डालकर स्नान करें. इसके साथ ही नहाते वक्त ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप जरूर करें.

• गुरुवार का व्रत रखें और केले के पौधे में जल अर्पित कर पूजा अर्चना करें. कहते हैं कि ऐसा करने से विवाह में आने वाली रुकावटों का समाधान होता है और अगर आप विवाहित हैं तो आपके वैवाहिक जीवन में किसी भी प्रकार की समस्या नहीं आती.

• कुंडली में मौजूद गुरु दोष को दूर करने के लिए गुरुवार के दिन विशेष रूप से सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करें और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें.

• गुरुवार के दिन न तो किसी को उधार दें और न हीं किसी से उधार लें. कहते हैं कि ऐसा करने से कुंडली में गुरु की स्थिति खराब होती है और आर्थिक तंगी का सामना भी करना पड़ सकता है.

• गुरुवार का व्रत रखने वाले इस दिन भगवान श्री सत्यनारायण की व्रत कथा जरूर सुनें या पढ़ें. कहते हैं कि ऐसा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं.

• बृहस्पति देव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस दिन खासतौर से बृहस्पति देव की मूर्ति को विधि- विधान के साथ किसी पीले वस्त्र पर स्थापित कर चंदन और पीले फूल से उनकी पूजा अर्चना करें. इसके साथ ही प्रसाद में चने की दाल और गुड़ चढ़ाएं.

• गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनना काफी शुभ माना जाता है. कहते हैं कि ऐसा करने से भाग्योदय होता है.

• बृहस्पति देव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए गुरुवार के दिन किसी बुजुर्ग ब्राह्मण को भोजन अवश्य कराएं और उनसे आशीर्वाद लें.

*प्रत्यक्ष नव दुर्गाऐं*नव दुर्गाओं की नव रात्रियों में हम हर साल पूजा करते हैं। कहते हैं कि वे अनेकों ऋद्धि−सिद्धियाँ प्...
18/10/2021

*प्रत्यक्ष नव दुर्गाऐं*

नव दुर्गाओं की नव रात्रियों में हम हर साल पूजा करते हैं। कहते हैं कि वे अनेकों ऋद्धि−सिद्धियाँ प्रदान करती हैं। सुख सुविधाओं की उपलब्धि के लिए, उनकी कृपा और सहायता करने के लिए विविध विधि साधन पूजन किये जाते हैं। जिस प्रकार देवलोक में निवासिनी नवदुर्गाऐं हैं उसी प्रकार भू−लोक में निवास करने वाली, हमारे अत्यन्त समीप−शरीर और मस्तिष्क में ही रहने वाली—नौ प्रत्यक्ष देवियाँ भी हैं और उनकी साधना का प्रत्यक्ष परिणाम भी मिलता है। देव−लोक वासिनी देवियों के प्रसन्न होने और न होने की बात संदिग्ध भी हो सकती है पर शरीर लोक में रहने वाली इन देवियों की साधना का श्रम कभी भी व्यर्थ नहीं जा सकता। यदि थोड़ा भी प्रयत्न इनकी साधना के लिए किया जाय तो उसका भी समुचित लाभ मिल जाता है। हमारे मनःक्षेत्र में विचरण करने वाली इन नौ देवियों के नाम है :—

(1) आकाँक्षा (2) विचारणा (3) भावना (4) श्रद्धा (5) निष्ठा (6) प्रवृत्ति (7) क्षमता (8) क्रिया (9) मर्यादा। इनका संतुलित विकास करके मनुष्य अष्ट−सिद्धियों और नव−सिद्धियों का स्वामी बन सकता है। संसार के प्रत्येक प्रगतिशील मनुष्य को जाने या अनजाने में इनकी साधना करनी ही पड़ी है और इन्हीं के अनुग्रह से उन्हें उन्नति के उच्च शिखर पर चढ़ने का अवसर मिला है।

*अखण्ड ज्योति*
*सितंबर 1962*

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Ahmedabad
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