04/06/2021
🙏🙏जून~4
बनाओ,बिगाड़ो मत
“आज के दिन अपने बारे में नकारात्मक भावनाओं के स्थान पर हमारा दूसरों के लिए एक सकारात्मक लगाव है!”
बेसिक टेक्स्ट पृष्ठ..15
अनाप-शनाप की गपशप हमारे अंदर छुपी हमारी अनजान भूख को चारा पानी देती है! कभी-कभी हम सोचने लगते हैं कि अपने बारे में अच्छा महसूस करने के लिए बेहतर रास्ता यही है कि हम अपने से तुलना करते हुए दूसरों को बुरा बताएं! दूसरों की कीमत पर खरीदी गई स्वाभिमान की चाल ढाल एकदम खोखली और मूल्यहीन होती है!
तब हम अपने प्रति अपनी नकारात्मक संवेदना से कैसे सुलटें ? एकदम आसान है - हम इसे दूसरों के प्रति एक सकारात्मक बोध में बदल दें ! अपने छिछले स्वाभिमान के खोल में बंद रहने से बेहतर है कि हम उनकी तरफ मुखातिब हो , जो हमारे आसपास चारों ओर बिखरे हुए हैं और कुछ कारगर ढंग से उनकी सेवा करें!
लग सकता है कि इस तर्क से हम असली मुद्दे से आंखें चुरा रहे हो , पर ऐसा है नहीं ! अपने स्वयं के प्रति एक ओछी संवेदना के खोल में सिमटकर हम कुछ नहीं कर सकते , सिवाय इसके लिए हम अपनी बेचारगी के दायरे में इधर-उधर हाथ-पांव मारते रहे ! लेकिन अपनी इस बेचारगी को दूसरों के प्रति एक सक्रिय प्रेम बोध में बदल कर हम भी उन लोगों में शामिल हो सकते हैं जिन्हें इज्जत की निगाह से देखा जाता है!
अपने स्वाभिमान को बनाने संवारने का तौर तरीका यह नहीं है कि हम दूसरों को नीचा दिखाए , अपितु उनके प्रति प्यार और सकारात्मक लगाव से उन्हें ऊंचा उठाएं ! दूसरों की मदद करने के लिए ऐसे एहसास से भर कर ही हम अपने स्वयं से पूछ सकते हैं कि क्या हम भी समस्याओं के समाधान में कुछ अपना योगदान दे रहे हैं ! आज हम विनाश के स्थान पर निर्माण का मार्ग चुन सकते हैं!
सिर्फ आज के दिन : - यद्यपि मैं अपने को बहुत कुछ महसूस कर रहा हूँ पर अपने को ऊंचा उठाने के लिए मुझे अब किसी को नीचा दिखाने की जरूरत नहीं है ! आज, मैं अपनी नकारात्मक संवेदना जो दूसरों के प्रति एक सकारात्मक बोध में बदल दूंगा! आप मैं बनाऊंगा , बिगाड़ूगाँ नहीं।