Dr.Jagdeesh Singh Patel

Dr.Jagdeesh Singh Patel Dr. J P

01/04/2024

हार्ट अटैक की बुनियादी जानकारी

प्राथमिक लक्षण है

सीने में दर्द होना।
यह एक pressure, heaviness या tightness जैसे भी महसूस हो सकता है।
यह दर्द पेट के ऊपर की तरफ जाता है कभी बायें हाथ या कंधे की तरफ जाता है कई बार जबड़े में या दांत में भी दर्द हो सकता है।
सांस लेने में तकलीफ और पसीना आना।
कुछ लोगो को गैस होने की फीलिंग आती है।

हार्ट अटैक आने पर क्या करें?

सबसे पहले मदद के लिए एम्बुलेंस को कॉल करें या आपके पास अपना साधन है जिससे आप अस्पताल पहुँच सकते हैं तो उसे तैयार करने को कहें।
नज़दीक में जो भी व्यक्ति या मित्र है उसे भी तुरंत आने को कहें।

जब तक गाड़ी तैयार होगी या एम्बुलेंस आएगा तब तक प्राथमिक तौर पर Aspirin की गोली मरीज़ को दें और चबाने को कहें।

Aspirin रक्त की धमनियों में Clotting को रोकती है।

मरीज़ को तब तक उचित जगह बैठने या लेटने को कहें जहाँ उन्हें आराम हो।

अगर घर में sorbitrate की 5mg की टेबलेट हो तो उसे जीभ के नीचे रखनी है।

अगर मरीज़ होश में नहीं है तो कुछ भी पिलाने की कोशिश ना करें। मरीज़ अगर साँस नहीं ले रहा, पल्स नहीं मिल रहा वैसी परिस्तिथि में तुरंत CPR शुरू करें।

एम्बुलेंस आते ही या गाड़ी तैयार होते ही अस्पताल के लिए निकल जायें।

अगर नज़दीकी अस्पताल का नंबर है तो उन्हें रास्ते से ही सूचित कर दें कि आप ऐसे किसी मरीज़ को ले कर अस्पताल पहुँच रहे हैं ताकि वो भी तैयार रहें।

23/11/2023

Diabetes को लेकर तथ्य

1) Diabetes होने का मतलब ये नहीं की ये ठीक नहीं हो सकता। कई मामलों में Diabetes रिवर्स हो सकता है।

2) ज़्यादा मीठा खाने से Diabetes नहीं होता। पर डाइबीटीज़ होने के बाद ख़ान पान में संयम रखें।

3) डायबिटीज़ में ख़ानपीन को लेकर कई भ्रांतियाँ हैं मसलन चावल नहीं खा सकते या फल नहीं खा सकते। आप चावल और फल दोनों ले सकते हैं।
आप अपना नियमित आहार लें बस मात्रा संयमित लें, खाने में फ़ाइबर की मात्रा अधिक रखें।

4) अगर आपके माता पिता को डायबिटीज है तो आपको डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है।

5) एक बार insulin लेने का ये मतलब नहीं कि ज़िंदगी भर इन्सुलिन लेनी पड़ेगी। अगर डॉ ने इन्सुलिन लेने की सलाह दी है तो बिलकुल लें। Insulin काफ़ी सुरक्षित दवाई है।

6) अगर आपको डायबिटीज है और वो नियंत्रण में नहीं है तो ये आपके कई अंगों को प्रभावित कर सकता है ख़ास कर किडनी और आँखों को।

7) जितनी ज़रूरी शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना है उससे ज़्यादा ज़रूरी ये है की शुगर लेवल ज़रूरत से ज़्यादा कम ना हो।

8) अपने पैरों पर विशेष ध्यान दें। अगर शुगर लेवल अत्यधिक बढ़ा है तो पैर का कोई भी घाव पैरों को काटने की वजह बन सकता है।

9) डायबिटीज से डरें, डायबिटीज के इलाज से नहीं। अगर बीमारी है तो नियमित अंतराल पर घर पर ही शुगर की जाँच करते रहें। किसी भी अच्छी कंपनी का मशीन ले सकते हैं। अगर मशीन को लेकर संशय है तो लैब और मशीन के रिजल्ट को compare कर के देख लें। 20 यूनिट से ज़्यादा का अंतर अगर नहीं है तो मशीन ठीक है

10) आपका संयमित भोजन और physical exercise आपको डायबिटीज और उसके होने वाले दुष्प्रभावों से बचा सकता है।
Diabetes reversal program aur wellness centre जैसे जगह पर आपके पैसों की बर्बादी होगी। ख़ुद थोड़ा परिश्रम करेंगे तो स्वास्थ्य और पैसे दोनों बचेंगे।

Q: I still have lingering cough, fatigue or loss of smell after 2-3 weeks of symptom onset. My repeat test is + too. Am ...
29/01/2021

Q: I still have lingering cough, fatigue or loss of smell after 2-3 weeks of symptom onset. My repeat test is + too. Am I contagious?

A:No. Symptoms may persist for weeks but patients don’t shed viable virus after 10-days and are NOT contagious thereafter. Don’t repeat COVID PCR+

12/09/2018

डेंगी ( डेंगू) यानी केवल प्लेटलेटों की कमी नहीं !

डेंगी में सबसे महत्त्वपूर्ण उतार-चढ़ाव तरल का है। मुख्य रक्तधारा से फ्लूइड के निकल जाने के कारण ही स्थिति गम्भीर होती है : प्लेटलेटों की कमी से होता ख़ून का बहाव उसी आग में घी का काम करता है।
डेंगी में सबसे बड़ी समस्या कैपिलरी-लीक की होती है , इसे समझिए। कैपिलरी या केशिकाएँ वे नन्हीं रक्तवाहिनियाँ होती हैं , जिनकी दीवार इस बीमारी में अधिक छिद्रदार हो जाती है। इस कारण केशिकाओं से ख़ून का द्रव रिस कर शरीर में ही आसपास जमा होने लगता है। ( ध्यान रहे : कैपिलरी-लीक में केशिकाओं से बाहर निकल कर इंटरस्टिशियम में जमा होता तरल कहीं जाता नहीं है : वह आपके शरीर के भीतर ही रहता है। बस वह किसी उपयोग का नहीं रह जाता। ) तरल प्लाज़्मा की इसी कमी के कारण ब्लडप्रेशर गिरने लगता है और हिमैटोक्रिट बढ़ने लगता है।

तीन जाँचें जो डेंगी के रोगी में सबसे महत्वपूर्ण हैं : वे ब्लडप्रेशर , हिमैटोक्रिट और प्लेटलेट-काउंट हैं। केवल प्लेटलेट पर ध्यान देना न सिर्फ़ अपूर्ण है , बल्कि कई बार बड़ी हानि भी पैदा कर सकता है।

डेंगी की शुरुआत में होने वाले बुख़ार और बदनदर्द के लिए किसी दवा का सेवन अपने-आप कभी नहीं करना चाहिए। पैरासीटामॉल के सिवा कोई भी अन्य दवा हानिकारक हो सकती है और लेने-के-देने पड़ सकते हैं।
दूसरी बात तरल पदार्थों की मुँह से प्रचुर पूर्ति है। मुँह से इस तरह लिया जाता फ्लूइड ब्लडप्रेशर के गिरने के खिलाफ़ एक प्रतिरोध होता है।
लेकिन फिर भी चिकित्सक से सम्पर्क बनाये रखना चाहिए और उसकी राय पर कान धरना चाहिए। अमूमन प्लेटलेटों की गिरती संख्या आम तौर पर जब बीस हज़ार के नीचे हो , तभी डॉक्टर प्लेटलेट चढ़ाने की सलाह देते हैं। अधिक स्तर होने पर प्लेटलेट चढ़ाना अधिकतर अनावश्यक है और उसका कोई लाभ नहीं है। इसलिए उपचार कर रहे चिकित्सक की सलाह पर चलना चाहिए।

डेंगी के उपचार का अर्थ केवल और केवल प्लेटलेट बढ़ाकर जान बचाना नहीं है। जान तभी बचेगी , जब मरीज़ का कैपिलरी-लीक ठीक होगा।

✍🏻Skand Shukla

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Moti Lal Nehru Medical College
Allahabad
284405

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