Priti Hospital

Priti Hospital We believe in putting our best efforts and healing with a human touch.

25/05/2026

गर्भावस्था के दौरान अपने डॉक्टर से नियमित रूप से मिलना (प्रसवपूर्व देखभाल) एक स्वस्थ प्रेगनेंसी और सुरक्षित डिलीवरी के लिए सबसे जरूरी कदम है। इससे आपके और शिशु के विकास की निगरानी होती है।
गर्भावस्था की पूरी अवधि (लगभग 9 महीने) के दौरान डॉक्टर से मिलने का एक सामान्य कार्यक्रम (schedule) इस प्रकार होता है:
डॉक्टर से मिलने का समय (Checkup Schedule):-
1)पहली से दूसरी तिमाही (पहले 7 महीने तक): आमतौर पर हर 4 सप्ताह में एक बार डॉक्टर के पास जाना होता है।
2)तीसरी तिमाही (आठवां महीना): हर 2 सप्ताह में एक बार।
3)अंतिम महीना (36वें सप्ताह से डिलीवरी तक): सप्ताह में एक बार। [1]
डॉक्टर के पास जाने का महत्व:-
1)जांच (Tests): डॉक्टर आपके और बच्चे के स्वास्थ्य की जांच करते हैं, जिसमें ब्लड प्रेशर मापना, वजन की निगरानी, और अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) शामिल होते हैं।
2)दवाएं और विटामिन: आपको प्रेगनेंसी के दौरान जरूरी सप्लीमेंट्स (जैसे आयरन, कैल्शियम और फोलिक एसिड) दिए जाते हैं।
3)स्क्रीनिंग: आनुवंशिक जांच और मधुमेह (शुगर) टेस्ट के जरिए किसी भी जटिलता को समय रहते पकड़ा जा सकता है।
डॉक्टर से क्या पूछें:-
हर चेकअप के दौरान आपको अपने डॉक्टर से खुलकर बात करनी चाहिए। आप उनसे निम्नलिखित सवाल पूछ सकते हैं :
1)मुझे अपने खान-पान में क्या शामिल करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए?
2)मेरे लिए कौन से व्यायाम (Exercise) सुरक्षित हैं?
3)प्रसवपूर्व विटामिन या सप्लीमेंट्स कब और कैसे लेने हैं?
4)मुझे किन असामान्य लक्षणों (जैसे ब्लीडिंग, अत्यधिक उल्टी या चक्कर आना) को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

24/05/2026

साइनसाइटिस को बोलचाल में 'साइनस का इन्फेक्शन' या 'नजला' कहा जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें नाक के आसपास चेहरे की हड्डियों के भीतर स्थित खाली जगह (साइनस) में सूजन आ जाती है। इसके कारण सांस लेने में दिक्कत, सिरदर्द और चेहरे पर दबाव महसूस होता है।
साइनसाइटिस के लक्षण:-
साइनस संक्रमण के दौरान आमतौर पर निम्नलिखित समस्याएं होती हैं:
नाक का बंद होना या बहुत अधिक गाढ़ा स्राव (बलगम) निकलना।
चेहरे, माथे, आंखों के आसपास और दांतों में दर्द या दबाव महसूस होना।
गंभीर सिरदर्द, जो आगे झुकने पर और बढ़ जाता है।
सूंघने या स्वाद लेने की क्षमता का कम होना।
गले में खराश और सूखी खांसी।
थकान, हल्का बुखार और मुंह से दुर्गंध आना।
साइनसाइटिस के कारण:-
यह समस्या मुख्य रूप से तब होती है जब साइनस का निकास मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और वहां बलगम जमा हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया, वायरस या फंगस पनपने लगते हैं:
वायरल संक्रमण: सर्दी-जुकाम या इन्फ्लूएंजा।
एलर्जी: धूल, मिट्टी या परागकणों से एलर्जी।
संरचनात्मक समस्याएँ: नाक की हड्डी का टेढ़ा होना या नेज़ल पॉलिप्स (नाक में मांस का बढ़ना)।
साइनसाइटिस के प्रकार:-
अवधि के आधार पर इसे चार भागों में बांटा जा सकता है:
एक्यूट: 4 सप्ताह से कम समय तक रहने वाला, आमतौर पर सर्दी से जुड़ा।
सब-एक्यूट: 4 से 12 सप्ताह तक रहने वाला।
क्रोनिक: 12 सप्ताह या उससे अधिक समय तक रहने वाला।
रिकरेंट: जो एक साल में बार-बार होता है।
बचाव और घरेलू उपाय:-
तीव्र साइनसाइटिस के लक्षणों को इन उपायों से कम किया जा सकता है:
भाप लेना (Steam): गर्म पानी की भाप लेने से बंद नाक खुलती है और बलगम ढीला होता है。
गर्म सिकाई: चेहरे पर दर्द वाले हिस्सों में गर्म तौलिये से सिकाई करने से आराम मिलता है।
हाइड्रेशन: दिन भर गुनगुना पानी पीते रहें, जिससे शरीर में नमी बनी रहे।
नेज़ल स्प्रे: नाक को साफ रखने के लिए खारे पानी के नेज़ल ड्रॉप्स का उपयोग किया जा सकता है।
डॉक्टर से परामर्श कब करें?
यदि लक्षण 10 से 12 दिनों से अधिक समय तक बने रहें, घरेलू उपायों से राहत न मिले, या आपको तेज बुखार और अत्यधिक सिरदर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

23/05/2026

मेडी असिस्ट (Medi Assist) एक प्रमुख थर्ड-पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) कंपनी है। यह आपकी स्वास्थ्य बीमा कंपनी और प्रीति अस्पताल के बीच एक सेतु (Link) का काम करती है। यह प्रीति अस्पताल में कैशलेस इलाज की सुविधा को मैनेज करने और मेडिकल क्लेम प्रोसेस करने में मदद करती है।
मेडी असिस्ट कैसे काम करता है?
कैशलेस सुविधा: यदि आप प्रीति अस्पताल (नेटवर्क हॉस्पिटल) में भर्ती होते हैं, तो मेडी असिस्ट आपके इंश्योरेंस क्लेम का वेरिफिकेशन करके सीधा अस्पताल को पेमेंट करता है।
नेटवर्क अस्पताल: इसके जरिए आप भारत के हजारों नेटवर्क अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
क्‍या कवर नहीं है: प्रीति अस्पताल से डिस्चार्ज होने के समय, आपको केवल उन खर्चों का भुगतान करना होता है जो आपकी पॉलिसी में कवर नहीं हैं (जैसे- कॉन्समेबल आइटम्स या को-पे)।
महत्वपूर्ण सेवाएं और संसाधनक्लेम प्रक्रिया: अस्पताल के टीपीए (TPA) डेस्क पर जाकर प्री-ऑथराइजेशन फॉर्म जमा करें। मेडी असिस्ट आपके आवेदन की समीक्षा करके कैशलेस सुविधा को मंजूरी देता है।
ऑनलाइन पोर्टल: अपने ई-कार्ड डाउनलोड करने, क्लेम ट्रैक करने और नेटवर्क अस्पतालों की लिस्ट देखने के लिए मेडी असिस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करें।
मोबाइल ऐप: यात्रा के दौरान या त्वरित सेवाओं के उपयोग के लिए आप Medi Assist Healthcare Services Google Play App डाउनलोड कर सकते हैं।

22/05/2026

क्या मोटापा एक कार्डियोमेटाबोलिक जोखिम कारक है?
हाल ही में पब्लिश हुए एक वैश्विक अध्ययन के अनुसार, सामान्य बॉडी मास इंडेक्स (BMI) वाले 5 में से 1 से अधिक वयस्कों में पेट की चर्बी (एब्डोमिनल ओबेसिटी) पाई जाती है। सामान्य वजन के बावजूद पेट में यह अतिरिक्त फैट सीधे तौर पर हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी खतरनाक कार्डियोमेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा हुआ है।
सामान्य BMI और पेट का मोटापा:
समस्या क्या है: बॉडी मास इंडेक्स (BMI) केवल आपके वजन और लंबाई का अनुपात बताता है। अक्सर लोग पतले या सामान्य वजन (Normal BMI: 18.5 - 24.9) के दिखते हैं, लेकिन उनके पेट के हिस्से (Visceral Fat) में अस्वास्थ्यकर वसा जमा हो जाती है।
वेस्ट सरकम्फ्रेंस (कमर की माप): कमर की चौड़ाई, वजन करने वाली मशीन से ज्यादा महत्वपूर्ण है। पुरुषों में कमर => 94 सेमी और महिलाओं में => 80 सेमी होना एब्डोमिनल ओबेसिटी का संकेत माना जाता है।
कार्डियोमेटाबॉलिक जोखिम:
पेट के हिस्से में जमा चर्बी (Belly fat) शरीर के अंदर सूजन पैदा करने वाले रसायन (Inflammatory chemicals) छोड़ती है, जो आर्टरी (धमनियों) को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे निम्नलिखित बीमारियों का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है:
हाई बीपी (Hypertension): ब्लड प्रेशर का सामान्य से अधिक होना।
शुगर (Diabetes): इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण टाइप-2 डायबिटीज का खतरा।
कोलेस्ट्रॉल (Dyslipidemia): ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) का कम होना।
बचाव और लाइफस्टाइल:
सक्रिय रहें: प्रतिदिन 30-45 मिनट तेज वॉक करें।
खान-पान में बदलाव: चीनी, प्रोसेस्ड फूड, और तेल-मसाले वाले भोजन का सेवन कम करें। अपनी डाइट में फाइबर, हरी सब्जियां और सलाद शामिल करें।
नींद और तनाव: रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लें और तनाव (Stress) को नियंत्रित करें।
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20/05/2026

भीषण गर्मी और हीट वेव (लू) से बचने के लिए क्या करना चाहिए?
भीषण गर्मी और हीट वेव (लू) से बचने के लिए सबसे जरूरी है शरीर में पानी की कमी न होने देना और सीधे धूप के संपर्क में आने से बचना। बाहर निकलते समय सिर ढककर रखें, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और प्यास न लगने पर भी हर घंटे पानी पीते रहें।
हीट वेव (लू) से बचने के लिए आपको नीचे दिए गए मुख्य उपायों का पालन करना चाहिए:
💧 हाइड्रेटेड रहें (शरीर में पानी की कमी न होने दें)
• पर्याप्त पानी पिएं: दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पिएं।
• इलेक्ट्रोलाइट्स का सेवन करें: केवल सादे पानी के अलावा नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी, बेल का शरबत, या ओआरएस (ORS) का घोल पीते रहें ताकि पसीने से निकले लवण की भरपूर्ति हो सके।
👗 पहनावा और धूप से बचाव
• सही कपड़े चुनें: हल्के वजन के, हल्के रंग (सफेद या क्रीम) वाले और ढीले सूती कपड़े पहनें।
• सिर को ढककर रखें: धूप में बाहर निकलते समय हमेशा छाता लगाएं या सिर को टोपी/गमछे से अच्छी तरह ढक कर रखें।
• धूप का चश्मा: आँखों को सूरज की हानिकारक UV किरणों से बचाने के लिए अच्छी क्वालिटी का सनग्लासेस (धूप का चश्मा) पहनें।
• सनस्क्रीन: बाहर जाने से पहले अच्छी सनस्क्रीन क्रीम लगाएं।
☀️ घर के अंदर और बाहर रहने के नियम
• समय का ध्यान रखें: दोपहर 12 बजे से शाम 3-4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें।
• घर को ठंडा रखें: दिन के समय खिड़कियों और पर्दों को बंद रखें, ताकि गर्म हवा और धूप अंदर न आ सके। शाम और रात में खिड़कियां खोलें ताकि ठंडी हवा अंदर आ सके।
• भारी काम से बचें: धूप में ज्यादा शारीरिक मेहनत वाले काम (जैसे कसरत, भारी वजन उठाना) करने से बचें।
🚨 हीट स्ट्रोक (लू लगने पर) क्या करें?
• तुरंत छांव में जाएं: अगर किसी को लू लग जाए या घबराहट हो, तो उसे तुरंत किसी ठंडी जगह या छाया में लिटा दें।
• शरीर को ठंडा करें: उनके शरीर पर ठंडा पानी डालें या गीले कपड़े से शरीर पोंछें।
• ढीले कपड़े: पीड़ित के टाइट कपड़े ढीले कर दें और उन्हें धीरे-धीरे पानी पिलाएं।

20/05/2026

विटामिन B12 शरीर के लिए एक अत्यंत आवश्यक पोषक तत्व है जो नसों को स्वस्थ रखने, नई लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) के निर्माण और डीएनए (DNA) बनाने में मदद करता है। शरीर इसे खुद नहीं बना सकता, इसलिए इसे भोजन या सप्लीमेंट्स के जरिए लेना जरूरी है।
⚠️ विटामिन B12 की कमी के लक्षण:-
शरीर में इस विटामिन की कमी होने पर आपको कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं :
अत्यधिक थकान: हर समय कमजोरी और सुस्ती महसूस होना।
नसों की समस्या: हाथ-पैरों में सुन्नता या झुनझुनी (सुई चुभने जैसा) होना।
याददाश्त कमजोर होना: मानसिक थकान या याददाश्त में कमी।
त्वचा में पीलापन: खून की कमी (एनीमिया) के कारण त्वचा का रंग फीका पड़ना।
मुंह के छाले: जीभ में सूजन, लालिमा या मुंह में बार-बार छाले होना।
🍗 विटामिन B12 के प्रमुख स्रोत:-
प्राकृतिक रूप से विटामिन B12 मुख्य रूप से मांसाहारी और डेयरी उत्पादों में पाया जाता है।
मांसाहारी स्रोत: मछली, चिकन, मटन और अंडे।
शाकाहारी स्रोत: दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद।
फोर्टिफाइड फूड्स: शाकाहारी लोग विटामिन B12 से भरपूर (फोर्टिफाइड) अनाज, सोया उत्पाद और ओट्स का सेवन कर सकते हैं।

💊 आवश्यकता और बचाव:-
एक सामान्य वयस्क को प्रतिदिन लगभग 2.4 माइक्रोग्राम (mcg) विटामिन B12 की आवश्यकता होती है। शाकाहारी और वीगन (Vegan) लोगों में इस विटामिन की कमी होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
यदि आपमें कमी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत किसी भी नजदीकी लैब में जाकर अपना ब्लड टेस्ट (B12 Test) जरूर करवाएं। डॉक्टर की सलाह पर आप विटामिन B12 के सप्लीमेंट्स (गोलियां या इंजेक्शन) भी ले सकते हैं।

19/05/2026

चलते समय बर्न होने वाली कैलोरी किसी भी एक्टिविटी के दौरान शरीर जितनी कैलोरी बर्न करता है, वह व्यक्ति के बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) और एक्टिविटी की तीव्रता पर निर्भर करता है, जिसे मेटाबॉलिक इक्विवैलेंट्स (METs) में मापा जाता है।
इसका फ़ॉर्मूला यह है: बर्न हुई कैलोरी = (BMR x METs) ÷ 24 x एक्टिविटी की अवधि (घंटों में)।
इस फ़ॉर्मूले का इस्तेमाल करके यह हिसाब लगाया जा सकता है कि पैदल चलने से शरीर कितनी कैलोरी बर्न करता है। ऐसा करने के लिए, सबसे पहले BMR और METs के बारे में समझना ज़रूरी है।
ऑनलाइन कैलकुलेटर का इस्तेमाल करके यह सारी जानकारी एक साथ इकट्ठा करने के बाद, अब यह हिसाब लगाना मुमकिन है कि पैदल चलते समय शरीर कितनी कैलोरी बर्न करता है।
उदाहरण के लिए, एक 40 साल के पुरुष का वज़न 195 lbs और लंबाई 69″ (5’9″) है, तो उसका BMR 1,885.2 होगा। अगर वह 1 घंटे तक तेज़ गति से चलता है, तो वह 259.2 कैलोरी बर्न करेगा।
इस जानकारी के साथ फ़ॉर्मूला इस प्रकार है: BMR (1,885.2) x METs (3.3) ÷ 24 x एक्टिविटी की अवधि (घंटों में) (1) = 259.2 कैलोरी।

17/05/2026

विश्व उच्च रक्तचाप दिवस पर डॉक्टरों का मुख्य संदेश यह है कि हाई बीपी एक "साइलेंट किलर" है। अतः बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी यह हृदय और मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा सकता है। अपने रक्तचाप को हमेशा नियंत्रित रखें और नियमित रूप से इसकी जांच जरूर करवाएं। प्रीति हॉस्पिटल के डॉक्टरों द्वारा दिए गए कुछ सुझाव है ••••
1. नियमित जांच:
अपने ब्लड प्रेशर को नियमित रूप से चेक कराते रहें। बीपी 120/80 mmHg सामान्य रक्तचाप होता है। यदि आपका बीपी 140/90 mmHg या इससे अधिक रहता है, तो बिना देरी किए डॉक्टर से परामर्श लें।
2. संतुलित और कम नमक वाला आहार:
अपने दैनिक आहार में नमक की मात्रा कम करें (दिनभर में ५ ग्राम या १ चम्मच से कम)। प्रोसेस्ड और जंक फूड से बचें, क्योंकि इनमें सोडियम बहुत अधिक होता है। फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज ज्यादा खाएं।
3. सक्रिय जीवनशैली:
प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक सैर, योग, या हल्का व्यायाम जरूर करें। नियमित शारीरिक गतिविधि बीपी को नियंत्रित रखने में सबसे ज्यादा मददगार है।
4. तनाव से दूरी:
तनाव, चिंता और पर्याप्त नींद न लेने से रक्तचाप बढ़ता है। योग और प्राणायाम के जरिए मानसिक शांति बनाए रखें।
5. नशा मुक्त रहें :
धूम्रपान और शराब का सेवन रक्त वाहिकाओं को कमजोर करता है, इसलिए इसे छोड़ने में ही भलाई है।
6. दवाइयों का सही समय पर सेवन:
यदि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है और डॉक्टर ने दवाएं लिखी हैं, तो उन्हें कभी भी अपनी मर्जी से न छोड़ें।


16/05/2026

गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित कर सकती है?
गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज (चाहे पहले से हो या गर्भकालीन मधुमेह) माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। डॉक्टर आंचल गुप्ता का कहना है कि गर्भावस्था पर मधुमेह के प्रभावों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में समझा जा सकता है:-
माँ पर प्रभाव••••
उच्च रक्तचाप: डायबिटीज के कारण प्रेगनेंसी में ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
सी-सेक्शन: जब बच्चे का आकार आवश्यकता से अधिक बड़ा हो जाता है, तो डॉक्टर को सर्जिकल डिलीवरी का निर्णय लेना पड़ता है।
भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज: जिन महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान जेस्टेशनल डायबिटीज होती है, उन्हें भविष्य में टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा अधिक रहता है।
बच्चे पर प्रभाव••••
अत्यधिक वजन: माँ के खून में बढ़ा हुआ ग्लूकोज बच्चे तक पहुँचता है, जिससे बच्चे का वजन सामान्य से बहुत अधिक हो सकता है।
साँस लेने में कठिनाई: समय से पहले जन्म या फेफड़े पूरी तरह विकसित न होने के कारण नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
कम ब्लड शुगर: जन्म के तुरंत बाद बच्चे का ब्लड शुगर खतरनाक स्तर तक गिर सकता है।
बचाव और प्रबंधन••••
यदि आपको पहले से डायबिटीज है या प्रेगनेंसी में यह समस्या होती है, तो संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और इंसुलिन थेरेपी की मदद से ब्लड शुगर को सामान्य रखा जा सकता है।

14/05/2026

क्या कम नींद या खराब नींद सीधे तौर पर हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाती है?
हाल के एक शोध के अनुसार, रोजाना सोने का समय अनियमित होने (कभी जल्दी, कभी बहुत देर) और 8 घंटे से कम नींद लेने से दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक का खतरा दोगुना तक बढ़ सकता है। फिनलैंड में 3,000 से अधिक लोगों पर एक दशक तक किए गए अध्ययन से पता चला है कि सोने का अनिश्चित समय 40 की उम्र के बाद दिल के लिए सबसे अधिक खतरनाक है, जो सीधे तौर पर खराब नींद और हृदय रोगों के बीच संबंध को पुख्ता करता है।
मुख्य बिंदु:
दोहरा खतरा: यदि आप सोने का समय और अवधि (8 घंटे से कम) दोनों में लापरवाही बरतते हैं, तो हृदय रोगों का खतरा लगभग 100% बढ़ जाता है।
सोने का समय (Bedtime) महत्वपूर्ण: सुबह उठने के समय की तुलना में, रात को "सोने का समय" समान न होना दिल के लिए अधिक हानिकारक पाया गया है।
वैज्ञानिक कारण: अनियमित नींद से शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक बिगड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर, हृदय गति और चयापचय पर नकारात्मक असर पड़ता है।
अन्य जोखिम: कम या खराब नींद से स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है, सूजन होती है, और धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के मुख्य कारण हैं।
दिल को बचाने के लिए उपाय:
रूटीन बनाएं: रोज एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें, भले ही वीकेंड हो।
7-8 घंटे की नींद: हर रात पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद लें।
स्क्रीन टाइम कम करें: सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन या टीवी (स्क्रीन) का इस्तेमाल बंद कर दें।
तनाव कम करें: योग या मेडिटेशन का सहारा लें, क्योंकि खराब नींद और तनाव मिलकर दिल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं।

13/05/2026

क्या आप बच्चे की प्लानिंग कर रहे हैं और असमंजस में हैं?
प्रेगनेंसी प्लान करना एक बड़ा और सुखद निर्णय है, लेकिन इसमें उलझन होना बहुत सामान्य है। यह एक ऐसा समय होता है जब सही जानकारी होना बहुत ज़रूरी है।
यहाँ डॉक्टर अंचल गुप्ता द्वारा कुछ मुख्य टिप्स और बातें बताए गई हैं जो आपकी उलझन दूर करने में मदद कर सकती हैं:
1. डॉक्टर से सलाह:
• कब जाएँ? अगर आपकी उम्र 30 से कम है और आप 1 साल से ट्राई कर रहे हैं, या 30 से ज़्यादा है और 6 महीने से ट्राई कर रहे हैं, तो डॉक्टर से मिलें। 35 से अधिक उम्र होने पर पहले ही दिन से परामर्श लें।
• क्या करें? डॉक्टर से मिलकर अपनी फर्टिलिटी और फोलिक एसिड सप्लीमेंट्स के बारे में बात करें।
2. सही समय की पहचान:
• ओव्यूलेशन: सबसे ज़रूरी है कि आपको पता हो कि अंडा कब बनता है। यह आमतौर पर पीरियड्स के 14वें दिन के आसपास होता है (28 दिन की साइकिल में)।
• फर्टाइल विंडो: पीरियड के पहले दिन से लेकर अगले पीरियड के पहले दिन तक, बीच के दिनों (11-16) में संबंध बनाने से गर्भधारण की संभावना सबसे अधिक होती है।
3. लाइफस्टाइल में बदलाव:
• हेल्दी डाइट: फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम से भरपूर भोजन करें।
• नशे से दूरी: धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूर रहें।
• तनाव मुक्त रहें: मानसिक रूप से तैयार होना बहुत जरूरी है।
4. जरूरी टेस्ट:
• महिला के लिए: थायराइड, प्रोलैक्टिन, और AMH (एग क्वालिटी/क्वांटिटी के लिए)।
• पुरुष के लिए: सीमेन एनालिसिस - स्पर्म क्वालिटी चेक करने के लिए।
5. दूसरा बच्चा कब प्लान करें?
• दो बच्चों के बीच कम से कम 3 साल का अंतर रखने की सलाह दी जाती है ताकि माँ की बॉडी रिकवर हो सके।
#महिलाडॉक्टर
#महिलाचिकित्सक
#डॉक्टरनी
#महिलाक्लीनिक
#जच्चाडॉक्टर














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