08/07/2026
� लीच थेरेपी (Leech Therapy / जलौका चिकित्सा / रक्तमोक्षण) – आयुर्वेद की प्राचीन एवं वैज्ञानिक उपचार पद्धति
सुश्रुत संहिता में जलौका (Leech) द्वारा रक्तमोक्षण को कोमल एवं प्रभावी विधि बताया गया है।
� श्लोक:
"जलौका एव सर्वासां श्रेष्ठा।" (सुश्रुत संहिता)
� किन रोगों में चिकित्सक की सलाह पर लीच थेरेपी उपयोगी हो सकती है?
� साइटिका (Sciatica)
� स्लिप डिस्क (L4-L5, L5-S1) से संबंधित दर्द
� सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस
� फ्रोजन शोल्डर
� घुटनों का दर्द (ऑस्टियोआर्थराइटिस)
� टेनिस एल्बो
� वैरिकोज वेन्स (Varicose Veins)
� डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) के चयनित मामलों में विशेषज्ञ परामर्श अनुसार
� गैंग्रीन के चयनित मामलों में सहायक उपचार के रूप में
� सोरायसिस एवं कुछ अन्य त्वचा रोग
� एक्जिमा के कुछ मामलों में
� गठिया (आमवात/रूमेटॉइड आर्थराइटिस)
� गाउट (Vatarakta)
� पुरानी सूजन एवं दर्दयुक्त रोग
� एड़ी का दर्द (Plantar Fasciitis)
� मांसपेशियों एवं लिगामेंट की चोट के बाद होने वाली सूजन (चयनित मामलों में)
� संभावित लाभ
� दर्द एवं सूजन कम करने में सहायक
� प्रभावित भाग में रक्तसंचार बेहतर करने में सहायक
� रक्त के ठहराव (Venous Congestion) को कम करने में सहायता
� ऊतकों तक ऑक्सीजन एवं पोषक तत्वों की आपूर्ति में सहयोग
� घाव भरने की प्रक्रिया में कुछ परिस्थितियों में सहायक
� साइटिका के दर्द से राहत पाने वाले 89 मरीजों के वास्तविक फीडबैक वीडियो हमारे YouTube चैनल पर उपलब्ध हैं।
https://youtube.com/shorts/8bfTvofD2WY?feature=share
� Dr. C. R. Meena
वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी
राजकीय आयुर्वेद औषधालय, पलवा, अलवर (राजस्थान)
� मो.: 9413794309
� महत्वपूर्ण सूचना: लीच थेरेपी केवल योग्य एवं प्रशिक्षित आयुर्वेद चिकित्सक की देखरेख में ही करानी चाहिए। सभी रोगों में इसका उपयोग उपयुक्त नहीं होता। उपचार रोग की अवस्था एवं चिकित्सकीय जांच के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
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