17/04/2026
यह चित्र श्रीमद्भगवद्गीता के **पाँचवें अध्याय का 29वाँ श्लोक** (Chapter 5, Shlok 29) है।
# # # **मूल संस्कृत श्लोक:**
> भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।
> सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥
>
# # # **हिन्दी में अर्थ:**
इस श्लोक का सरल हिन्दी अनुवाद यह है:
**"जो व्यक्ति मुझे (श्रीकृष्ण को) सभी यज्ञों और तपस्याओं का भोगने वाला, समस्त लोकों का परमेश्वर और सभी जीवों का निस्वार्थ प्रेमी (मित्र) जान लेता है, वह परम शांति को प्राप्त करता है।"**