21/07/2026
इतिहास को सोचने वाला महावीर पर जोर देगा, क्राइस्ट पर जोर देगा--कैसा जीवन? मिथ की दृष्टि वाला व्यक्ति तुम पर जोर देगा कि महावीर का कैसा जीवन कि तुम बदल जाओ। इसमें बुनियादी फर्क हुए।
अब यह हो सकता है कि मिथ किसी दृष्टि से अप्रामाणिक मालूम पड़े। जैसे जीसस का सूली पर चढ़ना और फिर तीन दिन बाद पुनरुज्जीवित हो जाना। ऐतिहासिक तथ्य की तरह शायद इसे प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि ऐसा हुआ हो। जैसे जीसस का कुंआरी मां से पैदा होना। ऐतिहासिक तथ्य की तरह प्रमाणित नहीं किया जा सकता कि कुंआरी लड़की से कोई पैदा हो सकता है, जिसका पुरुष से कोई संपर्क न हुआ हो।
बाहर की दुनिया की यह घटना ही नहीं है। बाहर की दुनिया में तो कुंआरी लड़की से कोई लड़का कैसे पैदा होगा? लेकिन जिन्होंने इस पर जोर दिया है उनकी दृष्टि बहुत गहरी है। यह भीतर की घटना को ही वे कह रहे हैं। वे कह रहे हैं कि जीसस जैसा बेटा अत्यंत कुंआरी आत्मा से ही जन्म ले सकता है। अत्यंत इनोसेंट। कुंआरा शरीर नहीं, कुंआरी आत्मा, कुंआरे चित्त से।
और यह भी हो सकता है कि शरीर बिलकुल कुंआरा हो और चित्त बिलकुल कुंआरा न हो। इससे उलटा भी हो सकता है कि शरीर कुंआरा न हो और चित्त बिलकुल कुंआरा हो।
जीसस जैसे व्यक्ति का जन्म वर्जिन गर्ल से ही हो सकता है, कुंआरी लड़की से ही हो सकता है।
यह इतिहास तो नहीं है, लेकिन इतिहास अगर सिद्ध भी कर दे, तो नुकसान ही पहुंचाएगा। यानी मैं मानूंगा कि यह बात प्रमाणित ही रहनी चाहिए कि जीसस जैसे व्यक्ति का जन्म एक कुंआरे मन से होता है। और अगर किसी मां को जीसस जैसे बेटे को जन्म देना हो, तो उसके चित्त का अत्यंत कुंआरा होना जरूरी है। और कुंआरेपन का कोई संबंध शरीर से है ही नहीं। वर्जिनिटी का कोई संबंध शरीर से नहीं है। शरीर तो यंत्र है, कुंआरापन तो आंतरिक मनोदशा है।
🌹ओशो 🌹