Shiv ayurveda

Shiv ayurveda It's about a miraculous ayurvedic remedy

05/06/2026

#प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि पेट के निचले हिस्से में मूत्राशय के मुख के ठीक नीचे प्रोस्टेट ग्रंथि स्थित रहती है। युवा पुरुषों में इसका वजन लगभग 20 ग्राम होता है। इस रोग से पीड़ित होने से मतलब यह है कि प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ गई। है। जब यह ग्रंथि बढ़ जाती है, तो इसका वजन 100 ग्राम तक पहुच जाता है। इससे मूत्र नली में अवरोध पैदा हो जाता है। वस्तुतः होता यह है कि मूत्राशय के ठीक नीचे यह ग्रंथि स्थित होती है। जब किन्हीं कारणों से यही ग्रंथि बढ़ जाती है, तो मूत्राशय की गरदन में दबाव पड़ने से मूत्र त्याग में अवरोध आने लगता है। इससे मूत्राशय प्रसारित होने लगता है, परिणाम यह होता है कि बढ़ा हुआ प्रैशर मूत्रवाहिकाओं के माध्यम से किडनी नेफ्रांस तक पहुंच जाता है। परिणाम यह होता है कि गुरदों को हानि पहुंचती है तथा गुरदों के कार्य बाधित होने लगते हैं। यह रोग बहुधा पचास की उम्र के बाद आधे से भी ज्यादा पुरुषों को हो जाता है। यह रोग धीरे-धीरे पनपता है। आरंभ में रोग के लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं।

#कारण -

● लगभग 45 वर्ष की उम्र के बाद प्रोस्टेट के आकार में दिन प्रतिदिन वृद्धि होने लगती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अभी तक इस रोग के कारणों को अज्ञात मानता है। यदि मूत्र इसी प्रकार मूत्राशय में बार-बार रुका हुआ रहता है, तो उसमें तेज गंध पैदा होने लगती है, साथ ही मूत्राशय में पथरियों का निर्माण होना सम्भव है। साथ ही मूत्र नलिका में सूजन आना भी सम्भव है। हां, यदि बहुत ही ज्यादा अवरोध हो जाता है, तो बढ़े हुए दबाव के कारण गुरदों को भी हानि पहुंचती है।

● सरदी एवं एलर्जी की दवाओं का अंधाधुंध सेवन करना अल्सर के उपचार में डिप्रेशन तथा इरिटेबल बाउल सिंड्रोम के उपचार में दी जाने वाली आधुनिक औषधियां

● हारमोनल असंतुलन बढ़ती उम्र के साथ-साथ पुरुषों में पुरुष हारमोन टेस्टोस्टेरोन में कमी आने लगती है, जिसके कारण प्रोस्टेट बढ़ने लगता है।

#लक्षण -

• रात के समय बार-बार मूत्र त्याग की इच्छा, जबकि वास्तव में उस समय मूत्र त्याग की आवश्यकता नहीं होती है। रात के समय बार-बार मूत्र त्याग करने के लिए बार-बार बिस्तर से उठने के कारण रोगी अच्छी तरह से नहीं सो पाता है, जिसके परिणाम स्वरूप यह दिन भर थका थका रहता है।

• दिन में भी बार-बार मूत्र त्याग करने के लिए जाना

• मूत्र त्याग के मध्य की अवधि का कम होना

• मूत्र की इच्छा को बिलकुल भी नहीं रोक पाना, जिसके कारण उन्हें मूत्र त्याग करने की हड़बड़ी रहती है। साथ ही उन्हें हमेशा कपड़े खराब होने का डर बना रहता है।

• मूत्र त्याग करने में कठिनाई, मूत्र-प्रवृत्ति के समय जोर लगाना

• मूत्राशय को पूरी तरह खाली करने में असमर्थता, मूत्राशय में कठोरता आना

• मूत्र त्याग करते समय जलन होना

• मूत्र का उचित प्रेशर नहीं रहना तथा मूत्र त्याग के अंत में बूंद-बूंद मूत्र आना

• मूत्र के साथ रक्त आना

• तीव्र अवस्थाओं में मूत्र का अवरोध होना

• खड़े होकर ही अच्छी तरह से मूत्र त्याग कर पाना

• कुछ अवस्थाओं में बुखार, कंपकंपी का होना भी संभव है।

• सैक्स के समय कठिनाई के साथ वीर्यपात होना।

#क्या_कहता_है_आयुर्वेद ?

आयुर्वेद में इस रोग को अष्ठीला संज्ञा दी गई है। चूंकि इस रोग में प्रोस्टेट ग्रंथि का स्वरूप लो अथवा बट्टे जैसा हो जाता है, इसीलिए आयुर्वेदज्ञों ने उपमा स्वरूप इस रोग को अष्ठीला नाम दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार मूत्राशय में वायु में नामक दोष प्रकुपित हो जाने से यह रोग पैदा होता है। इस रोग में उस स्थान की पेशियां संकुचित होने लगती हैं तथा उनमें जकड़न पैदा हो जाती है। इस प्रकार आयुर्वेद की मान्यता के अनुसार वायु नामक दोष मूत्राशय एवं गुद प्रदेश में अवरोध पैदा कर उन्हें फुलाकर पाषाणखंड के समान कठोर, चलायमान, लटका हुआ, अत्यंत दर्द-युक्त गंथि को पैदा करके मल एवं मूत्र का अवरोध पैदा करती है।

#आयुर्वेद_सम्मत_कारण -

• किसी भी प्रकार की चोट लगना
• अर्बुद अथवा कैंसर होना
• उस स्थान पर पुराना घाव होना
• बार-बार संक्रमण होना
• अत्यधिक व्यायाम करना
• अत्यधिक सम्भोग करना
• लम्बे समय तक संतुलित
• रूखा-सूखा भोजन करना
• आहार का सेवन नहीं करना
• मल-मूत्र इत्यादि वेगों को रोकना

#आयुर्वेद_में_प्रोस्टेट_की_चिकित्सा -
कांचनार गुग्गुल, गोक्षुरादि गुग्गुल, शोभान्जन वटी, आरोग्यवर्धनी वटी, चन्दनादि वटी, गंडमाला कंडन रस आदि।

एक बार एक रोगी ने पूंछा कि वैद्य जी महाराज क्या मुझको यह सभी औषधियां खानी पड़ेगी। हमने उसको समझाया कि तुम जिस ऑपरेशन को सरल समझ रहे हो असल में वह सच नहीं है। ऑपरेशन करके पेशाब नली में पेशाब करने की जगह बढा दी जाती है। जिससे आसानी से पेशाब निकलने लगता है मगर पेशाब पर नियंत्रण समाप्त हो सकता है एवं प्रोस्टेट फिर से बढ़ सकता है।

#पथ्यापथ्य -

#सेवन_करें -
गेंहू, पुराना चावल, मूंग, कुलथी, जौ का पानी, लहसुन, अदरक, हल्दी, परवल, सहिजन, नारियल, खीरा, तरबूज, धनिया, जीरा, अंगूर, गन्ना

#सेवन_नहीं_करें -
पालक, टमाटर, काले चने, मटर, गुड, तेल, खटाई, गरम मसाले, सरसों, अधिक गरम एवं मसालेदार भोजन, चाय-कॉफी, मदिरा।

#विशेष -
मूत्राशय में मूत्र को धारण करने की शक्ति कम हो जाने पर, बार-बार थोड़ा-थोड़ा मूत्र-स्राव होता रहता है। विशेषतः यह विकार यकृत की निर्बलता होने के पश्चात होता है। यकृत के निर्बल हो जाने पर घी, तेल एवं शक्कर का यदि अधिक सेवन होता रहेगा, तो मूत्र-यंत्र पर भार पड़ता है, जिससे मूत्राशय को हानि पहुंचती है। यह कारण हो तो घृतादि का सेवन मर्यादित करें।
• सवेरे बिस्तर से उठते ही दो गिलास ठंडा अथवा हलका-गरम पानी अवश्य पिएं। आयुर्वेद में इसे उषापान नाम दिया गया है। दिन भर में आठ से दस गिलास पानी अवश्य पिएं। शाम के समय कम मात्रा में पानी सेवन करें, ताकि रात को सुख-पूर्वक सो सकें। अन्यथा बार-बार पेशाब की हाजत होने से आप सो नहीं पाएंगे।

यह भी याद रखने योग्य बात है कि मल-मूत्र के आवेग को जरा भी नहीं रोकें।

• मदिरा एवं चाय-कॉफी के सेवन से बचें क्योंकि इनके सेवन से मूत्राशय उत्तेजित होता है। विशेष रूप से बीयर का सेवन भूलकर भी नहीं करें। नियमित रूप से अवगाहन अर्थात पानी से भरे हुए टब में बैठना भी लाभप्रद सिद्ध होता है।

#अश्विनी_मुद्रा -

जिस प्रकार घोड़ा लीद करने के बाद अपनी गुदा को अंदर की ओर सिकोड़ता है और तत्पश्चात ढीला छोड़ता है, ठीक उसी प्रकार का अभ्यास करने का नाम अश्विनी मुद्रा है।

#अश्विनी_मुद्रा_की_विधि -

किसी भी आसन में सुख-पूर्वक बैठ जाएं। तत्पश्चात उक्त क्रिया को करें। यहां पर ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब आप गुदा को सिकोड़ते हैं, तो अपने दोनों हाथों की मुट्ठियों को अच्छी तरह से कस कर बांधलें और जब आप गुदा को ढीला छोड़ते हैं, तो हाथों की मुट्ठियां भी खोल लें।

#विशेष - यह मुद्रा नियमित रूप से सुबह-सवेरे खाली पेट की जानी चाहिए। 10 से 20 बार तक धीरे-धीरे, पूरी एकाग्रता के साथ इस मुद्रा का अभ्यास किया जाना चाहिए।

#अश्विनी_मुद्रा_से_होने_वाले_लाभ -

• यह मुद्रा बवासीर के रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं। • गर्भाशय-भ्रंश (प्रोलेस्ड यूट्रस) की रुग्णाओं के लिए अमोघ औषधि का कार्य करती है।

• गुद-अंश (काच का निकलना या प्रोलेप्स ऑफ रैक्टम) की शिकायत से पीड़ित होने पर उत्तम लाभ देती है।
• इसका नियमित अभ्यास करने से 'प्रोस्टेट ग्रंथि वृद्धि की शिकायते दूर होने लगती हैं।
• जो लोग इसका नियमित अभ्यास करते है, उन्हें ब्रह्मचर्य पालन करने तथा वीर्य की रक्षा करने में बहुत सहायता मिलती है।

अपने शरीर को किसी भी प्रकार की बीमारी से मुक्त करने के लिए आयुर्वेदिक उपचार अपनाएं।

04/06/2026

मरीज डॉक्टर से मिलने के बाद भी इंटरनेट क्यों खोजता है? और आयुर्वेद चिकित्सक की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया कि 10 में से 8 मरीज डॉक्टर से परामर्श लेने के बाद इंटरनेट और सोशल मीडिया पर अपनी बीमारी के बारे में जानकारी खोजते हैं। कारण भी स्पष्ट बताए गए—कम समय, पर्याप्त संवाद का अभाव, बीमारी और उपचार के बारे में अधूरी समझ, तथा आगे क्या करना है इसकी स्पष्ट जानकारी न मिलना।
यहीं पर आयुर्वेद की परंपरा और एक आयुर्वेद चिकित्सक की भूमिका अलग दिखाई देती है।
आयुर्वेद केवल रोग का नाम देखकर दवा देने की प्रणाली नहीं है। एक आयुर्वेद चिकित्सक मरीज की प्रकृति, आहार-विहार, मानसिक स्थिति, दिनचर्या, रोग की उत्पत्ति और जीवनशैली को समझने का प्रयास करता है। परामर्श के दौरान अक्सर मरीज को यह भी बताया जाता है कि रोग क्यों हुआ, किन कारणों से बढ़ा, और उसे ठीक होने के लिए अपनी दिनचर्या में क्या बदलाव करने होंगे। जब मरीज अपने रोग को समझ लेता है, तो उसका भ्रम काफी हद तक कम हो जाता है।
आधुनिक चिकित्सा की अपनी उपयोगिता और वैज्ञानिक उपलब्धियाँ हैं, विशेषकर आपातकालीन परिस्थितियों में। लेकिन आज का मरीज केवल एक प्रिस्क्रिप्शन नहीं चाहता, वह अपनी बीमारी को समझना चाहता है। वह जानना चाहता है कि "मुझे यह रोग क्यों हुआ?", "क्या खाना चाहिए?", "क्या नहीं खाना चाहिए?", "भविष्य में इसे कैसे रोक सकता हूँ?"। आयुर्वेद इन प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करता है।
एक आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में मेरा उद्देश्य केवल दवा लिखना नहीं, बल्कि रोगी को उसकी स्वास्थ्य यात्रा में मार्गदर्शन देना है। जब मरीज अपने शरीर, रोग और उपचार को समझता है, तब वह इंटरनेट पर भटकने के बजाय आत्मविश्वास के साथ अपने स्वास्थ्य का प्रबंधन कर सकता है।
स्वास्थ्य सेवा का भविष्य केवल उपचार में नहीं, बल्कि संवाद, शिक्षा और रोगी को सशक्त बनाने में है। और यही वह क्षेत्र है जहाँ आयुर्वेद की हजारों वर्षों पुरानी रोगी-केंद्रित परंपरा आज भी अत्यंत प्रासंगिक दिखाई देती है।

14/05/2026

सुबह उठते ही हाथों की उंगलियों में जकड़न, चाय का कप पकड़ने में दर्द, मुट्ठी बंद करने, घरेलू कामों में कठिनाई
और धीरे-धीरे उंगलियों का आकार बदलने लगे तो इसे सामान्य परेशानी मत समझिए।
कई लोगों में यह समस्या एक गंभीर बीमारी Rheumatoid Arthritis (RA) के कारण होती है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है।
समय पर इलाज न मिले तो उंगलियों में एक विशेष प्रकार की विकृति बनने लगती है जिसे Swan Neck Deformity कहा जाता है।
इसमें उंगली का बीच वाला जोड़ पीछे की ओर अधिक मुड़ जाता है और अंतिम हिस्सा नीचे की ओर झुक जाता है।
उंगली का आकार हंस की गर्दन जैसा दिखने लगता है, इसलिए इसे “Swan Neck” कहा जाता है।
यह विकृति धीरे-धीरे बनती है और अक्सर हाथों की कई उंगलियों में दिखाई देती है। उंगलियों में सूजन आने लगती है और यह आकार में भी विकृत हो जाती है।

इसे ही Rheumatoid Arthritis या रूमेटिक गठिया कहा जाता है।
RA में शरीर के जोड़ों के अंदर लगातार सूजन बनी रहती है।
यह सूजन
☑️जोड़ों की परत (Synovium) को नुकसान पहुँचाती है
☑️Ligament और Tendon को कमजोर करती है
☑️Cartilage और हड्डी को घिसने लगती है
☑️उंगलियों के संतुलन को बिगाड़ देती है
☑️धीरे-धीरे उंगलियाँ टेढ़ी होने लगती हैं और deformity बन जाती है।
प्रारंभिक लक्षण
☑️ सुबह हाथों में 30 मिनट से अधिक जकड़न रहने लगता है।
☑️उंगलियों के छोटे जोड़ों में दर्द रहना।
☑️सूजन और गर्माहट
☑️ मुट्ठी बंद करने में कठिनाई
☑️दोनों हाथों में समान समस्या
☑️थकान, कमजोरीऔर चीजें पकड़ने में दिक्कत होना। अगर आप इसे इग्नोर करते रहे तो 👉Swan Neck deformity
Boutonniere deformity, उंगलियों का टेढ़ापन,हाथों की पकड़ कमजोर होना जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

📕आयुर्वेद में इसे आमवात से जोड़ा गया है,
जब शरीर में “आम” (अधपचा, विषैले तत्व) और “वात” मिलकर जोड़ों में रुकावट व सूजन पैदा करते हैं, तब दर्द,सूजन,जकड़न, कमजोरी,जोड़ों की विकृति जैसी समस्याएं
उत्पन्न होने लगती है।

🌿🌿आयुर्वेदिक उपचार
आयुर्वेद केवल दर्द दबाने पर नहीं, बल्कि बीमारी को पूरी तरह ठीक करने का प्रयास करता है।
✅ सूजन कम करने पर ध्यान
कई आयुर्वेदिक औषधियाँ प्राकृतिक anti-inflammatory प्रभाव रखती हैं।
✅पाचन और “आम” सुधारना
RA में कई मरीजों में पाचन खराब, गैस, भारीपन जैसी समस्या भी मिलती है।
आयुर्वेद अग्नि सुधारने और आम कम करने पर जोर देता है।
✅जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखना
तेल, पंचकर्म, स्वेदन आदि से stiffness कम करने में सहायता मिल सकती है।
✅लंबे समय की देखभाल
जीवनशैली, आहार, व्यायाम और मानसिक संतुलन पर भी कार्य किया जाता है।

आयुर्वेद में उपयोग होने वाले प्रमुख उपचार
सिंहनाद गुग्गुलु,महायोगराज गुग्गुलु,रास्नादि क्वाथ,दशमूल क्वाथ उपयोगी औषधि है।
एरण्ड (Castor) आधारित उपचार, गुडूची (Giloy),अश्वगंधा,शल्लकी (Boswellia),मोरिंगा लेना अच्छा है।
✅ प्रभावित स्थान पर महानारायण तेल या श्रीगोपाल तेल की मालिश करने से लाभ मिलता है।

#अपथ्य
बहुत ठंडी चीजें, फ्रिज का भोजन, अधिक तला-भुना,फास्ट फूड,अत्यधिक मीठा और देर रात भोजन न सेवन करें।

अगर शरीर मे ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत सावधान हो जाएं
☑️ उंगलियाँ टेढ़ी होने लगें
☑️सुबह की जकड़न लगातार बढ़ रही हो
☑️ हाथों की पकड़ कमजोर हो रही हो
☑️सूजन कई सप्ताह से बनी हो
☑️दर्द के कारण दैनिक कार्य प्रभावित हों तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।

Rheumatoid Arthritis केवल “जोड़ों का दर्द” नहीं है।
समय रहते इलाज न हो तो यह हाथों की संरचना बदल देता है।
सही समय पर पहचान, नियमित उपचार, उचित व्यायाम, संतुलित आहार और आयुर्वेदिक सहयोग से कई मरीज बेहतर जीवन जी सकते हैं।
विशेष परिस्थितियों में कुशल वैद्य से परामर्श लें। 096913 14718

06/05/2026

गठिया,बवासीर,प्रोस्टेट, पथरी, डायबिटीज, फैटी लीवर,कोलेस्ट्रॉल, पित्ती उछलना,धातुरोग, लिपोमा इत्यादि बीमारियों की आयुर्वेदिक दवा l निःशुल्क परामर्श 096913 14718

02/05/2026

ऐसा क्या होता है शरीर में जो 30-35 साल होते होते ऊर्जा, स्टेमिना, याददाश्त, कमजोरी,थकान, तनाव, बाल का सफेद होना , चेहरे पर झुर्रियां, मेटाबॉलिज्म धीमा होना, इम्यून सिस्टम का कमजोर होना, मसल्स घटते चले जाना और नसों में समस्याएं साथ ही कई सारी बीमारियां डायबिटीज हार्ट अटैक जॉइंट पेंट माइग्रेन इस तरह की कई सारी अन्य समस्याएं आती है, तो 👇
👉खुशखबरी यह है कि अब साइंटिस्टों ने और कुछ डॉक्टरों ने कुछ patented फार्मूला और हर्बल फार्मूला को एक बेहतरीन मॉलिक्यूल के साथ लेकर आया है जो इन तमाम समस्याएं को और उम्र के प्रभाव को रिवर्स किया जा सकता है, रोका जा सकता है ,और इसे डिलीट किया जा सकता है ,जिसमें आप फुर्तीला ऊर्जावान, स्वस्थ और जवान 👈 जीवन जी सकते है।
👉साथ ही अपने खोए हुए उम्र को वापस पा सकते हैं और जवान दिखेंगे और महसूस भी करेंगे।👈
क्या आप भी चाहते हैं इस विज्ञान रहस्य के बारे में जानना तो
उठाए फोन और मिलाएं कॉल 096913 14718

19/04/2026

शरीर में कोई भी बड़ी बिमारी अचानक से नहीं आती। शरीर हमेशा अपने अंदर चल रही समस्याओं के संकेत देता रहता है, लेकिन अक्सर हम इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं और जब हम बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते तो एक समय बाद स्थिति गंभीर भी हो सकती है।
सच तो यह है कि छोटे-छोटे लक्षण भी बड़े स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं,बस जरूरत है इन्हें समझने की....
🛑 ध्यान रखें
✅ अगर अचानक बाल सफेद होने लगें, तो यह केवल उम्र का असर नहीं बल्कि विटामिन B12 की कमी का संकेत भी हो सकता है।
✅ अगर गले में लगातार खुजली रहने लगे तो यह थायरॉइड असंतुलन की ओर इशारा कर सकता है, जिसे समय रहते समझना जरूरी है।

✅मुंह से अजीब गंध आना सिर्फ दांतों की सफाई की कमी नहीं, बल्कि लिवर की समस्या का संकेत भी हो सकता है।
✅ पैरों के नाखूनों में दरारें दिखना शरीर में कैल्शियम की कमी को दर्शाता है।
✅ अक्सर कब्ज रहना फाइबर की कमी का परिणाम होता है, जिसे आहार में सुधार करके ठीक किया जा सकता है।
✅यदि थोड़ा सा चलने पर ही सांस फूलने लगे, तो यह आयरन की कमी का संकेत हो सकता है।
✅ त्वचा पर नीले निशान बनना विटामिन C की कमी को दर्शाता है, जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो सकती है।
✅ हाथों का कांपना विटामिन B6 की कमी से जुड़ा हो सकता है, जबकि आंखों में सूखापन विटामिन A की कमी की ओर इशारा करता है।

✅सिर में लगातार भारीपन रहना मैग्नीशियम की कमी का संकेत हो सकता है, जो शरीर के कई कार्यों के लिए जरूरी है।
✅बार-बार हिचकी आना पेट में गैस या एसिडिटी से जुड़ा हो सकता है।
✅ पैरों में सूजन किडनी से संबंधित समस्या का संकेत हो सकती है, जिसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
✅ घबराहट, बेचैनी, नींद न आना रक्तचाप के अनियंत्रित होने का संकेत है। अतः इसे इग्नोर न करे।

समय रहते इन सभी संकेतों को समझना और सही कदम उठाना बहुत जरूरी है।
संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करवाना हमें इन समस्याओं से बचा सकता है। शरीर की हर छोटी प्रतिक्रिया को ध्यान से समझना ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है।
ध्यान रहे कि जिस तरह पौधे को उखाड़ना आसान होता है लेकिन पेड़ को नहीं, ठीक उसी तरह नयी बिमारी को जल्दी कन्ट्रोल किया जा सकता है जबकि पुरानी होने पर
समस्या बढ़ सकती है।
#स्वस्थ_रहें_मस्त_रहें

15/04/2026

बरसों पुराना कमर दर्द ठीक हुआ। कमर दर्द , साइटिका,बवासीर , धातु रोग (लिकोरिया) इत्यादि समस्याओं की गारंटीड आयुर्वेदिक दवा मिलती है। संपर्क: शिव मेडिकल स्टोर मगरदा चौराहा अशोक नगर. Phone : 096913 14718

04/04/2026

मात्र 7 दिन में एक वर्ष पुराना साइटिका ठीक हुआ। साइटिका, सर्वाइवल,कमर दर्द,गठिया ,बवासीर,धातुरोग, माइग्रेन, फैटी लिवर,शुगर,मोटापा इत्यादि रोगों की आयुर्वेदिक दवा । संपर्क - शिव मेडिकल स्टोर मगरदा चौराहा आरोन रोड अशोकनगर मोबाइल नंबर: 096913 14718

03/04/2026

फ्रोजन शोल्डर ठीक हुआ मात्र 15 दिन में पिता पुत्र दोनों का। साइटिका,सर्वाइकल,गठिया,दबी हुई नस,AVN, cervical spondolysis,lumber spondolysis, माइग्रेन, डायबिटीज,एलर्जी,अस्थमा,की देशी दवा। संपर्क : शिव मेडिकल स्टोर मगरधा चौराहा,आरोन रोड अशोकनगर मप्र
मोबाइल नंबर : 096913 14718

10/02/2026

बरसों पुराना कमर दर्द ठीक हुआ। कमर दर्द , साइटिका,बवासीर , धातु रोग (लिकोरिया) इत्यादि समस्याओं की गारंटीड आयुर्वेदिक दवा मिलती है। संपर्क: शिव मेडिकल स्टोर मगरदा चौराहा अशोक नगर. Phone : 9691314718

Address

Aron Road, Shankarpur Magarda Choraha
Ashoknagar
473331

Opening Hours

Monday 12pm - 9pm
Tuesday 10:30am - 9pm
Wednesday 11am - 8pm
Thursday 12pm - 8pm

Telephone

+919691314718

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Shiv ayurveda posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share