SAastha Ayurveda Pvt.Ltd

SAastha Ayurveda Pvt.Ltd "Holistic Ayurveda clinic specializing in infertility and chronic disease management. पुराने रोग एवम बन्ध्यत्व निवारण केंद्र।

We offer personalized treatments, herbal remedies, Panchakarma therapies, and lifestyle guidance to restore balance and promote lasting wellness."

Support your vitality and reproductive health with the power of Ayurveda. Introducing Virro X Plus by S. Astha Ayurveda ...
02/05/2026

Support your vitality and reproductive health with the power of Ayurveda. Introducing Virro X Plus by S. Astha Ayurveda — a thoughtfully formulated herbal supplement designed to promote healthy testosterone levels, enhance fertility, and improve overall strength and vigor.
In today’s fast-paced lifestyle, stress, poor diet, and lack of sleep can negatively impact hormonal balance. Virro X Plus combines time-tested Ayurvedic ingredients known for their rejuvenating and energizing properties. These herbs work synergistically to support natural testosterone production, improve stamina, and promote better reproductive health without harmful side effects.
Whether you’re experiencing low energy, reduced performance, or fertility concerns, incorporating Ayurvedic support can make a meaningful difference. Virro X Plus is crafted with a scientific approach rooted in traditional wisdom, ensuring both safety and effectiveness.
Key benefits include: ✔ Supports healthy testosterone levels
✔ Enhances male fertility and reproductive strength
✔ Boosts stamina, energy, and vitality
✔ Promotes overall well-being and confidence
At S. Astha Ayurveda, we believe in treating the root cause, not just the symptoms. With years of trusted experience and thousands of satisfied patients, our approach combines authenticity with modern understanding.
Take a step towards a healthier, more confident you. Let nature restore your balance.
📞 Call Now: 094680 09591
📍 Visit: S. Astha Ayurveda, JC College Road, Assandh
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Choose Ayurveda. Choose Strength. Choose Virro X Plus.

अगर आप कमजोरी, थकान या फर्टिलिटी से जुड़ी परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो अब चिंता छोड़िए 🌿Virro X Plus एक आसान और भरोसेमंद...
18/03/2026

अगर आप कमजोरी, थकान या फर्टिलिटी से जुड़ी परेशानी महसूस कर रहे हैं, तो अब चिंता छोड़िए 🌿
Virro X Plus एक आसान और भरोसेमंद आयुर्वेदिक उपाय है, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करता है। यह रोज़मर्रा की लाइफ में आपकी ऊर्जा, स्टैमिना और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक हो सकता है।
✨ इसके फायदे:
✔ शरीर में ताकत और एनर्जी बढ़ाए
✔ पुरुष स्वास्थ्य को सपोर्ट करे
✔ फर्टिलिटी सुधारने में मदद करे
सबसे अच्छी बात—अब आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं 🚚
फ्री डिलीवरी के साथ दवा सीधे आपके घर तक पहुंचेगी।
📲 कोई सवाल हो या सलाह चाहिए?
सीधे हमसे बात करें
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📍 S. Astha Ayurveda, Assandh
आज ही शुरुआत करें और खुद में बदलाव महसूस करें। 🌿

आज के समय में महिलाओं में PCOS (Polycystic O***y Syndrome) एक बहुत सामान्य समस्या बनती जा रही है। चिकित्सा अध्ययनों के अ...
16/03/2026

आज के समय में महिलाओं में PCOS (Polycystic O***y Syndrome) एक बहुत सामान्य समस्या बनती जा रही है। चिकित्सा अध्ययनों के अनुसार महिला infertility के लगभग 20–30% मामलों में PCOS महत्वपूर्ण कारण होता है। वहीं अगर सिर्फ ovulation न होने (Anovulatory infertility) की बात करें, तो लगभग 70–80% मामलों का संबंध PCOS से पाया जाता है।
PCOS केवल एक हार्मोनल समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर के संतुलन को प्रभावित कर सकती है। इसके कारण मासिक धर्म अनियमित होना, वजन बढ़ना, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे, मानसिक तनाव और सबसे बड़ी चिंता गर्भधारण में कठिनाई हो सकती है।
लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। सही समय पर सही उपचार से इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार PCOS को शरीर के दोषों के असंतुलन, अग्नि की कमजोरी और धातुओं की विकृति से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए आयुर्वेदिक चिकित्सा केवल लक्षणों को दबाने की बजाय शरीर के मूल कारण को संतुलित करने पर ध्यान देती है।
उचित औषधि, आहार-विहार और जीवनशैली सुधार के माध्यम से हार्मोन संतुलन, ओव्यूलेशन सुधार और प्रजनन क्षमता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
S. Astha Ayurveda में हम पिछले कई वर्षों से निःसंतानता (Infertility), PCOS, अनियमित पीरियड्स और स्त्री रोगों के आयुर्वेदिक उपचार पर कार्य कर रहे हैं।
कई ऐसे दंपति, जो वर्षों से संतान सुख के लिए प्रयास कर रहे थे, उन्हें यहां आयुर्वेदिक चिकित्सा से लाभ मिला है।
हमारा उद्देश्य केवल उपचार देना नहीं बल्कि महिलाओं को प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ प्रजनन क्षमता प्राप्त करने में मदद करना है। हर मरीज की प्रकृति और समस्या के अनुसार व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार की जाती है।
अगर आप या आपके परिवार में कोई PCOS, पीरियड समस्या या infertility से परेशान है, तो सही मार्गदर्शन लेना बहुत जरूरी है। समय पर उपचार से मातृत्व का सपना पूरा हो सकता है।
मातृत्व का सुख, अब आयुर्वेद के साथ।
📍 S. Astha Ayurveda
JC College Road, Near HAFED Godown
Assandh, Haryana
📞 Appointment / WhatsApp: 9468009591
स्वस्थ जीवन और खुशहाल परिवार के लिए आयुर्वेद को अपनाएं। 🌿

कमजोरी को कहें अलविदाऔर रिश्ते में लाएं नया जोश।
08/03/2026

कमजोरी को कहें अलविदा
और रिश्ते में लाएं नया जोश।

साइक्लिंग के फायदे (Benefits of Cycling)साइक्लिंग एक आसान, सस्ती और प्रभावी व्यायाम पद्धति है। यह शरीर के लगभग सभी अंगों...
25/01/2026

साइक्लिंग के फायदे (Benefits of Cycling)
साइक्लिंग एक आसान, सस्ती और प्रभावी व्यायाम पद्धति है। यह शरीर के लगभग सभी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। रोज़ाना 20–40 मिनट साइकिल चलाने से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों बेहतर होते हैं।
1. लिवर (यकृत) के लिए लाभ
साइक्लिंग करने से शरीर की चर्बी कम होती है, जिससे फैटी लिवर की समस्या में सुधार आता है। यह मेटाबॉलिज़्म को तेज़ करती है, जिससे लिवर पर जमा विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है। नियमित व्यायाम से लिवर एंज़ाइम संतुलित रहते हैं और यकृत की कार्यक्षमता बढ़ती है।
2. डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य
साइक्लिंग करने से दिमाग में एंडॉर्फिन (खुशी का हार्मोन) निकलता है, जिससे तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। सुबह खुली हवा में साइकिल चलाने से मन प्रसन्न रहता है, नींद बेहतर आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। यह अकेलेपन और नकारात्मक सोच को भी कम करती है।
3. पाचन तंत्र (Digestion)
साइक्लिंग से पेट की मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। यह आंतों की गति को बेहतर बनाती है और भूख को संतुलित करती है। नियमित साइक्लिंग से मोटापा कम होता है, जो पाचन को सुधारने में सहायक है।
4. हृदय (Heart) के लिए लाभ
साइक्लिंग एक बेहतरीन कार्डियो एक्सरसाइज़ है। इससे हृदय की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं, रक्त संचार सुधरता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। यह खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाकर अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाती है, जिससे हार्ट अटैक का जोखिम कम होता है।
5. डायबिटीज और वजन नियंत्रण
नियमित साइक्लिंग से रक्त शर्करा नियंत्रित रहती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है। यह वजन घटाने में मदद करती है और पेट की चर्बी कम करती है।
6. मांसपेशियाँ और जोड़
साइक्लिंग से जांघ, पिंडली और कमर की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं। यह जोड़ों पर ज़्यादा दबाव नहीं डालती, इसलिए उम्रदराज़ लोगों के लिए भी सुरक्षित है।
निष्कर्ष
साइक्लिंग एक संपूर्ण व्यायाम है जो लिवर, दिल, पाचन और मानसिक स्वास्थ्य—सबके लिए फायदेमंद है। इसे रोज़मर्रा की दिनचर्या में शामिल कर स्वस्थ जीवन पाया जा सकता है।

094680 09591  call for details.यकृतोदर (Yukritodara) – आयुर्वेदिक विवरणआयुर्वेद में यकृतोदर को उदर रोग के अंतर्गत बताया ...
22/01/2026

094680 09591 call for details.
यकृतोदर (Yukritodara) – आयुर्वेदिक विवरण
आयुर्वेद में यकृतोदर को उदर रोग के अंतर्गत बताया गया है। इसमें यकृत (लिवर) का आकार बढ़ जाता है, जिससे पेट फूलने लगता है। आधुनिक चिकित्सा में इसे Hepatomegaly, Liver cirrhosis या Ascites से संबंधित लिवर रोग कहा जाता है। यह रोग मुख्यतः पित्त दोष के बढ़ने और अग्नि मंदता के कारण होता है।
1. पूर्वरूप (Purvarupa – प्रारंभिक लक्षण)
यकृतोदर होने से पहले शरीर कुछ संकेत देता है, जिन्हें पहचानना बहुत आवश्यक है:
भूख कम लगना
भोजन के बाद भारीपन
बार-बार डकार आना
पेट में गैस व जलन
मितली या उलटी जैसा मन
शरीर में कमजोरी
आंखों में हल्की पीलापन
आलस्य व नींद अधिक आना
मल का रंग हल्का या कब्ज
👉 इन लक्षणों को नजरअंदाज करने पर रोग आगे बढ़ जाता है।
2. रूप (Rupa – मुख्य लक्षण)
जब यकृतोदर पूर्ण रूप से विकसित हो जाता है, तब ये लक्षण दिखाई देते हैं:
पेट का आगे की ओर बढ़ना
पेट में जल भर जाना (जलोदर)
यकृत का कठोर व बढ़ा हुआ महसूस होना
त्वचा व आंखों का पीला पड़ना
वजन तेजी से बढ़ना या घट जाना
भोजन में अरुचि
सांस फूलना
हाथ-पैरों में सूजन
पेशाब कम होना
कमजोरी व थकावट
चेहरे पर निस्तेजता
👉 यह अवस्था गंभीर मानी जाती है और तुरंत उपचार आवश्यक होता है।
3. औषध (Aushadh – आयुर्वेदिक उपचार)
यकृतोदर में उपचार का उद्देश्य होता है –
पित्त शमन, यकृत शोधन और अग्नि दीपन।
⚠️ दवाएं वैद्य की देख-रेख में ही लें।
प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ:
आरोग्यवर्धिनी वटी
पुनर्नवासव
भृंगराजासव
कुमारी आसव
त्रिफला चूर्ण
शारिवाद्य आसव
गोमूत्र हरितकी (चिकित्सक सलाह से)
👉 ये औषधियाँ यकृत को मजबूत करती हैं, सूजन घटाती हैं और पाचन सुधारती हैं।
4. आहार (Aahar – क्या खाएं)
यकृतोदर में हल्का, सुपाच्य और पित्तशामक आहार अत्यंत आवश्यक है।
लाभकारी आहार:
मूंग दाल की पतली खिचड़ी
जौ, पुराना चावल
लौकी, तोरी, कद्दू
पपीता, सेब
छाछ (बिना नमक)
गुनगुना पानी
धनिया व जीरा युक्त भोजन
परहेज:
तला-भुना भोजन
अधिक मसालेदार चीजें
शराब (पूर्णतः निषेध)
बासी भोजन
मांसाहार
अधिक नमक
5. विहार (Vihar – जीवनशैली)
समय पर सोना व जागना
मानसिक तनाव से बचना
हल्का योग व प्राणायाम
भोजन के बाद तुरंत न लेटें
दिन में अधिक सोना न करें
नियमित दिनचर्या अपनाएं
उपयोगी योग:
पवनमुक्तासन
वज्रासन
अनुलोम-विलोम
भ्रामरी प्राणायाम
निष्कर्ष
यकृतोदर एक गंभीर लेकिन समय रहते पहचाना जाए तो आयुर्वेद द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। सही औषध, आहार और विहार से यकृत की कार्यक्षमता सुधरती है और रोगी का जीवन स्तर बेहतर होता है।
👉 नियमित वैद्य परामर्श और अनुशासित जीवनशैली ही यकृतोदर का सर्वोत्तम उपचार है।

रसायन चिकित्सा द्वारा बढ़ती उम्र की प्रक्रिया को धीमा करेंआज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली, तनाव, गलत खान-पान, नींद की कमी और ...
03/01/2026

रसायन चिकित्सा द्वारा बढ़ती उम्र की प्रक्रिया को धीमा करें
आज की तेज़ रफ्तार जीवनशैली, तनाव, गलत खान-पान, नींद की कमी और प्रदूषण के कारण शरीर समय से पहले बूढ़ा होने लगता है। बालों का झड़ना, त्वचा की चमक कम होना, जोड़ों में दर्द, कमजोरी, आँखों की रोशनी कम होना, लिवर की समस्याएँ, मधुमेह की जटिलताएँ और संतान से जुड़ी परेशानियाँ—ये सभी बढ़ती उम्र के साथ आम होती जा रही हैं। आयुर्वेद में इन सभी समस्याओं का एक प्रभावी और प्राकृतिक समाधान है—रसायन चिकित्सा (Rasayana Therapy)।
रसायन चिकित्सा क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार रसायन चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि शरीर के धातुओं को पुष्ट करना, ओज बढ़ाना, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करना और उम्र बढ़ने की गति को धीमा करना है। यह चिकित्सा शरीर के भीतर से कार्य करती है, जिससे कोशिकाओं का पोषण होता है और शरीर लंबे समय तक स्वस्थ, ऊर्जावान और युवा बना रहता है।
S. Astha Ayurveda, Assandh में रसायन चिकित्सा को व्यक्ति की प्रकृति (वात-पित्त-कफ), उम्र, रोग की अवस्था और जीवनशैली के अनुसार व्यक्तिगत रूप से दिया जाता है। यही कारण है कि उपचार अधिक प्रभावी और सुरक्षित होता है।
रसायन चिकित्सा से होने वाले प्रमुख लाभ
त्वचा की देखभाल (Skin Care)
रसायन चिकित्सा त्वचा को भीतर से पोषण देती है। झुर्रियाँ, रूखापन, दाग-धब्बे और समय से पहले बढ़ती उम्र के लक्षणों में कमी आती है। त्वचा में प्राकृतिक चमक लौटती है।
बालों की देखभाल (Hair Care)
बालों का झड़ना, सफ़ेद होना, रूसी और कमजोर बाल—इन समस्याओं में रसायन औषधियाँ बालों की जड़ों को मज़बूत करती हैं और नए बालों की वृद्धि में सहायक होती हैं।
जोड़ों का दर्द (Joint Pain)
उम्र बढ़ने के साथ होने वाला घुटनों, कमर और गर्दन का दर्द वात दोष के कारण होता है। रसायन चिकित्सा वात को संतुलित कर जोड़ों में चिकनाई और शक्ति प्रदान करती है।
लिवर की देखभाल (Liver Care)
गलत खान-पान और दवाओं के दुष्प्रभाव से लिवर कमजोर हो जाता है। रसायन चिकित्सा लिवर की कार्यक्षमता को सुधारती है और शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है।
मधुमेह की जटिलताएँ (Diabetic Complications)
डायबिटीज़ में नसों की कमजोरी, थकान, घाव देर से भरना जैसी समस्याएँ होती हैं। रसायन चिकित्सा शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर इन जटिलताओं को नियंत्रित करने में सहायक होती है।
नेत्र ज्योति की कमजोरी (Eye Sight Weakness)
आँखों की रोशनी कम होना, जलन और थकान—इनमें भी रसायन औषधियाँ नेत्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाती हैं।
बांझपन (Infertility)
पुरुष एवं महिला दोनों में रसायन चिकित्सा शुक्र व अंडाणु की गुणवत्ता सुधारने, हार्मोन संतुलन और संतान प्राप्ति की संभावना बढ़ाने में सहायक है।
क्यों चुनें S. Astha Ayurveda?
यहाँ उपचार केवल लक्षणों पर नहीं, बल्कि रोग के मूल कारण पर किया जाता है। शुद्ध आयुर्वेदिक औषधियाँ, अनुभवी चिकित्सकीय मार्गदर्शन और व्यक्तिगत देखभाल—यही हमारी पहचान है।
👉 आज ही अपनी उम्र को स्वस्थ तरीके से बढ़ाइए।
👉 रसायन चिकित्सा द्वारा शरीर, मन और इंद्रियों को पुनः युवा बनाइए।
📍 S. Astha Ayurveda, Assandh (Hr.)
📞 अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: 094680 09591

महिलाओं में PID (Pelvic Inflammatory Disease)कारण, लक्षण, जटिलताएँ और आयुर्वेदिक दृष्टिकोणPID यानी पेल्विक इंफ्लेमेटरी ड...
02/01/2026

महिलाओं में PID (Pelvic Inflammatory Disease)
कारण, लक्षण, जटिलताएँ और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
PID यानी पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिज़ीज़ महिलाओं की एक गंभीर समस्या है, जिसमें गर्भाशय (uterus), फैलोपियन ट्यूब और अंडाशय में संक्रमण व सूजन हो जाती है। यह समस्या आज के समय में बांझपन (Infertility) का एक प्रमुख कारण मानी जाती है।
PID के मुख्य कारण (Nidana)
आधुनिक दृष्टि से PID के प्रमुख कारण हैं –
असुरक्षित यौन संबंध
बार-बार गर्भपात
प्रसव या D&C के बाद संक्रमण
लंबे समय तक सफ़ेद पानी (White Discharge) की अनदेखी
बार-बार योनि संक्रमण
आयुर्वेद में, इसे मुख्यतः योनि रोग, गर्भाशय शोथ, आर्तव दोष के अंतर्गत समझा जाता है।
मुख्य दोष: वात और पित्त, कभी-कभी कफ की सहभागिता।
PID के पूर्वरूप (Purva Rupa – प्रारंभिक संकेत)
हल्का पेट दर्द
कमर दर्द
सफ़ेद या पीला स्राव
कमजोरी
मासिक धर्म में अनियमितता
PID के लक्षण (Rupa)
लगातार या बढ़ता हुआ निचले पेट में दर्द
बदबूदार, गाढ़ा सफ़ेद या पीला स्राव
मासिक धर्म के दौरान अधिक दर्द
संभोग के समय दर्द
बुखार, थकान
पेशाब में जलन
PID की जटिलताएँ (Complications)
यदि समय पर उपचार न हो तो PID से गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं:
फैलोपियन ट्यूब ब्लॉकेज
बांझपन (Infertility)
बार-बार गर्भपात
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी
क्रॉनिक पेल्विक पेन
इसलिए PID को महिलाओं में Infertility का मुख्य कारण माना जाता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण (Ayurvedic Approach)
आयुर्वेद में PID को दोष-दूष्य सम्मूर्च्छना से उत्पन्न रोग माना गया है।
दोष अनुसार प्रकार:
वातज PID – दर्द अधिक, सूखापन, अनियमित पीरियड
पित्तज PID – जलन, बदबूदार पीला स्राव, बुखार
कफज PID – गाढ़ा सफ़ेद स्राव, भारीपन
आयुर्वेदिक उपचार की लाइन (Line of Treatment)
दोष शमन (Vata-Pitta balancing)
संक्रमण नाशन (Krimighna, Shothahara)
गर्भाशय शुद्धि
रसायन चिकित्सा
प्रमुख उपचार सिद्धांत:
दीपन-पाचन
शोथहर
स्त्रावरोधक
गर्भाशय बल्य
PID में उपयोगी आयुर्वेदिक औषधियाँ / जड़ी-बूटियाँ
अशोक (Ashoka)
लोध्र (Lodhra)
दशमूल
गुग्गुलु
हरिद्रा (हल्दी)
नीम
शतावरी
कांचनार
(औषधियों का प्रयोग हमेशा वैद्य की सलाह से करें)
जीवनशैली और आहार सुझाव
अधिक तीखा, खट्टा, तला भोजन न लें
स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
तनाव कम करें
नियमित दिनचर्या अपनाएँ
समय पर उपचार कराएँ
निष्कर्ष
PID एक गंभीर लेकिन उपचार योग्य रोग है। समय रहते आयुर्वेदिक उपचार लेने से न केवल संक्रमण ठीक किया जा सकता है, बल्कि Infertility से भी बचाव संभव है।
आयुर्वेद शरीर की जड़ तक जाकर दोषों को संतुलित करता है और प्राकृतिक रूप से स्वास्थ्य लौटाने में सहायक है।
👉 सफ़ेद पानी, पेट दर्द या पीरियड समस्या को नज़रअंदाज़ न करें — समय पर उपचार ही संतान सुख की कुंजी है।

Address

By-Pass Road . Purani Anaj Mandi, Near HAFED Godown
Assandh
132039

Opening Hours

Monday 9:30am - 2:30pm
Tuesday 9:30am - 2:30pm
Wednesday 9am - 2:30pm
Thursday 9:30am - 2:30pm
Friday 9:30am - 2:30pm
Saturday 9:30am - 2:30pm

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