S D Hospital

S D Hospital 24 X 7 Surgical & Trauma centre , ICU & Dialysis center. Standard care at very economical cost Dr. Abhishek Bose (MBBS,MS,MCh ) Consultant Urologist.
3.

S D Hospital is a state-of-art health delivery system by well qualified doctors -
1. Dr. Pushpendra Kumar (MBBS, MS, FIMS, FIAGES) - Laproscopic & Uro surgeon.
2. Dr. Sanjay Kumar (MBBS, DA, DNB) - Anaesthetic & Emergency physician.
4. Dr. Abhinav Kumar (MBBS, MS) - Consultant Orthopaedic surgeon

बच्चों की यूरोलॉजी (Pediatric Urology): इन समस्याओं को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ न करेंबच्चों में पेशाब, किडनी, ब्लैडर या...
08/08/2026

बच्चों की यूरोलॉजी (Pediatric Urology): इन समस्याओं को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ न करें

बच्चों में पेशाब, किडनी, ब्लैडर या जननांग से जुड़ी कई समस्याएँ ऐसी होती हैं, जिनके बारे में माता-पिता खुलकर बात नहीं करते या यह सोचकर इंतजार करते हैं कि बच्चा बड़ा होने पर समस्या अपने-आप ठीक हो जाएगी। लेकिन Bed Wetting, Undescended Te**is, Hypospadias, बार-बार Urine Infection जैसी कुछ स्थितियों में समय पर पहचान और विशेषज्ञ की सलाह महत्वपूर्ण होती है।

Pediatric Urology बच्चों में Urinary System और जननांग से संबंधित समस्याओं की जांच और उपचार से जुड़ा क्षेत्र है। सही समय पर Diagnosis होने से कई समस्याओं का प्रभावी उपचार संभव है।

बच्चा रात में बिस्तर गीला करता है – Bed Wetting

रात में सोते समय अनजाने में पेशाब हो जाने को Bed Wetting या Nocturnal Enuresis कहा जाता है। छोटे बच्चों में यह सामान्य हो सकता है। लेकिन यदि बच्चा 5–7 वर्ष की उम्र के बाद भी नियमित रूप से बिस्तर गीला करता है, तो कारण समझना जरूरी है।

खासकर यदि बच्चे को दिन में भी पेशाब निकल जाता हो, पेशाब करते समय दर्द या जलन होती हो, बहुत अधिक प्यास लगती हो, बार-बार Urine Infection होता हो या पहले बच्चा रात में सूखा रहता था और अचानक Bed Wetting शुरू हो गया हो, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बच्चे को इसके लिए डाँटना या शर्मिंदा करना सही नहीं है। पहले कारण जानना जरूरी है।

Undescended Te**is – अंडकोष नीचे न आना

सामान्यतः जन्म के समय या जन्म के कुछ समय बाद दोनों Te**is अंडकोश यानी Sc***um में आ जाते हैं। यदि एक या दोनों Te**is अपनी सामान्य जगह पर नहीं आए हैं, तो इसे Undescended Te**is (Cryptorchidism) कहा जाता है।

इसे लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर विशेषज्ञ द्वारा जांच जरूरी होती है, क्योंकि अनुपचारित स्थिति भविष्य में Fertility और Te**is के स्वास्थ्य से संबंधित जोखिम बढ़ा सकती है।

यदि Te**is अपने-आप नीचे नहीं आता, तो डॉक्टर बच्चे की उम्र और स्थिति के अनुसार Orchiopexy Surgery की सलाह दे सकते हैं।

Hypospadias क्या है?

Hypospadias जन्मजात स्थिति है जिसमें बच्चे के पेशाब का छेद लिंग के सामान्य सिरे पर न होकर नीचे की ओर किसी स्थान पर होता है। कुछ बच्चों में लिंग में नीचे की ओर झुकाव भी दिखाई दे सकता है और पेशाब की धार असामान्य हो सकती है।

ऐसी स्थिति में Pediatric Urology Evaluation महत्वपूर्ण है।

एक विशेष बात ध्यान रखने योग्य है—यदि बच्चे में Hypospadias का संदेह है, तो Circumcision कराने से पहले Urologist की सलाह लेना उचित है, क्योंकि आगे की Surgical Repair में fo****in की आवश्यकता पड़ सकती है।

बार-बार Urine Infection को भी न करें नजरअंदाज

बच्चों में बार-बार Urinary Tract Infection (UTI) होना भी जांच का विषय है। पेशाब में जलन, दर्द, बार-बार पेशाब आना, बुखार, दुर्गंधयुक्त पेशाब या छोटे बच्चों में बिना स्पष्ट कारण बार-बार बुखार आना UTI से जुड़ा हो सकता है।

Recurrent UTI के पीछे कभी-कभी Urinary Tract की संरचना या पेशाब के प्रवाह से जुड़ी समस्या हो सकती है। इसलिए केवल बार-बार Antibiotic लेने के बजाय कारण की जांच आवश्यक है।

Pediatric Urologist से कब मिलना चाहिए?

यदि बच्चे में लंबे समय तक Bed Wetting बना हुआ है, एक या दोनों Te**is नीचे नहीं आए हैं, पेशाब का छेद सामान्य स्थान पर नहीं है, पेशाब की धार बहुत कमजोर या असामान्य है, पेशाब करने में दर्द होता है या बार-बार Urine Infection हो रहा है, तो Urologist से परामर्श करना चाहिए।

हर बच्चे को Surgery की आवश्यकता नहीं होती। कुछ समस्याएँ समय, निगरानी, दवा या व्यवहार संबंधी बदलाव से नियंत्रित हो सकती हैं, जबकि कुछ स्थितियों में समय पर Surgical Treatment बेहतर परिणाम के लिए जरूरी हो सकता है। इसका निर्णय बच्चे की जांच के बाद ही किया जाता है।

माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण संदेश

बच्चों की यूरोलॉजिकल समस्या को शर्म या संकोच का विषय न बनाएं। बच्चे को डाँटने, समस्या छिपाने या लंबे समय तक अपने-आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लें।

समय पर पहचान, सही जांच और उचित उपचार बच्चे के भविष्य के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

डॉ. अभिषेक बोस
MBBS, MS, MCh (Urology)
Consultant Urologist & Laparoscopic Surgeon

SD Hospital – Advance Laparoscopic & Trauma Center
📍 टिकरी रोड, नियर ओवर ब्रिज, औरंगाबाद (बिहार)
📞 7091194400 | 7091194411

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पेशाब में खून आना (Hematuria): कब सामान्य नहीं होता और तुरंत Urologist से क्यों मिलना चाहिए?हर बार पेशाब में खून दिखना ए...
06/08/2026

पेशाब में खून आना (Hematuria): कब सामान्य नहीं होता और तुरंत Urologist से क्यों मिलना चाहिए?

हर बार पेशाब में खून दिखना एक चेतावनी हो सकता है—इसे नज़रअंदाज़ करना भारी पड़ सकता है।

पेशाब में खून आना, जिसे चिकित्सकीय भाषा में Hematuria कहा जाता है, एक ऐसा लक्षण है जिसे कभी भी सामान्य मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। कई लोग सोचते हैं कि एक-दो बार खून आने से कोई बड़ी समस्या नहीं होगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह Kidney Stone, Urinary Tract Infection (UTI), Enlarged Prostate (BPH), Bladder Stone, Kidney Disease, Bladder Cancer या अन्य गंभीर यूरोलॉजिकल (Urological) बीमारियों का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।

अच्छी बात यह है कि समय पर जांच और सही इलाज से अधिकांश कारणों का सफल उपचार संभव है। इसलिए यदि पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या भूरे रंग जैसा दिखाई दे, तो स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ Urologist से परामर्श लेना सबसे सही निर्णय है।

Hematuria क्या है?

Hematuria का अर्थ है पेशाब में Red Blood Cells (RBCs) का मौजूद होना। कई बार खून खुली आँखों से दिखाई देता है (Gross Hematuria), जबकि कुछ मामलों में केवल लैब जांच (Microscopic Hematuria) में इसका पता चलता है। दोनों ही स्थितियों में कारण जानना आवश्यक होता है।

पेशाब में खून आने के प्रमुख कारण

सबसे सामान्य कारणों में Kidney Stone शामिल है। जब पथरी मूत्र नली में रगड़ पैदा करती है, तो खून आ सकता है। इसके अलावा Urinary Tract Infection (UTI), प्रोस्टेट का बढ़ना (Benign Prostatic Hyperplasia – BPH), ब्लैडर या किडनी में संक्रमण, चोट, कुछ दवाइयाँ तथा दुर्लभ मामलों में Kidney Cancer या Bladder Cancer भी इसका कारण हो सकते हैं।

इसीलिए केवल दर्द देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि समस्या क्या है। सही कारण जानने के लिए विशेषज्ञ जांच आवश्यक होती है।

कब इसे इमरजेंसी समझें?

यदि बार-बार पेशाब में खून आ रहा हो, खून के साथ तेज़ दर्द हो, पेशाब रुक रहा हो, बुखार और ठंड लग रही हो, या पेशाब में खून के थक्के (Blood Clots) निकल रहे हों, तो यह स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे मामलों में तुरंत Urologist से संपर्क करना चाहिए।

कौन-कौन सी जांच की जाती है?

Hematuria का इलाज शुरू करने से पहले उसका कारण पता लगाना सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसके लिए डॉक्टर आवश्यकता अनुसार Urine Routine & Microscopy, Urine Culture, Blood Test, Ultrasound (KUB), CT Scan, तथा कुछ मरीजों में Cystoscopy की सलाह दे सकते हैं।

इन जांचों से यह स्पष्ट हो जाता है कि समस्या किडनी, ब्लैडर, प्रोस्टेट या मूत्र मार्ग के किस हिस्से में है और उसी आधार पर उपचार तय किया जाता है।

इलाज कैसे होता है?

Hematuria का इलाज हमेशा उसके कारण पर निर्भर करता है। यदि कारण संक्रमण है तो Antibiotics दी जाती हैं। यदि Kidney Stone है तो उसके आकार और स्थान के अनुसार दवा, ESWL, Laser Treatment या Endoscopic Surgery की आवश्यकता हो सकती है। प्रोस्टेट की समस्या में दवा या आधुनिक सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। यदि किसी गंभीर बीमारी की आशंका हो तो समय पर विशेषज्ञ उपचार मरीज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

किन गलतियों से बचें?

बहुत से लोग इंटरनेट देखकर दवा शुरू कर देते हैं या खून आना बंद होते ही इलाज छोड़ देते हैं। यह आदत खतरनाक हो सकती है। बिना जांच के कोई भी दवा न लें, दर्द या खून को सामान्य न समझें और उपचार में देरी बिल्कुल न करें।

निष्कर्ष

पेशाब में खून आना कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। यह साधारण संक्रमण से लेकर गंभीर यूरोलॉजिकल रोग तक का संकेत हो सकता है। सही समय पर Diagnosis, उचित जांच और विशेषज्ञ Urologist की सलाह से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं। इसलिए यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को पेशाब में खून दिखाई दे, तो इसे छिपाएँ नहीं और न ही अनदेखा करें—समय पर इलाज ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।

डॉ. अभिषेक बोस
MBBS, MS, MCh (Urology)
Consultant Urologist & Laparoscopic Surgeon

SD Hospital – Advance Laparoscopic & Trauma Center
📍 टिकरी रोड, नियर ओवर ब्रिज, औरंगाबाद (बिहार)
📞 7091194400 | 7091194411

आधुनिक Laparoscopic Surgery के लिए SD Hospital ही क्यों चुनें?अनुभवी सर्जिकल टीम, आधुनिक तकनीक और सुरक्षित इलाज का भरोसा...
05/08/2026

आधुनिक Laparoscopic Surgery के लिए SD Hospital ही क्यों चुनें?

अनुभवी सर्जिकल टीम, आधुनिक तकनीक और सुरक्षित इलाज का भरोसा

आज के समय में चिकित्सा विज्ञान ने सर्जरी के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। पहले जहाँ ऑपरेशन का नाम सुनते ही बड़े चीरे, लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने और कई सप्ताह की रिकवरी का डर लोगों के मन में होता था, वहीं आज Advanced Laparoscopic Surgery (Keyhole Surgery) ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। छोटे चीरे, कम दर्द और तेज़ रिकवरी के कारण यह तकनीक लाखों मरीजों के लिए बेहतर विकल्प बन चुकी है।

लेकिन केवल आधुनिक तकनीक ही पर्याप्त नहीं होती। सफल सर्जरी के लिए अनुभवी सर्जन, सही निर्णय, उन्नत उपकरण और मरीज-केंद्रित देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। यही कारण है कि SD Hospital, Aurangabad आधुनिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के लिए लोगों का भरोसेमंद केंद्र बन रहा है।

अनुभवी सर्जिकल टीम का भरोसा :

किसी भी ऑपरेशन की सफलता केवल मशीनों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सर्जन के अनुभव और निर्णय क्षमता पर भी निर्भर करती है। SD Hospital में प्रत्येक मरीज का ऑपरेशन करने से पहले विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। मरीज की उम्र, स्वास्थ्य, मेडिकल हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट और बीमारी की अवस्था को ध्यान में रखते हुए सबसे उपयुक्त उपचार योजना बनाई जाती है। इसी कारण प्रत्येक मरीज को व्यक्तिगत (Personalized) उपचार मिलता है।

आधुनिक Laparoscopic Equipment :

SD Hospital में आधुनिक High Definition Laparoscopic System, उन्नत कैमरा तकनीक और आधुनिक सर्जिकल उपकरणों की सहायता से ऑपरेशन किए जाते हैं। इससे सर्जन को शरीर के अंदर का स्पष्ट दृश्य मिलता है, जिससे ऑपरेशन अधिक सटीक और सुरक्षित ढंग से किया जा सकता है।

इसी तकनीक की मदद से Gallbladder Stone Surgery, Appendix Surgery, Hernia Surgery, Gynecology Laparoscopic Surgery तथा कई अन्य General Surgical Procedures सफलतापूर्वक किए जाते हैं।

सुरक्षित एवं प्रमाणित उपचार :

हर मरीज की बीमारी एक जैसी नहीं होती। इसलिए SD Hospital में किसी भी सर्जरी से पहले आवश्यक जांचें की जाती हैं और उसके बाद ही उपचार की योजना बनाई जाती है। अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण (Infection Control), आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है ताकि मरीज को सुरक्षित उपचार मिल सके।

व्यक्तिगत Treatment Planning :

हर मरीज की आवश्यकताएँ अलग होती हैं। किसी को तुरंत सर्जरी की जरूरत होती है, जबकि कुछ मरीजों में पहले दवा या अन्य उपचार आवश्यक हो सकता है। SD Hospital की विशेषज्ञ टीम प्रत्येक मरीज के लिए अलग Treatment Plan तैयार करती है। इससे अनावश्यक सर्जरी से बचा जा सकता है और सही समय पर सही इलाज सुनिश्चित होता है।

बेहतर Patient Care :

अच्छा इलाज केवल ऑपरेशन तक सीमित नहीं होता। SD Hospital में मरीज को ऑपरेशन से पहले परामर्श, सर्जरी के दौरान सुरक्षित देखभाल और ऑपरेशन के बाद नियमित फॉलो-अप की सुविधा भी दी जाती है। डॉक्टर और मेडिकल टीम मरीज तथा उनके परिवार को पूरी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाती है ताकि इलाज के दौरान किसी प्रकार की उलझन न रहे।

Laparoscopic Surgery के प्रमुख फायदे :

आज अधिकांश मरीज लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को इसलिए चुनते हैं क्योंकि इसमें कई महत्वपूर्ण लाभ मिलते हैं।

केवल छोटे (Keyhole) चीरे लगते हैं।

ऑपरेशन के बाद दर्द अपेक्षाकृत कम होता है।

रक्तस्राव कम होता है।

संक्रमण का खतरा कम रहता है।

अस्पताल में कम समय रुकना पड़ता है।

जल्दी सामान्य जीवन और काम पर वापसी संभव होती है।

शरीर पर छोटे निशान (Minimal Scar) रह जाते हैं।

इन्हीं कारणों से आज दुनिया भर में कई सामान्य सर्जरी के लिए Laparoscopic Surgery को प्राथमिकता दी जाती है।

किन समस्याओं में SD Hospital से संपर्क करें?

यदि आपको बार-बार पेट दर्द हो रहा है, Gallbladder Stone, Appendix, Hernia, स्त्री रोग संबंधी सर्जरी (Gynecology Surgery), यूरोलॉजी (Urology) से जुड़ी समस्या या किसी भी प्रकार की General Surgery की आवश्यकता हो, तो इलाज में देरी न करें। समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेने से कई जटिलताओं से बचा जा सकता है और बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।

निष्कर्ष :

सर्जरी केवल बीमारी का इलाज नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने का माध्यम है। सही अस्पताल, अनुभवी सर्जन और आधुनिक तकनीक का चुनाव आपके इलाज को अधिक सुरक्षित और सफल बना सकता है। यदि आपको किसी भी प्रकार की सर्जरी की आवश्यकता है, तो विशेषज्ञ से समय पर सलाह लें। छोटा चीरा, कम दर्द, तेज़ रिकवरी और बेहतर जीवन—यही आधुनिक Laparoscopic Surgery की सबसे बड़ी पहचान है।

डॉ. पुष्पेंद्र कुमार
MBBS, MS (General Surgery)
Professor, Department of General Surgery, NMCH
FIAGES – Fellowship in Laparoscopic Surgery

SD Hospital – Advance Laparoscopic & Trauma Center
📍 टिकरी रोड, नियर ओवर ब्रिज, औरंगाबाद (बिहार)
📞 7091194400 | 070911 94411

03/08/2026

सर्वाइकल दर्द (Cervical Spondylosis): गर्दन के दर्द को हल्के में न लें
आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में Cervical Pain और Cervical Spondylosis तेजी से बढ़ रही समस्याएँ हैं। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर का उपयोग, गलत Posture और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। यदि गर्दन का दर्द बार-बार हो, कंधे या हाथ तक फैले, हाथों में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस हो, या गर्दन घुमाने में कठिनाई हो, तो इसे सामान्य थकान समझकर नज़रअंदाज़ न करें।
शुरुआती अवस्था में सही Diagnosis, दवाओं, Physiotherapy, Neck Exercises और Posture Correction से अधिकांश मरीजों को राहत मिल जाती है। केवल कुछ गंभीर मामलों में ही Surgery की आवश्यकता होती है।
समय पर जांच और विशेषज्ञ Orthopaedic सलाह भविष्य की जटिलताओं से बचा सकती है। दर्द को दबाने के बजाय उसके कारण का इलाज कराना ही सबसे सही निर्णय है।
— डॉ. अभिनव कुमार
MBBS, MS (Ortho), Fellowship in AO Trauma
SD Hospital – Advance Laparoscopic & Trauma Center, Aurangabad(Bihar)

Gallbladder Stone (गॉल ब्लैडर स्टोन): लक्षण, कारण, इलाज और Laparoscopic Surgery की पूरी जानकारीहर पेट दर्द गैस नहीं होता...
02/08/2026

Gallbladder Stone (गॉल ब्लैडर स्टोन): लक्षण, कारण, इलाज और Laparoscopic Surgery की पूरी जानकारी

हर पेट दर्द गैस नहीं होता – समय पर पहचान और सही इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है

क्या आपको अक्सर दाईं ओर ऊपरी पेट (Right Upper Abdomen) में दर्द होता है? क्या तैलीय या मसालेदार भोजन खाने के बाद पेट में अचानक तेज़ दर्द, मतली (Nausea), उल्टी (Vomiting) या गैस जैसी समस्या महसूस होती है? यदि हाँ, तो इसे केवल Gas, Acidity या Indigestion समझकर नज़रअंदाज़ न करें। कई बार ये लक्षण Gallbladder Stone (Cholelithiasis) के हो सकते हैं।

गॉल ब्लैडर स्टोन भारत में तेजी से बढ़ने वाली सामान्य सर्जिकल समस्याओं में से एक है। अच्छी बात यह है कि समय पर Ultrasound Diagnosis, सही सलाह और आधुनिक Laparoscopic Gallbladder Surgery (Laparoscopic Cholecystectomy) के माध्यम से इसका सुरक्षित और प्रभावी इलाज संभव है।

गॉल ब्लैडर क्या है और इसमें स्टोन कैसे बनता है?

गॉल ब्लैडर (Gallbladder) लीवर के नीचे स्थित एक छोटा-सा अंग है, जो पित्त (Bile) को संग्रहित करता है। भोजन, विशेषकर वसायुक्त भोजन (Fatty Food), को पचाने में यही पित्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जब पित्त में मौजूद Cholesterol, Bile Salts और Pigments का संतुलन बिगड़ जाता है, तो धीरे-धीरे छोटे-छोटे कण बनते हैं और समय के साथ यही Gallstones का रूप ले लेते हैं। ये स्टोन कभी-कभी वर्षों तक बिना किसी परेशानी के रह सकते हैं, लेकिन जैसे ही ये पित्त नली (Bile Duct) में रुकावट पैदा करते हैं, तब तेज़ दर्द और गंभीर जटिलताएँ शुरू हो सकती हैं।

किन लोगों में Gallbladder Stone होने का खतरा अधिक रहता है?

कुछ लोगों में इस बीमारी की संभावना अधिक होती है। महिलाओं में पुरुषों की तुलना में इसका जोखिम अधिक देखा जाता है। 40 वर्ष से अधिक आयु, मोटापा (Obesity), तेजी से वजन कम करना, परिवार में पथरी का इतिहास (Family History), Diabetes, High Cholesterol, Pregnancy, लंबे समय तक Hormonal Medicines का उपयोग तथा असंतुलित खान-पान इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं।

यदि आपके परिवार में किसी को पहले गॉल ब्लैडर स्टोन रहा है, तो समय-समय पर जांच कराना लाभदायक हो सकता है।

Gallbladder Stone के प्रमुख लक्षण :

हर मरीज में लक्षण एक जैसे नहीं होते, लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए।

दाईं ओर ऊपरी पेट में तेज़ दर्द, दर्द का दाएँ कंधे या पीठ तक फैलना, तैलीय भोजन के बाद दर्द बढ़ना, बार-बार गैस या अपच महसूस होना, मतली या उल्टी, पेट में भारीपन तथा कुछ मामलों में बुखार और पीलिया (Jaundice) भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
यदि दर्द बार-बार हो रहा है या कई घंटों तक बना रहता है, तो तुरंत किसी General & Laparoscopic Surgeon से परामर्श लेना चाहिए।

Gallbladder Stone की जांच कैसे होती है?

अधिकांश मामलों में Ultrasound Abdomen सबसे सरल और विश्वसनीय जांच मानी जाती है। आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर Liver Function Test (LFT), Blood Test, MRCP या CT Scan जैसी अतिरिक्त जांच की सलाह भी दे सकते हैं।
सही जांच से यह पता चलता है कि स्टोन केवल गॉल ब्लैडर में है या पित्त नली तक पहुँच चुका है।

क्या दवा से Gallbladder Stone ठीक हो सकता है?

यह सबसे सामान्य सवाल है।
वास्तविकता यह है कि अधिकांश Gallbladder Stones दवाओं से पूरी तरह समाप्त नहीं होते। इंटरनेट पर मिलने वाले घरेलू उपाय या बिना वैज्ञानिक प्रमाण वाले उपचार अक्सर मरीज को सही इलाज से दूर कर देते हैं।

यदि स्टोन छोटा है और कोई लक्षण नहीं हैं, तो कुछ मरीजों में डॉक्टर केवल नियमित निगरानी (Observation) की सलाह दे सकते हैं। लेकिन यदि बार-बार दर्द, संक्रमण या पित्त नली में रुकावट की समस्या हो रही है, तो Laparoscopic Cholecystectomy सबसे प्रभावी और स्थायी उपचार माना जाता है।

इलाज में देरी क्यों नहीं करनी चाहिए?

कई मरीज दर्द कम होते ही इलाज टाल देते हैं, लेकिन यह निर्णय भविष्य में गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है।

समय पर उपचार न मिलने पर Acute Cholecystitis (गॉल ब्लैडर में सूजन), Gallbladder Infection, Jaundice, Bile Duct Obstruction, Pancreatitis (अग्न्याशय में सूजन) जैसी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। कई बार मरीज को आपातकालीन (Emergency) सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

Laparoscopic Gallbladder Surgery क्यों बेहतर मानी जाती है?

आज अधिकांश गॉल ब्लैडर स्टोन का इलाज Laparoscopic Surgery द्वारा किया जाता है। इसमें केवल छोटे-छोटे चीरे लगाए जाते हैं और कैमरे की सहायता से पूरी सर्जरी की जाती है।

इसके प्रमुख लाभ हैं—

छोटे चीरे (Minimal Scar)

कम दर्द (Less Pain)

कम रक्तस्राव (Minimal Blood Loss)

संक्रमण का कम खतरा

24–48 घंटे में अस्पताल से छुट्टी

जल्दी सामान्य जीवन और काम पर वापसी

बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम :

इसी कारण दुनिया भर में Laparoscopic Gallbladder Surgery को Gallbladder Stone का Gold Standard Treatment माना जाता है।

किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए?

यदि आपको दाईं ओर पेट में लगातार या बार-बार दर्द हो, बुखार के साथ दर्द हो, त्वचा या आँखें पीली पड़ने लगें, लगातार उल्टी हो, दर्द 4–6 घंटे से अधिक समय तक बना रहे या दर्द के साथ पेट में सूजन महसूस हो, तो इसे सामान्य गैस समझकर घर पर इलाज न करें। तुरंत विशेषज्ञ सर्जन से परामर्श लें।

निष्कर्ष :

Gallbladder Stone एक सामान्य लेकिन ऐसी बीमारी है जिसे हल्के में लेना उचित नहीं है। समय पर Diagnosis, Ultrasound Evaluation, Expert Surgical Consultation और आधुनिक Laparoscopic Surgery के माध्यम से इसका सुरक्षित और सफल उपचार संभव है। यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को इसके लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से सलाह लें। समय पर लिया गया निर्णय न केवल दर्द से राहत देता है, बल्कि भविष्य की गंभीर जटिलताओं से भी बचाता है।

डॉ. पुष्पेंद्र कुमार
MBBS, MS (General Surgery)
Professor, Department of General Surgery, NMCH
FIAGES – Fellowship in Laparoscopic Surgery

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बवासीर (Piles) और फिशर (A**l Fissure) में क्या अंतर है? सही पहचान ही सही इलाज की पहली सीढ़ी हैहर दर्द और खून आना बवासीर ...
30/07/2026

बवासीर (Piles) और फिशर (A**l Fissure) में क्या अंतर है? सही पहचान ही सही इलाज की पहली सीढ़ी है

हर दर्द और खून आना बवासीर नहीं होता ।
मल त्याग के दौरान दर्द, खून आना या गुदा के आसपास असहजता होना ऐसी समस्याएँ हैं जिनका सामना बहुत से लोग करते हैं। लेकिन अक्सर लोग इन सभी लक्षणों को एक ही बीमारी—बवासीर (Piles)—समझ लेते हैं। यही सबसे बड़ी गलती है। वास्तव में कई मामलों में यह समस्या फिशर (A**l Fissure) भी हो सकती है। दोनों बीमारियों के लक्षण कुछ हद तक समान दिखाई देते हैं, लेकिन इनके कारण, प्रकृति और इलाज अलग-अलग होते हैं। इसलिए सही बीमारी की पहचान ही सही उपचार का आधार है।

बवासीर (Piles) क्या है?

बवासीर को चिकित्सकीय भाषा में Hemorrhoids कहा जाता है। इसमें मलाशय (Re**um) या गुदा (A**s) के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है। यह सूजी हुई नसें अंदर या बाहर दोनों जगह हो सकती हैं। लंबे समय तक कब्ज रहना, मल त्याग के दौरान अधिक ज़ोर लगाना, गर्भावस्था, मोटापा, लंबे समय तक बैठे रहना तथा कम फाइबर वाला भोजन इसके प्रमुख कारण हैं।

बवासीर के मरीजों में अक्सर बिना दर्द के ताज़ा लाल खून आना, गुदा के बाहर मस्सा महसूस होना, खुजली या असहजता जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शुरुआती अवस्था में दवाओं, जीवनशैली में बदलाव और कब्ज के उपचार से लाभ मिल सकता है, जबकि गंभीर मामलों में Laser Surgery या Laparoscopic/Advanced Surgical Treatment की आवश्यकता हो सकती है।

फिशर (A**l Fissure) क्या है?

फिशर यानी A**l Fissure गुदा की त्वचा में बनने वाली एक छोटी लेकिन दर्दनाक दरार होती है। यह अधिकतर कठोर मल, पुरानी कब्ज या बार-बार ज़ोर लगाने के कारण बनती है। फिशर में सबसे प्रमुख लक्षण मल त्याग के समय चाकू जैसी तेज़ पीड़ा होती है। दर्द कई बार मल त्याग के बाद भी घंटों तक बना रहता है। इसके साथ जलन, चुभन और कुछ बूंद खून भी आ सकता है।

यही कारण है कि हर खून आने की समस्या को बवासीर मान लेना सही नहीं है।

दोनों में मुख्य अंतर क्या है?

बवासीर में समस्या सूजी हुई नसों की होती है, जबकि फिशर में त्वचा की दरार होती है। बवासीर में कई बार दर्द नहीं होता और केवल खून आने की शिकायत होती है, जबकि फिशर में दर्द सबसे प्रमुख लक्षण होता है। फिशर के मरीज मल त्याग से डरने लगते हैं क्योंकि हर बार असहनीय दर्द होता है। दूसरी ओर, बवासीर के मरीजों को मस्सा महसूस हो सकता है या बैठने में असुविधा हो सकती है।

सही जांच क्यों आवश्यक है?

केवल लक्षण देखकर बीमारी का सही अनुमान लगाना हमेशा संभव नहीं होता। कई बार बवासीर, फिशर, फिस्टुला, संक्रमण या अन्य गंभीर रोगों के लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार का खून आना, लगातार दर्द, जलन या मस्सा महसूस होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय General & Laparoscopic Surgeon से जांच कराना चाहिए।

विशेषज्ञ डॉक्टर शारीरिक परीक्षण और आवश्यकता होने पर अन्य जांचों के आधार पर सही बीमारी की पहचान करते हैं और उसी अनुसार उपचार की योजना बनाते हैं।

इलाज में देरी क्यों नहीं करनी चाहिए?

कई लोग शर्म या डर के कारण महीनों तक समस्या छिपाकर रखते हैं। इससे बीमारी बढ़ सकती है। लंबे समय तक बवासीर रहने पर खून की कमी (Anemia) हो सकती है, जबकि पुराना फिशर लगातार दर्द, संक्रमण और मांसपेशियों में ऐंठन (Spasm) का कारण बन सकता है। समय पर उपचार लेने से अधिकांश मरीज बिना किसी बड़ी परेशानी के पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं।

इन समस्याओं से बचाव कैसे करें?

इन दोनों बीमारियों से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ, फाइबर युक्त भोजन जैसे फल, हरी सब्जियाँ और साबुत अनाज का सेवन करें, कब्ज न होने दें, नियमित व्यायाम करें और मल त्याग के दौरान अधिक ज़ोर लगाने से बचें। लंबे समय तक लगातार बैठे रहने की आदत भी बदलनी चाहिए।

निष्कर्ष :

यदि मल त्याग के दौरान दर्द, खून, जलन या मस्सा महसूस हो रहा है, तो यह मान लेना कि "यह सिर्फ बवासीर है" सही नहीं है। बवासीर (Piles) और फिशर (A**l Fissure) दो अलग-अलग बीमारियाँ हैं, जिनका उपचार भी अलग होता है। सही समय पर विशेषज्ञ से सलाह लेने से न केवल बीमारी का सही इलाज संभव है, बल्कि भविष्य में होने वाली जटिलताओं से भी बचा जा सकता है।

डॉ. पुष्पेंद्र कुमार
MBBS, MS (General Surgery)
Professor, Department of General Surgery, NMCH
FIAGES – Fellowship in Laparoscopic Surgery

SD Hospital – Advance Laparoscopic & Trauma Center
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📞 7091194400 | 070911 94411

सर्वाइकल दर्द (Cervical Spondylosis): क्या आपकी गर्दन का दर्द सिर्फ थकान है या किसी गंभीर समस्या का संकेत?आज की Digital ...
29/07/2026

सर्वाइकल दर्द (Cervical Spondylosis): क्या आपकी गर्दन का दर्द सिर्फ थकान है या किसी गंभीर समस्या का संकेत?

आज की Digital Lifestyle में Neck Pain, Cervical Pain और Cervical Spondylosis तेजी से बढ़ती हुई समस्याएँ बन चुकी हैं। पहले यह बीमारी मुख्यतः बढ़ती उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन आज लंबे समय तक Mobile Phone, Laptop, Desktop Computer और गलत Posture के कारण युवा भी बड़ी संख्या में इससे प्रभावित हो रहे हैं।

अक्सर लोग गर्दन के दर्द को सामान्य थकान समझकर Painkiller लेकर काम चलाते रहते हैं। लेकिन यदि दर्द बार-बार हो रहा है, हाथों तक फैल रहा है या रोज़मर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं, तो यह Cervical Spine की गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। समय पर पहचान और सही इलाज से अधिकांश मरीज बिना किसी बड़ी परेशानी के सामान्य जीवन जी सकते हैं।

Cervical Spondylosis क्या है?

हमारी गर्दन में सात हड्डियाँ (Cervical Vertebrae) होती हैं, जिनके बीच मौजूद Disc और Joint गर्दन को लचीला बनाए रखते हैं। उम्र बढ़ने, गलत बैठने की आदत, लंबे समय तक स्क्रीन देखने और गर्दन पर लगातार दबाव पड़ने से इन संरचनाओं में घिसाव शुरू हो जाता है। इसी स्थिति को Cervical Spondylosis कहा जाता है।

यदि समय रहते इलाज न कराया जाए, तो नसों (Nerves) पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे हाथों में झुनझुनी, कमजोरी और कई बार संतुलन बनाने में भी परेशानी हो सकती है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी समस्या लगातार महसूस हो रही है, तो Orthopaedic Specialist से परामर्श लेना उचित रहेगा—

गर्दन में लगातार दर्द या अकड़न

दर्द का कंधे या हाथ तक फैलना

हाथों में झुनझुनी (Tingling) या सुन्नपन (Numbness)

हाथों की पकड़ कमजोर होना

बार-बार सिरदर्द या चक्कर आना

गर्दन घुमाने में कठिनाई

लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करने पर दर्द बढ़ जाना

ये सभी लक्षण Cervical Spondylosis, Disc Problem या Nerve Compression की ओर संकेत कर सकते हैं।

मोबाइल और लैपटॉप कैसे बन रहे हैं सबसे बड़े कारण?

आज अधिकांश लोग प्रतिदिन कई घंटे मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिताते हैं। मोबाइल को नीचे झुककर देखने की आदत (Text Neck Syndrome) गर्दन पर सामान्य से कई गुना अधिक दबाव डालती है।

इसके अलावा लगातार एक ही Position में बैठना, गलत ऊँचाई पर Laptop इस्तेमाल करना, सही कुर्सी का उपयोग न करना, गलत तकिया और शारीरिक गतिविधि की कमी भी Cervical Pain के प्रमुख कारण बन चुके हैं।

Cervical Pain का इलाज कैसे होता है?

हर मरीज का इलाज उसकी बीमारी की अवस्था और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाता है।

शुरुआती अवस्था में Medication, Muscle Relaxants, दर्द कम करने वाली दवाइयाँ तथा Vitamin Support से काफी लाभ मिल सकता है।

इसके साथ Physiotherapy, Neck Strengthening Exercises, Stretching तथा Posture Correction लंबे समय तक दर्द नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि नस पर अत्यधिक दबाव हो, हाथों में लगातार कमजोरी आने लगे या दवा एवं फिजियोथेरेपी से आराम न मिले, तो कुछ मरीजों में आधुनिक Spine Surgery या Minimally Invasive Surgical Procedure की आवश्यकता पड़ सकती है। सही उपचार का निर्णय हमेशा विशेषज्ञ द्वारा जांच के बाद ही लिया जाता है।

गर्दन को स्वस्थ रखने के 5 आसान उपाय

मोबाइल को हमेशा Eye Level पर रखें।

हर 30–40 मिनट बाद 2 मिनट का ब्रेक लें।

सही Posture में बैठकर काम करें।

नियमित Neck Stretching और हल्का Exercise करें।

सही तकिए का उपयोग करें और पर्याप्त नींद लें।

ये छोटी-छोटी आदतें भविष्य में Cervical Spondylosis का जोखिम काफी हद तक कम कर सकती हैं।

समय पर जांच क्यों जरूरी है?

अक्सर मरीज तब अस्पताल पहुँचते हैं जब दर्द कई महीनों पुराना हो चुका होता है या हाथों में कमजोरी शुरू हो जाती है। जबकि शुरुआती अवस्था में बीमारी की पहचान होने पर अधिकांश मरीजों का इलाज बिना Surgery के भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

यदि गर्दन का दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौट आता है या हाथों तक फैल रहा है, तो इसे केवल "थकान" या "गैस" समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और सही उपचार आपको भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचा सकता है।

निष्कर्ष

Cervical Spondylosis आज के समय की सबसे सामान्य Orthopaedic समस्याओं में से एक है, लेकिन अच्छी बात यह है कि समय पर Diagnosis, सही Treatment, नियमित Exercise और बेहतर Lifestyle अपनाकर इसे प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। गर्दन का दर्द जितना जल्दी समझा जाएगा, इलाज उतना ही आसान और परिणाम उतने ही बेहतर होंगे।

डॉ. अभिनव कुमार
MBBS, MS (Ortho)
Fellowship in AO Trauma
Assistant Professor, NMCH | Ex. Resident, Govt. of NCT, Delhi

SD Hospital – Advance Laparoscopic & Trauma Center
📍 टिकरी रोड, नियर ओवर ब्रिज, औरंगाबाद (बिहार)
📞 7091194400 | 7091194411

घुटनों का दर्द: कारण, इलाज और बचाव — समय रहते उठाएँ सही कदमआजकल घुटनों का दर्द केवल बढ़ती उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह...
27/07/2026

घुटनों का दर्द: कारण, इलाज और बचाव — समय रहते उठाएँ सही कदम

आजकल घुटनों का दर्द केवल बढ़ती उम्र के लोगों तक सीमित नहीं रह गया है। 30–40 वर्ष की आयु के लोगों में भी घुटनों में दर्द, अकड़न, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग इसे सामान्य दर्द समझकर दर्द निवारक दवाओं पर निर्भर रहते हैं, जबकि समय पर सही जांच और उपचार से इस समस्या को शुरुआती अवस्था में ही नियंत्रित किया जा सकता है।

इसी उद्देश्य से हमने घुटनों के दर्द पर चार महत्वपूर्ण विषयों की एक जागरूकता श्रृंखला तैयार की है, ताकि लोग बीमारी को समझें, सही समय पर इलाज कराएँ और भविष्य में गंभीर सर्जरी की आवश्यकता से बच सकें।

घुटनों के दर्द को न करें नज़रअंदाज़

यदि चलते समय, सीढ़ियाँ चढ़ते-उतरते, कुर्सी से उठते या लंबे समय तक बैठने के बाद घुटनों में दर्द महसूस होता है, तो इसे केवल उम्र का असर मानकर टालना सही नहीं है।

यदि दर्द के साथ सूजन, अकड़न, घुटनों से आवाज़ आना या चलने में कठिनाई भी हो रही है, तो यह ऑस्टियोआर्थराइटिस, लिगामेंट की चोट, मेनिस्कस की समस्या या अन्य ऑर्थोपेडिक बीमारी का संकेत हो सकता है।

घुटनों के दर्द के प्रमुख कारण

घुटनों के दर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं।

सबसे सामान्य कारण बढ़ती उम्र के साथ कार्टिलेज का घिसना है। इसके अलावा अधिक वजन घुटनों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे दर्द और जल्दी बढ़ सकता है।

खेलते समय लगी चोट, सड़क दुर्घटना, लिगामेंट या मेनिस्कस की चोट, अत्यधिक दौड़ना, भारी वजन उठाना, लंबे समय तक गलत मुद्रा में बैठना और शारीरिक गतिविधि की कमी भी घुटनों की समस्या को बढ़ा सकती है।

कई मरीजों में आनुवंशिक कारण या गठिया जैसी बीमारियाँ भी इसकी वजह बनती हैं।

घुटनों के दर्द का इलाज कैसे होता है?

हर मरीज का इलाज एक जैसा नहीं होता। सही उपचार हमेशा जांच और बीमारी की गंभीरता के अनुसार तय किया जाता है।

शुरुआती अवस्था में दवाइयाँ, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और वजन नियंत्रित करने से काफी लाभ मिलता है।

कुछ मरीजों में इंजेक्शन थेरेपी की आवश्यकता पड़ सकती है, जिससे दर्द और सूजन में राहत मिलती है।

यदि घुटने के अंदर लिगामेंट, मेनिस्कस या अन्य संरचनात्मक समस्या हो, तो आधुनिक आर्थ्रोस्कोपी (Keyhole Surgery) द्वारा छोटे चीरे से सफल उपचार किया जा सकता है।

जब घुटना पूरी तरह घिस चुका हो और दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तब घुटना प्रत्यारोपण (Knee Replacement Surgery) एक प्रभावी विकल्प हो सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी मरीज के लिए उपचार का निर्णय उसकी उम्र, एक्स-रे, एमआरआई और शारीरिक जांच के आधार पर किया जाता है।

स्वस्थ घुटनों के लिए अपनाएँ ये आदतें

घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ सरल आदतें बेहद प्रभावी साबित होती हैं।

नियमित हल्का व्यायाम करें, वजन नियंत्रित रखें, कैल्शियम और विटामिन D युक्त संतुलित भोजन लें तथा लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचें।

सीढ़ियों का अत्यधिक उपयोग, अचानक भारी वजन उठाना और बिना वार्म-अप के कठिन व्यायाम करने से बचना भी घुटनों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

यदि पहले से घुटनों में दर्द है, तो स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक चिकित्सक से सलाह लें।

समय पर इलाज ही सबसे बड़ा बचाव

अक्सर मरीज वर्षों तक दर्द सहते रहते हैं और अस्पताल तब पहुँचते हैं जब घुटना काफी क्षतिग्रस्त हो चुका होता है। याद रखिए, जितनी जल्दी बीमारी की पहचान होगी, इलाज उतना आसान और बेहतर होगा।

घुटनों का दर्द आपकी उम्र नहीं, बल्कि आपके जीवन की गुणवत्ता तय करता है। इसलिए दर्द को सामान्य मानकर अनदेखा न करें।

यदि आपको या आपके परिवार के किसी सदस्य को घुटनों में लगातार दर्द, सूजन, अकड़न या चलने-फिरने में परेशानी है, तो समय पर विशेषज्ञ से जांच कराएँ।

सही समय पर सही इलाज ही आपको सक्रिय, दर्द-मुक्त और बेहतर जीवन दे सकता है।

डॉ. अभिनव कुमार

MBBS, MS (Ortho)
Fellowship in AO Trauma
Assistant Professor, NMCH | Ex. Resident, Govt. of NCT, Delhi

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