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17/11/2021
*आषाढ़ माह 2021 के व्रत और त्योहार*【इंद्रासन ज्योतिष संस्थान अयोध्या 8400853496】=============================🏻इस बार आषा...
26/06/2021

*आषाढ़ माह 2021 के व्रत और त्योहार*
【इंद्रासन ज्योतिष संस्थान अयोध्या 8400853496】
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🏻इस बार आषाढ़ माह का प्रारंभ 25 जून 2021 शुक्रवार को प्रारंभ होगा और 24 जुलाई शनिवार 2021 गुरु पूर्णिाम तक रहेगा ज्योतिषाचार्य आचार्य रविंद्र जी गर्ग ने बताया कि इस माह के प्रमुख व्रत और त्योहार इस प्रकार रहेंगे.....
*1:-* 25 जून : वट सावित्री पूर्णिमा के बाद आषाढ़ माह प्रारंभ होगा। 25 जून को गुरु हरगोविन्दजी की जयंती है।
*2:-* 27 जून : 27 जून को गणेश चतुर्थी का व्रत रहेगा। रात को तिथि का प्रारंभ होगा। चंद्रोदय 9 बजकर 50 मिनट पर है। इसीलिए दूसरे दिन तक यह तिथि जारी रहेगी।
*3:-* 28 जून : 28 जून से पंचक काल प्रारंभ होगा जो 3 जुलाई तक रहेगा।
*4:-* 2 जुलाई : 2 जुलाई को सीतलाष्टमी का पर्व है जिसे बसोरा या बसोड़ भी कहते हैं।
*5:-* 5 जुलाई : 5 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
*6:-* 7 जुलाई : 7 जुलाई को प्रदोष व्रत रहेगा और इसी दिन संत नामदेवजी की पुण्यतिथि भी है।
*7:-* 8 जुलाई : 8 जुलाई को शिव चतुर्दशी अर्थात मासिक शिवरात्रि रहेगी।
*8:-* 9 जुलाई : 9 जुलाई को हलहारिणी अमावस्या है। यह श्राद्ध, दान पुण्य की अमावस्या है।
*9:-* 11 जुलाई : अषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा और इसी दिन गुप्त नवरात्रि का भी प्रारंभ होगा जो 18-19 जुलाई तक चलेगी।
*10:-* 12 जुलाई : 12 जुलाई को भगवान जगदीश की जगन्नाथ रथयात्रा प्रारंभ होगी।
*11:-* 13 जुलाई : 13 जुलाई को विनायकी चतर्दशी व्रत रहेगा।
*12:-* 15 जुलाई : 15 जुलाई को साई टेऊँराम जयंती रहेगी।
*13:-* 16 जुलाई : 16 जुलाई को मां ताप्ती जयंती रहेगी और इसी दिन कर्क संक्रांति भी होगी।
*14:-* 18 जुलाई : 18 जुलाई को गुप्त नवरात्रि पारण दिवस और इसी दिन भड़ली नवमी भी रहेगी।
*15:-* 19 जुलाई : 19 जुलाई को आशा दशमी का व्रत रहेगा।
*16:-* 20 जुलाई : ज्योतिषाचार्य आचार्य रविंद्र जी गर्ग ने बताया कि 20 जुलाई को हरिशयनी एकादशी से चतुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। इस देवशयनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन से देव सो जाएंगे और सभी तरह के मांगलिक और चार माह के लिए शुभ कार्य बंद हो जाएंगे।
*17:-* 21 जुलाई : 21 जुलाई को प्रदोष व्रत, वामन द्वादशी, वासुदेव द्वादशी रहेगी।
*18:-* 22 जुलाई : 22 जुलाई को विजया पार्वती व्रत और मंगला तेरस रहेगी।
*19:-* 23 जुलाई : 23 जुलाई को व्रत की पूर्णिमा प्रारंभ होगी। इसी दिन चंद्रशेखर आजाद और लोकमान्य तिलक की जयंती भी है।
*20:-* 24 जुलाई : 24 जुलाई को गुरू पूर्णिमा रहेगी। इस दिन व्यास पूजा होती है अर्थात महाभारत के लेखक वेद व्यासजी की पूजा। इसी दिन से आषाढ़ माह समाप्त हो जाएगा। दूसरे दिन से शिवजी का माह श्रावण माह का कृष्ण पक्ष प्रारंभ होगा और इसी दिन पंचक काल भी प्रारंभ हो जाएगा।
*21:-* जुलाई माह की बात करे तो 26 जुलाई को श्रावण माह का पहला सोमवार रहेगा ज्योतिषाचार्य ंने बताया कि इसी दिन महाकाल बाबा की पहली सवारी निकलेगी 27 जुलाई को मंगला गौरी का व्रत रखा जाएगा। इसी दिन गणेश चतुर्थी भी रहेगी। 28 जुलाई को मौना पंचमी रहेगी और नाग मरुस्थले भी है। 30 जुलाई को सीतला सप्तमी का व्रत रहेगा। इसी दिन पंचक समाप्त हो जाएगा।
*"ज्योतिष शास्त्र, वास्तुशास्त्र, वैदिक अनुष्ठान व समस्त धार्मिक कार्यो के लिए संपर्क करें:-*
*✍🏻 इंद्रासन ज्योतिष संस्थान अयोध्या, संपर्क सूत्र:- 8400853496, 9455518315 कुंडली परामर्श शुल्क 551/-रु. Phone Pe, Google Pay, Paytm No.- 9889246848**

16/06/2021

*भगवान शिव की अर्ध परिक्रमा क्यों.. ?*
【इंद्रासन ज्योतिष संस्थान अयोध्या 8400853496】
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शिवजी की आधी परिक्रमा करने का विधान है। वह इसलिए की शिव के सोमसूत्र को लांघा नहीं जाता है। जब व्यक्ति आधी परिक्रमा करता है तो उसे चंद्राकार परिक्रमा कहते हैं। शिवलिंग को ज्योति माना गया है और उसके आसपास के क्षेत्र को चंद्र। आपने आसमान में अर्ध चंद्र के ऊपर एक शुक्र तारा देखा होगा। यह शिवलिंग उसका ही प्रतीक नहीं है बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड ज्योतिर्लिंग के ही समान है।

''अर्द्ध सोमसूत्रांतमित्यर्थ: शिव प्रदक्षिणीकुर्वन सोमसूत्र न लंघयेत ।।
इति वाचनान्तरात।''

*सोमसूत्र के अनुसार:*

शिवलिंग की निर्मली को सोमसूत्र की कहा जाता है। शास्त्र का आदेश है कि शंकर भगवान की प्रदक्षिणा में सोमसूत्र का उल्लंघन नहीं करना चाहिए, अन्यथा दोष लगता है। सोमसूत्र की व्याख्या करते हुए बताया गया है कि भगवान को चढ़ाया गया जल जिस ओर से गिरता है, वहीं सोमसूत्र का स्थान होता है।

*क्यों नहीं लांघते सोमसूत्र :*

सोमसूत्र में शक्ति-स्रोत होता है अत: उसे लांघते समय पैर फैलाते हैं और वीर्य ‍निर्मित और 5 अन्तस्थ वायु के प्रवाह पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इससे देवदत्त और धनंजय वायु के प्रवाह में रुकावट पैदा हो जाती है। जिससे शरीर और मन पर बुरा असर पड़ता है। अत: शिव की अर्ध चंद्राकार प्रदशिक्षा ही करने का शास्त्र का आदेश है।

*तब लांघ सकते हैं :*

शास्त्रों में अन्य स्थानों पर मिलता है कि तृण, काष्ठ, पत्ता, पत्थर, ईंट आदि से ढके हुए सोम सूत्र का उल्लंघन करने से दोष नहीं लगता है,

लेकिन
‘शिवस्यार्ध प्रदक्षिणा’ का मतलब शिव की आधी ही प्रदक्षिणा करनी चाहिए।

किस ओर से परिक्रमा👉 भगवान शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बांई ओर से शुरू कर जलाधारी के आगे निकले हुए भाग यानी जल स्रोत तक जाकर फिर विपरीत दिशा में लौटकर दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी करें।
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