शब्दों का बाजीगर "बददी वाला राणा"

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शब्दों का बाजीगर "बददी वाला राणा" इस समूह का उदेश्य बददी बरोटीवाला नालागढ़ के रक्तदाताओं की सूची आम लोगों व जरुरतमंदो को उपलब्ध करवाना

🌹कुछ गिरहें बंद पड़ी रहने दोकुछ जज़्बात अंदर छुपे रहने दो🌹🌹कुछ बाते होंठ न ही कहे तो अच्छा हैथोड़ी मोहब्बत अभी दबी रहने ...
29/08/2026

🌹कुछ गिरहें बंद पड़ी रहने दो
कुछ जज़्बात अंदर छुपे रहने दो🌹
🌹कुछ बाते होंठ न ही कहे तो अच्छा है
थोड़ी मोहब्बत अभी दबी रहने दो🌹
2006

26/08/2026
24/08/2026

महसूस तो होती है पर, मुकम्मल नहीं होती ,
कुछ हसरतें, आँखों में ठहरी रहती है, इंतज़ार बनकर...

हर चीज़ तुरंत ठीक नहीं होती… कुछ चीज़ों को समय चाहिए होता हैज़िंदगी में कुछ परेशानियाँ ऐसी होती हैं,जिनका समाधान हम उसी ...
23/08/2026

हर चीज़ तुरंत ठीक नहीं होती… कुछ चीज़ों को समय चाहिए होता है
ज़िंदगी में कुछ परेशानियाँ ऐसी होती हैं,
जिनका समाधान हम उसी पल चाहते हैं।
हम चाहते हैं कि दर्द आज है तो कल खत्म हो जाए,
रिश्ता आज बिगड़ा है तो कल ठीक हो जाए,
और मेहनत आज की है तो सफलता कल मिल जाए।
लेकिन ज़िंदगी हमेशा हमारी जल्दी के हिसाब से नहीं चलती।
कुछ घावों को भरने में समय लगता है,
कुछ रिश्तों को संभलने में समय लगता है,
और कुछ सपनों को पूरा होने में भी समय लगता है।
इसलिए अगर आज सब कुछ वैसा नहीं है जैसा आपने सोचा था,
तो इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ खत्म हो गया।
कभी-कभी जिंदगी हमें रोकती है,
ताकि हम खुद को समझ सकें।
कभी रास्ता बदलती है,
ताकि हम सही मंज़िल तक पहुँच सकें।
और कभी इंतज़ार करवाती है,
ताकि जब खुशी मिले तो उसकी कीमत समझ आए।
बस एक बात याद रखिए—
बुरा वक्त आपकी पूरी कहानी नहीं है,
वह आपकी कहानी का सिर्फ एक पन्ना है।
आज मन भारी है तो थोड़ा आराम कर लीजिए,
आज कदम धीमे हैं तो धीमे चलिए,
लेकिन खुद को यह मत कहिए कि
“मैं नहीं कर सकता”
कल का सूरज आज की परेशानी लेकर नहीं आएगा।
हर सुबह अपने साथ एक नई संभावना लेकर आती है।
और शायद जिंदगी का सबसे खूबसूरत मोड़ वही होता है,
जब इंसान पीछे मुड़कर देखता है और कहता है—
“जिस दौर को मैं अपना अंत समझ रहा था,
वही दौर मुझे मेरी असली ताकत सिखा रहा था।”
इसलिए थोड़ा सब्र रखिए…
जो आपके लिए है, वह अपने सही समय पर जरूर आएगा।
बस तब तक खुद का साथ मत छोड़िए।
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मेरी कलम से✍️ डॉ.पुष्पा चौधरी

फिर वही बोझिल सुबह फिर से वही सारे मसाइल.बासी ख़बरों के फिर अख़बार उठाए हुए बैठे हैँ.ज़िन्दगी इस क़दर बेज़ार सी लगने लगी है.ल...
17/08/2026

फिर वही बोझिल सुबह फिर से वही सारे मसाइल.
बासी ख़बरों के फिर अख़बार उठाए हुए बैठे हैँ.
ज़िन्दगी इस क़दर बेज़ार सी लगने लगी है.
लोग अब ख़ुद से ही उकताए हुए बैठे हैँ.....

खो रहा है अपनापन... और दिखावा बढ़ता जा रहा है।आज इंसान, इंसान से जुड़ने के बजाय उससे बेहतर दिखने की होड़ में दौड़ रहा है...
29/07/2026

खो रहा है अपनापन... और दिखावा बढ़ता जा रहा है।
आज इंसान, इंसान से जुड़ने के बजाय उससे बेहतर दिखने की होड़ में दौड़ रहा है। इस अंधी प्रतिस्पर्धा ने रिश्तों की सादगी, आत्मीयता और विश्वास को धीरे-धीरे निगल लिया है। लोग साथ तो हैं, लेकिन दिलों की दूरियाँ पहले से कहीं अधिक बढ़ गई हैं।

विडंबना देखिए—हम बड़े-बड़े घर बना रहे हैं, लेकिन उनमें रिश्तों के लिए जगह छोटी होती जा रही है। हमारे पास हजारों ऑनलाइन मित्र हैं, पर मन की बात सुनने वाला अपना इंसान कम होता जा रहा है। चेहरों पर मुस्कानें बढ़ी हैं, मगर दिल पहले से ज़्यादा अकेले हो गए हैं।
रिश्ते कभी दिखावे से नहीं, बल्कि समय, सम्मान, विश्वास, संवेदना और समर्पण से जीवित रहते हैं। दिखावा कुछ पल के लिए लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सच्चा अपनापन जीवनभर दिलों में अपनी जगह बना लेता है।
आइए, तुलना की जगह प्रोत्साहन दें, अहंकार की जगह विनम्रता चुनें, और दिखावे की जगह अपनापन। क्योंकि अंत में लोग हमारी
दौलत, पद या प्रसिद्धि को नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार और हमारे निभाए हुए रिश्तों को याद रखते हैं।
रिश्तों को बचाइए... क्योंकि जब अपनापन खो जाता है, तब दुनिया की कोई भी चमक मन का खालीपन नहीं भर सकती।
मेरी कलम से ✍️ - डॉ. पुष्पा चौधरी
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Surender Sharma

15/07/2026

दौड़ती हुई जिंदगी में ठहराव ढूंढते हैं
जब हमारा मन ना लगे तो हम चाय ढूंढते हैं.....

ऐसी औरतें भी होती हैं, जो दूसरी औरतों के साथ गलत करती हैं और ऐसे मर्द भी होते हैं, जो औरतों के लिए अच्छा करना चाहते हैं।...
14/07/2026

ऐसी औरतें भी होती हैं, जो दूसरी औरतों के साथ गलत करती हैं और ऐसे मर्द भी होते हैं, जो औरतों के लिए अच्छा करना चाहते हैं। समस्या मर्द होने में नहीं, सोच में है।
कमला भसीन

"सौ दाग भले मिल जाए मेरे कपड़ों में...पर मेरा जमीर हमेशा साफ मिलेगा... See more
27/06/2026

"सौ दाग भले मिल जाए मेरे कपड़ों में...
पर मेरा जमीर हमेशा साफ मिलेगा... See more

हर किसी को अपना मत समझिए... क्योंकि हर सुनने वाला हमदर्द नहीं होता।ज़िंदगी की सबसे अनमोल नेमत धन, दौलत या शोहरत नहीं है।...
05/06/2026

हर किसी को अपना मत समझिए... क्योंकि हर सुनने वाला हमदर्द नहीं होता।
ज़िंदगी की सबसे अनमोल नेमत धन, दौलत या शोहरत नहीं है। सबसे बड़ी नेमत वह इंसान है जो आपके टूटे हुए मन की आवाज़ भी सुन ले, बिना किसी स्वार्थ के आपका हाथ थाम ले, और अंधेरे रास्तों में भी आपको उजाले की दिशा दिखाता रहे।
ऐसे लोग भीड़ में नहीं मिलते... वे किस्मत की किताब में लिखे जाते हैं।
आज की दुनिया में चेहरे बहुत हैं, लेकिन चरित्र कम हैं। शब्द बहुत हैं, लेकिन संवेदनाएँ कम हैं। लोग आपके सामने ऐसे बैठेंगे मानो आपकी पीड़ा उनके सीने में उतर गई हो, मानो आपकी आँखों का हर आँसू उनकी पलकों पर ठहर गया हो। मगर जैसे ही आप अपनी कहानी उनके हवाले करते हैं, वही कहानी किसी और की महफ़िल में चर्चा बन जाती है।
आप अपना दर्द सुनाते हैं...
और दुनिया उसे मनोरंजन की तरह सुनती है।
आपके घावों की गहराई जिनके लिए रातों की नींद छीन लेती है, वही घाव किसी और के लिए चाय की चुस्कियों के बीच सुनाया जाने वाला एक दिलचस्प किस्सा बन जाते हैं।
यही कारण है कि हर दर्द को बाज़ार में नहीं ले जाना चाहिए।
कुछ आँसू इतने पवित्र होते हैं कि उन्हें केवल ईश्वर और अपनी आत्मा के बीच ही रहने देना चाहिए।
हाँ, यह भी सच है कि इस भीड़ में कभी-कभी कोई ऐसा भी मिलता है जो सचमुच चाहता है कि आप संभल जाएँ, मुस्कुरा दें, फिर से खड़े हो जाएँ। वह आपकी कमज़ोरियों का हिसाब नहीं रखता, आपकी तकलीफ़ों का प्रदर्शन नहीं करता। उसकी अपनी मजबूरियाँ हो सकती हैं, उसके हाथ सीमित हो सकते हैं, लेकिन उसकी नीयत निर्मल होती है।
ऐसे लोग समुद्र के किनारे पड़ी साधारण रेत नहीं, बल्कि गहराइयों में छिपे मोती होते हैं।
इसलिए अपनी हर पीड़ा को दुनिया के सामने मत खोलिए।
हर दरवाज़े पर अपनी उदासी मत रखिए।
हर मुस्कुराते चेहरे को अपना राज़दार मत बनाइए।
क्योंकि दुनिया उतनी सरल नहीं है जितनी दिखाई देती है, और नक़ाबों के इस मेले में सच्चे चेहरे पहचानना सबसे कठिन कला है।
अपने दुःख को अपनी शक्ति बनाइए, अपनी कमज़ोरी नहीं।
अपनी चुप्पी को अपनी गरिमा बनाइए, अपनी हार नहीं।
और जब कभी जीवन में कोई ऐसा इंसान मिल जाए जो आपके आँसुओं का सम्मान करे, आपकी अनुपस्थिति में भी आपकी इज़्ज़त की रक्षा करे, और आपकी भलाई को अपना धर्म समझे...
तो उसे संभाल कर रखिए।
क्योंकि ऐसे लोग रिश्तों के नाम पर नहीं मिलते, वे ऊपरवाले की तरफ़ से भेजी गई वह दुआ होते हैं जो हर किसी के हिस्से में नहीं आती।
सोचिए... आपकी ज़िंदगी में जो लोग आपके दुःख जानते हैं, उनमें से कितने लोग सचमुच आपके साथ खड़े हैं, और कितने लोग केवल आपकी कहानी जानते हैं? 💔🥀
यही प्रश्न कई बार पूरी ज़िंदगी का सबसे सच्चा उत्तर बन जाता है। ✍️🌹

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