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29 जून को श्री राजेन्द्र जोशी जी के बनबसा स्थित आवास पर शांतिकुंज, हरिद्वार की टोली द्वारा युग संगीत, प्रवचन एवं दीप यज्...
30/06/2026

29 जून को श्री राजेन्द्र जोशी जी के बनबसा स्थित आवास पर शांतिकुंज, हरिद्वार की टोली द्वारा युग संगीत, प्रवचन एवं दीप यज्ञ का कार्यक्रम सम्पन्न किया गया 🙏

गायत्री जयन्ती के शुभ अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ, बनबसा में आयोजित कार्यक्रम 🙏
24/06/2026

गायत्री जयन्ती के शुभ अवसर पर गायत्री शक्तिपीठ, बनबसा में आयोजित कार्यक्रम 🙏

💐भावपूर्ण आमंत्रण 💐
24/06/2026

💐भावपूर्ण आमंत्रण 💐

🙏🕉️👏आमंत्रण💐🌻🌹 गायत्री जयंती ,परम पूज्य गुरुदेव महानिर्वाण दिवस 23 जून -सायं 4 बजे से 6 बजे तक -सामूहिक गायत्री महामंत्र...
21/06/2026

🙏🕉️👏आमंत्रण💐🌻🌹
गायत्री जयंती ,परम पूज्य गुरुदेव महानिर्वाण दिवस
23 जून -सायं 4 बजे से 6 बजे तक -सामूहिक गायत्री महामंत्र अनुष्ठान में जितनी देर तक भागीदारी कर सकें।
24 जून - गायत्री यज्ञ व पर्व पूजन प्रात: 0730 बजे से

कार्यक्रम स्थल - गायत्री शक्तिपीठ बनबसा।

04/06/2026
पूर्णिमा के अवसर पर आज गायत्री शक्तिपीठ, बनबसा में पावन सुन्दर काण्ड का पाठ किया गया 🙏
30/05/2026

पूर्णिमा के अवसर पर आज गायत्री शक्तिपीठ, बनबसा में पावन सुन्दर काण्ड का पाठ किया गया 🙏

23/05/2026

15/05/2026

भगवान श्री कृष्ण और उनकी लीला
# # # **भगवान श्रीकृष्ण की वह रहस्यमयी लीला जिसे आज भी कोई नहीं समझ पाया**
**उल्लेख: श्रीमद्भागवत महापुराण, स्कंध 10, गर्ग संहिता — "महारास के बाद की रात"**

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# # # # **प्रस्तावना: 3 रहस्य जो द्वापर में दब गए**

श्रीकृष्ण की 16,108 रानियाँ, माखन-चोरी, गोवर्धन-धारण — ये सब जग-जाहिर है। पर 3 लीलाएँ ऐसी हैं जिनका अर्थ ब्रह्मा भी नहीं समझ पाए:
1. **रास के बाद गोपियों के घर कृष्ण कैसे पहुँचे?**
2. **स्यमंतक मणि की चोरी का सच**
3. **द्वारका डूबने से पहले की आखिरी रात**

आज की कथा तीसरे रहस्य पर है — **"वो रात जब द्वारका में 9 करोड़ कृष्ण एक साथ प्रकट हुए थे"**। इसे संत "योगमाया-प्रकाश लीला" कहते हैं।

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# # # # **अध्याय 1: द्वारका का आखिरी वर्ष**

महाभारत युद्ध खत्म हुए 36 साल बीत गए। गांधारी का श्राप फलित हो रहा था — यदुवंशी आपस में लड़ने लगे थे। ऋषि दुर्वासा ने कहा, "यादव कुल का नाश निकट है।"

कृष्ण जानते थे। एक दिन उन्होंने उद्धव को बुलाया। बोले, "उद्धव, द्वारका समुद्र में डूब जाएगी। पर जाने से पहले मुझे एक लीला करनी है — ऐसी कि कलियुग का मनुष्य समझे कि ईश्वर 'एक' नहीं, 'अनंत' है।"

उद्धव ने पूछा, "प्रभु, आप तो एक हैं। फिर अनंत कैसे?"
कृष्ण मुस्कुराए, "आज रात मेरे महल आना, पर अकेले। किसी को मत बताना।"

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# # # # **अध्याय 2: 9 करोड़ कृष्ण की रात**

फाल्गुन पूर्णिमा। द्वारका के हर घर में उत्सव। पर कृष्ण के महल में सन्नाटा। रात 12 बजे उद्धव छुपकर पहुँचे।

क्या देखा? महल के 16,108 कक्षों में 16,108 कृष्ण बैठे थे। हर रानी के साथ एक कृष्ण। रुक्मिणी के साथ कृष्ण शतरंज खेल रहे थे। सत्यभामा के साथ नृत्य। जाम्बवती के साथ गीता पढ़ रहे थे। मित्रविंदा के साथ माखन खा रहे थे।

उद्धव बाहर भागे। नगर में गए — हर यादव के घर में कृष्ण! कोई पिता के साथ बैठा, कोई बेटे के साथ, कोई गाय का दूध दुह रहा, कोई सुदामा के घर खिचड़ी खा रहा।

गिनती की तो 9 करोड़ रूप। पर सबके चेहरे पर वही मोरपंख, वही पीताम्बर, वही बाँसुरी। और सब एक साथ बोल रहे थे, पर आवाज़ एक।

उद्धव का सिर घूम गया। वो समुंद्र किनारे गए। वहाँ भी कृष्ण लहरों से खेल रहे थे। उद्धव गिर पड़े, "प्रभु, ये क्या माया है?"

तभी सब रूप हवा में मिले और सिर्फ एक कृष्ण रह गए — वही जो उद्धव के सामने खड़े थे। बोले:

**"उद्धव, मैं एक हूँ, पर प्रेम अनंत है। जिस भक्त ने मुझे जैसा पुकारा, मैं वैसा बन गया। कोई मित्र कहता है तो सुदामा बन जाता हूँ, कोई पुत्र कहता है तो प्रद्युम्न के पास बैठ जाता हूँ, कोई पति कहता है तो 16,108 रूप ले लेता हूँ।
कलियुग में लोग पूछेंगे — ईश्वर एक है तो दुनिया में इतना भेद क्यों? तब तुम बता देना: सूर्य एक है, पर घड़ों में 9 करोड़ दिखता है। घड़ा फूटे तो सूर्य नहीं फूटता। वैसे ही देह मिटे तो मैं नहीं मिटता।"**

इसे "कायव्यूह लीला" कहते हैं — एक शरीर से अनंत शरीर प्रकट करना।

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# # # # **अध्याय 3: ब्रह्मा का भ्रम और समाधान**

इस लीला का पहला प्रयोग कृष्ण ने वृंदावन में 5 साल की उम्र में किया था। ब्रह्मा ने ग्वाल-बाल और गायें चुरा लीं। कृष्ण ने खुद ही उतने ही ग्वाल-बाल और गायें बनाकर 1 साल वृंदावन चलाया। माँ यशोदा को पता तक न चला।

जब ब्रह्मा लौटे तो देखा — हर ग्वाल कृष्ण है, हर गाय कृष्ण है। डरकर माफी माँगी। कृष्ण बोले, "पितामह, आप सृष्टि बनाते हो, मैं सृष्टि बन जाता हूँ। अंतर यही है।"

**रहस्य**: ब्रह्मा का काम "बनाना" है, कृष्ण का काम "बन जाना" है। इसलिए वैष्णव कहते हैं — कृष्ण "अवतारी" हैं, बाकी सब "अवतार"।

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# # # # **अध्याय 4: कलियुग के लिए संदेश**

द्वारका डूबने से 7 दिन पहले कृष्ण ने उद्धव को "उद्धव गीता" सुनाई। 9 करोड़ रूप वाली रात का सार 4 सूत्रों में दिया:

1. **एकोऽहं बहु स्याम्** — मैं एक हूँ, अनेक होना चाहता हूँ। जब तुम प्रेम करोगे, मैं तुम्हारे लिए नया रूप ले लूँगा।
2. **यो मां पश्यति सर्वत्र** — जो सबमें मुझे देखता है, वो कभी अकेला नहीं। कलियुग में मंदिर टूटेंगे, पर माँ के आँचल में, दोस्त की हँसी में, गाय की आँख में मैं मिलूँगा।
3. **माया नहीं, योगमाया** — माया भटकाती है, योगमाया मिलाती है। 9 करोड़ रूप योगमाया थी — भ्रम नहीं, प्रेम का विस्तार।
4. **अंतिम लीला** — द्वारका डूबेगी, पर मेरा वादा नहीं डूबेगा। जब-जब भक्त अकेला होगा, मैं उसके पास उसी रूप में आऊँगा जिसकी उसे ज़रूरत है।

ये कहकर कृष्ण ने बाँसुरी तोड़ी और समुद्र में फेंक दी। बोले, "अब बाँसुरी हर भक्त के हृदय में बजेगी। जिसे सुननी हो, प्रेम से सुने।"

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# # # # **अध्याय 5: आज भी जारी है लीला**

**संत बताते हैं 3 प्रमाण कि लीला आज भी चल रही है:**

1. **जगन्नाथ पुरी**: वहाँ कृष्ण, बलराम, सुभद्रा की काठ की मूर्ति हर 12 साल में बदलती है। पुरानी मूर्ति में से "ब्रह्म पदार्थ" नई में डाला जाता है। पुजारी की आँखों पर पट्टी बाँधते हैं, हाथ में दस्ताने। कहते हैं जिसने ब्रह्म देखा, वो अंधा हो जाता है। वो ब्रह्म क्या है? — 9 करोड़ रूप वाली रात का एक कण, जो आज भी धड़कता है।
2. **बाँके बिहारी मंदिर**: मंगला आरती साल में 1 बार जन्माष्टमी पर होती है। क्योंकि मान्यता है अगर रोज बिहारी जी को देखोगे तो प्रेम में देह छूट जाएगी। वो 9 करोड़ रूप का तेज अब भी विग्रह में है।
3. **तुम्हारा घर**: जब तुम अकेले रोते हो और अचानक कोई दोस्त बिना बताए आ जाए, जब भूख में कोई रोटी दे जाए, जब मौत के मुँह से वापिस आ जाओ — समझो 9 करोड़ में से एक कृष्ण तुम्हारे पास आया था।

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# # # # **उपसंहार: रहस्य का हल**

**तो रहस्य क्या था जो कोई नहीं समझ पाया?**
ये कि भगवान "आकाश में बैठा व्यक्ति" नहीं, "तुम्हारे पास बैठने की कला" है।

कृष्ण द्वारका में 9 करोड़ इसलिए बने क्योंकि 9 करोड़ यादव थे। हर एक को लगा "कृष्ण सिर्फ मेरे हैं"। कलियुग में 8 अरब लोग हैं। इसलिए आज भी वो 8 अरब रूप ले सकते हैं — एक तुम्हारे लिए, एक मेरे लिए।

**पहचान कैसे हो?**
गर्ग संहिता कहती है: *"यत्र प्रेम तत्र प्रकटः"* जहाँ सच्चा प्रेम जागे, वहाँ वो प्रकट हैं। बाँसुरी की आवाज़ नहीं आएगी, पर मन में अचानक हिम्मत आएगी। पीताम्बर नहीं दिखेगा, पर अँधेरे में रास्ता दिखेगा।

**अंतिम सूत्र**: द्वारका डूबी, पर कृष्ण नहीं डूबे। वो अब "समय" बनकर हर सेकंड में बँट गए। तुम्हारा ये सेकंड भी उन्हीं 9 करोड़ में से एक है।

**राधे कृष्ण। राधे कृष्ण। राधे कृष्ण।**

🙏

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