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20/10/2022

*🌹सूर्यग्रहण 25 अक्टूबर 2022 विशेष जानकारी : (पूर्व भारत के कुछ भाग छोड़कर पूरे भारत में नियम पालनीय हैं।)*

*🌔ग्रहण का समयकाल, सूतक काल भारत के विभिन्न स्थानों में ग्रहण का समय तथा ग्रहण में क्या करें- क्या नही सम्पूर्ण जानकारी 😗

*👉🏻सूर्यग्रहण तिथि – 25 अक्टूबर 2022, मंगलवार*
*👉🏻ग्रहण काल - 25 अक्टूबर शाम 04:30 से 06:06 तक*
*👉🏻सूतक काल – 25 अक्टूबर प्रातः 04:30 से ग्रहण समाप्त होने तक*

*विशेष सूचना*

*सभी साधक ध्यान दे कि 25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण है और उस दिन भोजन पानी के समस्त पदार्थो में तुलसी के पत्ते डालने है*

*लेकिन किन्तु परन्तु*

*24 अक्टूबर को अमावस्या है जिस दिन कोई भी पत्ता तोड़ने से ब्रह्महत्या का पाप लगता है*

*कहानी अभी पूरी नहीं हुई है* 😀

*23 अक्टूबर को रविवार है और रविवार को तुलसी को स्पर्श करना और पत्ते तोड़ना बिल्कुल वर्जित है और तोड़ने वाले को महापाप लगेगा*

*इसलिए तुलसी के पत्ते 22 अक्टूबर को दिन में 12 बजे से पहले तोड़ ले क्योंकि 12 बजे के बाद पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए*
*22 को द्वादशी है तुलसी पते नही तोड़े , 20 तारीख गुरुवार को ही तोड़े*
🚩

*🔹स्थान- ग्रहण प्रारम्भ व समाप्ति समय 😗

*(स्थान)* *(समय-शाम)*
*▪️अहमदाबाद-* 04:38 से 06:06 तक
*▪️नई दिल्ली-* 04:28 से 05:42 तक
*▪️सूरत* - 04:43 से 06:07 तक
*▪️मुम्बई-* 04:49 से 06:09 तक
*▪️पुणे-* 04:51 से 06:06 तक
*▪️नागपुर-* 04:49 से 05:42 तक
*▪️नाशिक-* 04:47 से 06:04 तक
*▪️गुवाहाटी-* -- --
*▪️जोधपुर -* 04:30 से 06:01 तक
*▪️लखनऊ-* 04:36 से 05:29 तक
*▪️भोपाल-* 04:42 से 05:47 तक
*▪️रायपुर-* 04:50 से 05:32 तक
*▪️चंडीगढ़-* 04:23 से 05:41 तक
*▪️रांची -* 04:48 से 05:15 तक
*▪️पटना-* 04:42 से 05:14 तक
*▪️कोलकाता-* 04:41 से 05:04 तक
*▪️भुवनेश्वर-* 04:56 से 05:16 तक
*▪️चेन्नई-* 05:13 से 05:45 तक
*▪️बेंगलुरु-* 05:12 से 05:56 तक
*▪️हैदराबाद-* 04:58 से 05:48 तक
*▪️जम्मू-* 04:17 से 05:47 तक

*🌹ग्रहण में क्या करें, क्या न करें ?*

📍चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण के समय संयम रखकर जप-ध्यान करने से कई गुना फल होता है। श्रेष्ठ साधक उस समय उपवासपूर्वक ब्राह्मी घृत का स्पर्श करके *''ॐ नमो नारायणाय''* मंत्र का आठ हजार जप करने के पश्चात ग्रहणशुद्धि होने पर उस घृत को पी ले। ऐसा करने से वह *मेधा (धारणशक्ति), कवित्वशक्ति तथा वाक् सिद्धि* प्राप्त कर लेता है।

📍सूर्यग्रहण या चन्द्रग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उतने वर्षों तक *'अरुन्तुद'* नरक में वास करता है।

📍सूर्यग्रहण में ग्रहण *चार प्रहर (12 घंटे) पूर्व और चन्द्र ग्रहण में तीन प्रहर (9)* घंटे पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। *बूढ़े, बालक और रोगी डेढ़ प्रहर (साढ़े चार घंटे)* पूर्व तक खा सकते हैं।

📍ग्रहण-वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियाँ डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते। पके हुए अन्न का त्याग करके उसे गाय, कुत्ते को डालकर नया भोजन बनाना चाहिए।

📍ग्रहण वेध के प्रारम्भ में तिल या कुश मिश्रित जल का उपयोग भी अत्यावश्यक परिस्थिति में ही करना चाहिए और ग्रहण शुरू होने से अंत तक अन्न या जल नहीं लेना चाहिए।

📍ग्रहण के स्पर्श के समय स्नान, मध्य के समय होम, देव-पूजन और श्राद्ध तथा अंत में सचैल (वस्त्रसहित) स्नान करना चाहिए। स्त्रियाँ सिर धोये बिना भी स्नान कर सकती हैं।

📍ग्रहण पूरा होने पर सूर्य या चन्द्र, जिसका ग्रहण हो उसका शुद्ध बिम्ब देखकर भोजन करना चाहिए।

📍ग्रहणकाल में स्पर्श किये हुए वस्त्र आदि की शुद्धि हेतु बाद में उसे धो देना चाहिए तथा स्वयं भी वस्त्रसहित स्नान करना चाहिए।

📍ग्रहण के स्नान में कोई मंत्र नहीं बोलना चाहिए। ग्रहण के स्नान में गरम जल की अपेक्षा ठंडा जल, ठंडे जल में भी दूसरे के हाथ से निकाले हुए जल की अपेक्षा अपने हाथ से निकाला हुआ, निकाले हुए की अपेक्षा जमीन में भरा हुआ, भरे हुए की अपेक्षा बहता हुआ, (साधारण) बहते हुए की अपेक्षा सरोवर का, सरोवर की अपेक्षा नदी का, अन्य नदियों की अपेक्षा गंगा का और गंगा की अपेक्षा भी समुद्र का जल पवित्र माना जाता है।

📍ग्रहण के समय गायों को घास, पक्षियों को अन्न, जरूरतमंदों को वस्त्रदान से अनेक गुना पुण्य प्राप्त होता है।

📍ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल नहीं तोड़ने चाहिए। बाल तथा वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए व दंतधावन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग, मैथुन और भोजन – ये सब कार्य वर्जित हैं।

📍ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

📍ग्रहण के समय सोने से रोगी, लघुशंका करने से दरिद्र, मल त्यागने से कीड़ा, स्त्री प्रसंग करने से सूअर और उबटन लगाने से व्यक्ति कोढ़ी होता है। गर्भवती महिला को ग्रहण के समय विशेष सावधान रहना चाहिए।

📍तीन दिन या एक दिन उपवास करके स्नान दानादि का ग्रहण में महाफल है, किन्तु संतानयुक्त गृहस्थ को ग्रहण और संक्रान्ति के दिन उपवास नहीं करना चाहिए।

*📍भगवान वेदव्यासजी ने परम हितकारी वचन कहे हैं-* 'सामान्य दिन से चन्द्रग्रहण में किया गया पुण्यकर्म (जप, ध्यान, दान आदि) *एक लाख* गुना और सूर्यग्रहण में *दस लाख* गुना फलदायी होता है। यदि *गंगाजल* पास में हो तो *चन्द्रग्रहण में एक करोड़* गुना और *सूर्यग्रहण में दस करोड़* गुना फलदायी होता है।'

📍ग्रहण के समय गुरुमंत्र, इष्टमंत्र अथवा भगवन्नाम-जप अवश्य करें, न करने से मंत्र को मलिनता प्राप्त होती है।

📍ग्रहण के अवसर पर दूसरे का अन्न खाने से *बारह वर्षों* का एकत्र किया हुआ सब *पुण्य नष्ट* हो जाता है। (स्कन्द पुराण)

📍भूकंप एवं ग्रहण के अवसर पर पृथ्वी को खोदना नहीं चाहिए। (देवी भागवत)

📍अस्त के समय सूर्य और चन्द्रमा को रोगभय के कारण नहीं देखना चाहिए।

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*पंचांग में तिथि ,नक्षत्र आदि का काल गणना (समय) काशी (बनारस) के पंचांग से लिया गया है* 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

🌼 *समाज कल्याण हेतु अन्य ग्रुप तथा अपने मित्रों परिचितो तक पहुचाने का सेवा अवश्य करें* 💐☘🌹🌻🌺🙏🙏🏻🌹🌻☘🌷🌺🌸🌼💐🙏🏻🙏🍀🌷🌻🌺🌺🌸🍁💐🙏🏻💐
*समाज रुपी ईश्वर के सेवा में सदैव अग्रणी ज्योतिषीय संस्थान ( सभी* *तरह के ग्रहबाधा, शत्रु बाधा, अनिष्ट बाधा के उत्तम शांति निवारण ,रत्न*
*सलाह , ग्रह से संबंधित सभी समस्या समाधान,जन्मकुंडली के विशेष अनुभवी)*

*स्वामी आशुतोष पाण्डेय* (1) .. नारायण आयुवैर्दीक सेवा केंद्र ,हरमु रोड किशोरगंज,रांची,
*झारखण्ड,संपर्क-6200016671*
🍁🙏🏻
*कुंदन कुमार पाठक*
(2) हरि ॐ पूजा भंडार, ठाकुरबारी, मेन रोड बस स्टैंड छत्तरपुर, झारखण्ड, सम्पर्क -7858092728, 6200839778
*अपने व्हाट्सप्प ग्रुप में पंचांग पाने हेतु इस नम्बर को अपने ग्रुप में ADD करें* 👉 *06200016671*
🙏🏻🌷🌻🌹🍀🌺🌸🍁💐🙏🏻🌺🙏

02/06/2022

दिनाँक ०२ जून २०२२
दिन गुरुवार
विक्रमी संवत २०७९
शक संवत १९४४
सूर्य उत्तरायण
उत्तरगोल
ग्रीष्म ऋतु
ज्येष्ठ मास
शुक्ल पक्ष
तृतीया तिथि २४:१७ तक फिर चतुर्थी तिथि
आर्द्रा नक्षत्र १६:०३ तक फिर पुनर्वसु नक्षत्र
गण्ड योग २६:३५ तक फिर वृद्धि योग
मिथुन राशि में चन्द्रमा

02/05/2022

दिनाँक ०२ मई २०२२
दिन सोमवार
विक्रमी संवत २०७९
शक संवत १९४४
सूर्य उत्तरायण
उत्तरगोल
ग्रीष्म ऋतु
बैसाख मास
शुक्ल पक्ष
द्वितिया तिथि २९:१८ तक फिर तृतीया तिथि
कृतिका नक्षत्र २४:३३ तक फिर रोहिणी नक्षत्र
सौभाग्य योग १५:३६ तक फिर शोभन योग
वृश्चिक राशि में चन्द्रमा

01/05/2022

दिनाँक ०१ मई २०२२
दिन रविवार
विक्रमी संवत २०७९
शक संवत १९४४
सूर्य उत्तरायण
उत्तरगोल
ग्रीष्म ऋतु
बैसाख मास
शुक्ल पक्ष
प्रतिपदा तिथि २७:२५ तक फिर द्वितिया तिथि
भरणी नक्षत्र २२:१० तक फिर कृतिका नक्षत्र
आयुष्मान योग १५:१७ तक फिर सौभाग्य योग
मेष राशि में चन्द्रमा २८:४२ तक फिर वृश्चिक राशि में

25/04/2022

दिनाँक २५ अप्रैल २०२२
दिन सोमवार
विक्रमी संवत २०७९
शक संवत १९४४
सूर्य उत्तरायण
उत्तरगोल
बसंत ऋतु
बैसाख मास
कृष्ण पक्ष
दशमी तिथि २५:३८ तक फिर एकादशी तिथि
धनिष्ठा नक्षत्र १७:१२ तक फिर शतभिषा नक्षत्र
शुक्ल योग २०:५४ तक फिर ब्रह्म योग
मकर राशि में चन्द्रमा ०५:२९ तक फिर कुम्भ राशि में

24/04/2022
24/04/2022

दिनाँक २४ अप्रैल २०२२
दिन रविवार
विक्रमी संवत २०७९
शक संवत १९४४
सूर्य उत्तरायण
उत्तरगोल
बसंत ऋतु
बैसाख मास
कृष्ण पक्ष
नवमी तिथि २६:५२ तक फिर दशमी तिथि
श्रवण नक्षत्र १७:५२ तक फिर धनिष्ठा नक्षत्र
शुभ योग २३:०३ तक फिर शुक्ल योग
मकर राशि में चन्द्रमा

23/04/2022

दिनाँक २३ अप्रैल २०२२
दिन शनिवार
विक्रमी संवत २०७९
शक संवत १९४४
सूर्य उत्तरायण
उत्तरगोल
बसंत ऋतु
बैसाख मास
कृष्ण पक्ष
सप्तमी तिथि ०६:२७ तक फिर अष्टमी तिथि २८:२९ तक फिर नवमी तिथि
उत्तराषाढ़ा नक्षत्र १८:५३ तक फिर श्रवण नक्षत्र
साध्य योग २५:२९ तक फिर शुभ योग
मकर राशि में चन्द्रमा

21/04/2022

दिनाँक २१ अप्रैल २०२२
दिन गुरुवार
विक्रमी संवत २०७९
शक संवत १९४४
सूर्य उत्तरायण
उत्तरगोल
बसंत ऋतु
बैसाख मास
कृष्ण पक्ष
पंचमी तिथि ११:१२ तक फिर षष्ठी तिथि
मूल नक्षत्र २१:५१ तक फिर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
परिघ योग १०:२० तक फिर शिव योग
धनु राशि में चन्द्रमा

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