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Ojas Ojas is a wellness startup whose mission is to spread spirituality and uplift society.

Ojas provides physical and emotional healing services such as Prana chikitsa and yoga-medication to people as well as teaches this technique to new students.

*AWGP- LITERATURE GURUDEV*ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*युग निर्माण सत्-सं...
07/06/2026

*AWGP- LITERATURE GURUDEV*
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा*
*अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्य करेंगे।*

वास्तव में नीति मार्ग छोड़कर किसी मानवोचित सदुद्देश्य की पूर्ति की नहीं जा सकती। मनुष्यता खोकर पाई सफलता कम से कम मनुष्य कहलाने में गौरव अनुभव करने वाले के लिए तो प्रसन्नता की बात नहीं ही है। यदि कोई व्यक्ति ऊपर से नीचे जल्दी पहुंचने की उतावली में सीधा कूदकर हाथ-पैर तोड़ ले तो उसे कोई ‘जल्दी पहुंचने में सफल हुआ’ नहीं कहना चाहेगा। इससे तो थोड़ी देर में पहुंचना अच्छा।
मानवोचित नैतिक स्तर गंवाकर किसी एक विषय में सफलता की लालसा उपरोक्त प्रसंग जैसी विडम्बना ही है। हर विचारशील को इससे सावधान रहकर नीति मार्ग को अपनाये रहकर मनुष्यता के अनुरूप वास्तविक सफलता अर्जित करने का प्रयास करना चाहिए।

*क्रमशः* *........*
-LITERATUREGURUDEV .

हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन का धर्म कर्तव्य मानेंगे। - हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन ....

07/06/2026

"The Existence of God and the Experience of the Divine Presence."
Have you ever seen how the Order of Creation Prove the Existence of God? Is this merely a coincidence, or does it point toward the existence of a Supreme Intelligence? If there is no God, then who is running a universe where billions of stars never miss their path—and why does a human being still feel empty after getting everything?

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*AWGP- LITERATURE GURUDEV*ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*युग निर्माण सत्-सं...
06/06/2026

*AWGP- LITERATURE GURUDEV*
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा*
*अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्य करेंगे।*

ईसा मसीह ने क्रूस पर चढ़कर पराजय स्वीकार की, पर नीति का परित्याग नहीं किया। शिवाजी, राणा प्रताप, बन्दा वैरागी, गुरु गोविन्द सिंह, लक्ष्मीबाई, सुभाष बोस आदि को पराजय का ही मुंह देखना पड़ा पर उनकी यह पराजय भी विजय से अधिक महत्वपूर्ण थी। धर्म और सदाचार पर दृढ़ रहने वाले सफलता में नहीं कर्तव्य पालन में प्रसन्नता अनुभव करते हैं और इसी दृढ़ता को स्थिर रख सकने को एक बड़ी भारी सफलता मानते हैं।
अनीति और सफलता में से यदि एक को चुनना पड़े तो असफलता को ही पसन्द करना चाहिए, अनीति को नहीं। जल्दी सफलता प्राप्त करने के लोभ में अनीति के मार्ग पर चल पड़ना ऐसी बड़ी भूल है जिसके लिए सदा पश्चाताप ही करना पड़ता है।

*क्रमशः* *........*
-LITERATUREGURUDEV .

हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन का धर्म कर्तव्य मानेंगे। - हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन ....

*AWGP- LITERATURE GURUDEV*ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*युग निर्माण सत्-सं...
05/06/2026

*AWGP- LITERATURE GURUDEV*
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*युग निर्माण सत्-संकल्प की दिशा-धारा*
*अनीति से प्राप्त सफलता की अपेक्षा नीति पर चलते हुए असफलता को शिरोधार्य करेंगे।*

सफलता की अपेक्षा नीति श्रेष्ठ है। यदि नीति पर चलते हुए परिस्थितिवश असफलता मिली है तो वह भी कम गौरव की बात नहीं है। नीति का स्थायी महत्व है, सफलता का अस्थाई। सफलता न मिलने से भौतिक जीवन में उत्कर्ष में थोड़ी असुविधा रह सकती है पर नीति त्याग देने पर तो लोक परलोक, आत्म-सन्तोष, चरित्र, धर्म, कर्तव्य और लोकहित सभी कुछ नष्ट हो जाता है।
ईसा मसीह ने क्रूस पर चढ़कर पराजय स्वीकार की, पर नीति का परित्याग नहीं किया। शिवाजी, राणा प्रताप, बन्दा वैरागी, गुरु गोविन्द सिंह, लक्ष्मीबाई, सुभाष बोस आदि को पराजय का ही मुंह देखना पड़ा पर उनकी यह पराजय भी विजय से अधिक महत्वपूर्ण थी। धर्म और सदाचार पर दृढ़ रहने वाले सफलता में नहीं कर्तव्य पालन में प्रसन्नता अनुभव करते हैं और इसी दृढ़ता को स्थिर रख सकने को एक बड़ी भारी सफलता मानते हैं।

*क्रमशः* *........*
-LITERATUREGURUDEV .

हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन का धर्म कर्तव्य मानेंगे। - हम आस्तिकता और कर्तव्यपरायणता को मानव जीवन ....

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