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Ojas provides physical and emotional healing services such as Prana chikitsa and yoga-medication to people as well as teaches this technique to new students.

अपने आपको तुच्छ समझना ही आत्म-पतन है।जिस दिन आप अपनी आत्मशक्ति को पहचानकर श्रेष्ठ बनने का दृढ़ संकल्प कर लेते हैं, उसी द...
15/09/2026

अपने आपको तुच्छ समझना ही आत्म-पतन है।
जिस दिन आप अपनी आत्मशक्ति को पहचानकर श्रेष्ठ बनने का दृढ़ संकल्प कर लेते हैं, उसी दिन से आपकी वास्तविक उन्नति आरम्भ हो जाती है।
इसलिए स्वयं को तुच्छ नहीं—ईश्वर का दिव्य अंश समझिए। उठिए, अपनी शक्ति पहचानिए और अपने महान लक्ष्य की ओर बढ़ चलिए।

15/09/2026

प्रातःकालीन गुरुदेव की अमृतवाणी
अन्दर से पवित्र हो
https://youtube.com/shorts/C-YW7vJ4j_Q?feature=share
अपने भीतर की शक्ति पहचानो
https://youtube.com/shorts/ZFetwbBwGso
मंत्र_जप_से_ऊर्जा_कैसे_पैदा_होती_है
https://youtube.com/shorts/h-032dJRJF4
https://www.awgp.org/en/literature/akhandjyoti/1940/August/v2.31

15/09/2026

प्रातःकालीन गुरुदेव की अमृतवाणी
पहली शर्त.
https://youtube.com/shorts/jBsN73DCXmQ
आत्म-तिरस्कार__आपकी_क्षमताओं_का_सबसे_बड़ा दुश्मन
https://youtube.com/shorts/EXY_Y7CalMc
गायत्री मंत्र की अद्भुत शक्ति.
https://youtube.com/shorts/-TY5X81oIzs?feature=share
https://www.awgp.org/en/literature/book/karmkand_pradip/v2

AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*संतोष ही संसार का सब...
13/09/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*संतोष ही संसार का सबसे बड़ा धन है।*

पर्णक नाम के एक संतोषी भिक्षुक को रास्ते में एक सिक्का मिला।
उसने वह सिक्का संसार के सबसे बड़े कंगाल को देने का निश्चय किया।
कई वर्षों तक खोजने के बाद उसने राजा ऋतुपर्ण की विशाल सेना देखी।
राजा के पास सत्रह सौ राज्य और सोने से भरे खजाने थे।
फिर भी वह अधिक धन और भूमि पाने के लिए युद्ध करने जा रहा था।
पर्णक ने अपना सिक्का राजा को देते हुए कहा, “जिसकी इच्छाएँ कभी तृप्त नहीं होतीं, वही सबसे बड़ा कंगाल है।”
भिक्षुक की बात सुनकर राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने युद्ध रोक दिया।
कहानी की शिक्षा: संतोष ही संसार का सबसे बड़ा धन है।

क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV .

संस्करण के सन्दर्भ में - संस्करण के सन्दर्भ में - कर्मकांड प्रदीप - karmkand pradipNone

“संतोष ही सबसे बड़ा धन है।”क्या आप जानते हैं—संसार का सबसे बड़ा कंगाल कौन है? वह जिसके पास धन नहीं, या वह जिसकी इच्छाएँ ...
13/09/2026

“संतोष ही सबसे बड़ा धन है।”

क्या आप जानते हैं—संसार का सबसे बड़ा कंगाल कौन है? वह जिसके पास धन नहीं, या वह जिसकी इच्छाएँ कभी समाप्त नहीं होतीं?

गरीबी धन की कमी नहीं—संतोष की कमी है। जिसके पास संतोष है, वही सच्चा सम्राट है; और जिसकी तृष्णा अनंत है, वही संसार का सबसे बड़ा कंगाल है।

13/09/2026

Is Gayatri Upasana only the repetition of a mantra, or is it a complete process of inner transformation? In this podcast, discover how Gayatri Upasana awakens righteous wisdom, strengthens self-discipline and transforms our thoughts, habits, relationships and direction in life.
This podcast also explains why Gayatri is called Kamadhenu, the purpose of Sakara and Nirakara Upasana, and how Japa and Tapa guide a spiritual seeker toward Self-realization.
What positive quality would you like to develop through Gayatri Upasana—peace, discipline, courage, purity or compassion? Please share your answer in the comments.

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AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*कर्मकांड प्रदीप*॥ मङ...
12/09/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*कर्मकांड प्रदीप*

॥ मङ्गलाचरणम्॥
प्रत्येक शुभ कार्य को सम्पन्न करने से पहले वाले याजकों, साधकों के कल्याण,उत्साह अभिवर्धन, सुरक्षा और प्रशंसा की दृष्टि से पीले अक्षत और पुष्प की वर्षा कर स्वागत किया जाता है। मन्त्र के साथ भावना की जाय, देव अनुग्रह की वर्षा हो रही है, देवत्व के धारण तथा निर्वाह की क्षमता का विकास हो रहा है।
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रंपश्येमाक्षभिर्यजत्राः। स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवा * सस्तनूभिः व्यशेमहि देव हितं यदायुः॥ -२५.२१

अर्थात्- याजकों के पोषक हे देवताओ! हम सदैव कल्याणकारी वचनों को ही अपने कानों से सुनें, नेत्रों से सदैव कल्याणकारी दृश्य ही देखें। हे देव! परिपुष्ट अंगों से युक्त सुदृढ़ शरीर वाले हम आपकी वन्दना करते हुए- लोक हितकारी कार्यों को करते हुए पूर्ण आयु तक जीवित रहें।

क्रमशः ........
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AWGP- LITERATURE GURUDEVॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!*कर्मकांड प्रदीप*साधन...
11/09/2026

AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*कर्मकांड प्रदीप*

साधनादिपवित्रीकरणम्॥ सत्कार्यों, श्रेष्ठ उद्देश्यों के लिये यथाशक्ति साधन, माध्यम भी पवित्र रखने पड़ते हैं। कर्मकाण्ड में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों, साधनों में सन्निहित अशुभ संस्कार हटाये जाते हैं, उन्हें मन्त्र शक्ति से नष्ट किया जाता है एवं देवत्व का संस्कार जगाया जाता है। एक प्रतिनिधि जल लेकर मंत्र पाठ के साथ पल्लवों/ कुशाओं या पुष्पों से सभी उपकरणों, साधकों, पूजन सामग्रियों पर जल सिंचन करें। भावना करें मन्त्र शक्ति के प्रभाव से उनमें कुसंस्कारों के पलायन और सुसंस्कारों के उभार स्थापन का क्रम चल रहा है। हे यजमान! जिस प्रकार सूर्यपुत्री उषा सोम को शाश्वत छन्ना (प्रकृतिगत शोधन प्रक्रिया) से पवित्र करती है, उसी प्रकार श्रद्धा तुम्हें पवित्र करती है। (देवशक्तियों के लिए उपयोगी बनाती है।) देवगण हमें पवित्र बनाएँ। सुविचारों से सुवासित मन एवं बुद्धि हमें पवित्र बनाएँ। सम्पूर्ण प्राणी हमें पवित्र बनाएँ। हे जातवेदः(अग्निदेव)! आप भी हमें पवित्र बनाएँ। हे अग्ने! आपकी तेजस्वी ज्वालाओं के मध्य में जो परम पवित्र, सत्य, ज्ञान एवं अनन्त रूप विविध लक्षणों से युक्त ब्रह्म विस्तृत हुआ है, उससे हमारे जीवन को पवित्र करें।जो पवित्रता प्रदान करने वाले विलक्षण द्रष्टा वायुदेव सर्वज्ञाता और स्वयं पवित्र हैं, वे आज अपनी पवित्रता से हमारे जीवन को पवित्र करें।हे सर्वप्रेरक सविता देव! आप अपने दोनों प्रकार के स्वरूपों से अर्थात् अपनी (यज्ञ के लिए) आज्ञा से और प्रत्यक्ष पवित्र स्वरूप से, सब ओर से हमारे जीवन को पवित्र बनाएँ।

क्रमशः ........
-LITERATUREGURUDEV .

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