11/09/2026
AWGP- LITERATURE GURUDEV
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्!
*कर्मकांड प्रदीप*
साधनादिपवित्रीकरणम्॥ सत्कार्यों, श्रेष्ठ उद्देश्यों के लिये यथाशक्ति साधन, माध्यम भी पवित्र रखने पड़ते हैं। कर्मकाण्ड में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों, साधनों में सन्निहित अशुभ संस्कार हटाये जाते हैं, उन्हें मन्त्र शक्ति से नष्ट किया जाता है एवं देवत्व का संस्कार जगाया जाता है। एक प्रतिनिधि जल लेकर मंत्र पाठ के साथ पल्लवों/ कुशाओं या पुष्पों से सभी उपकरणों, साधकों, पूजन सामग्रियों पर जल सिंचन करें। भावना करें मन्त्र शक्ति के प्रभाव से उनमें कुसंस्कारों के पलायन और सुसंस्कारों के उभार स्थापन का क्रम चल रहा है। हे यजमान! जिस प्रकार सूर्यपुत्री उषा सोम को शाश्वत छन्ना (प्रकृतिगत शोधन प्रक्रिया) से पवित्र करती है, उसी प्रकार श्रद्धा तुम्हें पवित्र करती है। (देवशक्तियों के लिए उपयोगी बनाती है।) देवगण हमें पवित्र बनाएँ। सुविचारों से सुवासित मन एवं बुद्धि हमें पवित्र बनाएँ। सम्पूर्ण प्राणी हमें पवित्र बनाएँ। हे जातवेदः(अग्निदेव)! आप भी हमें पवित्र बनाएँ। हे अग्ने! आपकी तेजस्वी ज्वालाओं के मध्य में जो परम पवित्र, सत्य, ज्ञान एवं अनन्त रूप विविध लक्षणों से युक्त ब्रह्म विस्तृत हुआ है, उससे हमारे जीवन को पवित्र करें।जो पवित्रता प्रदान करने वाले विलक्षण द्रष्टा वायुदेव सर्वज्ञाता और स्वयं पवित्र हैं, वे आज अपनी पवित्रता से हमारे जीवन को पवित्र करें।हे सर्वप्रेरक सविता देव! आप अपने दोनों प्रकार के स्वरूपों से अर्थात् अपनी (यज्ञ के लिए) आज्ञा से और प्रत्यक्ष पवित्र स्वरूप से, सब ओर से हमारे जीवन को पवित्र बनाएँ।
क्रमशः ........
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संस्करण के सन्दर्भ में - संस्करण के सन्दर्भ में - कर्मकांड प्रदीप - karmkand pradipNone