09/12/2025
🌼 म्लेच्छों से अन्न भक्षण का प्रायश्चित्त 🌼
👉 म्लेच्छों (यथा मुस्लिम ईसाई आदि) के पर्व में अनेक लोग शुभकामनाएँ देते हुए दिखाई देते हैं | संभव है कि वे इन विधर्मियों के साथ इन दिनों में सहभोज भी करते होंगे | ये कृत्य शास्त्रविरुद्ध होने के कारण किसी भी हिंदू के लिए निन्दनीय है |
हमारा यह शरीर अन्न के द्वारा ही बनता है, इसलिए बहुत विचारपूर्वक अन्न की शुद्धि का निर्णय करना चाहिए | विधर्मियों के अन्न भक्षण से भोक्ता उसके अनेक जन्मों के संचित पाप का भागी होता है |
"इस समय सर्वत्र अधर्म बढ रहा है व लोग अपने स्वधर्म से च्युत हो रहे हैं, इसलिए अपने स्वबान्धवों के घर भोजन भी स्वधर्मनिष्ठ हिंदुओं के लिए पतित करने वाला ही है |"
जो म्लेच्छ द्वारा पकाया हुआ,छुया हुआ अथवा उसके द्वारा दिया गया अन्न भक्षण करता है तो उसे प्रायश्चित्त हेतु पूर्ण कृच्छ्र व्रत करना चाहिए | व्रत के पश्चात् द्विज अपना यज्ञोपवीत संस्कार पुनः करवाने पर ही शुद्ध होता है |
म्लैच्छैर्गतानां चौरैर्वा कान्तारे वा प्रवासिनाम् |
भक्षयाभक्ष्यविशुद्ध्यर्थं तेषां वक्ष्यामि निष्कृतिम् ||
पुनः प्राप्य स्वदेशं च वर्णानामनुपूर्वशः |
कृच्छ्रस्यान्ते ब्राह्मणस्तु पुनः संस्कारमर्हति ||
पादोनान्ते क्षत्रियश्च अर्धान्ते वैश्य एव च |
पादं कृत्वा यथा शूद्रो दानं दत्वा विशुध्यति ||
----- अग्निपुराण अध्याय- 170
( नोट - श्लोक में ब्राम्हण क्षत्रिय वैश्य शुद्र की उपमा किसी परिवार विशेष में जन्म लेने विषयक नही, कर्म विषयक है)
🕉️