Unique Diagnostics and Solar Fertility Clinic

Unique Diagnostics and Solar Fertility Clinic We offer all pathology test facilities ,both male and female infertility management and solution to all type of s*x related problems of both male n females

We have facility of making and supplying tailor made autologous Platelet rich plasma products {Tissue Glue} from own blood. Also we have facilities related to humen s***m biotechnology/Sperm washing/Separation/concentration and intrauterine insemination etc.

दोस्तों ! आजकल एक नयी फैशन चल पड़ी है कि घूमने फिरने के लिए तो हम चले जाते हैँ पर pathology  जांच के लिए घर पर से सैम्पल ...
13/05/2026

दोस्तों ! आजकल एक नयी फैशन चल पड़ी है कि घूमने फिरने के लिए तो हम चले जाते हैँ पर pathology जांच के लिए घर पर से सैम्पल देना चाहते हैँ } कॉर्पोरेट लैब के कलेक्शन केंद्रों ने इस नई प्रवती को हमारे मे भरना शुरू किया है पर क्या आप जानते हैँ कि सर्वश्रेष्ट जांच के लिए आपको एक नियमित लैब पर जा के सैम्पल देना हमेशा बेहतर है जानिए क्यों और कोशिश करिए कि आगे से आपको लैब पर जाकर ही सैम्पल देना है अगर आप आराम से चल फिर सकते हैँ| और हाँ लैब भी ऐसी जहां पर बैठे pathologist डॉक्टर से भी आप मिल सकें|

Before getting tested at a path lab, please think carefully.
10/05/2026

Before getting tested at a path lab, please think carefully.

"जांच करवाएं वहां |पैथोलॉजिस्ट बैठा हो जहां|"Today,i am starting a series of info-lets about my expertise for creating s...
10/05/2026

"जांच करवाएं वहां |
पैथोलॉजिस्ट बैठा हो जहां|"
Today,i am starting a series of info-lets about my expertise for creating some awareness and for the benefit of you all. Hope this may prove useful for you all. In c/o any queries ,please feel free to ask me anything. Thank you.all.

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22/04/2026

मैं हूं न :

गंभीर मरीज के परिजनों को सांत्वना देते हुए चिकित्सक ने कहा — 'आप चिंता न करें, मैं हूँ न।'

लेकिन उपरोक्त वाक्य आज से पचास वर्ष पूर्व आख़िरी बार किसी भारतीय चिकित्सक के मुँह से निकला था।

भारत में डॉक्टर-मरीज का रिश्ता हमेशा से विश्वास और आपसी सहयोग पर टिका था। पश्चिमी देशों की तरह यहाँ 'कंसेंट', आरोप-बाजी — ये सब कभी नहीं रहा। गंभीर से गंभीर मरीज का इलाज करते हुए भी कुछ दशकों पूर्व तक डॉक्टर को यह डर नहीं होता था कि मरीज मर गया तो मुझ पर हमला होगा, आरोप लगेंगे।

अब हर मरीज डॉक्टर को संभावित मुकदमेबाज लगता है और हर डॉक्टर मरीज को संभावित लुटेरा। इस वजह से डॉक्टर सुरक्षित रहने के लिए ढेरों जाँचें करवाता है — उनकी भी जिनकी संभावना बेहद कम हो। दुनिया भर की कागजी कार्यवाही, नोट्स, फाइलें मेडिकल कॉलेजों में सिखाई जाती हैं। मरीज के इलाज में गड़बड़ी से कहीं अधिक डांट इन फाइल वर्क के अधूरेपन पर पड़ती है मेडिकल कॉलेजों में।

परेशान और डरा हुआ चिकित्सक उस बस-चालक की तरह है जिसके सर पर बंदूक रखकर कहा हो — 'एक भी गड्ढे पर टायर नहीं जाना चाहिए।'
पश्चिमी देशों के कानूनों की अंधी नकल, बिना यहाँ की न्याय-व्यवस्था, जीवन, और धारणाओं के अंतर को समझे, की जा रही है।

सुषेण वैद्य सो रहे थे — उन्हें सोने दिया गया और खटिया सहित लाया गया, एक आपात स्थिति में, जब लक्ष्मण जी मूर्छित थे। कितनी अजीब सलाह थी उनकी — उस सुदूर पर्वत से चार संजीवनी बूटियाँ लाने की। हनुमान जी को पहचान नहीं आईं तो लड़े नहीं, लौटकर नहीं आए कि 'ढंग से क्यों नहीं बताया' — पर्वत ही उठा लाए। उन ताकतवर योद्धाओं के बीच इस वैद्य की सलाह मानी गई, सम्मान के साथ — क्योंकि वहाँ इंटेंट भलाई था, मरीज की... प्राथमिक प्रेरणा पैसा नहीं था। कोई कंसेंट नहीं, कोई 'poor prognosis explanation' नहीं — मात्र एक-दूजे पर विश्वास।
रिश्तों में कड़वाहट के कारण तलाश रहा था तो पाया — कारण एक नहीं, बहुत से हैं, जिन पर पूरी एक किताब बन सकती है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और निजी चैनलों का भारत में उद्भव एक अहम बिंदु था, जिसमें संपादक के दबाव में खबरें ढूँढता पत्रकार 'सॉफ्ट टारगेट' ढूँढता था।
किंतु आज बाहर उँगली दिखाना नहीं, बल्कि स्वयं में झाँकना
उद्देश्य है — इस क्षेत्र में क्या गड़बड़ है, यह आत्मावलोकन करना भी आवश्यक है।

मुझे स्वयं हाल ही में कॉर्पोरेट अस्पताल और बीमा कंपनी का अनुभव हुआ और समझ आया कि सब कुछ कितना व्यावसायिक, सामान की खरीद-फरोख्त जैसा बना दिया गया है। कोई व्यक्तिगत, भावनात्मक स्पर्श नहीं — मात्र पैसों से सेवाएँ खरीदने जैसा। उसमें भी एक ऐसा गठजोड़ जहाँ खरीदार स्वयं को असहाय महसूस करे।

मैं एक चिकित्सक हूँ — मुझे इस क्षेत्र में हर जगह से मदद मिल सकती है, फिर भी मुझे ऐसा लगा। तो सोचिए, वह आम व्यक्ति जिसने कभी अस्पताल में कदम नहीं रखा, उसे कैसा लगता होगा? स्वास्थ्य बीमा कंपनियाँ जरूरत पर मदद करने के जज्बे से नहीं, बल्कि कोई न कोई गलती निकालने की मंशा से बैठी हैं। धीमी न्याय-प्रक्रिया उन्हें अलग ही आत्मविश्वास से भर देती है। उनके कॉल सेंटर और ऐप्स — प्रीमियम भरते समय मक्खन जैसे चिकने, और क्लेम के समय बार-बार 'technical error'।

लेकिन आप अपने जीवन में ही देखें — आपको अपने मोहल्ले के, परिवार के डॉक्टर से शायद ही कभी कड़वाहट महसूस हुई हो। आप में से अधिकांश तो कृतज्ञ होंगे उन चिकित्सकों के, उन छोटे-छोटे अस्पतालों के, जो रात-बिरात, बिना भारी-भरकम बिल और तामझाम के, अपनत्व के साथ इलाज करते रहे। फोन पर बिना नियमों की परवाह किए इलाज बता दिए... किसी कॉरपोरेट से बिना अपॉइंटमेंट बिना फीस ये संभव है ?

कॉर्पोरेट व्यवस्था में वहाँ के डॉक्टर भी एक व्यावसायिक मानसिकता के साथ काम करते हैं क्योंकि यह स्ट्रक्चर ही एक कंपनी है .. जिसका मुख्य उद्देश्य प्रॉफिट है ।
उनकी बातचीत में अपनेपन का अभाव दिखता है — मरीज के लिए 'out of the way' जाना नहीं दिखता, बल्कि पूर्व-निर्धारित नियम, विनियम और फॉर्म दिखाई देते हैं।

यहाँ मरीज ठीक होकर भी कृतज्ञ नहीं होता — 'मैंने कुछ खरीदा है' ऐसा महसूस करता है। और ठीक न हो तो एक कड़वाहट से भर जाता है।

उस सिस्टम का जो पहला और आखिरी चेहरा होता है मरीज के सामने— वह डॉक्टर होता है। पृष्ठभूमि का तंत्र मरीज कैसे देख सकेगा? वह तो बस उस टाई वाले चेहरे को याद रखता है जिसने स्वास्थ्य बेचा था, हीलिंग बेची थी — लेकिन वह अगर खराब निकली तो वह सिस्टम नहीं वरन उस चेहरे और उसके नाम के आगे लगे प्रीफेक्स के प्रति कड़वाहट से भर जाता है। जैसे एक मोबाइल खरीदा हो और वो न चले।

इन पाँच सितारा अस्पतालों में डॉक्टर एक सेल्समैन है ।

अब कड़वाहट से भरा यह मरीज, वहाँ कॉर्पोरेट में बाउंसर और वकीलों की फौज के बीच कुछ नहीं कर पाता, तो धारणा बनाता है — 'सब डॉक्टर चोर होते हैं।' उसका गुस्सा वहाँ निकलता है जहाँ निकाला जा सकता है।

बड़े लोग चाहे जितने कॉर्पोरेट खोलें — उनकी अपनी आवश्यक जगह होगी निःसंदेह , जटिल और महंगी सर्जरी में, शायद शोध में, शायद अमीरों, ताकतवरों के लिए ५ स्टार से कंफर्ट में।

किंतु व्यक्तिगत स्पर्श वाले, अपने-से लगते छोटे-छोटे क्लिनिक और अस्पतालों को तंग मत कीजिए। इनका बंद होना, इन्हें तंग करना सीधे-सीधे आम, मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय जनसंख्या का एक सहारा छीन लेने जैसा होगा। और यह अनुरोध मेरा सरकारों, पत्रकारों, नौकरशाही और जनता — सभी से है।

भारत का स्वास्थ्य-ढाँचा पश्चिमी देशों से बेहद अलग है और बेहद सुविधाजनक — इन्हीं छोटे-छोटे असंगठित क्षेत्र के चिकित्सकों की वजह से। इतनी बड़ी जनसंख्या बिना दिनों की वेटिंग के इस असंगठित क्षेत्र की वजह से स्वास्थ्य लाभ,
सलाह, वैक्सीनेशन, जांचें, सर्जरी , एक्सीडेंट को झेल पाती है ।

एक प्रयोग करके देखिए —
किसी गरीब को इन मोहल्ले के क्लिनिकों में भेजिए। बिना किसी कागज-पत्र के उसे मुफ्त परामर्श और सैंपल की दवाइयाँ न मिलें तो कहना ।

अब उसी मरीज को किसी कॉर्पोरेट अस्पताल के रिसेप्शन तक बिना किसी मदद के पहुँचाकर देखिए।

मैने एम बी बी एस छात्रों की एक कक्षा में हाथ उठवाकर पूछा था एक दिन,आगे क्या करना चाहते हो ? और पाया — डॉक्टरों की आने वाली पीढ़ी किसी व्यवसायी या बड़े राजनीतिज्ञ के पैसों से बने इन कॉर्पोरेट्स में 'सेल्समेन' बनने को अपना सर्वश्रेष्ठ 'placement' मानने लगी है।

ये आपको तय करना है कि सेल्समेन के साथ साथ आपको कुछ लोग चिंता न करो ' मैं हूं न ' कहने वाले भी चाहिए या नहीं ।

आपका
डॉ. अव्यक्त

टोटल बॉडी चेक प्रोफाइल-कितना आवश्यक विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल ) के अवसर पर मैं आप के साथ कुछ इंपॉर्टेंट बात शेयर कर...
08/04/2026

टोटल बॉडी चेक प्रोफाइल-कितना आवश्यक
विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल ) के अवसर पर मैं आप के साथ कुछ इंपॉर्टेंट बात शेयर करना चाहता था “ टोटल बॉडी चैकअप “ के बारे मे ,क्योंकि आजकल इसका बहुत प्रचलन है| पहला सवाल यह है कि हमको टोटल बॉडी प्रोफाइल कब करवाने की जरूरत है और उसमें कौन सी जांच जरूरी है? मैं देखता हूं कि आजकल माता-पिता अपने साथ-साथ छोटे-छोटे बच्चे 10-15 साल के भी टोटल बॉडी चेकअप करा देते हैं जिसकी कोई जरूरत नहीं है टोटल बॉडी चैकअप का उद्देश्य है कि यदि आपके शरीर मे बिना किसी लक्षण के ,किसी प्रकार की कहीं भी कोई खराबी आ रही हो तो उसके बारे में पहले से ही आपको पता लग जाए लेकिन इतनी कम उम्र पर,और अगर कोई भी लक्षण नहीं है तो इन जांचों को करने का कोई औचित्य नहीं है| अगर कोई शारीरिक लक्षण न हो तो 30-35 वर्ष के बाद ही सालाना टोटल बॉडी प्रोफाइल का औचित्य है| सामान्यतया 35 साल के उम्र के बाद कुछ शरीर के कुछ अंगों में कुछ कमियां आ सकती हैं जो कि बिना लक्षण के भी हो सकती है अतः 35 साल की उम्र के बाद में यदि कोई बॉडी प्रोफाइल करवाता है और उसकी रिपोर्ट संतोषजनक है तो वह पूरे साल में एक बार ही काफी होता है पर मैंने देखा है कुछ लोग ऐसे हैं जो हर 3 -4 महीने पर अपना टोटल बॉडी प्रोफाइल करवाते हैं तो इसकी जरूरत नहीं दोस्तों|
दूसरी बात यह है कि 30 से 40 साल की उम्र के टोटल बॉडी प्रोफाइल में 70- 80 जांचों की जरूरत नहीं होती है सिर्फ सीबीसी ,ब्लड शुगर और लिवर, किडनी तथा लिपिड की कुछ जाँचें करना काफी है इसके अलावा एक चेस्ट का एक्स –रे, पेट का अल्ट्रसाउन्ड और हार्ट का इकोकार्डियोग्राम करवा लेना चाहिए , परंतु आजकल बहुत सारी कंपनियां 500 /- से ₹3000 तक में अपने- अपने बॉडी प्रोफाइल बेच रहे हैं और उसमें 60/ 70/ 80 या 90 टेस्टों का समावेश कर देते हैं परंतु इन सब जांचों की जरूरत थोड़ी है बेसिक जाँचें ही पर्याप्त हैँ पर अगर कोई लक्षण हो तो उस लक्षण के अनुसार बाकी जांचों की जरूरत होती है तो बेसिकली मूर्ख बनाने के लिए टोटल बॉडी प्रोफाइल मे ये इतने सारी जांच दिखाई जाती हैं और लोग बिना सोचे समझे उनको करवा लेते हैं वास्तव में यह सारी जांच की भी नहीं जाती है बल्कि कुछ जांच को करने के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के द्वारा बाकी सब की रिपोर्ट भर दी जाती है और यही कारण है कि अक्सर इन टोटल बॉडी प्रोफाइल रिपोर्ट में से कई रिपोर्ट गलत भी होती है| आप लिवर मे जॉन्डिस या पीलिया की जांच क्यों करेंगे जब पीलिया है ही नहीं |लिवर की सूजन या फैटी लिवर के लिए SGPT / SGOT जांच काफी होती है परंतु इस तरह के सस्ते प्रोफाइल मे आधी से ज्यादा फालतू की जाँचों की लिस्ट जोड़कर उसको आकर्षक बनाया जाता है |
टोटल बॉडी प्रोफाइल चेक अप में किए जाने योग्य जांच का चयन उम्र और सेक्स के आधार पर किया जाना चाहिए यानी कि 30 से 40 साल की उम्र में कुछ जांचों की जरूरत होती है जब कि 40 के बाद में कुछ अन्य जांच भी जुड़ जाती हैं और 50 साल के बाद में अन्य कुछ जांच भी की जानी चाहिए इसी प्रकार आदमियों में कुछ विशेष जांच जैसे कि प्रास्टैट कैंसर की स्क्रीनिंग जांच PSA एक आयु सीमा के बाद हर वर्ष होनी जरूरी होती हैं इसी प्रकार महिलाओं में भी PAP smear,ब्रेस्ट मेमोग्राम जैसी ,कुछ विशेष जांचों की सालाना आवश्यकता होती है परंतु इस तरीके की कंपनियां उन जांचों को इन टोटल बॉडी प्रोफाइल मे नहीं करती हैँ | दरअसल ज्यादातर कंपनियों में सिर्फ मशीन और टेक्नीशियन द्वारा यह सिर्फ pathology रिपोर्ट होती है सही तरीका यह है कि पहले आप अपने फैमिली फिजिशियन से पूछ ले कि किन जांचों की जरूरत है और सिर्फ वही करवाएं ,या फिर किसी अच्छे लैब पर पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर से राय करके समुचित जांचों वाला टोटल बॉडी प्रोफाइल सेलेक्ट करें |अधिक जांच होना जरूरी नहीं है सही जांच की रिपोर्ट मिलना ज्यादा जरूरी है और उसके लिए सबसे बेहतर ,किसी लैब पर स्वयं जाकर सैंपल देना, रिपोर्ट की गुणवत्ता की गारंटी होती है क्योंकि दूर (घर) से सैंपल लेकर लैब तक पहुंचने का समय और तरीका उस सैंपल में कई सारी जांचों की रिपोर्ट को बदल देता है और रिपोर्ट गलत आने की संभावना बढ़ जाती है इसलिए अंत में मैं आपको यही राय दूंगा कि भेड़चाल मे न फंसे, सड़क किनारे या पार्कों मे लगे ठेलेनुमा कैम्प मे अपनी कभी जांच न करवाएं | अपनी आयु के अनुसार किसी डॉक्टर से परामर्श करने के पश्चात ही टोटल बॉडी प्रोफाइल करवाएं और ऐसी लैब पर करवाएं ,जहां पर एक प्रशिक्षित पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर आपके परामर्श के लिए उपलब्ध हो| आप सदा स्वस्थ रहें,प्रसन्न रहें ऐसी मनोकामना के साथ --
डॉ संजीव कुमार
(MBBS,MD)
यूनीक डायगनोस्टिक्स ,बरेली

A warm welcome to our new followers Nishant Pantbalekundri, Anuradha Mittal, Ramesh Kumar Thukral, Anand Shaleen Dixit, ...
07/01/2026

A warm welcome to our new followers Nishant Pantbalekundri, Anuradha Mittal, Ramesh Kumar Thukral, Anand Shaleen Dixit, Kiran Bhatia, Nimisha Gupta. We're glad you're here.
Thank you very much.
Nishant Pantbalekundri , Anuradha Mittal ,Ramesh Kumar Thukral Chandra Shekhar Verma , Anand Shaleen Dixit, Udita Saran ,
Kiran Bhatia Salil Gopal
Nimisha Gupta Monika Agarwal Chhavindra Prakash Srivastava Mudit Parashari

01/01/2026

2026 का सूरज एक नई खाली कॉपी लेकर आएगा, इस पर सब नया और अच्छा अच्छा लिखना है।
2025 में जो सीखा, उसे ताकत बनाएं और जो पीछे छूट गया, उसे एक सबक।

इस साल में अपनी सभी चिंताओं और दुख को विदा करें। एक नई ऊर्जा,आशा और आस्था के साथ सन 2026 का स्वागत करें।

सन 2026 आपके और आपके परिजनों के लिए अत्यंत मंगलकारी और सुख संपत्तिदायक हो।
हमारी हार्दिक् शुभकामनायें।
डा. संजीव कुमार एवं समस्त यूनिक डायगनोस्टिक्स/सोलर फ़र्टिलिटी क्लिनिक परिवार।
🙏🏼🌻🙌🦚🌻🙌🙏🏼

01/11/2025

3 नवंबर,सोमवार वर्ल्ड विटामिन डी दिवस पर अपनी हड्डियों और जोड़ो की सुरक्षा के लिए विटामिन डी की जांच कराएं,यूनिक डायगनोस्टिक्स और।
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05/09/2025

Address

148, Saket Colony, Near Axis Bank, Civil Lines
Bareilly
243001

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Tuesday 8:30am - 8pm
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