Prabha Homoeo Clinic & Skin Care Centre

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Prabha Homoeo Clinic & Skin Care Centre One of the best Classical Homeopathic Clinic where patients are treated according to “strict homeo

10/09/2026
त्वचा पर बार-बार होने वाली खुजली, दाने और काले पड़े घावों को नज़रअंदाज़ न करेंकहीं भी इलाज से आराम नहीं मिला तब होम्योपै...
24/08/2026

त्वचा पर बार-बार होने वाली खुजली, दाने और काले पड़े घावों को नज़रअंदाज़ न करें

कहीं भी इलाज से आराम नहीं मिला तब होम्योपैथी इलाज के लिए क्लिनिक पर आए इतना परेशानी कि खुजली के कारण नीद भी नहीं आ रही पुरानी खुजली, दाने, पुरानी सूजन, त्वचा का मोटा होना तथा हाइपरपिग्मेंटेशन दिखाई दे रहे हैं। ऐसे लक्षण विभिन्न त्वचा रोगों—जैसे chronic eczema, prurigo, lichenification आदि—में देखे जा सकते हैं। सही निदान के बाद ही उपचार का चयन किया जाना चाहिए।

होम्योपैथी में रोगी के लक्षण, खुजली की प्रकृति, त्वचा की स्थिति, मानसिक एवं शारीरिक लक्षणों तथा रोग के इतिहास के आधार पर व्यक्तिगत उपचार का चयन किया जाता है।

🌿 Homeopathy may help in individualized management of chronic skin complaints.
⚕️ लंबे समय से समस्या हो, घाव बढ़ रहे हों, पस/खून आ रहा हो या रात में अत्यधिक खुजली हो तो विशेषज्ञ त्वचा रोग विशेषज्ञ से जांच भी आवश्यक है।

Dr.R.k.Tripathi
Prabha Homoeo Clinic & Skin Care Centre
Jail road Civil lines Basti
098396 74700

Homoeopathy may heal — with proper diagnosis & individualized care.

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कई बार लेज़र उपचार के बावजूद वार्ट्स/मस्से पूरी तरह समाप्त नहीं होते। ऐसे ही एक मरीज को त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologis...
24/08/2026

कई बार लेज़र उपचार के बावजूद वार्ट्स/मस्से पूरी तरह समाप्त नहीं होते। ऐसे ही एक मरीज को त्वचा रोग विशेषज्ञ (Dermatologist) ने आगे की होम्योपैथिक चिकित्सा के लिए मेरे पास रेफर किया।

यह कदम चिकित्सा की दृष्टि से सराहनीय और महत्वपूर्ण है। मरीज को जिस चिकित्सा पद्धति से जहाँ शीघ्र और उचित लाभ मिल सके, वहाँ समय पर रेफर करना—एक जिम्मेदार चिकित्सकीय दृष्टिकोण है।

होम्योपैथी में वार्ट्स/मस्से के साथ-साथ Milia और Molluscum जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं में भी रोगी की व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार उपचार किया जाता है।

Homoeopathy for Warts • मस्से • Milia • Molluscum

👨‍⚕️ Dr. R.k Tripathi
Prabha Homoeo Clinic & Skin Care Centre
Jail road Civil lines Basti ¹
098396 74700

Homoeopathy may heal

#मस्से

Pic --Before and after my Treatment
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03/08/2026

मेरी एक मरीज कई सालों से migraine से परेशान थी ।
कईं साल दवाइयाँ लेता रही लेकिन headache बार-बार लौट आता था।
उनसे बात करने पर निम्न महत्वपूर्ण लक्षण दिखे ।

1. बचपन से बहुत अनुशाषित और आज्ञाकारी कन्या ।

2. माता पिता strict parents थे । इससे कन्या को emotions दबाने की आदत हो गई ।

3. वो कभी भी किसी को “ना” नहीं बोलती थीं ।

4. हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती थी ।

5. छोटी छोटी बातों में भी अपराध बोध और हर काम में perfection दिखता था ।

6. sense of duty बहुत ज्यादा था ।

7. जब तक घर रसोई का काम पूरा न हो जाए सोने नहीं जाती थी ।

8. बाहर से calm दिखती थीं पर मन अंदर से बेचैन रहता था ।

उस कन्या का Headache सिर्फ symptom था , असल बीमारी थी suppressed emotions और internal pressure।

उपरोक्त लक्षणों पर 200 दी गई ।

धीरे-धीरे: migraine attacks की frequency कम हुई , intensity कम हुई
patient emotionally भी हल्का महसूस करने लगा
" जहाँ दर्द दिखता है, वहाँ कारण नहीं होता "
कारण अक्सर मन के अंदर छुपा होता है।



Dr.R.K.Tripathi
Contact-9839674700

25/07/2026

साँस की तकलीफ asthama medorrhinum

"दमे में Medorrhinum के कुछ प्रमुख लक्षण "

श्वसन सम्बन्धी लक्षण
दमा नमी (damp weather), बरसात या समुद्र तट के मौसम में बढ़ता हो।
रात में, विशेषकर 2–4 बजे के बीच सांस की तकलीफ़ बढ़े।
रोगी को ऐसा लगे कि पर्याप्त हवा नहीं मिल रही।
सांस लेने में राहत के लिए घुटनों के बल झुकना या छाती आगे करना पड़े।
खांसी के साथ गाढ़ा, चिपचिपा कफ।

मरीज़ के सामान्य (General) संकेत
अत्यधिक गर्मी लगना, कंबल हटाकर सोना।
समुद्र या समुद्री वातावरण की इच्छा।
जल्दी-जल्दी काम करना, जल्दी बोलना, जल्दी चलना।
समय बहुत धीरे बीतता हुआ महसूस होना।
स्मृति कमजोर, नाम भूलना।
अत्यधिक विरोधाभासी स्वभाव—कभी बहुत प्रेम, कभी पूर्ण उदासीनता।
उपरोक्त चरित्र के व्यक्ति को दें ।
Dr.R.k.Tripathi Online Consult करें।

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भारतीय होम्योपैथिक औषधियाँदूब से बनने वाली होम्योपैथिक दवाCynodon dactylon Qलेने की विधि — 10–20 बूंदें आधे कप पानी में,...
25/07/2026

भारतीय होम्योपैथिक औषधियाँ

दूब से बनने वाली होम्योपैथिक दवा
Cynodon dactylon Q

लेने की विधि — 10–20 बूंदें आधे कप पानी में, दिन में 2–3 बार।

जिन व्यक्तियों में निम्न लक्षण हों
उनके लिए यह औषधी लाभ प्रद है
A. बार-बार नाक से खून आना (Epistaxis)
B. रक्तस्रावी बवासीर (Bleeding Piles)
C. मूत्र में रक्त आना (Hematuria)
D. अत्यधिक मासिक स्राव (Menorrhagia)
E. चोट लगने के बाद रक्तस्राव की प्रवृत्ति
F. शरीर में गर्मी एवं जलन की अनुभूति
G. हाथ-पैरों में जलन
H. पेट में अम्लता (Acidity)
I. बार-बार प्यास लगना
J. त्वचा पर खुजली एवं चकत्ते
K. पुराने त्वचा रोग
L. मूत्र मार्ग की जलन
M. शारीरिक कमजोरी एवं थकान
N. गर्मी से कष्ट बढ़ना
O. रक्तस्राव के बाद कमजोरी
P. बार-बार होने वाले छोटे-मोटे रक्तस्राव

Dr. R.k. Tripathi
098396 74700

25/07/2026

& Pain #

किन खाद्य पदार्थों से Gout (यूरिक एसिड) बढ़ सकता है?

यदि आपको बार-बार Gout का दर्द होता है या यूरिक एसिड बढ़ा रहता है, तो दवा के साथ खान-पान पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।

इन खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें:

A लाल मांस (Mutton, Beef, Pork)

B कलेजी, गुर्दा जैसे Organ Meats

C सार्डिन, एन्कोवी, हेरिंग, शेलफिश जैसी कुछ समुद्री मछलियाँ

D बीयर और अन्य मादक पेय

E फ्रक्टोज़ युक्त कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक और पैकेज्ड मीठे पेय

F अत्यधिक चीनी और हाई-फ्रक्टोज़ कॉर्न सिरप वाले खाद्य पदार्थ

निम्न भोज्य पदार्थों का सेवन अधिक करें:

A कम वसा वाला दूध और दही

B पर्याप्त मात्रा में पानी

C हरी सब्ज़ियाँ और सलाद

D साबुत फल (जूस की बजाय पूरा फल)

E साबुत अनाज

F सीमित मात्रा में मेवे और बीज


कुछ अध्ययनों में सीमित मात्रा में कॉफी और विटामिन C युक्त आहार को यूरिक एसिड नियंत्रण से जोड़ा गया है, लेकिन इन्हें उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता।

हर व्यक्ति में Gout का कारण केवल भोजन नहीं होता। आनुवंशिक प्रवृत्ति, किडनी की कार्यक्षमता, मोटापा, कुछ दवाएँ और अन्य बीमारियाँ भी यूरिक एसिड बढ़ा सकती हैं।

कमेंट में बताइए— आपका यूरिक एसिड कितना रहता है? और Gout का दर्द किस जोड़ में सबसे पहले हुआ है?

Dr. R.k. Tripathi
098396 74700

#निरोगमंत्र

25/07/2026



22 की छात्रा का केस जिसे calceria carb से ठीक किया गया ।

Menorrhagia — ज्यादा और लंबे समय तक bleeding

Leucorrhea — सफेद पानी की समस्या

Hormonal imbalance

1 पीरियड्स समय से पहले आते रहे थे । जैसे ही समाप्त होते थे 5 -6 दिन बाद फिर शुरू हो जाते थे ।
2 बहुत ज्यादा या लंबे समय तक bleeding होना

3 बार-बार चक्कर या कमजोरी महसूस होना

4 गाढ़ा, दूध जैसा सफेद पानी (leucorrhea)

5 पीरियड्स के समय स्तनों में दर्द या सूजन

6 पैर हमेशा ठंडे और पसीने से भीगे रहना

7 नींद नहीं आना, दिमाग में लगातार विचार चलना

8 डरावने या बेचैन करने वाले सपने । सपनो में चूहा , आग , दुर्घटना के सपने ।
9 रात को सोते समय सर पर पसीना आना ।

10 मरीज़ को ठंड ज्यादा लगती थी ।

11 थोड़ी सा काम करने पर थकावट या पसीना पसीना हो जाना ।

12 अंडे खाने की तीव्र इच्छा ।

13 वजन तेजी से बढ़ रहा था ।

“हर महिला का शरीर अलग है” । इसलिए इलाज भी अलग होगा ।
अगर आपके लक्ष्ण उपरोक्त हैं तभी आपको calceria carb लेना है l

Dr.R.k. Tripathi
098396 74700

24/07/2026

एक 35 वर्षीय स्कूल शिक्षिका जनपद सिद्धार्थ नगर से अपनी ऊर्जा और समर्पण के लिए हमेशा प्रशंसा पाती थीं। स्टाफ प्रबंधन, अकादमिक जिम्मेदारियों और सैकड़ों छोटी-छोटी जिम्मेदारियों को संभालते हुए, वे अपने संस्थान की धड़कन थीं।
लेकिन पिछले कई महीनों से, हर महीने तीन दिन असहनीय हो गए थे। घड़ी की सुई की तरह, अपनी मासिक धर्म के आसपास, उन्हें गंभीर सिरदर्द होने लगते थे। ये सामान्य सिरदर्द नहीं थे। ये अक्षम कर देने वाले थे। तेज, धड़कते दर्द उनके कनपटियों को जकड़ लेते थे, कभी-कभी मतली और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता के साथ। उन दिनों वे मुश्किल से काम कर पाती थीं, फिर भी वे कक्षाओं और मीटिंगों में खुद को धकेलती रहतीं, अक्सर जबरदस्ती मुस्कान लगाकर।
उन्हें चिड़चिड़ापन, लगातार और व्यापक निम्न मूड भी विकसित हो गया था।
वे अपने काम का आनंद नहीं ले पा रही थीं। वे अपनी दैनिक दिनचर्या पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रही थीं।
उनके स्टाफ ने उनका पीछे हटना देखा, और घर पर भी परिवार ने उनका दुख देखा। दर्द उनके पेशेवर आत्मविश्वास और व्यक्तिगत खुशी को छीन रहा था।
अपने सामान्य चिकित्सक से परामर्श किया, और बाद में एक स्त्री रोग विशेषज्ञ से भी। कुछ दवाओं से अस्थायी राहत मिली, लेकिन कुछ भी वास्तव में आवर्ती पैटर्न को संबोधित नहीं कर पाया। निराशा बढ़ती गई—किसी को समझ में क्यों नहीं आ रहा था कि वे क्या झेल रही हैं?
आखिरकार, वे मेरे क्लिनिक में आईं। विस्तृत मूल्यांकन किया गया। कुछ ही मिनटों में तस्वीर साफ हो गई: वे मेन्स्ट्रुअल माइग्रेन से पीड़ित थीं—सिरदर्द जो सीधे उनके मासिक चक्र के आसपास हार्मोनल उतार-चढ़ाव से जुड़े थे, और मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर के साथ।
निदान स्पष्ट था, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण था इसे सहानुभूति के साथ उन्हें समझाना। मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि यह एक अच्छी तरह से पहचानी जाने वाली स्थिति है, न कि “उनके दिमाग की उपज।”
हमने जीवनशैली समायोजन, निवारक रणनीतियों और उनके चक्र के अनुरूप प्रभावी चिकित्सा विकल्पों पर चर्चा की।
उनकी राहत स्पष्ट थी; केवल उपचार के वादे से नहीं, बल्कि अंततः समझे जाने से। अगले कुछ महीनों में, सही दृष्टिकोण के साथ, उनके हमले कम और प्रबंधनीय हो गए। उन्होंने अपनी ऊर्जा, अपने नेतृत्व की चिंगारी और अपनी व्यक्तिगत खुशी को फिर से खोज लिया। वह स्कूल शिक्षिका जो कभी महीनों से डरती थीं, अब फिर से अपनी जीवंत स्वभाव में वापस आ गईं।
जब वे आखिरी बार आईं, तो मुस्कुराते हुए बोलीं, “डॉक्टर, आपने मुझे मेरी जिंदगी वापस दे दी।”​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​​

मासिक धर्म संबंधी माइग्रेन (जिसे पीरियड सिरदर्द, हार्मोन सिरदर्द या मासिक धर्म से संबंधित माइग्रेन भी कहा जाता है) एक ऐसा माइग्रेन अटैक है जो मासिक धर्म चक्र से गहराई से जुड़ा होता है। यह आमतौर पर मासिक धर्म शुरू होने से ठीक पहले एस्ट्रोजन के स्तर में प्राकृतिक गिरावट से ट्रिगर होता है।
परिभाषा और प्रकार—
अटैक आमतौर पर पीरियड शुरू होने से 2 दिन पहले से लेकर ब्लीडिंग के तीसरे दिन तक के विंडो में होते हैं। मुख्य रूप से दो

उप-प्रकार हैं (इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेडेक डिसऑर्डर्स के मानदंडों के अनुसार):
• शुद्ध मासिक धर्म माइग्रेन: अटैक केवल इसी पेरिमेंस्ट्रुअल विंडो में होते हैं (और कम से कम 2 में से 3 चक्रों में), और महीने के अन्य समय में कोई माइग्रेन नहीं होता। यह दुर्लभ है (माइग्रेन वाली 100 महिलाओं में से 1 से भी कम)।
• मासिक धर्म से संबंधित माइग्रेन: अटैक पेरिमेंस्ट्रुअल विंडो में साथ ही महीने के अन्य समय में भी होते हैं। यह कहीं अधिक आम है।
माइग्रेन वाली लगभग 60% महिलाएं अपने पीरियड से संबंध बताती हैं। ये अटैक अक्सर गैर-मासिक धर्म माइग्रेन की तुलना में अधिक गंभीर, लंबे समय तक चलने वाले, अधिक अक्षम करने वाले (अधिक मतली, उल्टी या प्रकाश संवेदनशीलता के साथ) और कभी-कभी इलाज करने में कठिन होते हैं। ये आमतौर पर आभा (aura) के बिना होते हैं।
कारण-
मुख्य ट्रिगर मासिक धर्म से कुछ दिन पहले एस्ट्रोजन (और संबंधित हार्मोनल परिवर्तन) में तेजी से गिरावट है। इस समय जारी प्रोस्टाग्लैंडिन भी योगदान दे सकते हैं (और पीरियड दर्द को बढ़ा सकते हैं)। हार्मोनल उतार-चढ़ाव समग्र रूप से यह समझाते हैं कि माइग्रेन उन लोगों में अधिक आम क्यों है जो मासिक धर्म करते हैं। अन्य कारक (नींद में व्यवधान, भोजन छोड़ना, तनाव, निर्जलीकरण) इस संवेदनशील अवधि के दौरान जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

लक्षण
अन्य माइग्रेन के समान लेकिन अक्सर अधिक तीव्र:
• धड़कन या स्पंदन वाला दर्द (अक्सर एक तरफ)
• प्रकाश, ध्वनि या गंध के प्रति संवेदनशीलता
• मतली, उल्टी या भूख न लगना
• थकान, चक्कर आना या धुंधली दृष्टि
• संभवतः स्कैल्प में कोमलता या अधिक गर्म/ठंडा महसूस होना
लक्षण कुछ घंटों से लेकर दिनों तक रह सकते हैं।

डॉ. आर. के. त्रिपाठी
सीनियर होम्योपैथिक फिजिशियन
098396 74700

Experience the gentle power of homeopathy at Prabha Homoeo Clinic.Our holistic approach addresses chronic diseases and s...
20/07/2026

Experience the gentle power of homeopathy at Prabha Homoeo Clinic.
Our holistic approach addresses chronic diseases and skin conditions from the root, providing long-lasting relief and improving your overall well-being.
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