Aarogyam Clinic

Aarogyam Clinic Aarogyam clinic is a place where all the diseases are cured with Ayurvedic medicines and also with n

20/11/2017

गुड़ खाने से 18 फायदे
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1- गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत l

2- खाना खाने के बाद अक्सर मीठा
खाने का मन करता हैं।
इसके लिए सबसे बेहतर है
कि आप गुड़ खाएं।
गुड़ का सेवन करने से आप
हेल्दी रह सकते हैं

3 - पाचन क्रिया को सही रखना

4 - गुड़ शरीर का रक्त साफ
करता है और मेटाबॉल्जिम
ठीक करता है।
रोज एक गिलास पानी या दूध
के साथ गुड़ का सेवन पेट को
ठंडक देता है। इससे गैस की
दिक्कत नहीं होती।
जिन लोगों को गैस की परेशानी है,
वो रोज़ लंच या डिनर के बाद
थोड़ा गुड़ ज़रुर खाएं..

5 - गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है।
इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों
के लिए बहुत फायदेमंद है।
खासतौर पर महिलाओं के
लिए इसका सेवन बहुत
अधिक ज़रुर है.

6 - त्वचा के लिए, गुड़ ब्लड से
खराब टॉक्सिन दूर करता है,
जिससे त्वचा दमकती है और
मुहांसे की समस्या नहीं होती है।

7 - गुड़ की तासीर गर्म है,
इसलिए इसका सेवन जुकाम
और कफ से आराम दिलाता है।
जुकाम के दौरान अगर आप
कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं
तो चाय या लड्डू में भी
इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

8 - एनर्जी के लिए -बुहत
ज़्यादा थकान और कमजोरी
महसूस करने पर गुड़ का
सेवन करने से आपका एनर्जी
लेवल बढ़ जाता है।
गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे
शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता.
दिनभर काम करने के बाद
जब भी आपको थकान हो,
तुरंत गुड़ खाएं।

9 - गुड़ शरीर के टेंपरेचर को
नियंत्रित रखता है।
इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं,
इसलिए दमा के मरीज़ों के
लिए इसका सेवन काफी
फायदेमंद होता है।

10 - जोड़ों के दर्द में आराम--
रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के
साथ अदरक का सेवन करें,
इससे जोड़ों के दर्द की
दिक्कत नहीं होगी।

11- गुड़ के साथ पके चावल
खाने से बैठा हुआ गला व
आवाज खुल जाती है।

12 - गुड़ और काले तिल के
लड्डू खानेसे सर्दी में अस्थमा
की परेशानी नहीं होती है।

13 - जुकाम जम गया हो, तो
गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी
बनाकर खिलाएं।

14 - गुड़ और घी मिलाकर खाने
से कान का दर्द ठीक हो जाता है।

15 - भोजन के बाद गुड़ खा
लेने से पेट में गैस नहीं बनती.

16 - पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम
गुड़ के साथ लेने से पीलिया
रोग में लाभ होता है।

17 - गुड़ का हलवा खाने से
स्मरण शक्ति बढती है।

18 - पांच ग्राम गुड़ को इतने ही
सरसों के तेल में मिलाकर खानेसे
श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।

Aarogyam Clinic

27/05/2017

¥ सनबर्न ¥ **** Sun Burn *****

एलो वेरा जैल

एलो वेरा जैल त्वचा पर एलोवेरा जैल का उपयोग करने से आपकी त्वचा सुंदर और चमकदार दिखती है। एलोवेरा जैल में 90 प्रतिशत पानी होता है जो सनबर्न से तुरंत आराम दिलाता है। इसके अलावा एलोवेरा जैल में उपस्थित विटामिन्स और प्रोटीन्स भी सन डैमेज्ड स्किन के उपचार में सहायक होते हैं। एलोवेरा की एक पत्ती लें और उसमें से जैल निकालें। अब सनबर्न भाग पर इस जैल से मालिश करें और फिर ठंडे पानी से धो डालें।

दूध

सन डेमेज्ड स्किन के लिए दूध एक अच्छा विकल्प है क्योंकि यह सनबर्न त्वचा के उपचार में सहायक होता है। दूध में प्रोटीन्स, फैट्स और विटामिन्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो कोलेजन के उत्पादन में सहायक होते हैं और इस प्रकार यह आपकी त्वचा को आराम पहुंचाते हैं। थोडा ठंडा दूध लें और उसमें बर्फ़ के कुछ टुकडें डालें। जब दूध बहुत ठंडा हो जाए तो उसे आइसक्यूब की सहायता से स्किन पर लगायें।

एप्पल साइडर विनेगर

जब एप्पल साइडर विनेगर को त्वचा पर लगाया जाता है तो यह एस्ट्रिजेंट की तरह काम करता है और त्वचा के रोम छिद्रों के आकार को कम करता है और त्वचा का उपचार करता है। आधा कप एप्पल साइडर विनेगर लें और उसमें आधा कप पानी मिलाएं। दोनों सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाएं और इस मिश्रण को त्वचा पर लगायें। कुछ देर तक इंतज़ार करें और फिर पानी से धो डालें।

बेकिंग सोडा

आधा चम्मच बेकिंग सोडा लें और इसे ठंडे पानी के साथ मिलाएं। दोनों पदार्थों को अच्छी तरह मिलाएं और इस मास्क को सनबर्न भाग पर लगायें। इसे 10 मिनिट बाद धो डालें। दिन में दो बार इस उपचार को अपनाएँ और परिणाम देखें।

ग्रीन टी

ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो सनबर्न त्वचा के उपचार में सहायक होते हैं। थोड़ी ग्रीन टी लें और उसे कुछ देर उबालें। अब इस ग्रीन टी को एक डिब्बे में निकालें और इसे कुछ देर ठंडा होने दें। जब पानी ठंडा हो जाए तो इस ग्रीन टी वॉटर को सनबर्न स्किन पर लगायें और इसे ठंडा होने दें। बाद में ठंडे पानी से धो डालें।

खीरा

खीरे में एक्टिव एंजाइम्स होते हैं जो त्वचा को राहत पहुंचाते हैं और सनबर्न स्किन को ठंडक पहुंचाते हैं। कुछ खीरे लें और उन्हें टुकड़ों में काटें। अब इन टुकड़ों को त्वचा पर रगड़ें और कुछ देर मसाज करें। बाद में ठंडे पानी से धो डालें। अच्छे परिणामों के लिए आप त्वचा पर खीरे का रस भी लगा सकते हैं।

11/05/2017

🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉🕉......आयुर्वेद....क्या कहता है.......................सबसे पहले आप हमेशा ये बात याद रखें कि शरीर मे सारी बीमारियाँ वात-पित्त और कफ के बिगड़ने से ही होती हैं !


अब आप पूछेंगे ये वात-पित्त और कफ क्या होता है ???

बहुत ज्यादा गहराई मे जाने की जरूरत नहीं आप ऐसे समझे की सिर से लेकर छाती के बीच तक जितने रोग होते हैं वो सब कफ बिगड़ने के कारण होते हैं ! छाती के बीच से लेकर पेट और कमर के अंत तक जितने रोग होते हैं वो पित्त बिगड़ने के कारण होते हैं !और कमर से लेकर घुटने और पैरों के अंत तक जितने रोग होते हैं वो सब वात बिगड़ने के कारण होते हैं !

हमारे हाथ की कलाई मे ये वात-पित्त और कफ की तीन नाड़ियाँ होती हैं ! भारत मे ऐसे ऐसे नाड़ी विशेषज्ञ रहे हैं जो आपकी नाड़ी पकड़ कर ये बता दिया करते थे कि आपने एक सप्ताह पहले क्या खाया एक दिन पहले क्या खाया -दो पहले क्या खाया !! और नाड़ी पकड़ कर ही बता देते थे कि आपको क्या रोग है ! आजकल ऐसी बहुत ही कम मिलते हैं !

शायद आपके मन मे सवाल आए ये वात -पित्त कफ दिखने मे कैसे होते हैं ???

तो फिलहाल आप इतना जान लीजिये ! कफ और पित्त लगभग एक जैसे होते हैं ! आम भाषा मे नाक से निकलने वाली बलगम को कफ कहते हैं ! कफ थोड़ा गाढ़ा और चिपचिपा होता है ! मुंह मे से निकलने वाली बलगम को पित्त कहते हैं ! ये कम चिपचिपा और द्रव्य जैसा होता है !! और शरीर से निकले वाली वायु को वात कहते हैं !! ये अदृश्य होती है !

कई बार पेट मे गैस बनने के कारण सिर दर्द होता है तो इसे आप कफ का रोग नहीं कहेंगे इसे पित्त का रोग कहेंगे !! क्यूंकि पित्त बिगड़ने से गैस हो रही है और सिर दर्द हो रहा है ! ये ज्ञान बहुत गहरा है खैर आप इतना याद रखें कि इस वात -पित्त और कफ के संतुलन के बिगड़ने से ही सभी रोग आते हैं !

और ये तीनों ही मनुष्य की आयु के साथ अलग अलग ढंग से बढ़ते हैं ! बच्चे के पैदा होने से 14 वर्ष की आयु तक कफ के रोग ज्यादा होते है ! बार बार खांसी ,सर्दी ,छींके आना आदि होगा ! 14 वर्ष से 60 साल तक पित्त के रोग सबसे ज्यादा होते हैं बार बार पेट दर्द करना ,गैस बनना ,खट्टी खट्टी डकारे आना आदि !! और उसके बाद बुढ़ापे मे वात के रोग सबसे ज्यादा होते हैं घुटने दुखना ,जोड़ो का दर्द आदि

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भारत मे 3 हजार साल पहले एक ऋषि हुए है उनका नाम था वाग्बट्ट ! उन्होने ने एक किताब लिखी जिसका नाम था अष्टांग हृदयं !! वो ऋषि 135 साल तक की आयु तक जीवित रहे थे ! अष्टांग हृदयं मे वाग्बट्टजी कहते हैं की जिंदगी मे वात्त,पित्त और कफ संतुलित रखना ही सबसे अच्छी कला है और कौशल्य है सारी जिंदगी प्रयास पूर्वक आपको एक ही काम करना है की हमारा वात्त,पित्त और कफ नियमित रहे,संतुलित रहे और सुरक्षित रहे|जितना चाहिए उतना वात्त रहे,जितना चाहिए उतना पित्त रहे और जितना चाहिए उतना कफ रहे|तो जितना चाहिए उतना वात्त,पित्त और कफ रहे उसके लिए क्या करना है
उसके लिए उन्होने 7000 सूत्र लिखे हैं उस किताब मे !
उसमे सबसे महत्व पूर्ण और पहला सूत्र है :

भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है | )
अब समझते हैं क्या कहा वाग्बट्टजी ने !!

कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पीना !! अब आप कहेंगे हम तो हमेशा यही करते हैं ! 99% लोग ऐसे होते है जो पानी लिए बिना खाना नहीं खाते है |पानी पहले होता है खाना बाद मे होता है |बहुत सारे लोग तो खाना खाने से ज्यादा पानी पीते है दो-चार रोटी के टुकडो को खाया फिर पानी पिया,फिर खाया-फिर पानी पिया ! ऐसी अवस्था मे वाग्बट्टजी बिलकुल ऐसी बात करते हे की पानी ही नहीं पीना खाना खाने के बाद ! कारण क्या ? क्यों नहीं पीना है ??

ये जानना बहुत जरुरी है …हम पानी क्यों ना पीये खाना खाने के बाद क्या कारण है |

बात ऐसी है की हमारा जो शरीर है शरीर का पूरा केंद्र है हमारा पेट|ये पूरा शरीर चलता है पेट की ताकत से और पेट चलता है भोजन की ताकत से|जो कुछ भी हम खाते है वो ही हमारे पेट की ताकत है |हमने दाल खाई,हमने सब्जी खाई, हमने रोटी खाई, हमने दही खाया लस्सी पी कुछ भी दूध,दही छाझ लस्सी फल आदि|ये सब कुछ भोजन के रूप मे हमने ग्रहण किया ये सब कुछ हमको उर्जा देता है और पेट उस उर्जा को आगे ट्रांसफर करता है |आप कुछ भी खाते है पेट उसके लिए उर्जा का आधार बनता है |अब हम खाते है तो पेट मे सब कुछ जाता है|पेट मे एक छोटा सा स्थान होता है जिसको हम हिंदी मे कहते है अमाशय|उसी स्थान का संस्कृत नाम है जठर|उसी स्थान को अंग्रेजी मे कहते है epigastrium |ये एक थेली की तरह होता है और यह जठर हमारे शरीर मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि सारा खाना सबसे पहले इसी मे आता है ये |बहुत छोटा सा स्थान हैं इसमें अधिक से अधिक 350GMS खाना आ सकता है |हम कुछ भी खाते सब ये अमाशय मे आ जाता है|

अब अमाशय मे क्या होता है खाना जैसे ही पहुँचता है तो यह भगवान की बनाई हुई व्यवस्था है जो शरीर मे है की तुरंत इसमें आग(अग्नि) जल जाती है |आमाशय मे अग्नि प्रदीप्त होती है उसी को कहते हे जठराग्नि|ये जठराग्नि है वो अमाशय मे प्रदीप्त होने वाली आग है |ये आग ऐसी ही होती है जेसे रसोई गेस की आग|आप की रसोई गेस की आग है ना की जेसे आपने स्विच ओन किया आग जल गयी|ऐसे ही पेट मे होता है जेसे ही आपने खाना खाया की जठराग्नि प्रदीप्त हो गयी |यह ऑटोमेटिक है,जेसे ही अपने रोटी का पहला टुकड़ा मुँह मे डाला की इधर जठराग्नि प्रदीप्त हो गई|ये अग्नि तब तक जलती हे जब तक खाना पचता है |आपने खाना खाया और अग्नि जल गयी अब अग्नि खाने को पचाती है |वो ऐसे ही पचाती है जेसे रसोई गेस|आपने रसोई गेस पर बरतन रखकर थोडा दूध डाल दिया और उसमे चावल डाल दिया तो जब तक अग्नि जलेगी तब तक खीर बनेगी|इसी तरह अपने पानी डाल दिया और चावल डाल दिए तो जब तक अग्नि जलेगी चावल पकेगा|

अब अपने खाते ही गटागट पानी पी लिया और खूब ठंडा पानी पी लिया|और कई लोग तो बोतल पे बोतल पी जाते है |अब होने वाला एक ही काम है जो आग(जठराग्नि) जल रही थी वो बुझ गयी|आग अगर बुझ गयी तो खाने की पचने की जो क्रिया है वो रुक गयी|अब हमेशा याद रखें खाना पचने पर हमारे पेट मे दो ही क्रिया होती है |एक क्रिया है जिसको हम कहते हे Digation और दूसरी है fermentation|फर्मेंटेशन का मतलब है सडना और डायजेशन का मतलब हे पचना|

आयुर्वेद के हिसाब से आग जलेगी तो खाना पचेगा,खाना पचेगा तो उसका रस बनेगा|जो रस बनेगा तो उसी रस से मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र और अस्थि बनेगा और सबसे अंत मे मेद बनेगा|ये तभी होगा जब खाना पचेगा|

अब ध्यान से पढ़े इन् शब्दों को मांस की हमें जरुरत है हम सबको,मज्जा की जरुरत है ,रक्त की भी जरुरत है ,वीर्य की भी जरुरत है ,अस्थि भी चाहिए,मेद भी चाहिए|यह सब हमें चाहिए|जो नहीं चाहिए वो मल नहीं चाहिए और मूत्र नहीं चाहिए|मल और मूत्र बनेगा जरुर ! लेकिन वो हमें चाहिए नहीं तो शरीर हर दिन उसको छोड़ देगा|मल को भी छोड़ देगा और मूत्र को भी छोड़ देगा बाकि जो चाहिए शरीर उसको धारण कर लेगा|

ये तो हुई खाना पचने की बात अब जब खाना सड़ेगा तब क्या होगा..?

अगर आपने खाना खाने के तुरंत बाद पानी पी लिया तो जठराग्नि नहीं जलेगी,खाना नहीं पचेगा और वही खाना फिर सड़ेगा|और सड़ने के बाद उसमे जहर बनेंगे|

खाने के सड़ने पर सबसे पहला जहर जो बनता है वो हे यूरिक एसिड(uric acid )|कई बार आप डॉक्टर के पास जाकर कहते है की मुझे घुटने मे दर्द हो रहा है ,मुझे कंधे-कमर मे दर्द हो रहा है तो डॉक्टर कहेगा आपका यूरिक एसिड बढ़ रहा है आप ये दवा खाओ,वो दवा खाओ यूरिक एसिड कम करो|यह यूरिक एसिड विष (जहर ) है और यह इतना खतरनाक विष है की अगर अपने इसको कन्ट्रोल नहीं किया तो ये आपके शरीर को उस स्थिति मे ले जा सकता है की आप एक कदम भी चल ना सके|आपको बिस्तर मे ही पड़े रहना पड़े पेशाब भी बिस्तर मे करनी पड़े और संडास भी बिस्तर मे ही करनी पड़े यूरिक एसिड इतना खतरनाक है |इस लिए यह इतना खराब विष हे नहीं बनना चाहिए |

और एक दूसरा उदाहरण खाना जब सड़ता है तो यूरिक एसिड जेसा ही एक दूसरा विष बनता है जिसको हम कहते हे LDL (Low Density lipoprotive) माने खराब कोलेस्ट्रोल(cholesterol )|जब आप ब्लड प्रेशर(BP) चेक कराने डॉक्टर के पास जाते हैं तो वो आपको कहता है (HIGH BP )हाय बीपी है आप पूछोगे कारण बताओ? तो वो कहेगा कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है |आप ज्यादा पूछोगे की कोलेस्ट्रोल कौनसा बहुत है ? तो वो आपको कहेगा LDL बहुत है |

इससे भी ज्यादा खतरनाक विष हे वो है VLDL(Very Low Density lipoprotive)|ये भी कोलेस्ट्रॉल जेसा ही विष है |अगर VLDL बहुत बढ़ गया तो आपको भगवान भी नहीं बचा सकता|
खाना सड़ने पर और जो जहर बनते है उसमे एक ओर विष है जिसको अंग्रेजी मे हम कहते है triglycerides|जब भी डॉक्टर आपको कहे की आपका triglycerides बढ़ा हुआ हे तो समज लीजिए की आपके शरीर मे विष निर्माण हो रहा है |

तो कोई यूरिक एसिड के नाम से कहे,कोई कोलेस्ट्रोल के नाम से कहे,कोई LDL – VLDL के नाम से कहे समज लीजिए की ये विष हे और ऐसे विष 103 है |ये सभी विष तब बनते है जब खाना सड़ता है |

मतलब समझ लीजिए किसी का कोलेस्ट्रोल बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे ध्यान आना चाहिए की खाना पच नहीं रहा है ,कोई कहता हे मेराtriglycerides बहुत बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट मे डायग्नोसिस कर लीजिए आप ! की आपका खाना पच नहीं रहा है |कोई कहता है मेरा यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है तो एक ही मिनिट लगना चाहिए समझने मे की खाना पच नहीं रहा है |

क्योंकि खाना पचने पर इनमे से कोई भी जहर नहीं बनता|खाना पचने पर जो बनता है वो है मांस,मज्जा,रक्त,वीर्य,हड्डिया,मल,मूत्र,अस्थि और खाना नहीं पचने पर बनता है यूरिक एसिड,कोलेस्ट्रोल,LDL-VLDL| और यही आपके शरीर को रोगों का घर बनाते है !

पेट मे बनने वाला यही जहर जब ज्यादा बढ़कर खून मे आते है ! तो खून दिल की नाड़ियो मे से निकल नहीं पाता और रोज थोड़ा थोड़ा कचरा जो खून मे आया है इकट्ठा होता रहता है और एक दिन नाड़ी को ब्लॉक कर देता है जिसे आप heart attack कहते हैं !

तो हमें जिंदगी मे ध्यान इस बात पर देना है की जो हम खा रहे हे वो शरीर मे ठीक से पचना चाहिए और खाना ठीक से पचना चाहिए इसके लिए पेट मे ठीक से आग(जठराग्नि) प्रदीप्त होनी ही चाहिए|क्योंकि बिना आग के खाना पचता नहीं हे और खाना पकता भी नहीं है |रसोई मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पका सकते और पेट मे आग नहीं हे आप कुछ नहीं पचा सकते|

महत्व की बात खाने को खाना नहीं खाने को पचाना है |आपने क्या खाया कितना खाया वो महत्व नहीं हे कोई कहता हे मैंने 100 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 200 ग्राम खाया,कोई कहता है मैंने 300 ग्राम खाया वो कुछ महत्व का नहीं है लेकिन आपने पचाया कितना वो महत्व है |आपने 100 ग्राम खाया और 100 ग्राम पचाया बहुत अच्छा है |और अगर आपने 200 ग्राम खाया और सिर्फ 100 ग्राम पचाया वो बहुत बेकार है |आपने 300 ग्राम खाया और उसमे से 100 ग्राम भी पचा नहीं सके वो बहुत खराब है !!

खाना पच नहीं रहा तो समझ लीजिये विष निर्माण हो रहा है शरीर में ! और यही सारी बीमारियो का कारण है ! तो खाना अच्छे से पचे इसके लिए वाग्भट्ट जी ने सूत्र दिया !!

भोजनान्ते विषं वारी (मतलब खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीना जहर पीने के बराबर है )

इसलिए खाने के तुरंत बाद पानी कभी मत पिये !

अब आपके मन मे सवाल आएगा कितनी देर तक नहीं पीना ???

तो 1 घंटे 48 मिनट तक नहीं पीना ! अब आप कहेंगे इसका क्या calculation हैं ??
बात ऐसी है ! जब हम खाना खाते हैं तो जठराग्नि द्वारा सब एक दूसरे मे मिक्स होता है और फिर खाना पेस्ट मे बदलता हैं है ! पेस्ट मे बदलने की क्रिया होने तक 1 घंटा 48 मिनट का समय लगता है ! उसके बाद जठराग्नि कम हो जाती है ! (बुझती तो नहीं लेकिन बहुत धीमी हो जाती है )

पेस्ट बनने के बाद शरीर मे रस बनने की परिक्रिया शुरू होती है ! तब हमारे शरीर को पानी की जरूरत होती हैं तब आप जितना इच्छा हो उतना पानी पिये !!

जो बहुत मेहनती लोग है (खेत मे हल चलाने वाले ,रिक्शा खीचने वाले पत्थर तोड़ने वाले !! उनको 1 घंटे के बाद ही रस बनने लगता है उनको एक घंटे बाद पानी पीना चाहिए !

खाना खाने के बाद अगर कुछ पी सकते हैं उसमे तीन चीजे आती हैं !!

1) जूस
2) छाज (लस्सी) या दहीं !
3) दूध

सुबह खाने के बाद अगर तुरंत कुछ पीना है तो हमेशा जूस पिये !
दोपहर को दहीं खाये ! या लस्सी पिये !
और दूध हमेशा रात को पिये !!

इन तीनों के क्रम को कभी उल्टा पुलटा न करे !!फल सुबह ही खाएं (ज्यादा से ज्यादा दोपहर 1 बजे तक ) ! दहीं या लस्सी दोपहर को दूध रात को ही पिये !

जूस या फल सुबह ,दहीं या लस्सी दोपहर , और दूध हमेशा रात को क्यूँ पीना चाहिए ??

ज्यादा विस्तार मे न जाते हुए आप बस इतना समझे कि इन तीनों को पचाने के लिए शरीर मे अलग अलग इंजाएम उत्पन होते है !
जूस या फल सुबह को पचाने के इंजाईम हमेशा सुबह उत्पन होते है इसी तरह दहीं और छाझ को पचाने वाले दोपहर को और दूध को पचाने वाले रात को !!
शाम या रात को पिया हुआ जूस अगले दिन सिर्फ मूत्र के साथ flesh out होता है !
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ये तो हुआ खाने के बाद पानी पीने के बारे मे अब आप कहेंगे खाना खाने के पहले कितने मिनट तक पानी पी सकते हैं ???

तो खाना खाने के 45 मिनट पहले तक आप पानी पी सकते हैं ! अब आप पूछेंगे ये 45 मिनट का calculation ????

बात ऐसी ही जब हम पानी पीते हैं तो वो शरीर के प्रत्येक अंग तक जाता है ! और अगर बच जाये तो 45 मिनट बाद मूत्र पिंड तक पहुंचता है ! तो पानी – पीने से मूत्र पिंड तक आने का समय 45 मिनट का है ! तो आप खाना खाने से 45 मिनट पहले ही पाने पिये !

******************************************     Fairness Face Pack  For Summers.     ************************************...
11/05/2017

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Fairness Face Pack For Summers.
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Ingredients.....

1. Aloevera Gel or Fresh Aloevera
2. Honey
3. Lemon juice

Method.....

Take a clean bowl and then add 1 tsp of aloevera gel and 1 tsp of Honey and 1 tsp of lemon juice ( means half lemon juice )...mix all the three ingredients and apply on your clean face and rub it into circular motion for 2 minutes and then leave it for 5 minutes ...and then wash your face with normal water and feel the difference ...try it once this amazing fairness face pack .......

09/03/2017

*💊💉आरोग्य उपाय🌱🌿*

*गैस की पीड़ा से छुटकारा दिलाने वाला चूर्ण*

पहली विधि :-

छोटी हरड (बाल हर्र) एक किलो लेकर इनहे साफ करके दही की छाछ मे फुलाइए । सुबह फूलने के लिए छाछ मे डाल दीजिए । अगले दिन सुबह छाछ मे से निकालकर पानी से साफ करके छाया मे एक कपड़े पर डाल कर सुखा लीजिए ।जब सूछ जाए तब पुनः छाछ मे डाल दीजिए । ऐसा 3-6 बार करिए । इसके बाद हरडे को पीसकर बारीक चलनी से छान लीजिए ।इस प्रकार बनाए गए एक किलो छोटी हरड के चूर्ण मे पाव किलो अजवाइन पीसकर मिला लीजिए । फिर इस चूर्ण मे काला नमक सवादानुसार मिला लीजिए ।बस गैसहर चूर्ण तैयार ।

सेवन विधि :-

भोजन के बाद सेहत के अनुसार यह चूर्ण गुनगुने पानी से ले (ठंडे पानी से भी ले सकते है ) ।
इसके सेवन से गैस की तकलीफ कभी नही होगी , तकलीफ होने पर 5-6 मिनट मे ही चूर्ण लेने के बाद आराम मिल जाएगा , पाचन शकती भी बढ़ती है , दस्त साफ होते है ।गैस का दर्द दूर करने के लिए यह अचूक शर्तिया दवा है । बाजार मे यह चूर्ण नही मिलता है ।

गैस निवारक चटनी

पेट की गैस यदि पुरानी न हो तो निम्नलिखित पेट की गैस निवारक चटनी के सेवन से लाभ प्राप्त किया जा सकता है :-
1) मुनकका (बीज निकालकर ) 30 ग्राम
2) अदरक 6 ग्राम
3) बड़ी सौंफ 6 ग्राम
4) काली मिर्च 3 ग्राम
5) सैंधा नमक स्वादानुसार
इन पाँचो वस्तुओ को थोड़े पानी मे पीसकर चटनी बना ले । इसे दोनों समय भोजन के समय रोटी या भारत के साथ आवश्यकतानुसार 1-2 चम्मच चटनी की भांति चाटे । 1-2 चम्मच चटनी के सेवन से ही आपको पेट की गैस और पेट की खराबी मे पर्याप्त आराम मिलेगा ।पूर्ण लाभ के लिए चार पाँच दिन इसी भांति सेवन करे ।

पेट मे अमलता (ऐसीडिटी ) व गैस :-

एक लौंग व एक इलायची प्रत्येक भोजन व नाश्ते के बाद ले लेने पर कभी भी एसिडिटी व गैस नही होती ।

*दूसरी विधि :

इन हरडो को रेत मे भूनिए लीजिए । खूब फूलती है । इनहे पीस लीजिए । जल्दी पिसी जाती है ।

तीसरी विधि :-

इस चूर्ण मे 60 ग्राम सनाय (सोनामुखी ) की पत्ती को हल्का भूनकर चूर्ण बनाकर डालने से पुराने से पुराना कब्ज भी हफ्ते भर मे ठीक हो जाता है । सनाय की पत्ती बिना भून कर डालने से पेट मे मरोड आती है ।


Aarogyam Clinic
Bathinda ( Punjab )

27/02/2017

🍃 *आरोग्यं* :-
धनिया क्यों फायदेमंद होता है ?

✏* धनिया हर भारतीय रसोई का अभिन्न हिस्सा है। बतौर मसाला और व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने के लिए इसे खूब इस्तेमाल किया जाता है।

✏* चाहे धनिया की हरी ताजा पत्तियों की बात हो या इसके सूखे हुए बीज, इनका इस्तेमाल घर-घर में किया जाता है। आधुनिक विज्ञान ने धनिया के अनेक औषधीय गुणों को प्रमाणित किया है। आज हम आपको इससे जुड़े पारंपरिक ज्ञान के बारे में बताने जा रहे हैं।

✏* हरे ताजे धनिया की पत्तियां लगभग 20 ग्राम और उसमें चुटकी भर कपूर मिला कर पीसकर रस छान लें। इस रस की दो बूंदें नाक के छिद्रों में दोनों तरफ टपकाने से तथा रस को माथे पर लगा कर हल्का-हल्का मलने से नाक से निकलने वाला खून, जिसे नकसीर भी कहा जाता है, तुरंत बंद हो जाता है।

✏* थोड़ा-सा ताजा हरा धनिया कुचलकर कर पानी में उबाल कर ठंडा होने के बाद मोटे कपड़े से छान कर शीशी में भर लें। इसकी दो बूंदें आंखों में टपकाने से आंखों में जलन, दर्द तथा आंख से पानी गिरना जैसी समस्याएं दूर होती हैं।

✏* धनिया महिलाओं में मासिक धर्म संबंधी समस्याओं को भी दूर करता है। यदि मासिक धर्म साधारण से ज्यादा हो, तो आधा लीटर पानी में लगभग 6 ग्राम धनिया के बीज डालकर खौलाएं और इसमें शक्कर डालकर पिएं, फायदा होगा।

✏* धनिया को मधुमेह नाशी माना जाता है। इसके सेवन से खून में इंसुलिन की मात्रा नियंत्रित रहती है। धनिया त्वचा के लिए भी फायदेमंद है।

✏* धनिया की पत्तियों के कुचलकर इसकी 1 चम्मच मात्रा लेकर चुटकी भर हल्दी का चूर्ण मिलाकर चेहरे पर दिन में कम से कम 2 बार लगाएं। इससे मुंहासों की समस्या दूर होती है और यह ब्लैकहेड्स को भी हटाता है। सौंफ, मिश्री व धनिया के बीजों की समान मात्रा लेकर चूर्ण बना कर 6-6 ग्राम प्रतिदिन भोजन के बाद खाने से हाथ-पैर की जलन, एसिडिटी, आंखों की जलन, पेशाब में जलन व सिरदर्द दूर होता है।

14/02/2017

🍃 *आरोग्यं* :-
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रुसी के निदान के घरेलु उपचार :-
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1 # - 4 निम्बू का छिलका उतारकर इसे 500 मिली. पानी में उबालकर उन्हें ठंडा करके हफ्ते में २ दिन इससे अपने बालों को धोएं |

2 # - अगर उनमे खुजली शुरू गो गयी हो तो सुबह सूरज निकलने से पहले नीम की ताज़ी और मुलायम पत्तियों को पीसकर इसका लेप बालों में लगाएँ |

3 # - अगर तैलीय रूसी हो तो रात में किसी स्वदेशी माइल्ड शैम्पू से बाल धो कर सिरके और पानी बराबर मिलकर लगाएँ |

4 # - अगर सूखी रुसी है तो किसी स्वदेशी माइल्ड शैम्पू से बाल धोकर जब सर सूख जाए तो बादाम, नारियल या जैतून के गुनगुने तेल से सिर की मालिश करने से रूसी कम होगी। मालिश के बाद तेल को सिर पर रात भर के लिये छोड़ें |

5 # - नहाने से 30 मिनट पहले ग्वारपाठा(एलोवेरा) लगा कर किसी स्वदेशी माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें |

6 # - तुलसी और आंवले को बराबर मिलाकर लेप बनाकर सर पे आधे घंटे रखें फिर बाल धो लें |

7 # - रुसी की पपड़ी हटाने के लिए बेकिंग सोडा को किसी स्वदेशी माइल्ड शैम्पू में मिलकर बाल धोएं पपड़ी ख़त्म हो जायेगी |

8 # - मेथी दाने को रात भर भिगोकर सुबह पेस्ट बनाकर आधे घंटे के लिए लगाकर फिर बाल धोएं |

Dr.ABHINANDAN
Aarogyam Clinic
Bathinda ( Punjab )

30/01/2017

*कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है.......🙏🏼*

*सोना*

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

*चाँदी*

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

*कांसा*

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*तांबा*

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

*पीतल*

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*लोहा*

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

*स्टील*

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।

*एलुमिनियम*

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

*मिट्टी*

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

12/01/2017

आज की बीमारी एसिडिटी से सम्बंधित है ।
आइये समझते है ।

क्या होती है एसिडिटी की समस्या
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हमारे पेट में बनने वाला एसिड या अम्ल भोजन को पचाने का काम करता है, लेकिन कई बार पचाने के लिए पेट में पर्याप्त भोजन ही नहीं होता या फिर एसिड ही आवश्यक मात्रा से अधिक बन जाता है। ऐसे में एसिडिटी या अम्लता की समस्या हो जाती है। इसे पेट की जलन या हार्टबर्न भी कहा जाता है।

वसायुक्त और मसालेदार भोजन का सेवन आमतौर पर एसिडिटी की प्रमुख वजह है। इस प्रकार का भोजन पचने में जटिल होता है और एसिड पैदा करने वाली कोशिकाओं को आवश्यकता से अधिक एसिड बनाने के लिए उत्तेजित करता है।

क्यों होती है एसिडिटी
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लगातार बाहर का भोजन करना।

भोजन करना भूल जाना।

अनियमित तरीके से भोजन करना। दो बार के भोजन में अधिक अंतराल रखने से भी एसिडिटी हो सकती है।

मसालेदार खाने का ज्यादा सेवन करना।

विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव भी एसिडिटी का एक कारण है।

काम का अत्यधिक दबाव या पारिवारिक तनाव लंबे समय तक बना रहे तो शारीरिक तंत्र प्रतिकूल तरीके से काम करने लगता है और पेट में एसिड की मात्रा आवश्यकता से अधिक बनने लगती है।

इन घरेलू प्रयोग को करें
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✅ इलायची - इलायची खाने की आदत आपको एसिडिटी से बचाए रखने में मदद करती है। जब भी आपको एसिडिटी या पेट में जलन की समस्या हो, तो एक से दो इलायची को मुंह में रखकर चूसते रहें।

✅ तुलसी - तुलसी न केवल एसिडिटी में लाभदायक है बल्कि मानसिक और अन्य शारीरिक रोगों में भी बेहद प्रभावी औषधी है। खाने के बाद तुलसी के कुछ पत्तों को चबाएं या फिर गर्म पानी में डालकर इसका सेवन करें।

✅ पुदीना - पुदीना हमेशा से ही पेट व पाचन की समस्याओं के लिए फायदेमंद रहा है। मसालेदार भोजन से पेट में होने वाली जलन, पुदीने के पत्तों को चबाने से शांत होगी, या फिर पानी में नींबू और पि‍सी हुई पुदीना पत्ती को काले नमक के साथ मिलाकर पिएं।

आंवला - आंवला हमेशा से ही एक घरेलू पाचक उपायों में गिना जाता है। एसिडिटी में आंवले को काले नमक के साथ खाना लाभकारी होगा। आप चाहें तो इसका मुरब्बा, जूस या इसकी चॉकलेट अथवा सुपारी का सेवन भी कर सकते हैं।

✅ दूध - ठंडा दूध पीना, एसिडिटी के लिए पुराना रामबाण उपाय है। पेट या सीने में जलन होने पर दूध और पानी को बराबर मात्रा में मिलाकर पिएं या फिर ठंडे दूध का सेवन करें।

✅ जीरे का पानी - पेट की समस्याओं में जीरे का पानी भी बेहद लाभदायक होता है। जीरे को पानी में उबालकर, इसका प्रयोग करना एसिडिटी में फायदेमंद साबित होगा।

✅अदरक - सर्दी, खांसी, जुकाम हो या फिर पाचन संबंधी समस्याएं, अदरक का इस्तेमाल एक कारगर उपाय है। इसे पानी के साथ उबालकर उस पानी को पिएं, या फिर इसका एक टुकड़ा काले नमक में लपेटकर चूसें। जल्द से जल्द लाभ मिलेगा।

✅सौंफ - खाने के बाद सौंफ का सेवन, पाचन में मददगार होता है। पेट में जलन, एसिडिटी होने पर भी सौंफ उतना ही फायदेमंद है। सौंफ ठंडी प्रकृति की होती है और यह पेट में ठंडक पैदा कर एसिडिटी में राहत देती है।

इसके साथ ही ये उपाय भी करें
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1. समय पर भोजन करें और भोजन करने के बाद कुछ देर वॉक जरूर करें।

2. अपने खाने में ताजे फल, सलाद, सब्जियों का सूप, उबली हुई सब्जी को शामिल करें। हरी पत्तेदार सब्जियां और अंकुरित अनाज खूब खाएं। ये विटामिन बी और ई का बेहतरीन स्रोत होते हैं जो शरीर से एसिडिटी को बाहर निकाल देते हैं।

3. खाना हमेशा चबा कर और जरूरत से थोड़ा कम ही खाएं। सदैव मिर्च-मसाले और ज्यादा तेल वाले भोजन से बचें।

4. अपने रोजमर्रा के आहार में मट्ठा और दही शामिल करें।

5. ताजे खीरे का रायता एसिडिटी का बेहतरीन उपचार हैं।

6. शराब और मांसाहारी भोजन से परहेज करें।

7. पानी खूब पिएं। याद रखें इससे न सिर्फ पाचन में मदद मिलती है, बल्कि शरीर से टॉक्सिन भी बाहर निकल जाते हैं।

8. खाने के बाद तुरंत पानी का सेवन न करें। इसका सेवन कम से कम आधे घंटे के बाद ही करें।

9. धूम्रपान, शराब से बचें।

10. पाइनेपल के जूस का सेवन करें, यह एन्जाइम्स से भरा होता है। खाने के बाद अगर पेट अधिक भरा व भारी महसूस हो रहा है, तो आधा गिलास ताजे पाइनेपल का जूस पीएं। सारी बेचैनी और एसिडिटी खत्म हो जाए

11. आंवले का सेवन करें हालांकि यह खट्टा होता है, लेकिन एसिडिटी के घरेलू उपचार के रूप में यह बहुत काम की चीज है।

12. गैस से फौरन राहत के लिए 2 चम्मच ऑंवला जूस या सूखा हुआ ऑंवला पाउडर और दो चम्मच पिसी हुई मिश्री ले लें और दोनों को पानी में मिलाकर पी जाएं।



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03/01/2017

***** स्वास्थ्य ही जीवन *******

⭐⭐⭐⭐⭐⭐⭐

4-5 नींबू लें। इन्हें अच्छे से धोकर दो टुकड़ों में काट लें। एक बर्तन में पानी लें और इन्हें डालकर पानी को 3 से 5 मिनट तक उबाल लें। इसके बाद, इसे 10 मिनट के लिए ठंडा होने दें। बाद में इसे छान लें और बचे हुए पानी को पी जाएं। पल्प को खाना बनाने के काम में ले जाएं। अगर आपको स्वाद अच्छा न लगे तो इसमें शहद भी मिलाया जा सकता है।

क्या फायदा होगा इससे
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इस पेय को पीने से शरीर में कब्ज की समस्या दूर हो जाती है। इसमें एसिड की उच्च मात्रा होती है जो पेट की ऐंठन को दूर कर देती है। साथ ही कब्ज की समस्या से भी निजात मिल जाता है।

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इस नींबू पेय को पीने से कैलरी बर्न हो जाती है और शरीर को पोषण तत्व भी मिलते हैं। इससे शरीर का मेटाबॉलिजम सही हो जाता है।

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इस नींबू पेय को पीने से शरीर की विषाक्तता दूर हो जाती है यानी बॉडी डिटॉक्सीफाई हो जाती है।

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इस पेय से शरीर को कमजोर किए बिना वजन घटाने में मदद मिलती है। इसे पीने से बार-बार भूख लगने की समस्या भी कम हो जाती है।

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अगर आपको सर्दी हो गई है तो इस पेय को पीने से आराम मिलेगा। इसमें ऐंटिऑक्सिडेंट होते हैं जो सर्दी दूर भगा देते हैं।

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अगर आपकी पाचन क्रिया गड़बड़ हो तो इसे अवश्य लीजिये ।

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यह पेय इम्यूनिटी को बूस्ट कर देता है क्योंकि नींबू में विटमिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है।

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नींबू, एनर्जी को बूस्ट करने में मदद करता है। यह सिर्फ पल्प नहीं है बल्कि इसकी एरोमा तक से एनर्जी बढ़ जाती है।

यदि आपको नींबू की एलर्जी हो तो डाक्टर से सलाह लेकर ही प्रयोग करे ।

Aarogyam Clinic
Bathinda

24/12/2016

** How To Make Gold Water, Silver Water And Copper Water -***

* Metal Charged Water And Its Benefits
In Maintaining Health *

*** Healing with metals is an ancient Ayurvedic therapy. Metals like gold, silver and copper have been used to treat various health problems in Ayurveda.

Gold water, silver water, copper water means water charged with the healing qualities of these metals. It is known that copper, silver and gold have health benefits for the human body. These health benefits can be transferred to the water which comes in contact with these metals. Before I lay out the method by which this can be done, I'd like to present some information about this therapy.****

***** Some Information About The Use Of These Metals*****

In ancient times, it was a practice with the Kings and the affluent to use gold and silver utensils and cutlery to serve and eat food, and to store and drink water from these metallic containers.

Mahatma Gandhi said " It is health that is real wealth and not gold and silver ". So true!

Ayurveda has from times immemorial suggested using a copper vessels to store water overnight and to drink this as soon as one gets up the next morning. Many Ayurvedic medicines even today use gold and silver ash (bhasm) as one of their ingredients.

Also it was and is a common practice in India to put a gold or silver foil in murabbas, chyawanprash and medicines even today. Paan, the Indian betel leaf mouth freshener and digestive, is covered in silver foil before being given to the customer. All this just shows the importance these metals have on our health and well being.

*****What Is Metal Charged Water ? *****

When metals like gold, silver or copper are put in water for a specific time period, the resultant water gets charged with the health benefiting qualities of the metal.

*******Some Health Benefits Of
Metal Charged Water *********

Some of these health benefits are :

# Gold

People suffering from respiratory disease like asthma, breathlessless, diseases of the lungs, heart diseases, brain diseases, find it benefits to consume gold charged water.
Gold benefits the brain, relaxes the body and mind.

# Silver

People suffering from digestive problems and organs related to digestion like stomach, intestines, liver etc and those suffering from diseases of the urinary system and organs find it benefits to consume silver charged water.

Silver has anti bacterial, anti viral and anti fungal properties. In olden times milk was preserved by putting silver coins in it since it kills pathogens of all types instantly.

# Copper

Those suffering from a number of chronic and complicated diseases like joint diseases, polio, leprosy, high BP, knee pains, stress and mental tension, paralysis find it benefits to consume copper charged water.

Copper is needed by the body for various physiological functions like RBC synthesis, protein metabolism, enzyme activity and benefits the nervous and circulatory systems and bone health.

** Things Required & Precautions **

** Gold**

10 to 20 grams of gold coins or gold ornaments like bangles, rings, etc.

Precautions

Ornaments with stones or a lot of joints, like chains or necklaces should not be used for this purpose.

** Silver**

20 to 50 grams of pure silver coins, utensils like small plates or pieces of silver.

Precautions

Use only pure silver for this purpose.

** Copper**

40 to 50 grams of copper in the form of coins, utensils, small plates or pieces of copper.

Precautions

Do not use copper wires meant for electric work even if they are new.

All these things can be got from jewellers who should be told that these things need to be pure and for what purpose they are being bought so that you do not end up buying the wrong thing.

***********Procedure For Making
Metal Charged Water **********

# Wash the needed metal well with clean water.

# In a Steel vessel ( do not use aluminium vessel ) put 4 to 5 cups of fresh and clean water.Drop all the metal in this water and keep the water for boiling , keep boiling water till 2 cups of water remain .

# Remove the metals from the water and strain this water through a fine muslin cloth.

# The resultant water is the metal charged water.

# Drink 1cup of this slightly warm metal charged water in the morning and the other cup in the evening .

# It is not necessary to use all the 3 metals together for making the metal charged water.One Can use the metal indicated for the specific disease and make the water.

Thank you

Dr.Abhinandan Gopal
Arrogyam Clinic
Bathinda

Address

Arogyam Clinic , Backside Punjab Clinical Laboratory, G. T Road
Bathinda
151001

Telephone

9888694195

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