Dr Rahul Upadhyay BHMS. MD

Dr Rahul Upadhyay BHMS. MD Specialist chronic disease
Skin.Hair fall.Respiretion . Arthritis.Tumar.Male & Females disease.etc

डॉ राहुल उपाध्याय                 एम डी नोट : दवा भेजने की सुविधा उपलब्ध है ।
01/05/2019

डॉ राहुल उपाध्याय
एम डी
नोट : दवा भेजने की सुविधा उपलब्ध है ।

 #होमियोपैथीक_दवाइयों_से_बाझपन_दूर_कर_रहे_हैं  #डॉ_राहुल_उपध्याय, बानगी के तौर पर गुड्डी देवी चेतगंज* भदोही जिले के सर्र...
25/04/2019

#होमियोपैथीक_दवाइयों_से_बाझपन_दूर_कर_रहे_हैं
#डॉ_राहुल_उपध्याय, बानगी के तौर पर गुड्डी देवी चेतगंज*

भदोही जिले के सर्रोई बाजार अहरा रोड के पास स्थित एडवांस होमियोपैथीक क्लीनिक के डॉक्टर राहुल उपाध्याय उन महिलाओं और बहु बेटियों के लिए भगवान बनकर उभरे हुए हैं जिनको बच्चा नही हो रहा हैं। या कोई अन्य परेशानियों के कारण महिलाएं बच्चा पैदा नही कर पा रही हैं, लेकिन डॉक्टर राहुल उपाध्याय से जब ये सभी महिलाएं मिली तो क्या उनकी समस्याओं का निदान एक से दो माह में ही हो गया। जी हाँ डॉ राहुल उपध्याय होमियोपैथीक दवाइयों से बाझपन महिलाओं की समस्या को दूर कर रहे हैं। नजीर के तौर पर चेतगंज की महिला गुड्डी देवी पति दिनेश प्रजापति की कहानी हैं। इस महिला को करीब 15 सालों से पेट मे बच्चा नही हो रहा था , घर परिवार और समाज की बातों को सुनकर ऊब चुकी थी, लेकिन किसी महिला ने जब गुड्डी को डॉ राहुल उपाध्याय के बारे में बताया तो गुड्डी फौरन उनके पास आई और अपनी समस्यओं को सुनाकर रोने लगी , लेकिन डाक्टर साहब ने जब उसे दो महीने का दवा दिया और दो महीने के बाद गुड्डी ने यह ख़बर सुनाया की उसके पेट मे बच्चा आ गया हैं। महिला गुड्डी ने डॉक्टर राहुल उपाध्याय को अपना भगवान मानते हुए उस ऊपर वाले परमात्मा का भी शुक्रिया अदा की। जिले में इस कृत्य के लिए डॉ राहुल उपाध्याय एक जानी-पहचानी शख्सियत बन चुके हैं। वह नाम काम के मोहताज नही है। वह अपनी होमियोपैथिक दवाइयों के लिए जाने पहचाने जाते हैं।

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण...
06/04/2019

या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते ॥

#श्री_के_पी_मेमोरियल_पब्लिक_स्कूल सर्रोई भदोही
की तरफ से आप सभी गुरुजनों व मित्रो को
हिन्दू नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं ....
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

Class PG to VIII
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एडवांस होम्योपैथीक क्लिनिक सर्रोई में होम्योपैथीक दवाओं द्वारा होता हैं। पिम्पल्स व छायी का स्थायी इलाज ।।              ...
29/03/2019

एडवांस होम्योपैथीक क्लिनिक सर्रोई
में होम्योपैथीक दवाओं द्वारा होता हैं।
पिम्पल्स व छायी का
स्थायी इलाज ।।
#डॉ_राहुल_उपाध्याय
एम डी

बुखार से न घबराएं, सही ट्रीटमेंट कराएंडॉ राहुल उपाध्याय                 एम डीएडवांस होम्योपैथीक क्लिनिक             सररो...
18/09/2018

बुखार से न घबराएं, सही ट्रीटमेंट कराएं

डॉ राहुल उपाध्याय
एम डी
एडवांस होम्योपैथीक क्लिनिक
सररोई भदोही
मो:9839227549

इस मौसम में फीवर एक सामान्य-सी बात है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। जरूरत है तो सही वक्त पर, सही इलाज की। मौसमी बुखार पर पूरी जानकारी:
इन दिनों होने वाले बुखार के ज्यादातर मामले वायरस के हैं, लेकिन मलेरिया, निमोनिया, टायफायड के अलावा इक्का-दुक्का मामले डेंगू के भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में कई तरह के बुखारों की पहचान और उसके मुताबिक इलाज की जरूरत होती है।

क्या करें?
*एडवांस होम्योपैथीक क्लीनिक के डॉ. राहुल उपाध्याय* के मुताबिक, 100 डिग्री फॉरेनहाइट तक बुखार में दवा की जरूरत नहीं होती, लेकिन बुखार इसी रेंज में 4-5 या ज्यादा दिन तक बना रहे या बढ़ जाए तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं। 102 डिग्री फॉरेनहाइट तक बुखार है और कोई असामान्य लक्षण नहीं हैं तो मरीज की देखभाल घर पर ही कर सकते हैं। उसके शरीर पर सामान्य पानी की पट्टियां तब तक रखें, जब तक तापमान कम न हो जाए।
मरीज को हर छह घंटे में पैरासिटामॉल की एक गोली दे सकते हैं। यह क्रोसिन, कालपोल आदि ब्रैंड नेम से मिलती है। यह बुखार की सबसे सेफ दवा है। दूसरी कोई गोली डॉक्टर से पूछे बिना न दें, खासकर कॉम्बिफ्लेम, ब्रूफेन या एस्प्रीन न लें, क्योंकि अगर डेंगू है तो इनसे प्लेटलेट्स कम हो जाएंगे। 10 साल तक के बच्चों को हर चार घंटे में 1 मिली लीटर प्रति किलो वजन के अनुसार दवा दे सकते हैं। दो दिन तक बुखार ठीक न हो तो डॉक्टर के पास ले जाएं।

मरीज को वाइरल है तो उससे थोड़ी दूरी बनाए रखें और उसकी इस्तेमाल की गई चीजें इस्तेमाल न करें। मरीज को पूरा आराम करने दें, खासकर तेज बुखार में। आराम भी बुखार में इलाज का काम करता है। मरीज छींकने से पहले नाक और मुंह पर रुमाल रखें। इससे वाइरल होने पर दूसरों में नहीं फैलेगा। ध्यान रखें कि वह अपने हाथ भी अच्छी तरह से साफ करें।
बच्चे को वाइरल है तो स्कूल न भेजें। इससे बीमारी दूसरे बच्चों में नहीं फैलेगी। मरीज के कमरे में ताजा हवा आने दें। एसी का तापमान 23-24 डिग्री के आसपास रखें। मरीज हल्के गुनगुने पानी से नहा ले तो बेहतर है। फ्रेश लगेगा।
कब जाएं डॉक्टर के पास?

बुखार अगर 102 डिग्री से ज्यादा है या कम बुखार में भी उलटी, दस्त, चक्कर, सिर, आंखों, बदन या जोड़ों में दर्द जैसे लक्षणों में से कोई भी लक्षण है, तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं।
कैसे-कैसे बुखार
टायफायड
इसे एंट्री फीवर और मियादी बुखार भी कहते हैं। यह सैल्मोनेला बैक्टीरिया से होता है, जिससे आंत में जख्म (अल्सर) हो जाता है और इस वजह से बुखार होता है। यह बुखार आमतौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है। पहले दिन में, फिर थोड़ा तेज और धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।

कैसे फैलता है?
टायफायड खराब पानी से फैलता है। टायफायड वैक्सीन लगी होने के बावजूद यह बुखार हो सकता है, क्योंकि यह वैक्सीन 65 फीसदी ही सुरक्षा देती है।
कितने दिन रहता है?
3-4 हफ्ते (इलाज न हो तो यह लंबा खिंच जाता है।)
लक्षण
तेज बुखार (जो धीरे-धीरे बढ़ता है), सिर दर्द, कमजोरी, उलटी, जी मितलाना, दस्त, पेटदर्द, कभी-कभी पॉटी में खून। आमतौर पर शरीर में दर्द नहीं होता।
टेस्ट
ब्लड कल्चर। कभी-कभी विडाल और टायफिडॉट टेस्ट भी कराते हैं।
इलाज
इसमें एंटी-बायोटिक दवा आमतौर पर दो हफ्ते के लिए दी जाती है। कई बार दवा देने के बाद भी बुखार उतरने में 4-5 दिन लग सकते हैं, इसलिए परेशान न हों। हाथ बिल्कुल साफ रखें और पानी साफ और उबालकर पिएं।
मलेरिया
यह ‘प्लाज्मोडियम’ नाम के पैरासाइट से होता है, जो मच्छर इंसानों में फैलाते हैं। माना जाता है कि मलेरिया में एक दिन छोड़कर बुखार आता है, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है।
कैसे फैलता है?
मलेरिया मादा ‘एनेफिलीज’ मच्छर के काटने से होता है, जो गंदे पानी में पनपते हैं। ये मच्छर आमतौर पर दिन ढलने के बाद काटते हैं।
कितने दिन रहता है?
1-2 हफ्ते (इलाज के बिना यह लंबा खिंच जाता है)
लक्षण
रह-रह कर (कभी-कभी लगातार भी) ठंड के साथ तेज बुखार, सिर दर्द, कंपकंपी महसूस होना, शरीर दर्द, उलटी, जी मितलाना, कमजोरी आदि। कभी-कभी मरीज बेहोश भी हो जाता है।
टेस्ट
ब्लड स्मेयर टेस्ट और मलेरिया एंटीजन। ब्लड स्मेयर टेस्ट चढ़े बुखार में किया जाता है।
इलाज
इसमें क्लोरोक्विन जैसी एंटी-मलेरियल दवा दी जाती है। इन दवाओं के साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, इसलिए इन्हें डॉक्टर की सलाह के बिना न लें।
वाइरल
वाइरल यरल कहलाता है। आमतौर पर यह मौसम बदलने पर होता है।
कैसे फैलता है?
आमतौर पर इंफेक्शन वाले शख्स और उसके कॉन्टैक्ट में आई चीजों जैसे फोन, हैंडल, टॉवल आदि छूने या इस्तेमाल करने से फैलता है।
कितने दिन रहता है?
3 से 5 दिनों तक।
लक्षण
हल्का बुखार, खांसी, नाक बहना या नाक बंद होना, सिर दर्द, शरीर में दर्द, थकावट, गला खराब आदि। टेस्ट 95 फीसदी मामलों में टेस्ट की जरूरत नहीं होती।
डेंगू
डेंगू 3 तरह का होता है: 1. क्लासिल (साधारण) डेंगू फीवर 2. डेंगू हैमरेजिक फीवर (DHF), 3. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)
कैसे फैलता है?
डेंगू मादा एडीस इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है।
कितने दिन रहता है?
5 से 10 दिन तक।
लक्षण
ठंड लगने के बाद तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, कमजोरी, उलटी, पेट दर्द, चक्कर, स्किन का लाल होना
टेस्ट
एंटीजन ब्लड टेस्ट (एनएस 1) और डेंगू सिरॉलजी। एनएस1 पहले दिन ही पॉजिटिव आ जाता है, लेकिन धीरे-धीरे पॉजिटिविटी कम होने लगती है। 4-5 दिन बाद टेस्ट कराते हैं तो एंटीबॉडी टेस्ट (डेंगू सिरॉलजी) कराना बेहतर है।
इलाज
साधारण डेंगू बुखार का इलाज घर पर ही हो सकता है। मरीज को पूरा आराम करने दें। हर छह घंटे में होम्योपैथीक दवा यूपोटेरिम 200 दें और पानी और तरल चीजें पिलाएं। अगर डेंगू हैमरेजिक फीवर या शॉक सिंड्रोम का लक्षण (मसूढ़ों या पॉटी में खून, स्किन पर गहरे नीले चकत्ते, चक्कर) दिखाई दे तो मरीज को फौरन डॉक्टर के पास ले जाएं।
ध्यान रखें
टायफायड के अलावा किसी और बुखार में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी वाइरल के साथ इन्फेक्शन होने पर भी एंटीबायोटिक दी जाती हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ डॉक्टर के कहने पर करें। खुद एंटीबायोटिक न लें। ज्यादा एंटीबायोटिक लेने से शरीर इम्यून हो जाता है और शरीर के गुड बैक्टीरिया भी मर जाते हैं।

डॉ राहुल उपाध्याय
12/06/2018

डॉ राहुल उपाध्याय

 #आंनद_कुमार_यादव उम्र 3 वर्ष उगापुर औराई के रहने वाले है । इनके ब्रेन में कंजेशसन (ट्यूमर)हो गया था जिससे उस बच्चे को ह...
28/05/2018

#आंनद_कुमार_यादव उम्र 3 वर्ष उगापुर औराई के रहने वाले है । इनके ब्रेन में कंजेशसन (ट्यूमर)हो गया था

जिससे उस बच्चे को हमेशा मिर्गी के दौड़े आना
सर में बहुत तेज दर्द होना
बुखार बहुत तेज आना
हाथ पैर हमेशा सुंन हो जाना

इनके अभिभावक बहुत ही परेसान रहते थे ।जो भी जहा बताता था वहा पर ले जाते थे ।और उन्हें यही एक ही जबाब मिलता था की आप का बच्चा कभी भी ठीक नहीं हो सकता है क्योकि ये जन्म से है । #आंनद को कई बड़े हॉस्पिटलों में भी दिखाया गया लेकिन इन्हे कोई आराम नहीं हुआ ।सभी लोगो ने इन्हे ऑपरेशन की सलाह दी ।तथा ये भी बताया कि ओपरेसन के बाद भी कोई गारंटी नहीं है ।तब ये सरोई स्थित #एडवांस होम्योपैथीक क्लिनिक में #डॉ_राहुल_उपाध्याय को दिखाया ।यहाँ पर आधुनिक होम्योपैथीक के से कुछ ही दिनों में ठीक हो गये ।
#डॉ_राहुल_उपाध्याय
एम डी
एडवांस होम्योपैथीक क्लिनिक
सर्रोई भदोही

#डाक_से_दवा_भेजने_की_सुविधा_उपलब्ध_है
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