Ayurvedic Physician Dr sms Ahmed

Ayurvedic Physician Dr sms Ahmed DR SYED SHAHABUDDIN AHMAD
(MD) AYURVEDIC MEDICINE
general physician and HIJAMA THERAPIST 'Panchkerma THERAPIST . contacts for online proscription

बच्चेदानी में कैंसर होने पर नजर आते हैं ये 6 शुरुआती लक्षण, 90 फीसदी महिलाएं साधारण समझकर करती हैं इग्नोरUterine Cancer ...
09/06/2024

बच्चेदानी में कैंसर होने पर नजर आते हैं ये 6 शुरुआती लक्षण,

90 फीसदी महिलाएं साधारण समझकर करती हैं इग्नोर

Uterine Cancer Symptoms: बच्चेदानी में कैंसर होने पर शरीर में कुछ लक्षण नजर आते हैं। आइए, जानते हैं इसके बारे में विस्तार से –

गर्भाशय या बच्चेदानी महिलाओं की प्रजनन प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह वो स्थान है, जहां गर्भधारण के बाद भ्रूण का विकास होता है। ऐसे में, हर महिला के लिए बच्चेदानी का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। लेकिन गलत खानपान, खराब लाइफस्टाइल और तनाव के कारण आजकल महिलाओं में गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चेदानी में गांठ, सिस्ट, इन्फेक्शन जैसी समस्याएं होने पर गर्भधारण करने में परेशानी हो सकती है। आजकल महिलाओं में बच्चेदानी के कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में महिलाओं की सबसे ज्यादा मौत यूटरस कैंसर के कारण होती है।

बच्चेदानी के कैंसर को एंडोमेट्रियल कैंसर (Endometrial Cancer) व यूटेराइन कैंसर (Uterine Cancer) के नाम से भी जाना जाता है। यह तब होता है जब एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की अंदरूनी परत) की कोशिकाएं असामान्य रूप से विभाजित और बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं ट्यूमर का रूप ले लेती हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो बच्चेदानी में कैंसर होने पर शरीर में इसके कई शुरुआती लक्षण देखने को मिलते हैं, जिन्हें समय रहते पहचान लेने पर इलाज संभव हो सकता है। आज इस लेख में हम आपको बच्चेदानी में कैंसर के लक्षणों (Uterine Cancer Symptoms In Hindi) के बारे में बताने जा रहे हैं।

पेट के निचले हिस्से में दर्द

पेट के निचले हिस्से में दर्द और ऐंठन होना बच्चेदानी में कैंसर का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, महिलाओं को श्रोणि में ऐंठन का अनुभव भी हो सकता। अगर आपको बार-बार इस तरह की परेशानी महसूस हो रही है, तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाकर एक्सअपना चेकअप करवाना चाहिए।

ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होना

अगर आपको पीरियड्स के अलावा अन्य दिनों में ब्लीडिंग होती है या महीने में कई बार ब्लीडिंग या स्पॉटिंग होती है, तो इन लक्षणों को भूलकर भी नजरअंदाज न करें। ये बच्चेदानी में कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर आपको लंबे समय से इस तरह के लक्षण दिख रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करवाएं।

ज्यादा दिनों तक पीरियड रहना

अगर आपके पीरियड्स सामान्य से अधिक दिनों तक चलते हैं, तो यह बच्चेदानी में कैंसर होने का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, आपको पीरियड्स के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव की परेशानी भी हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

बार-बार पेशाब आना
बच्चेदानी में कैंसर होने पर आपको बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है। कुछ महिलाओं को पेशाब के दौरान दर्द और जलन जैसी समस्याओं का अनुभव भी हो सकता है। अगर आपको इस तरह के लक्षण दिख रहे हैं, तो आपको तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच करवानी चाहिए।

मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग या डिस्चार्ज होना
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में व्हाइट डिस्चार्ज या वेजाइनल ब्लीडिंग की समस्या होना भी बच्चेदानी के कैंसर का लक्षण हो सकता है। अगर आपको मेनोपॉज के बाद इस तरह के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर अपना चेकअप करवाएं ताकि आपका समय पर इलाज किया जा सके।

शारीरिक संबंध बनाते समय दर्द होना

बच्चेदानी में कैंसर होने पर महिला को शारीरिक संबंध बनाते समय बहुत ज्यादा दर्द जैसी परेशानी का अनुभव हो सकता है। अगर आपको अपने पार्टनर के साथ यौन संबंध बनाने के दौरान दर्द या असहजता महसूस हो, तो ऐसे में आपको अपने आयुर्वेदिक एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए।

घरेलू उपाय

अदरक

अदरक का नियमित मात्रा में सेवन करने से कई बीमारियों के इलाज में बेहद कारगर है। यह पेट के कैंसर के इलाज में काफी कारगर माना जाता है। इसके गुणों के कारण यह गर्भाशय और कई अन्य प्रकार के कैंसर की रोकथाम में भी कारगर माना जाता है।

हल्दी
पहले से ही कई भारतीय व्यंजनों में एक मुख्य मसाला, कच्चे रूप में एक जड़ी बूटी के रूप में हल्दी और पाउडर के रूप में एक मसाले के रूप में, दुनिया भर में नई चमत्कार जड़ी बूटी के रूप में जाना जाता है। भारत में सदियों से इसका उपयोग पारंपरिक औषधि के रूप में किया जाता रहा है। यह एक बहुत ही प्रभावी एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंट माना जाता है। इस प्रकार यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में बहुत प्रभावी है।

कैमेलिया साइनेंसिस प्लांट से ग्रीन टी
ग्रीन टी को कई प्रकार के कैंसर के इलाज में, वजन घटाने में सहायता करने और विषहरण की सुविधा के लिए प्रभावी माना जाता है। कैमेलिया साइनेंसिस संयंत्र से हरी चाय की नियमित खपत शरीर के भीतर कैंसर कोशिकाओं के विकास से लड़ने के लिए जानी जाती है। इस प्रकार यह गर्भाशय के कैंसर के उपचार में भी बहुत प्रभावी है।

अश्वगंधा
इस जड़ी बूटी का उपयोग न केवल आयुर्वेद में किया जाता है, बल्कि होम्योपैथी द्वारा अर्क के लिए एक पारंपरिक दवा के रूप में भी अपनाया गया है। अश्वगंधा एक एडाप्टोजेन है, जिसका अर्थ है कि यह शरीर की जरूरतों के अनुकूल हो सकता है। फिर आवश्यक क्षेत्रों को सहायता प्रदान करने के लिए परिवर्तन कर सकते हैं। यह कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में भी बहुत अच्छा है।

लहसुन
यह मसाला कई प्रकार के कैंसर के लिए अच्छा माना जाता है क्योंकि इसमें एलिसिन होता है। यह सूजन संबंधी बीमारियों के सबसे अच्छे उपचारकों में से एक माना जाता है। इसमें अन्य प्रकार के फाइटोकेमिकल्स भी होते हैं और इस प्रकार शरीर को विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करता है। यह कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में बहुत प्रभावी है और शरीर के भीतर कैंसर के विकास को रोक सकता है।

डॉक्टर शैयद शहाबुद्दीन अहमद
एम डी (आर्युवेदिक मेडिसीन)
आयुर्वेद एक्सपर्ट एवं सागर आर्युवेदिक हॉस्पिटल के संस्थापक
भागलपुर,बिहार
मोबाइल नंबर 8294779982
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Diabetes Reversal Expert

बांझपन महिलाओं में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. ऐसे में प्रजनन क्षमता की कमी होने के कारण कपल्स को कंसीव करने में दिक...
06/12/2022

बांझपन महिलाओं में एक गंभीर समस्या बनती जा रही है. ऐसे में प्रजनन क्षमता की कमी होने के कारण कपल्स को कंसीव करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. आर्युवेद के अनुसार,

आयुर्वेद की प्रणाली एक सेहतमंद जीवन का विज्ञान है जिसमे आपकी बुद्धि और शरीर को प्राचीन चिकित्सीय क्रियाओं के द्वारा पूर्ण पोषण दिया जाता है ताकि आप स्वस्थ रहें।

महिलाओं में बांझपन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे ओव्यूलेशन डिसऑर्डर, फैलोपियन ट्यूब में क्षति, एंडोमेट्रियोसिस, यूटेरस या सर्विक्स से जुड़ी समस्याएं आदि. एक्सपर्ट कहते हैं कि अगर लक्षणों का पता लगाकर इसका समय पर इलाज कर किया जाए तो बांझपन को ठीक किया जा सकता है. जानते हैं कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में जो बांझपन का संकेत दे सकते हैं.
एंडोमेट्रियोसिस- कुछ महिलाओं को पीरियड्स के दौरान सामान्य से कम दर्द होता है या बिल्कुल नहीं होता, जबकि बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं जिन्हें पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा दर्द और ऐंठन का सामना करना पड़ता है. इसके अलावा, उनके पीरियड्स की अवधि काफी दिनों तक चलती है. एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी समस्या है जिसमें यूटेरस के अंदर पाया जाने वाला एक ऊतक (टिश्यू) बढ़कर गर्भाशय के बाहर फैलने लगता है. यह ऊतक अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या यूटेरस के बाहरी हिस्सों में और दूसरे हिस्सों में फैल सकता है. एंडोमेट्रियोसिस होने पर पीरियड्स के दौरान तेज दर्द हो सकता है. एंडोमेट्रियोसिस के कुछ अन्य लक्षणों में अनियमित पीरियड्स और स्पॉटिंग, क्रोनिक पैल्विक दर्द (न केवल मासिक धर्म के दौरान), मल त्याग करने में दर्द, सेक्स के दौरान दर्द, पीठ दर्द, थकान, मतली आदि शामिल हैं.
मासिक धर्म चक्र में अनियमितता- एक अनियमित चक्र, जिसमें मिस्ड पीरियड्स शामिल हैं, बांझपन का कारण बन सकता है. अनियमित पीरियड्स की वजह से ओव्यूलेशन नियमित तौर पर नहीं हो पाता है. पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस), मोटापा, कम वजन और थायराइड की समस्याओं सहित कई फेक्टर्स के कारण ओव्यूलेशन की अनियमितताएं हो सकती हैं.
हार्मोनल समस्याएं- हार्मोन में उतार-चढ़ाव होने से शरीर में कई तरह के लक्षण दिखने लगते हैं. इनमें मुंहासे, हाथ पैरों का ठंडा पड़ना, सेक्स ड्राइव में कमी, यौन इच्छा में कमी, निप्पल डिस्चार्ज, चेहरे पर बालों का बढ़ना, सिर के बालों का पतला होना, वजन का बढ़ना आदि शामिल हैं. ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर की सलाह लें.
सेक्स के दौरान दर्द- डिस्पेर्यूनिया, या सेक्स के दौरान दर्द, एक ऐसी समस्या है जो महिला की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है.

आयुर्वेद की प्रणाली एक सेहतमंद जीवन का विज्ञान है जिसमे आपकी बुद्धि और शरीर को प्राचीन चिकित्सीय क्रियाओं के द्वारा पूर्ण पोषण दिया जाता है ताकि आप स्वस्थ रहें।
Dr Syed Shahabuddin Ahmed MD (ayurvedic medicine) Bhagalpur Bihar

डिस्पेप्सिया (अपच): प्रमुख जानकारी और निदानडिस्पेप्सिया (अपच) क्या है?डिस्पेप्सिया आपकी आंत के ऊपरी हिस्से में उत्पन्न ह...
07/09/2022

डिस्पेप्सिया (अपच): प्रमुख जानकारी और निदान

डिस्पेप्सिया (अपच) क्या है?
डिस्पेप्सिया आपकी आंत के ऊपरी हिस्से में उत्पन्न हुई किसी समस्या के कारण आने वाली कई समस्याओं के लिए प्रयुक्त होने वाला एक शब्द है। इसे अपच या पेट में गड़बड़ के नाम से भी पहचाना जाता है।
यह पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द् या जलन का एहसास है। पेट में उपस्थित अम्ल जब पाचन तंत्र की संवेदनशील, सुरक्षाकारक परतों के संपर्क में आता है, तो इसका परिणाम इन परतों की उत्तेजना और सूजन (पीड़ा और फूलना) के रूप से सामने आता है, जिसके फलस्वरूप डिस्पेप्सिया उत्पन्न होता है।
रोग अवधि

अपच के प्रकरण अक्सर बिना चिकित्सीय सहायता के कुछ घंटों में स्वयं ही दूर हो जाते हैं। ठीक होने में लगने वाला समय स्थिति की गंभीरता और उपचार की सफलता पर निर्भर करता है।
जाँच और परीक्षण
रोग का निर्धारण शारीरिक परीक्षण द्वारा होता है. अन्य जाँचों में हैं :
श्वास या रक्त परीक्षण।
गेस्ट्रोस्कोपी
बेरियम स्वालो और मील एक्स-रे
डॉक्टर द्वारा आम सवालों के जवाब
1. डिस्पेप्सिया (अपच) क्या है?
डिस्पेप्सिया आपकी आंत के ऊपरी हिस्से में उत्पन्न हुई किसी समस्या के कारण आने वाली कई समस्याओं के लिए प्रयुक्त होने वाला एक शब्द है। इसे अपच या पेट में गड़बड़ के नाम से भी पहचाना जाता है। यह पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द् या जलन का एहसास है। पेट में उपस्थित अम्ल जब पाचन तंत्र की संवेदनशील, सुरक्षाकारक परतों के संपर्क में आता है, तो इसका परिणाम इन परतों की उत्तेजना और सूजन (पीड़ा और फूलना) के रूप से सामने आता है जिसके फलस्वरूप डिस्पेप्सिया उत्पन्न होता है।
2. इसके लक्षण क्या होते हैं?
अपच के लक्षणों में पेट में या पेट के ऊपरी हिस्से में जलन, सीने में जलन (पेट में या आहारनली में जलन का एहसास), पेटदर्द, पेट फूलना (भरे हुए होने का एहसास), डकार और गैस, मतली और उल्टी, अम्लीय स्वाद, पेट में “गुड़गुड़” या अतिसार आदि हैं।

3. डिस्पेप्सिया (अपच) कैसे होता है?
पेट में उपस्थित अम्ल जब पाचन तंत्र की संवेदनशील, सुरक्षाकारक परतों के संपर्क में आता है, तो इसका परिणाम इन परतों की उत्तेजना और सूजन (पीड़ा और फूलना) के रूप से सामने आता है जिसके फलस्वरूप डिस्पेप्सिया उत्पन्न होता है।

4. ठीक होने में कितना समय लगता है?
अपच के प्रकरण अक्सर बिना चिकित्सीय सहायता के कुछ घंटों में स्वयं ही दूर हो जाते हैं। ठीक होने में लगने वाला समय स्थिति की गंभीरता और उपचार की सफलता पर निर्भर करता है।

5. व्यक्ति को डॉक्टर से संपर्क कब करना चाहिए?
डॉक्टर से संपर्क करें यदि आपके पेट के ऊपरी हिस्से या छाती में दर्द, भरापन, या असहजता (जलन) होना, भूख में कमी, अस्वस्थता का अनुभव, डकार, पेट में गुड़गुड़ या गुदाद्वार से हवा निकलना या पेट दर्द आदि लक्षणों का अनुभव करते हैं। मुँह का स्वाद ख़राब होना, जीभ पर परत होना और श्वास दुर्गन्धयुक्त होना आदि को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

नींबू और अदरक दो चम्मच नींबू के रस में अदरक का रस मिलाएं और इनसे गर्म पानी के साथ पी लें। ...
धनिया पाउडर के साथ छाछ छाछ पेट को ठंडा रखता है और खाना पचाने में मदद करता है। ...
अजवायन या जीरा एक चम्मच अजवायन या जीरे को काला नमक के साथ मिलाकर गर्म पानी के साथ पिएं। ...
ग्रीन टी खाने के आधे घंटे बाद ग्रीन टी लें। ...
अदरक ...
बेकिंग सोडा
Dr Syed shahabuddin Ahmed.
(MD) ayurvedic medicine
Bhagalpur bihar

इसे अरबी में हिजामा, चीनी और अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण नाम से जाना जाता है। इसस...
21/08/2021

इसे अरबी में हिजामा, चीनी और अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण नाम से जाना जाता है। इससे जुड़े चिकित्सक कम होने के कारण यह ज्यादा प्रचलित नहीं है। जानें इसके बारे में-

खून से विषैले तत्त्वों की सफाई कर कई रोगों से मुक्त करती है 'हिजामा थैरेपी'

'हिजामा' थैरेपी हजारों वर्ष पुरानी यूनानी चिकित्सा पद्धति है। दुनिया के हर हिस्से में इस पद्धति का प्रयोग किया जाता है। इसे अरबी में हिजामा, चीनी और अंग्रेजी में कपिंग, मिस्र में इलाज बिल कर्न व भारत में रक्त मोक्षण नाम से जाना जाता है। इससे जुड़े चिकित्सक कम होने के कारण यह ज्यादा प्रचलित नहीं है। जानें इसके बारे में-

कैसे काम करती है थैरेपी ?
शरीर को निरोगी बनाए रखने का काम रक्त पर निर्भर है। रक्तसंचार शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ रखता है। यह थैरेपी रक्तसंचार के अवरोध को खत्म कर अंगों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त पहुंचाती है। इस चिकित्सा के तहत रक्त में मौजूद विषैले पदार्थ, मृत कोशिकाओंं व अन्य दूषित तत्त्वों को बाहर निकालकर रोगों से बचाव किया जाता है। इससे नए खून का निर्माण होता है और कई बीमारियां दूर हो जाती हैं। साथ ही मांसपेशियों व ऊत्तकों पर दबाव पड़ने से इनमें लचीलापन आता है और इसके कार्य में सुधार होता है। थैरेपी के दौरान सावधानी की जरूरत होती है इसलिए इसे विशेषज्ञ से ही करवाएं ताकि किसी प्रकार की परेशानी न हो।

हिजामा क्या है ?
'हिजामा' एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है - 'खींचकर बाहर निकालना' यानी शरीर से दूषित रक्त को बाहर निकालना। कपिंग (हिजामा) ड्राई और वेट दो तरह की होती है।

क्या यह पद्धति मान्यता प्राप्त है ?
हां, यह आयुष मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है। बीयूएमएस और बीएएमएस डिग्री प्राप्त चिकित्सक इसे करने के लिए पात्र हैं।

क्या यह जोखिम भरा इलाज है ?
नहीं, यदि एक कुशल चिकित्सक करे तो इसमें कोई जोखिम नहीं है। यह लगभग बिना दर्द वाली पद्धति है जिसमें इंजेक्शन से भी कम दर्द महसूस होता है।

क्या इससे संक्रमण हो सकता है ?
नहीं, इसमें प्रयोग होने वाले कप मेडिकेटेड व डिस्पोजेबल होते हैं। अत: हर रोगी में अलग व नए कप प्रयुक्त होते हैं, इससे इंफेक्शन नहीं होता। बचाव के लिए हिजामा के बाद त्वचा पर एंटीसेप्टिक क्रीम या लोशन भी लगाया जाता है।

किन रोगों में उपयोगी है ?
सभी रोगों में यह फायदेमंद है। खासतौर पर हर प्रकार के दर्द में। सियाटिका, स्लिप डिस्क, सिरदर्द, चर्मरोग, स्पॉन्डिलाइटिस, किडनी, हृदय रोग, लकवा, मिर्गी, महिलाओं में इंफर्र्टिलिटी, माहवारी की समस्या, गर्भाशय व हार्मोनल विकार, अस्थमा, साइनुसाइटिस, मधुमेह, मोटापा, थायरॉइड की समस्या, पेट के रोग, चेहरे पर दाने व दाग-धब्बे और गंजेपन में यह थैरेपी कारगर है।
DR SYED SHAHABUDDIN AHMAD.
MD ( AYURVEDIC MEDICINE)

Gastritis treated by HIJAMA THERAPY आप पेट से परेशान हैं या फिर आपका पेट आपसे?---------------------------अधिकांश पेट के ...
06/06/2021

Gastritis treated by HIJAMA THERAPY
आप पेट से परेशान हैं या फिर आपका पेट आपसे?

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अधिकांश पेट के रोगियों का चेकअप करने के बाद मैं उनसे कहता हूँ कि आपको पेट ने नहीं पेट को आपने परेशान कर रखा है। हमेशा ही वे मुझसे कहते हैं कि अरे डॉक्टर साहब क्या बताऊँ बहुत परेशान हूँ इस पेट से, दर्द होता है, पेट फूलता है, कब्ज़, गैस, एसिडिटी...से लेकर बवासीर और सीने में दर्द तक की शिकायतों का पिटारा खुल जाता है।

फिर मैं सवाल करता हूँ-

खाना कितनी कितनी देर में लेते हो?
जवाब आता है कभी भी।

फिर पूछता हूँ कि रात का खाना कब खा लेते हो और उसके कितनी देर बाद सो जाते हो?
जवाब मिलता है 10-11 या 12 बजे और फिर टीवी देखते हुए सो जाते हैं।

चाय कितनी पीते हैं आप?
अधिकांश का जवाब मिलता है- 3 से लेकर 10-12 तक।

गुटखा, तम्बाखू, सिगरेट कुछ पीते हो?
अधिकांश पुरुषों का जवाब हां में होता है।

पानी गर्म पीते हो या ठंडा?
ठंडा, गर्म पानी पीने में आता है क्या, प्यास ही नहीं बुझेगी उससे तो।

सलाद या फ्रूट खाते हो?
कभी कभी।

कितने किलोमीटर चलते हैं आप?
अधिकांश बस हंस देते हैं और कुछ कहते हैं सीढियां बहुत है हमारे घर मे इसलिए उसी पर 5 से 6 चक्कर लग जाते हैं।

मेरे यह सवाल उसे खुद ब खुद समझा देते हैं कि पेट पर वह कितना अत्याचार कर रहा है और दोष भी उसे ही दे रहा है। फिर भी मैं उन्हें बता देता हूँ कि अब आप मुझे बताइये दोष किसका है... आपका या आपके मासूम पेट का?

आप भी अगर पेट की समस्या से ग्रस्त हैं तो एक बार जरूर सोचें कि पेट ने आपको परेशान किया है या आपने उस बेचारे को...अगर आप तय समय पर भोजन करें, 3 से 4 किलोमीटर रोज़ाना चले, गर्म पानी पिएं (ज्यादा नहीं तो कम से कम 3 से 4 ग्लास ही सही), खाना सोने के 4 घंटे पहले खा लें, फ्रूट्स और सलाद रोज़ाना लें और फिर अगर पेट आपको परेशान करता तो बात मानी जाती कि- "हां पेट ने आपको परेशान किया है।" लेकिन सारे सुबूत तो आपके ख़िलाफ़ हैं, इसलिए दोषी आप ही हैं, पेट बेचारा बेकसूर है। सज़ा के तौर पर आपको अब जीवन भर मेरे बताए काम (ऊपर सवालों वाले) करना होंगें।

DR SYED SHAHABUDDIN AHMAD.
MD ( AYURVEDIC MEDICINE)
पेट की तरफ से जिरह करने वाला वकील

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06/06/2021

े_अंदर_ब्लेक_फंगस_से_सावधान........?
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बाजार से आप प्याज खरीद कर लाते हैं.....कभी आपने देखा होगा उसके ऊपर काला-काला कोई पदार्थ लगा रहता है........
असल में यही ब्लैक फंगस (काला फफूंद) होता है।
अआप अपने घरों के फ्रिज के दरवाजे खोलिए उसमें एक रबर लगी मिलेगी।
उस रबर को साफ रखें, एवं फ्रिजर को साफ रखें, अगर काला काला फंगस दिख रहा हो तो तत्काल उसकी अच्छे ढंग से सफाई कर दें,और बराबर उसकी सफाई पर ध्यान दें।

उस रबर पर वो जो काला काला है, वही है #म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस

अगर आपने ध्यान न दिया तो ये फंगस आपके फ्रिज के अंदर रखे खाद्य पदार्थों के माध्यम से बेहद आसानी से आपके अंदर प्रवेश कर सकता है।

★आटा गूंथ कर फ्रिज में ना रखें।
★ कटे फल फ्रिज में ना रखें।
★प्याज ताजा काटकर खाए, कटा प्याज देर तक ना रखें।
★फ्रिज में रखी हुई ब्रेड कत्तई यूज न करें।
★ए.सी. इस्तेमाल कम से कम करें।

सब कुछ ताजा और तुंरन्त इस्तेमाल करें।
और जिस भी खाद्य पदार्थ पर आपको काला काला फंगस जैसा कुछ भी दिखे उसको तुरन्त सावधानी से नष्ट कर दें।

अपने कूलर, एसी और आरओ मशीन की टोटी भी चेक करते रहिएगा।

बेहद चौकन्ना रहिए, चीजों के बारे में पढ़ते-लिखते रहिए और अपडेट रहिए, चित्त बिल्कुल शांत रखिए, शुद्ध खान पान से इम्युनिटी मजबूत रखिए, और व्यायाम करते रहें और हमेशा सकारात्मक रहें।

सभी अपना ध्यान रखें तो......मजाल है जो कोई फंगस आपको छू भी ले❗
DR. SYED SHAHABUDDIN AHMAD
MD. ( AYURVEDIC MEDICINE)

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