ASTRO SIDHA

ASTRO SIDHA श्री सिद्धार्थ सागर बगर्त्ती ज्योतिषी और वास्तु विशेषज्ञ 10 वर्षों के अनुभवी

ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी ग्रह दोष से ग्रस्त रहता है, परन्तु कई बार उसे पता नहीं चलता कि किस वजह से...
17/06/2026

ज्योतिष के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी ग्रह दोष से ग्रस्त रहता है, परन्तु कई बार उसे पता नहीं चलता कि किस वजह से उसकी जिंदगी में परेशानियां थमने का नाम नहीं ले रही और किस वजह से जीवन में इतनी उथल- पुथल हो रही है. ऐसी स्थिति में ग्रह दोष के उपाय करना बहुत जरुरी होता है।

1. सूर्य दोष के लक्षण:

असाध्य रोगों के कारण परेशानी जैसे कि सिरदर्द, बुखार, नेत्र संबंधी कष्ट आदि हो सकते हैं।
सरकार के कर विभाग से परेशानी, नौकरी में बाधा आ सकती है।

सूर्य दोष के उपाय:

भगवान विष्णु की आराधना करनी चाहिए।
ऊं नमो भगवते नारायणाय मंत्र का 1 माला लाल चंदन की माला से जाप करना चाहिए।
गुड़ खाकर व पानी पीकर किसी विशेष कार्य काआरंभ करना चाहिए।
बहते जल में 250 ग्राम गुड़ प्रवाहित करना चाहिए।
सवा पांच रत्ती का माणिक्य तांबे की अंगूठी में जड़वा कर धारण कर रविवार के दिन सूर्योंदय के समय दाएं हाथ की मध्यमा अंगूली में धारण करनी चाहिए।

2. चंद्रमा दोष के लक्षण:

जुखाम व पेट की बीमारियों की समस्याएं हो सकती हैं।
घर में असमय पशुओं की मत्यु की आशंका होती है।
अकारण शत्रुओं का बढ़ना और धन का हानि होना।

चंद्रमा दोष के उपाय:

भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
ऊं नम शिवाय मंत्र का रूद्राक्ष की माला से 11 माला जाप करना चाहिए।
सोमवार के दिन सफेद कपड़े में मिश्री बांधकर जल में प्रवाहित करना चाहिए।
चांदी की अंगूठी में चार रत्ती का मोती जड़वा कर सोमवार के दिन अनामिका ऊँगली में धारण करें।
कांच के गिलास में दूध व पानी पीने से परेहज करना चाहिए।

3. मंगल दोष के लक्षण:

घर में चोरी होने का डर और घर-परिवार में लड़ाई-झगड़े की आशंका रहती है।
भाई के साथ संबंधों में अनबन रहती है।
दांपत्य जीवन में तनाव और अकाल मृत्यु की आशंका रहती है।

मंगल दोष के उपाय:

भगवान हनुमान की आराधना करनी चाहिए।
ऊं हं हनुमते रूद्रात्मकाय हुं फट कपिभ्यो नम: का 1 माला जाप करना चाहिए।
प्रति दिन हनुमान चालीसा या बजरंगबाण का पाठ करना चाहिए।
त्रिधातु की अंगुठी बाएं हाथ की अनामिका ऊँगली में धारण करनी चाहिए।
400 ग्राम चावल दूध से धोकर 14 दिन तक पवित्र जल में प्रवाहित करना चाहिए।
घर में नीम का पौधा लगाना चाहिए।

4. बुध दोष के लक्षण:

व्यक्ति के स्वभाव में चिड़चिड़ापन रहता है।
जुए-सट्टे के कारण धन की बड़ी हानि होती है।
दांत से जुड़े रोगों के कारण परेशानी आ सकती है।
सिर दर्द के कारण अधिक तनाव की स्थिति बन सकती है।

बुध दोष के उपाय:
मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए।
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे मंत्र का 5 माला जाप करना चाहिए।
देवी के सामने अखंड घी का दीया जलाना चाहिए।
घर की पूर्व दिशा में लाल झंडा लगाना चाहिए।
सोने के आभूषण धारण करने चाहिए और हरे रंग से परहेज करना चाहिए।
चौड़े पत्ते वाले पौधे घर में लगायें, तथा मुख्य द्वार पर पंचपल्लव का तोरण लगायें।
100 ग्रíम चावल व चने की दाल बहते जल में प्रवाहित करें।

5. गुरू दोष के लक्षण:

सोने की हानि और चोरी की आशंका हो सकती है।
उच्च शिक्षा की राह में बाधाएं आ सकती हैं।
झूठे आरोप के कारण मान-सम्मान में कमी आ सकती है।

गुरु दोष के उपाय:

परमपिता ब्रह्मा की आराधना करनी चाहिए।
बहते जल में बादाम, तेल, नारियल प्रवाहित करना चाहिए।
माथे पर केसर का तिलक लगाना चाहिए।
सोने की अंगूठी में सवा पांच रत्ती का पुखराज जड़वा कर गुरूवार को दाएं हाथ की तर्जनी अंगुली में धारण करना चाहिए।
पीपल के पेड़ पर 7 बार पीला धागा लपेटकर जल अर्पित करना चाहिए।

6. शुक्र दोष के लक्षण:

बिना किसी बीमारी के त्वचा संबंधी रोगों से परेशानी आ सकती है।
राजनीति के क्षेत्र में हानि और प्रेम व दापंत्य संबंधों में अलगाव हो सकता है।
जीवनसाथी के स्वास्थ्य को लेकर तनाव हो सकता है।

शुक्र दोष के उपाय:

मां लक्ष्मी की आराधना करनी चाहिए।
ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसिद प्रसिद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम इस मन्त्र का एक माला जाप प्रति रात को करना चाहिए।
मंदिर में आरती पूजा के लिए गाय का घी दान करना चाहिए।
2 किलो आलू में हल्दी या केसर लगाकर गाय को खिलायें।
चांदी या मिटटी के बर्तन में शहद भरकर घर की छत पर दबा दें।
शुक्रवार के दिन मंदिर में कांसे के बर्तन का दान करने चाहिए।

7. शनि दोष के लक्षण:

पैतृक संपत्ति की हानि व हमेशा किसी न किसी बीमारी की समस्या हो सकती है।
बनते हुए काम का बिगड़ जाना।

शनि दोष के उपाय:

भगवान भैरव की आराधना करनी चाहिए।
ऊं प्रां प्रीं प्रौं शं शनिश्चराय नमः मंत्र का 1 माला जाप करना चाहिए।
शनिदेव का 1 किलो सरसों के तेल से अभिषेक करना चाहिए।
43 दिन तक लगातार शनि मंदिर में जाकर नीले पुष्प अर्पित करने चाहिए।
शनिवार के दिन 800 ग्राम दूध, उड़द जल में प्रवाहित करने चाहिए।

8. राहु दोष के लक्षण:

मोटापे की परेशानी आ सकती है।
अचानक दुर्घटना, लड़ाई-झगड़े की आशंका हो सकती है।
हर तरह के व्यापार में घाटा आ सकता है।

राहु दोष के उपाय:

मां सरस्वती की आराधना करनी चाहिए।
ऊं ऐं सरस्वत्यै नमः मंत्र का 1 माला जाप करना चाहिए।
तांबे के बर्तन में गुड़, गेहूं भरकर बहते जल में प्रवाहित करने चाहिए।
मां सरस्वती के चरणों में लगातार 6 दिन तक नीले पुष्प की माला अर्पित करनी चाहिए।

9. बुरी संगत के कारण धन का हानि हो सकती है।
जोड़ों के दर्द से परेशानी हो सकती है।
संतान का भाग्योदय न होना और स्वास्थ्य के कारण तनाव रह सकता है।
केतु दोष के उपाय:
भगवान गणेश की आराधना करनी चाहिए।
ॐ गं गणपतये नमः मंत्र का 1 माला जाप करना चाहिए।
भगवान गणेश अथर्व शीर्ष का पाठ करना चाहिए।
घर के मुख्य द्वार पर दोनों तरफ तांबे की कील लगानी चाहिए।
पीले कपड़े में सोना, गेहूं बांधकर कुल पुरोहित को दान करना चाहिए।
बाएं हाथ की ऊँगली में सोने की अंगूठी पहनने से लाभ मिलता है।
43 दिन तक मंदिर में लगातार केला दान करने चाहिए।
काले व सफेद तिल बहते जल में प्रवाहित करने चाहिए ।

श्री सिद्धार्थ सागर वगर्त्ति
वैदिक, के.पी ज्योतिष ओर औरा बास्तुवीद
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17/06/2026
शादी में आ रही है देरी या बार-बार हो रही है रुकावट, कुंडली के ये दोष हो सकते हैं आपकी परेशानी की वजह--------------------...
17/06/2026

शादी में आ रही है देरी या बार-बार हो रही है रुकावट, कुंडली के ये दोष हो सकते हैं आपकी परेशानी की वजह
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विवाह का भाव : वैदिक ज्‍योतिष के अनुसार कुंडली का सातवां भाव विवाह का होता है। लेकिन दूसरे और ग्‍यारहवें भाव को भी शादी के लिए देखा जाता है। दूसरा भाव परिवार और परिवार में आने वाने अन्‍य सदस्‍य को दर्शाता है। ग्‍यारहवां भाव दोस्‍ती का प्रतीक है। इस भाव से भी आपके जीवनसाथी के बारे में जानकारी मिल सकती है क्‍योंकि जीवनसाथी भी एक मित्र की तरह ही होता है। वहीं ग्‍यारहवां भाव मनोकामनाएं पूर्ण करने का होता है। यदि आपको प्रेम विवाह की संभावनाओं के बारे में जानना है तो कुंडली के पांचवे भाव को देखें।

शादी में आ रही रुकावट के लिए जिम्‍मेदार ग्रह
कुंडली में शादी में आ रही देरी का कारण ग्रहों की विभिन्‍न स्थितियां और युति हो सकती हैं। यहां हम आपको कुंडली में ग्रहों की कुछ ऐसी स्थितियों के बारे में बता रहे हैं जो विवाह में देरी का कारण बन सकते हैं।

सूर्य और राहू की युति से शादी में देरी हो सकती है, खासतौर पर यदि इनका संबंध विवाह के भाव से हो तो।
मंगल और राहू की युति सप्‍तम भाव में हो या इनकी इस भाव पर दृष्टि हो।

यदि सप्‍तम भाव का स्‍वामी आठवें घर में हो और आठवें घर का स्‍वामी सप्‍तम भाव में हो तो शादी में देरी हो सकती है।
पुरुष की कुंडली में शनि और चंद्रमा की युति होने पर कुंडली में देरी से विवाह होने के लिए कई रुकावटें या समस्‍याएं जिम्‍मेदार हो सकती हैं।

कुंडली में शनि की कुदृष्टि या लग्‍न स्‍वामी, सप्‍तम भाव और सप्‍तम भाव के स्‍वामी के साथ या इनमें से किसी भी एक साथ युति होने पर शादी में देरी आती है।

कुंडली में मंगल दोष भी विवाह में देरी का कारण बनता है। यह दोष मंगल के पहले, चौथे, सप्‍तम, अष्‍टम या बारहवें घर में होने पर बनता है।

विवाह में आ रही देरी को दूर करने के उपाय-
अगर आप शादी में आ रही देरी का निवारण चाहते हैं तो सबसे पहले तो यह जानें कि आपको किस तरह का जीवनसाथी चाहिए। इसके बाद आप किसी अनुभवी ज्‍योतिषी (Best Astrologer for marriage)
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वैदिक, के.पी ज्योतिष ओर औरा बास्तुवीद
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से सलाह लें। इसके अलावा निम्‍न ज्‍योतिषीय उपायों की मदद से भी इस समस्‍या को दूर किया जा सकता है।
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अगर शनि दोष की वजह से शादी नहीं हो पा रही है तो आप किसी गरीब लड़की की मदद करें। हिंदू धर्म में दान को बहुत पवित्र माना जाता है।
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जल्‍दी विवाह की कामना रखने वालों को पीली चीजों जैसे कि हल्‍दी, चना दाल का सेवन एवं दान अधिक करना चाहिए। अपने नहाने के पानी में एक चुटकी हल्‍दी डालकर नहाएं। नहाने के बाद हल्‍दी और केसर का तिलक लगाएं।
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अगर कन्‍या के विवाह में देरी हो रही है और उसकी कुंडली में राहू दोष है तो उस लड़की को मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए। इससे वर की तलाश जल्‍दी खत्‍म होती है।
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16 सोमवार के व्रत रखने से भी जल्‍दी विवाह होने के रास्‍ते खुलते हैं। आप सोमवार की सुबह शिवलिंग का अभिषेक करें और मां पार्वती एवं भोलेनाथ से जल्‍दी विवाह की कामना करें।
क्‍या करें ।
अगर आप अपनी कुंडली में विवाह में आ रही देरी का कारण और समाधान जानना चाहते हैं तो ASTRO SIIDHA के अनुभवी ज्‍योतिषियों (Marriage Expert Astrologer) से बात कर सकते हैं।
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17/06/2026

पाटनर अव एक दुसरे से प्यार नही करते

कारण होसका हे -
दक्षिण पश्चिम ने हरे पोधे

उपचार-
पोधे को हटाकर जोन को मजवुत करे, वहां दोनो की तसवीर लगाये

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पुखराज रत्न की विशेषताएं | पुखराज धारण करने से पूर्व ये जानकारीब्रहस्पति के प्रसिद्द रत्न पुखराज को जनमानस का रत्न भी कह...
14/06/2026

पुखराज रत्न की विशेषताएं | पुखराज धारण करने से पूर्व ये जानकारी
ब्रहस्पति के प्रसिद्द रत्न पुखराज को जनमानस का रत्न भी कहा गया है | ब्रहस्पति चूँकि आकाश मंडल का विशालतम गृह है | अतः इसे ग्रहों के गुरु की पदवी प्राप्त है | इसलिए ही ब्रहस्पति का एक प्रसिद्द नाम गुरु भी है | प्रायः आम जन में इसे गुरु के नाम से पुकारा जाता है | यह बौद्धिक गृह है | मानसिक शक्ति, बल-बुद्धि, विवेक, वैवाहिक जीवन, धन-वैभव, राजयोग और पुत्र संतान का यह प्रधान कारक है | इसलिए इन गुणों के विकास के लिए भी पुखराज/(Pukhraj Ratan ke Fayde in Hindi) को धारण किया जाता है |

पुखराज बहुत से हल्के रंगों में प्राप्त होता है | लेकिन पीले रंग का होने से ब्रहस्पति प्रधान रत्न की श्रेणी में आता है | पुखराज को बहुत ही चमत्कारी पत्थर माना जाता है | इसे पीतमणि भी कहा गया है | यह हीरे की तुलना में कम कठोर होता है | इसे पत्थर में म्रदु श्रेणी का रत्न कहा गया है | इसको तराशना हीरे और नीलम की बनिस्बत सरल है | ज्यादातर पुखराज अंडाकार या समचौरस रूप में तराशे गये होते है |

Pukhraj Ratan ke Fayde in Hindi
यद्यपि रत्नों की श्रेणी में तो पुखराज का स्थान हीरे और माणिक्य के उपरांत है | तथापि अपनी गुणवत्ता, सौम्यता और अपनी अलौकिक शक्ति के कारण पुखराज जनमानस में अधिक प्रचलित है | इसके पीछे नीलम जैसा आतंक नहीं जुड़ा है | बल्कि मोती जैसी मृदुता और हीरे जैसी स्वच्छता इसे धारणीय या संग्रहनीय बनाती है | पुखराज के सबंध में यह मान्यता है कि इसे कोई भी पहन सकता है | तथापि हम इस तथ्य का समर्थन नहीं करते कि पुखराज को कोई भी व्यक्ति बिना जन्मकुंडली का परिक्षण किये धारण कर सकता है | क्योंकि ब्रहस्पति देव गुरु होने के बावजूद कुछ दोषों से दूषित होता ही है | जैसे ब्रहस्पति यदि मारकेश है तो वह अपनी दशा-अंतर्दशा में शारीरिक कष्ट देता है | इसलिए यह जरुरी है कि पुखराज को भी दुसरे रत्नों की भांति ही जन्मांग चक्र के परिक्षण के उपरांत ही धारण करना बेहतर है |

चपटा, समचौरस और पीली आभायुक्त पुखराज श्रेष्ठ कहा गया है | विभिन्न स्थानों की उपलब्धता के अनुसार कई दुसरे हल्के रंगों में भी प्राप्त होता है | विशेष रूप से गुलाबी, नीला, सफ़ेद और लाल रंगत के युक्त पुखराज भी प्राप्त होते है | यद्यपि पीला रंग ही अपनी पूर्ण गहराई से प्राप्त होता है, लेकिन शेष सभी रंगों में इन रंगों की आभा रहती है | और ये रंग बहुत हल्के दिखाई देते है | हालाँकि इन सभी रंगों के पत्थर भी पुखराज ही होंगे, तथापि पीले रंग के पुखराज को ही ब्रहस्पति की अनुकूलता के लिए धारण किया जाता है | शेष सभी सौंदर्य-वृद्धि और आभूषणों में प्रयुक्त होते है |

पुखराज पूर्णतः पारदर्शी रत्न है | छूने पर बहुत ही चिकना प्रतीत होता है | ऊँचे दर्जे का पुखराज हमेशा काँच की तरह चमकीला और स्वर्ण आभायुक्त दिखाई देता है | हथेली पर रखने पर यह अन्य सभी रत्नों की तुलना में भारीपन का अहसास देता है | इसके अंदर बहुत ही सूक्ष्म जाला होता है | जो साधारण आँखों से प्रायः दिखाई नहीं देता है |
पुखराज धारण करने की विधि :-
पुखराज को स्वर्ण की अँगूठी या चांदी की अँगूठी में जड़वाकर शुक्ल पक्ष के ब्रहस्पति वार को सुबह-सुबह इसकी पूजा आदि करने के उपरांत धारण करना चाहिए | पुखराज की पूजा इस प्रकार से करें :- ब्रहस्पति वार को सुबह-सुबह स्नान आदि से निवृत होकर पूजा स्थल पर बैठ जाये अब पहले पुखराज को दूध से स्नान कराये, फिर शहद से स्नान कराये और अंत में गंगाजल से स्नान कराये | अब इसे पूजा स्थल पर रख दे और दीपक प्रज्वल्लित कर इस मंत्र के यथासंभव जप करें : ॐ ब्रह्म ब्रहास्पतिये नमः | अब पुखराज पर कुमकुम से तिलक करें व अक्षत अर्पित करें अंत में दीपक के ऊपर से पुखराज को 21 बार वार कर तर्जनी ऊँगली में धारण करें |

Pukhraj Ratan ke Fayde in Hindi :
पुखराज धारण करने के फायदे :-
पुखराज धारण करने से जीवन में हर तरफ उन्नति, सौभाग्य और भाग्य उदय होता है | हर तरफ से सुख प्राप्त होता है |
पुखराज पहनने से पुत्र की प्राप्ति होती है | जिन लोगों के विवाह में विलंभ हो रहा हो उनके लिए भी पुखराज विवाह के शुभ संकेत लेकर आता है |
शारीरिक कष्टों में भी पुखराज पहनना शुभ माना जाता है जैसे : सीने में जलन, श्वास की बीमारी व गले के रोग में पुखराज लाभ प्रदान करता है | इनके अतिरिक्त अल्सर, गठिया, टी.बी., नपुंसकता जैसे रोगों में भी पुखराज धारण करने से आराम मिलता है |
इस रत्न को धारण करने से शिक्षा क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है |
मान-सम्मान और यश की प्राप्ति के लिए भी पुखराज धारण किया जा सकता है |
यदि आप अध्यात्म की ओर अग्रसर होना चाहते है तो पुखराज/(Pukhraj Ratan ke Fayde in Hindi) आपके लिए सबसे उपयुक्त रत्न है |

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12/06/2026

लग्न-लग्नेश राजयोग: कुंडली का मुकुट-मणि

शास्त्रोक्त प्रमाण
लग्नेशे बलसंयुक्ते केन्द्रकोणगते शुभे।
कारकैः सहिते वापि राजयोग उदाहृतः॥
बृहत्पाराशर होरा शास्त्र 36/8

लग्नेशो यदि केन्द्रस्थः स्वोच्चमित्रस्वराशिगः।
शुभग्रहयुतो वापि राजा भवति निश्चितम्॥
फलदीपिका 6/4

लग्नेश बलवान होकर केन्द्र भाव 1,4,7,10 या त्रिकोण भाव 1,5,9 में बैठे और शुभ ग्रह से युति या दृष्ट हो तो राजयोग बनता है। यदि लग्नेश केन्द्र में अपनी उच्च राशि, मित्र राशि या स्वराशि में हो और शुभ ग्रह के साथ हो तो जातक निश्चित ही राजा के समान जीवन जीता है।

लग्न का मतलब है तुम स्वयं। तुम्हारी देह, तुम्हारा चेहरा, तुम्हारी आत्मा, तुम्हारे भाग्य की बुनियाद।
लग्नेश का मतलब है लग्न राशि का स्वामी। ये तुम्हारा निजी बॉडीगार्ड है, तुम्हारा सारथी है।
जब बॉडीगार्ड खुद पहलवान हो और वीआईपी क्षेत्र यानी केन्द्र-त्रिकोण भाव 1,4,7,10,5,9 में जाकर बैठ जाए तो राजयोग बनता है। सीधा उदाहरण लो: हाथी को लग्नेश मानो और मुकुट को केन्द्र-त्रिकोण मानो। हाथी के सिर पर मुकुट रख दिया तो वो साधारण हाथी नहीं रहा, राजा का गजराज बन गया।

आत्मबल और स्वाभिमान
तुम स्वयं में राजा होते हो। किसी बैसाखी की जरूरत नहीं पड़ती। अकेले चलने का माद्दा होता है और अकेला ही सौ पर भारी पड़ता है।

स्वास्थ्य और दीर्घायु
लग्नेश बली हो तो शरीर वज्र के समान होता है। बड़ी बीमारी पास नहीं आती। आयु पूरी 100 वर्ष की संभावना बनती है क्योंकि लग्न ही आयु का घर है।

निर्णय क्षमता और प्रभाव
जो ठान लेते हो, वो करके दिखाते हो। तुम्हारी बात में वजन होता है। अधीनस्थ, मंत्री, संतरी सब तुम्हारी हाँ में हाँ मिलाते हैं। लीडरशिप नेचुरल आती है।

सभी दोषों का काट
इसे कुंडली के योगों का राजा कहा गया है। पत्रिका में सौ दोष भी हों, पर लग्नेश बली है तो सब दोष राख हो जाते हैं। लग्नेश को सूर्य समझो और बाकी कमजोर ग्रहों को जुगनू। सूर्य निकला तो जुगनू की चमक किसे दिखती है।

जन्मजात नेतृत्व
स्कूल में मॉनिटर, कॉलेज में प्रेसिडेंट, नौकरी में टीम लीड या बॉस, व्यापार में मालिक। नौकरी करेगा भी तो अंत में अपना साम्राज्य खड़ा करेगा। दूसरों के नीचे दबकर रहना स्वभाव में नहीं होता।

English Summary
Lagna-Lagnesh Rajyoga occurs when the Ascendant lord is strong and placed in Kendra or Trikona. Like a crown on an elephant's head, it makes the native a natural born leader with health, longevity, authority, and the power to nullify all doshas.

असली फर्क क्या है
धर्मकर्माधिपति योग यानी 9वें और 10वें भाव के स्वामी का संबंध। ये बाहरी राजा बनाता है। समाज कुर्सी देता है, पद देता है।
लग्नेश योग अंदर का राजा बनाता है। कुर्सी मांगता नहीं, खुद बनाता है। इसीलिए किताबों में इसे दूसरे नंबर पर रखा, पर अनुभव में ये पहले नंबर का योग है।

लग्नेश की कमजोर स्थिति
लग्नेश नीच राशि में हो, सूर्य के साथ अस्त हो, या 6, 8, 12 भाव में चला जाए तो हाथी बीमार हो गया। अब सिर पर मुकुट रख भी दो तो वो बोझ लगेगा। राजयोग भंग होकर दासयोग जैसा फल देता है। जिंदगी भर दूसरों की नौकरी।

पाप प्रभाव
लग्नेश पर शनि, राहु, केतु या मंगल की पूर्ण दृष्टि हो तो मुकुट में कांटे लग जाते हैं। व्यक्ति राजा तो बन सकता है पर मुकदमे, बदनामी, सरकारी दंड, जेल जैसी स्थितियां साथ चलती हैं। सत्ता मिलती है पर सुख नहीं।

लग्न का पीड़ित होना
लग्न भाव में ही क्रूर ग्रह बैठे हों और लग्नेश भी पापकर्तरी में हो या पाप ग्रह से युत हो तो हाथी पागल हो जाता है। ताकत मिलती है पर उसका गलत इस्तेमाल होता है। अंत में पतन तय है।

योग को सोने का मुकुट कैसे बनाएं: बल बढ़ाने के सूत्र

लग्नेश उच्च, मूलत्रिकोण, स्वराशि, मित्र राशि में हो
इस स्थिति को 24 कैरेट सोने का मुकुट कहते हैं। फल चक्रवर्ती राजा जैसा होता है। सत्ता निर्बाध मिलती है और टिकती भी है।

लग्नेश गुरु, शुक्र, बुध, बलवान चंद्र से युत हो
इसे मुकुट में हीरे जड़े हुए समझो। केवल सत्ता नहीं मिलती, धन, बुद्धि, यश, सौंदर्य और कला सब एक साथ मिलते हैं। व्यक्ति बहुआयामी प्रतिभा का धनी होता है।

लग्नेश वर्गोत्तम हो
वर्गोत्तम का मतलब जन्म कुंडली और नवांश कुंडली दोनों में लग्नेश एक ही राशि में हो। इसे डबल ताकत कहते हैं। एक हाथी में दस हाथी का बल आ जाता है। ऐसे व्यक्ति का संकल्प टूटता नहीं।

लग्नेश पुष्कर नवांश में हो
पुष्कर नवांश सबसे शुभ नवांश है। इसे देवताओं का आशीर्वाद कहते हैं। मानो मुकुट स्वयं इंद्र पहना रहे हों। भाग्य हर कदम पर साथ देता है और बड़ी आपदा भी टल जाती है।

1. लग्नेश का रत्न
लग्नेश के अनुसार रत्न धारण करें, पर कुंडली दिखाए बिना कभी नहीं। गलत रत्न पहनना यानी हाथी को जहर देना।
मेष और वृश्चिक लग्न के लिए मूंगा। वृष और तुला लग्न के लिए हीरा या ओपल। मिथुन और कन्या लग्न के लिए पन्ना। कर्क लग्न के लिए मोती। सिंह लग्न के लिए माणिक। धनु और मीन लग्न के लिए पुखराज। मकर और कुंभ लग्न के लिए नीलम।

2. लग्नेश का बीज मंत्र
रोज एक माला जाप करें। सुबह स्नान के बाद शांत मन से।
सूर्य के लिए: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
चंद्र के लिए: ॐ सों सोमाय नमः
मंगल के लिए: ॐ अं अंगारकाय नमः
बुध के लिए: ॐ बुं बुधाय नमः
गुरु के लिए: ॐ बृं बृहस्पतये नमः
शुक्र के लिए: ॐ शुं शुक्राय नमः
शनि के लिए: ॐ शं शनैश्चराय नमः

3. देह सेवा यानी लग्न की सेवा
लग्न का सीधा संबंध शरीर से है। रोज व्यायाम करो। सात्विक भोजन लो। ब्रह्मचर्य का पालन करो। नींद पूरी लो। शरीर बलवान होगा तो लग्नेश अपने आप बलवान महसूस करेगा। कमजोर शरीर में राजयोग फल नहीं देता।

4. आत्म विश्वास का अभ्यास
लग्नेश आत्मा का कारक है। रोज सुबह आईने में देखकर खुद से बोलो: मैं राजा हूँ। मैं सक्षम हूँ। ये अहंकार नहीं, आत्म-बोध है। जब तुम अपनी आत्मा को राजा मानोगे, तो पूरा ब्रह्मांड तुम्हें राजा मानेगा। संकल्प से बड़ा कोई योग नहीं।

5. लग्नेश ग्रह का दान
लग्नेश जिस ग्रह का है, उसके वार वाले दिन उससे जुड़ी वस्तु का दान करो।
उदाहरण: लग्नेश शनि है तो शनिवार को काला तिल, काला कपड़ा, लोहे का दान। लग्नेश गुरु है तो बृहस्पतिवार को चने की दाल, पीला वस्त्र, किताब दान। दान से ग्रह प्रसन्न होता है और शुभ फल बढ़ाता है।

अंतिम श्लोक प्रमाण
यस्य लग्नाधिपो वीरो बलयुक्तो यदा भवेत्।
तस्य सर्वाणि कार्याणि सिद्ध्यन्ति नात्र संशयः॥
सारावली 3/5

हिंदी भावार्थ
जिस जातक का लग्नेश बलवान और वीर स्वभाव का होता है, उसके सारे काम सिद्ध होते हैं। इसमें कोई संशय नहीं है।

ये योग अगर कुंडली में है और पाप प्रभाव से मुक्त है तो जीवन में एक बार बड़ा शिखर जरूर मिलता है।
श्री सिद्धार्थ सागर वगर्त्ति
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मंगल गृह नीच के होने पर उपाय | कमजोर मंगल के लक्षण व ज्योतिष उपायज्योतिष शास्त्र में मंगल गृह को सेनापति माना गया है | य...
12/06/2026

मंगल गृह नीच के होने पर उपाय | कमजोर मंगल के लक्षण व ज्योतिष उपाय
ज्योतिष शास्त्र में मंगल गृह को सेनापति माना गया है | यह एक अग्नि तत्व गृह है | मंगल गृह की शुभता जातक को जीवन में हमेशा आगे की और ले जाती है | मंगल शुभ होने पर जातक बड़ी बड़ी सफलता प्राप्त करता है | किन्तु यदि मंगल गृह कुंडली में नीच के है तो जातक को दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर कर देते है |

सबसे पहले यह जानते है कि मंगल गृह कुंडली में नीच के है कैसे पता कर सकते है | मंगल गृह मकर राशि में होने पर उच्च के होते है तो कर्क राशि में होने पर मंगल नीच के बन जाते है | मंगल गृह नीच के होने पर मंगल गृह से मिलने वाले फल बिल्कुल शून्य हो जाते है व इसके ठीक विपरीत परिणाम जातक को प्राप्त होते है |

यदि देखा जाये तो मंगल गृह नीच के होने पर या डिग्री से बिल्कुल कमजोर होने पर या शत्रु राशि में होने पर लगभग एक जैसे ही फल देखने को मिलते है | किन्तु मंगल दोष यानि जातक के मांगलिक होने पर परिणाम कुछ भिन्न हो सकते है | किन्तु आज हम इस post के माध्यम से नीच के मंगल या कमजोर मंगल के उपाय के विषय में चर्चा करने वाले है |

🚩सबसे पहले नीच के मंगल होने पर जातक को क्या-क्या लक्षण महसूस होते है या कौन -कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है :-
1. मंगल नीच के या कमजोर होने पर जातक अत्यधिक क्रोधी स्वभाव का बन जाता है |
2. तनाव में रहने लगता है |
3. पेट की बीमारी, गठिया रोग या अन्य प्रकार के रोग होने लगते है |
4. स्वभाव से डरपोक व आत्मविश्वास में कमी महसूस करने लगता है |
5. शरीर से दुर्बल हो जाता है |
6. जीवन में सभी कार्यों में आलस्य आने लगता है |
7. कोर्ट केस में फंस सकता है |
8. क़र्ज़ होने का खतरा सबसे अधिक होता है |

🚩 नीच के मंगल होने पर ये उपाय करने चाहिए :

1. मंगल गृह नीच के होने पर जातक को सबसे अधिक हनुमान जी की आराधना करने से सबसे अधिक फल की प्राप्ति होती है | मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें |
2. मंगलवार को हनुमान जी के व्रत रखे | हनुमान जी को भोग लगाये | हनुमान जी को चौला चढ़ाये |
3. मंगलवार को गोशाला जाये व गायों को अपने हाथ से गुड खिलाये | ध्यान दे गायों को गुड थोड़ी थोड़ी मात्रा में ही खिलाये | गर्मी के दिनों में गुड न खिलाये, गर्मी के दिनों में आप गेंहू का दलिया खिला सकते है |
4. मंगलवार को लाल रंग के वस्त्र धारण किया करें | लाल चन्दन का टीका प्रतिदिन लगाया करें |
5. मंगलवार को लाल रंग की मिठाई का प्रसाद वितरण किया करें | मंगलवार को लाल रंग के वस्त्र या कोई भी वस्तु का दान करने से लाभ मिलता है |
6. भोजपत्र पर विधिवत अंकित व मंत्र शक्ति द्वारा सिद्ध मंगल यंत्र को पूजा स्थल पर लाल कपड़ा बिछाकर प्रतिदिन धुप दीप द्वारा पूजन करने से अतिशीघ्र मंगल गृह से शुभ फल मिलने लगते है |
7. सिद्ध मंगल यंत्र लॉकेट गले में धारण करने से लाभ मिलता है |
मूंगा रत्न धारण करने से भी मंगल गृह से शुभ फल प्राप्त किये जा सकते है |
8. मंगलवार को जुआ, शराब व बाल,नाख़ून आदि न काटे | मांस का सेवन भूलकर भी न करें |
9. किसी भी पराई स्त्री को बुरी नजर से न देखे | स्त्री का सदैव सम्मान करें |
🙏🙏🙏🙏
ऊपर दिए सभी उपाय में से यदि आप कुछ उपाय भी करना शुरू करते है तो आपको आपको नीच के मंगल, कमजोर मंगल में अतिशीघ्र लाभ मिलने लगता है |
🙏🙏🙏🙏🙏
श्री सिद्धार्थ सागर वगर्त्ति
वैदिक, के.पी ज्योतिष ओर औरा बास्तुवीद
Call & Whatsapp - 7683912624


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12th June 2026 (Friday) - Adhika Krishna DwadashiDwadashi Tithi Begins - 10:36 PM on Jun 11, 2026 (for New Delhi)Dwadash...
11/06/2026

12th June 2026 (Friday) - Adhika Krishna Dwadashi
Dwadashi Tithi Begins - 10:36 PM on Jun 11, 2026 (for New Delhi)
Dwadashi Tithi Ends - 07:36 PM on Jun 12, 2026

https://www.facebook.com/share/v/1ayThRaZnR/फायर कॉर्नर का बढ़ना- अगर ईस्ट, साउथ या फायर कॉर्नर बढ़ा हुआ हो, तो ज़मीन का...
06/06/2026

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फायर कॉर्नर का बढ़ना- अगर ईस्ट, साउथ या फायर कॉर्नर बढ़ा हुआ हो, तो ज़मीन का वह टुकड़ा बुरी किस्मत देता है। इससे घर के मालिक को धन की हानि, चिंता, परेशानी और डर लगता है।

साउथ वेस्ट कॉर्नर का बढ़ना या फैलाव- साउथ वेस्ट दिशा को साउथ वेस्ट कहते हैं। अगर यह ज़ोन बढ़ा हुआ हो, तो यह बहुत बुरे नतीजे देता है, घर के मालिक को मानसिक परेशानियां होती हैं, परिवार और पड़ोसियों से नहीं बनती। आशुरी आदतें बढ़ती हैं, कोट केस होने की संभावना ज़्यादा होती है।

उत्तर दिशा में गेट के लिए अच्छे देवता की जगह चुनना,
देवता हैं-
मुक्ष- बेटा और धन,
भल्लाट- बहुत सारी लक्ष्मी,
सोम- धन और खुशहाली और धार्मिक चरित्र।

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वैदिक, KP एस्ट्रोलॉजर और ऑरा वास्तु एक्सपर्ट
श्री सिद्धार्थ सागर बागरती
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Depression, तनाव व अन्य मानसिक बीमारी, कुंडली से जाने कारण व उपाय👉डिप्रेशन व तनाव एक प्रकार से मन से जुड़ी बीमारी है जो ल...
01/06/2026

Depression, तनाव व अन्य मानसिक बीमारी, कुंडली से जाने कारण व उपाय

👉डिप्रेशन व तनाव एक प्रकार से मन से जुड़ी बीमारी है जो लंबे समय तक जातक के लाइफ स्टाइल और उनके सोचने व दूसरों के साथ व्यवहार करने से धीरे धीरे जगह बना लेती है और फिर इसे चिपक जाती है कि जातक के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करती है । ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से जातक की लग्न कुंडली को देखकर पहले से ही यह ज्ञात किया जा सकता है कि यह जातक आगे चलकर मानसिक व्याधियों का शिकार हो सकता है ।

👉ज्योतिष शास्त्र वहोत सारे योग व दोष हे मगर उनमेसे कुछ मुक्ष वीन्दु इसी प्रकार है । बैदीक ज्योतीषमे मानसिक विकार होने का प्रमुख कारण राहु, चंद्रमा व बुध ग्रह से जुड़ा होता है ।

1. जिसके जातक की कुंडली में चंद्र ग्रहण बनता है वे जातक अधिकतर डिप्रेशन ओर तनाव आदि के शिकार बन सकते है । चंद्र ग्रहण को समझते है, जब किसी एक भाव मे ही चंद्र ओर राहु दोनो ग्रह एक साथ बैठ जाते है तो यह चंद्र ग्रहण कहलाता है । इस स्थिति में चंद्र ग्रह बहुत कमजोर हो जाते है और मन से जुड़ी व्याधियां होने लगती है ।

2. इसके अतिरिक्त चंद्र ग्रह का कुंडली मे डिग्री से बहुत अधिक कमजोर होना या चंद्रमा का वृश्चिक राशि मे होना , इस राशि मे चंद्रमा नीच के हो जाते है ।

3. यदि जातक की कुंडली मे बुध ग्रह अस्त है, या बुध ग्रह डिग्री से बहुत अधिक कमजोर है | या बुध ग्रह नीच के होकर बैठे है या शत्रु राशि मे बैठे है ये सभी समीकरण भी जातक को मानसिक रूप से बीमार कर सकते है ।

5. राहु का महादशा या अन्तर्दशा में : यदि जातक की कुंडली मे राहु मारक है तो ऐसे में जब भी राहु की महादशा या अन्तर्दशा आती है तो जातक की मानसिक रूप से बीमार कर देती है और साथ मे कर्ज़ बढ़ने के भी संकेत दिखते है ।

श्री सिद्धार्थ सागर वगर्त्ति
वैदिक, के.पी ज्योतिष ओर औरा बास्तुवीद
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👉केपी ज्योतीष के हीसाव से पुनर्फू दोष

1. यदी चन्द्रमा के नक्षत्रमे या उप नक्षत्र मे शनी हो, वैवाहिक, शारीरिक, मानशीक, कर्म क्षेत्रमे विफलता से मानसीक अवसाद घटटी हा ।

2. यदी शनी की नक्षत्र मे या उप नक्षत्र मे चन्द्रमा उपस्थित हे ।

3. केइभी ग्रहकी दशा अन्तर दशा मे ग्रह ओर नक्षत्र 6,8,12 भाव फल देराहाहो तो ।

यदि आप भी किसी प्रकार की मानसिक बीमारी से झूझ रहे है तो एक बार अपनी कुंडली का हमसे विश्लेषण अवश्य करवाये और बताये गए उपाय अवश्य करे ।

वैसे अधिकतर चंद्र ग्रह और राहु ग्रह के उपाय करने से मानसिक रोग में लाभ अवश्य मिलता है । चंद्र को और राहु को दोनों ग्रह को ठीक करने हेतु शिवलिंग पूजा सबसे अच्छा उपाय है । प्रतिदिन शिवमंदिर जाए व शिवलिंग को जल अर्पित किया करे ।

मोती स्टोन को चांदी की अंगूठी में लगवाकर पहने । काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाये । शनिवार को गोशाला जाए व गाय को गुड़ आदि खिलाये । किसी दिव्यांग की मदद करने की कोशिश करे व उनको दान आदि दिया करे ।

इस प्रकार ये उपरोक्त उपाय करने के साथ साथ किसी मनोचिकित्सक को अवश्य दिखाए । जल्द ही आपकी बीमारी ठीक हो ऐसी हम आपके लिए कामना करते है ।

श्री सिद्धार्थ सागर वगर्त्ति
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