DrRashmi Moghe - Hirve - Psychiatrist

DrRashmi Moghe - Hirve - Psychiatrist Psychiatrist (Doctor)
& counsellor

22/04/2026

मेरा इंटरव्यू दैनिक जागरण डिजिटल में, पब्लिश किया गया है। फेल होने पर बच्चों द्वारा की जा रही आत्महत्या के विषय में। नीचे मेरे बाइट की वीडियो क्लिप अटैच्ड है।
देवेंद्र जी तथा दैनिक जागरण डिजिटल टीम का हार्दिक आभार 😊🙏🙏
डॉक्टर रश्मि मोघे हिरवे, मनोचिकित्सक तथा काउंसलर भोपाल
07553138825
Dr Rashmi Moghe Hirve
psychiatrist and Counsellor
Bhopal

🛑चुपचाप मिठाई खाने का झूठ पकड़ा गया🛑 HbA1c (जिसे **हीमोग्लोबिन A1c** या **ग्लायकेटेड हीमोग्लोबिन** भी कहते हैं) को आसान ...
09/04/2026

🛑चुपचाप मिठाई खाने का झूठ पकड़ा गया🛑 HbA1c (जिसे **हीमोग्लोबिन A1c** या **ग्लायकेटेड हीमोग्लोबिन** भी कहते हैं) को आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं:
यह आपके शरीर का **"3 महीने का शुगर रिपोर्ट कार्ड"** है।
# # # 1. यह साधारण शुगर टेस्ट से अलग कैसे है?
* **साधारण टेस्ट (Glucometer):** यह केवल उस पल की शुगर बताता है जब आपने खून दिया। यह एक "फोटो" की तरह है।
* **HbA1c टेस्ट:** यह पिछले 2 से 3 महीनों का **औसत (Average)** शुगर लेवल बताता है। यह एक "फिल्म" की तरह है जो लंबे समय की तस्वीर दिखाती है।
# # # 2. यह काम कैसे करता है?
हमारे खून में लाल रक्त कोशिकाएं (Red Blood Cells) होती हैं जिनमें **हीमोग्लोबिन** होता है। जब खून में शुगर (ग्लूकोज) बढ़ती है, तो वह इस हीमोग्लोबिन से चिपक जाती है।
* लाल रक्त कोशिकाओं की उम्र लगभग **120 दिन (3-4 महीने)** होती है।
* इसलिए, हीमोग्लोबिन पर जितनी ज्यादा शुगर "चिपकी" होगी, आपका HbA1c उतना ही ज्यादा आएगा।
# # # 3. रिपोर्ट का मतलब क्या है? (Standard Values)
HbA1c को प्रतिशत (%) में नापा जाता है:
| HbA1c लेवल | मतलब (Status) |
|---|---|
| **5.7% से कम** | सामान्य (Normal) |
| **5.7% से 6.4%** | प्रीडायबिटीज (Pre-diabetes) - यानी खतरा बढ़ रहा है |
| **6.5% या ज्यादा** | डायबिटीज (Diabetes) |
# # # 4. यह टेस्ट क्यों जरूरी है?
* **सच्चाई का पता लगाना:** कई बार लोग टेस्ट से दो दिन पहले मीठा खाना छोड़ देते हैं जिससे नॉर्मल शुगर रिपोर्ट सही आ जाती है, लेकिन HbA1c पिछले 3 महीने की पोल खोल देता है।
* **इलाज की निगरानी:** डॉक्टर यह देखते हैं कि दवाई या डाइट काम कर रही है या नहीं।
* **जटिलताओं से बचाव:** अगर यह कंट्रोल में रहे (आमतौर पर 7% से नीचे), तो किडनी, आंखों और दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।
**साधारण शब्दों में:** यह आपके खून का वह "इतिहास" है जो बताता है कि आपने पिछले कुछ महीनों में अपनी सेहत का कैसा ध्यान रखा है।
अधिक जानने के लिए कृपया अपने रेगुलर फिजिशियन या एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
मै मनोचिकित्सक हूं। HbA1c के बारे में जनता की सामान्य क्यूरियोसिटी को शांत करने के लिए सरल भाषा में ये पोस्ट डाली है।
डॉक्टर रश्मि मोघे हिरवे
मनोचिकित्सक तथा काउंसलर, भोपाल
07553138825

08/03/2026

Copied *The Freedom to Be*

__Women’s Day Reflection_

Perhaps the true spirit of Women’s Day is not in flowers, greetings or well-meaning compliments.

Perhaps it lies in something quieter -

in the freedom to simply be.

To be more than the roles she carries,
more than the expectations placed upon her,
more than the silent sacrifices history has asked of her.

A woman is not remarkable because of the success of the man beside her.
She is remarkable for the dreams she pursues and the life she builds for herself.

Her worth is not measured by how much she gives up,
how gracefully she balances endless responsibilities,
or how perfectly she fulfills every role expected of her.

She is worthy -
simply because she is.

Not because she is someone’s mother, wife, daughter or sister -
but because she is a person with her own voice, vision, strength and spirit.

True respect does not come from placing women on pedestals.
It comes from standing beside them as equals.

Not from protecting them,
but from ensuring they have the freedom, confidence and strength to walk their own path.

As Toni Morrison reminds us:
“You are your best thing.”

When women are free to live on their own terms,
they do more than complete the world - they shape it.

Today, and every day, let our respect for women be seen not merely in words,
but in understanding, dignity and shared responsibility.

Let this day not be about praising women for how much they endure,
but about building a world where they no longer have to.

That would be the truest way to honour women -
by allowing them the freedom to simply be.

Happy International Women’s Day.

🙏🙏🙏🙏🙏

बस ऐसे ही सम्मान भरे, स्नेह भरे शब्दों के मेसेजेस से लगता है कि मरीजों के लिए मेरा एक्स्ट्रा mile जाना सार्थक हुआ। 😊🙏🙏 ह...
11/01/2026

बस ऐसे ही सम्मान भरे, स्नेह भरे शब्दों के मेसेजेस से लगता है कि मरीजों के लिए मेरा एक्स्ट्रा mile जाना सार्थक हुआ। 😊🙏🙏 हार्दिक आभार आपका।
एक चिकित्सक अपने परामर्श में केवल दवा ही नहीं बल्कि जानकारी, उम्मीद और हौसला भी देता है। 😊🙏🙏

धन्यवाद तक्षशिला इंस्टीट्यूट तथा कौशलेय वेलफेयर ट्रस्ट, रोली मैडम तथा श्री अनिल जी को इतने अच्छे सेमिनार में मुझे वक्ता ...
08/12/2025

धन्यवाद तक्षशिला इंस्टीट्यूट तथा कौशलेय वेलफेयर ट्रस्ट, रोली मैडम तथा श्री अनिल जी को इतने अच्छे सेमिनार में मुझे वक्ता के तौर पर आमंत्रित करने हेतु।
स्पेशल नीड बच्चों के माता पिता तथा टैलेंटेड और मेहनती थेरेपिस्ट के साथ इंटरेक्शन बहुत सुखद तथा एक enriching एक्सपीरियंस रहा।
पुनः धन्यवाद 😊😀🙏

27/10/2025




जब दीपावली पर किसी पेशेंट बच्चे की माता मेवों से भरी बास्केट उपहार में देकर जाए, तो डॉक्टर को ऐसा लगता है कि कुछ तो अच्छ...
25/10/2025

जब दीपावली पर किसी पेशेंट बच्चे की माता मेवों से भरी बास्केट उपहार में देकर जाए, तो डॉक्टर को ऐसा लगता है कि कुछ तो अच्छा ज़रूर कर रही होगी वो, और इस प्यार और सम्मान भरे उपहार से मेरी दीवाली सच में जगमग और रौशन हो गई
थैंक यू, थैंक यू 🥰☺️💕🙏

नोट= उपहारदाता की पहचान तस्वीर को क्रॉप और पिक्सलेट करके छुपा दी गई है। 🙏

🛑ODD ऑपोजिशनल डिफायंट डिसऑर्डर🛑= क्या आपका बच्चा हर बात पर बहस करना, कामों को ना बोलना, उद्दंडता करना, ये करता रहता है? ...
12/09/2025

🛑ODD ऑपोजिशनल डिफायंट डिसऑर्डर🛑= क्या आपका बच्चा हर बात पर बहस करना, कामों को ना बोलना, उद्दंडता करना, ये करता रहता है? हर वक्त चिड़चिड़ाना, गुस्से में रहना, ऑथोरिटी फिगर्स जैसे माता पिता, शिक्षक आदि द्वारा दिए गए निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करना? बदला लेने की भावना होना। अपनी गलतियों की कोई जिम्मेदारी ना लेना, दूसरों पर दोष डालते रहना? तो हो सकता है कि आपके बच्चे को ODD हो।
ये बच्चे बेहद डिफिकल्ट चाइल्ड होते हैं, अनुशासन में लाने के सामान्य तरीके इनपर काम नहीं करते हैं। इन बच्चों के साथ माता पिता का जीवन एक रोज़ चलने वाला अंतहीन युद्ध बन जाता है। और कुछ स्ट्डीज कहती हैं कि बच्चों में odd बढ़ रहा है।
🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑🛑
ऑपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर (जिसे शॉर्ट में ODD कहते हैं) बच्चों और किशोरों (टीन्स) में होने वाला एक बिहेवियर से जुड़ा डिसऑर्डर है। इसमें बच्चे का पैटर्न होता है गुस्सा करना, चिड़चिड़ापन, बहस करना और अथॉरिटी फिगर्स (जैसे पेरेंट्स, टीचर्स) की बात न मानना।
यह समझना ज़रूरी है कि हर बच्चा कभी न कभी ज़िद करता है या गुस्सा दिखाता है। लेकिन ODD में यह बिहेवियर नार्मल बच्चों की तुलना में बहुत ज़्यादा, लगातार (कम से कम 6 महीने तक) और गंभीर होता है। इससे बच्चे की फॅमिली लाइफ, दोस्ती और पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है।
ODD के कॉमन सिम्पटम्स (लक्षण) क्या हैं? (एग्जांपल्स के साथ)
ODD के लक्षणों को 3 मुख्य कैटेगरी में बांटा जा सकता है:
👉1. गुस्सा और चिड़चिड़ापन (Angry and Irritable Mood):
अक्सर गुस्से में आ जाना: छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाना।
एग्जांपल: जैसे, अगर आपने बच्चे को टीवी बंद करके होमवर्क करने को कहा, तो वह छोटी सी बात पर चीखने-चिल्लाने लगे या रिमोट फेंक दे।
जल्दी इरिटेट हो जाना: दूसरों की बातों से बहुत जल्दी परेशान हो जाना।
एग्जांपल: अगर उसका छोटा भाई/बहन उसके कमरे में आ जाये तो वह फ़ौरन चिड़चिड़ा हो कर उस पर चिल्लाने लगता है।
हमेशा गुस्से में या नाराज़ रहना: चेहरे पर अक्सर गुस्सा या नफरत के भाव दिखना।
👉2. बहस करने वाला और डेफिएंट बिहेवियर (Argumentative and Defiant Behavior):
बड़ों से ज़रूरत से ज़्यादा बहस करना: हर बात को काटना और बहस करना।
एग्जांपल: आप कुछ भी कहेंगे, वह "क्यों?" और "मैं नहीं करूँगा" जैसा जवाब देगा। हर बात पर बहस करना उसकी आदत बन जाती है।
नियम (रूल्स) को तोड़ना या न मानना: जानबूझकर रिक्वेस्ट या रूल्स को इग्नोर करना।
एग्जांपल: स्कूल में टीचर के बार-बार बोलने पर भी लाइन में खड़ा न होना या घर पर "डिनर से पहले स्नैक्स नहीं खाना" जैसे रूल को रोज़ तोड़ना।
जानबूझकर दूसरों को परेशान करना: ऐसा काम करना जिससे दूसरे इरिटेट हों।
एग्जांपल: वह जानता है कि टीवी की आवाज़ तेज़ करने से आपको परेशानी होती है, फिर भी वह जानबूझकर वॉल्यूम बढ़ा देगा।
अपनी गलतियों के लिए दूसरों को ब्लेम करना: कभी अपनी गलती न मानना।
एग्जांपल: अगर उसने दूध का गिलास गिरा दिया, तो वह मानेगा नहीं कि गलती उसकी है। वह कहेगा, "आपने ही गिलास वहां रखा था" या "भाई ने मुझे धक्का दिया।"
👉3. बदला लेने वाला बिहेवियर (Vindictive):
दिल में बात रख कर बदला लेना: अगर कोई चीज़ उसके हिसाब से न हो, तो वह बाद में बदला लेने की कोशिश करता है।
एग्जांपल: अगर उसकी बहन ने गलती से उसकी कॉपी ले ली, तो वह गुस्से में आकर बाद में उसका फेवरेट खिलौना तोड़ देगा या छिपा देगा।
🛑ODD के रीज़न्स (कारण) क्या हो सकते हैं?🛑
ODD का कोई एक सिंगल रीज़न नहीं है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह कुछ चीज़ों का कॉम्बिनेशन हो सकता है:
👉जेनेटिक फैक्टर्स: अगर फॅमिली में किसी को मूड डिसऑर्डर, एंग्जायटी या पर्सनालिटी डिसऑर्डर रहा है, तो रिस्क बढ़ जाता है।
👉बायोलॉजिकल फैक्टर्स: दिमाग के कुछ केमिकल मेसेंजर्स (न्यूरोट्रांसमीटर्स) में इम्बैलेंस होने से भी बिहेवियर पर असर पड़ सकता है।
👉एनवायरनमेंटल फैक्टर्स: घर का माहौल भी एक बड़ा रोल प्ले करता है।
👉पेरेंटिंग स्टाइल: बहुत ज़्यादा सख्त या बहुत लापरवाह पेरेंटिंग।
👉फॅमिली इश्यूज: घर में रोज़-रोज़ के झगड़े या आपस में बनती न हो।
👉इनकंसिस्टेंट डिसिप्लिन: कभी एक ही गलती पर डांट पड़ना और कभी उसी गलती को इग्नोर कर देना।
डॉक्टर रश्मि मोघे हिरवे, मनोचिकित्सक तथा काउंसलर भोपाल 07553138825
🛑🛑🛑🛑🛑🛑
ODD का इलाज (ट्रीटमेंट) कैसे होता है?
odd के इलाज से इससे बच्चे के बिहेवियर में सुधार आ सकता है। इसमें बच्चे और फॅमिली दोनों को शामिल किया जाता है।
👉🛑साइकिएट्रिक दवाइयां🛑= इन बच्चों का व्यवहार इतना अग्रेसिव हो जाता है कि आप चाहें या ना चाहें, बच्चे को कई बार दवाइयां देनी ही पड़ती हैं। दवाइयां बेहद जल्दी असर करती हैं, कुछ ही दिनों परिणाम दिखने लगते हैं, एग्रेशन गुस्सा कम करने की दवाएं, ADHD की दवाएं, मूड स्विंग को रोकने वाली दवाएं आदि बेहद बेहद प्रभावी होती हैं। (बहुत कम या बिना किसी साइड इफेक्ट्स के) तेज गति से परिणाम लाने के लिए, अनुभवी मनोचिकित्सक बड़ी ही कुशलता से इन दवाओं का सही उपयोग करने में सक्षम होते हैं।🛑
👉पेरेंट मैनेजमेंट ट्रेनिंग (PMT): इसमें पेरेंट्स को सिखाया जाता है कि बच्चे के पॉजिटिव बिहेवियर को कैसे बढ़ावा दें और नेगेटिव बिहेवियर को कैसे हैंडल करें।
👉फैमिली थेरेपी: इसमें पूरी फैमिली एक साथ थेरेपिस्ट से मिलती है ताकि कम्युनिकेशन बेहतर हो और घर का माहौल आपसी समझ से सुधर सके।
👉कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT): यह थेरेपी बच्चे को अपने गुस्से को कण्ट्रोल करना और प्रॉब्लम्स को आसान तरीके से सॉल्व करना सिखाती है।
👉सोशल स्किल्स ट्रेनिंग: इससे बच्चे को दूसरों के साथ आसानी से घुलने-मिलने और दोस्ती करने में मदद मिलती है।
🛑अगर आपको अपने बच्चे में ऊपर दिए गए लक्षण दिखते हैं, तो चाइल्ड साइकियाट्री में अनुभवी किसी साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) से सलाह लेना सबसे अच्छा कदम है। सही गाइडेंस और सपोर्ट से इस सिचुएशन को एक हद तक हैंडल किया जा सकता है।
डॉक्टर रश्मि मोघे हिरवे, मनोचिकित्सक तथा काउंसलर भोपाल
Dr Rashmi Moghe Hirve psychiatrist and Counsellor, Bhopal
07553138825
With Neurologist DrMakarand Hirve bhopal

11/09/2025

लोग सिगरेट शराब चरस गांजा ले लेंगे, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य बचाने के लिए दवाई नहीं लेंगे।
ये कहकर कि "साइड इफेक्ट हो सकते हैं"
Irony 🙄😅

10/09/2025

2024 में भारत में रोड एक्सीडेंट से पौने दो लाख लोगों की मृत्यु हुई और आत्महत्या करने से लगभग दो लाख लोग काल के ग्रास हुए
⭐Mental health matters⭐
आत्महत्या रोकथाम दिवस 10 Sep

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