12/09/2025
🛑ODD ऑपोजिशनल डिफायंट डिसऑर्डर🛑= क्या आपका बच्चा हर बात पर बहस करना, कामों को ना बोलना, उद्दंडता करना, ये करता रहता है? हर वक्त चिड़चिड़ाना, गुस्से में रहना, ऑथोरिटी फिगर्स जैसे माता पिता, शिक्षक आदि द्वारा दिए गए निर्देशों का जानबूझकर उल्लंघन करना? बदला लेने की भावना होना। अपनी गलतियों की कोई जिम्मेदारी ना लेना, दूसरों पर दोष डालते रहना? तो हो सकता है कि आपके बच्चे को ODD हो।
ये बच्चे बेहद डिफिकल्ट चाइल्ड होते हैं, अनुशासन में लाने के सामान्य तरीके इनपर काम नहीं करते हैं। इन बच्चों के साथ माता पिता का जीवन एक रोज़ चलने वाला अंतहीन युद्ध बन जाता है। और कुछ स्ट्डीज कहती हैं कि बच्चों में odd बढ़ रहा है।
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ऑपोजिशनल डिफिएंट डिसऑर्डर (जिसे शॉर्ट में ODD कहते हैं) बच्चों और किशोरों (टीन्स) में होने वाला एक बिहेवियर से जुड़ा डिसऑर्डर है। इसमें बच्चे का पैटर्न होता है गुस्सा करना, चिड़चिड़ापन, बहस करना और अथॉरिटी फिगर्स (जैसे पेरेंट्स, टीचर्स) की बात न मानना।
यह समझना ज़रूरी है कि हर बच्चा कभी न कभी ज़िद करता है या गुस्सा दिखाता है। लेकिन ODD में यह बिहेवियर नार्मल बच्चों की तुलना में बहुत ज़्यादा, लगातार (कम से कम 6 महीने तक) और गंभीर होता है। इससे बच्चे की फॅमिली लाइफ, दोस्ती और पढ़ाई पर बुरा असर पड़ता है।
ODD के कॉमन सिम्पटम्स (लक्षण) क्या हैं? (एग्जांपल्स के साथ)
ODD के लक्षणों को 3 मुख्य कैटेगरी में बांटा जा सकता है:
👉1. गुस्सा और चिड़चिड़ापन (Angry and Irritable Mood):
अक्सर गुस्से में आ जाना: छोटी-छोटी बातों पर भड़क जाना।
एग्जांपल: जैसे, अगर आपने बच्चे को टीवी बंद करके होमवर्क करने को कहा, तो वह छोटी सी बात पर चीखने-चिल्लाने लगे या रिमोट फेंक दे।
जल्दी इरिटेट हो जाना: दूसरों की बातों से बहुत जल्दी परेशान हो जाना।
एग्जांपल: अगर उसका छोटा भाई/बहन उसके कमरे में आ जाये तो वह फ़ौरन चिड़चिड़ा हो कर उस पर चिल्लाने लगता है।
हमेशा गुस्से में या नाराज़ रहना: चेहरे पर अक्सर गुस्सा या नफरत के भाव दिखना।
👉2. बहस करने वाला और डेफिएंट बिहेवियर (Argumentative and Defiant Behavior):
बड़ों से ज़रूरत से ज़्यादा बहस करना: हर बात को काटना और बहस करना।
एग्जांपल: आप कुछ भी कहेंगे, वह "क्यों?" और "मैं नहीं करूँगा" जैसा जवाब देगा। हर बात पर बहस करना उसकी आदत बन जाती है।
नियम (रूल्स) को तोड़ना या न मानना: जानबूझकर रिक्वेस्ट या रूल्स को इग्नोर करना।
एग्जांपल: स्कूल में टीचर के बार-बार बोलने पर भी लाइन में खड़ा न होना या घर पर "डिनर से पहले स्नैक्स नहीं खाना" जैसे रूल को रोज़ तोड़ना।
जानबूझकर दूसरों को परेशान करना: ऐसा काम करना जिससे दूसरे इरिटेट हों।
एग्जांपल: वह जानता है कि टीवी की आवाज़ तेज़ करने से आपको परेशानी होती है, फिर भी वह जानबूझकर वॉल्यूम बढ़ा देगा।
अपनी गलतियों के लिए दूसरों को ब्लेम करना: कभी अपनी गलती न मानना।
एग्जांपल: अगर उसने दूध का गिलास गिरा दिया, तो वह मानेगा नहीं कि गलती उसकी है। वह कहेगा, "आपने ही गिलास वहां रखा था" या "भाई ने मुझे धक्का दिया।"
👉3. बदला लेने वाला बिहेवियर (Vindictive):
दिल में बात रख कर बदला लेना: अगर कोई चीज़ उसके हिसाब से न हो, तो वह बाद में बदला लेने की कोशिश करता है।
एग्जांपल: अगर उसकी बहन ने गलती से उसकी कॉपी ले ली, तो वह गुस्से में आकर बाद में उसका फेवरेट खिलौना तोड़ देगा या छिपा देगा।
🛑ODD के रीज़न्स (कारण) क्या हो सकते हैं?🛑
ODD का कोई एक सिंगल रीज़न नहीं है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह कुछ चीज़ों का कॉम्बिनेशन हो सकता है:
👉जेनेटिक फैक्टर्स: अगर फॅमिली में किसी को मूड डिसऑर्डर, एंग्जायटी या पर्सनालिटी डिसऑर्डर रहा है, तो रिस्क बढ़ जाता है।
👉बायोलॉजिकल फैक्टर्स: दिमाग के कुछ केमिकल मेसेंजर्स (न्यूरोट्रांसमीटर्स) में इम्बैलेंस होने से भी बिहेवियर पर असर पड़ सकता है।
👉एनवायरनमेंटल फैक्टर्स: घर का माहौल भी एक बड़ा रोल प्ले करता है।
👉पेरेंटिंग स्टाइल: बहुत ज़्यादा सख्त या बहुत लापरवाह पेरेंटिंग।
👉फॅमिली इश्यूज: घर में रोज़-रोज़ के झगड़े या आपस में बनती न हो।
👉इनकंसिस्टेंट डिसिप्लिन: कभी एक ही गलती पर डांट पड़ना और कभी उसी गलती को इग्नोर कर देना।
डॉक्टर रश्मि मोघे हिरवे, मनोचिकित्सक तथा काउंसलर भोपाल 07553138825
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ODD का इलाज (ट्रीटमेंट) कैसे होता है?
odd के इलाज से इससे बच्चे के बिहेवियर में सुधार आ सकता है। इसमें बच्चे और फॅमिली दोनों को शामिल किया जाता है।
👉🛑साइकिएट्रिक दवाइयां🛑= इन बच्चों का व्यवहार इतना अग्रेसिव हो जाता है कि आप चाहें या ना चाहें, बच्चे को कई बार दवाइयां देनी ही पड़ती हैं। दवाइयां बेहद जल्दी असर करती हैं, कुछ ही दिनों परिणाम दिखने लगते हैं, एग्रेशन गुस्सा कम करने की दवाएं, ADHD की दवाएं, मूड स्विंग को रोकने वाली दवाएं आदि बेहद बेहद प्रभावी होती हैं। (बहुत कम या बिना किसी साइड इफेक्ट्स के) तेज गति से परिणाम लाने के लिए, अनुभवी मनोचिकित्सक बड़ी ही कुशलता से इन दवाओं का सही उपयोग करने में सक्षम होते हैं।🛑
👉पेरेंट मैनेजमेंट ट्रेनिंग (PMT): इसमें पेरेंट्स को सिखाया जाता है कि बच्चे के पॉजिटिव बिहेवियर को कैसे बढ़ावा दें और नेगेटिव बिहेवियर को कैसे हैंडल करें।
👉फैमिली थेरेपी: इसमें पूरी फैमिली एक साथ थेरेपिस्ट से मिलती है ताकि कम्युनिकेशन बेहतर हो और घर का माहौल आपसी समझ से सुधर सके।
👉कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT): यह थेरेपी बच्चे को अपने गुस्से को कण्ट्रोल करना और प्रॉब्लम्स को आसान तरीके से सॉल्व करना सिखाती है।
👉सोशल स्किल्स ट्रेनिंग: इससे बच्चे को दूसरों के साथ आसानी से घुलने-मिलने और दोस्ती करने में मदद मिलती है।
🛑अगर आपको अपने बच्चे में ऊपर दिए गए लक्षण दिखते हैं, तो चाइल्ड साइकियाट्री में अनुभवी किसी साइकियाट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) से सलाह लेना सबसे अच्छा कदम है। सही गाइडेंस और सपोर्ट से इस सिचुएशन को एक हद तक हैंडल किया जा सकता है।
डॉक्टर रश्मि मोघे हिरवे, मनोचिकित्सक तथा काउंसलर भोपाल
Dr Rashmi Moghe Hirve psychiatrist and Counsellor, Bhopal
07553138825
With Neurologist DrMakarand Hirve bhopal