16/08/2026
““समय कभी वापस नहीं आता”… लेकिन अगर हिम्मत बाकी हो, तो इंसान खुद वापस आ सकता है — अभिषेक की कहानी
मैं किसी बच्चे से यह नहीं कहूँगा कि वह अभिषेक जैसा बने।
क्योंकि अभिषेक की कहानी में उसका भटकाव किसी के लिए आदर्श नहीं है।
लेकिन मैं हर उस बच्चे से जरूर कहूँगा, जिसने कभी पढ़ाई छोड़ी, समय बर्बाद किया, अपने लक्ष्य से दूर चला गया और अब बैठकर सोचता है—
“अब बहुत देर हो चुकी है… जो समय निकल गया, वो वापस थोड़ी आएगा… अब मुझसे पढ़ाई नहीं होगी…”
एक बार अभिषेक की कहानी जरूर पढ़ लेना।
क्योंकि कभी-कभी जिंदगी में देर हो जाती है,लेकिन वापसी के लिए हमेशा देर नहीं होती !
मानकासर गाँव का वह लड़का, जिसके अंदर प्रतिभा बहुत थी… बस दिशा नहीं थी
मानकासर गाँव के किसान परिवार में जन्मा अभिषेक डेलू पढ़ाई में शुरू से ही बहुत तेज था।
दिमाग इतना तेज कि उसे हमेशा लगता रहा—
“अभी नहीं पढ़ता तो क्या हुआ, आखिर में पढ़ लूँगा… मैं कर लूँगा।”
और सच कहूँ तो वह कई बार कर भी लेता था।कभी टेस्ट में बहुत अच्छे नंबर,
तो कभी ऐसे नंबर कि देखकर लगे—
“इस लड़के का चयन होगा भी या नहीं?”
कभी क्लास में,तो कभी गायब कभी टेस्ट में शानदार प्रदर्शन,तो कभी टेस्ट देने तक नहीं पहुँचना ,पढ़ाई के साथ-साथ उसने अपनी एक दूसरी दुनिया भी बना ली थी।
और यहीं से उसकी सबसे बड़ी समस्या शुरू हुई।
प्रतिभा थी, लेकिन अनुशासन नहीं था
अभिषेक Desert-80 परीक्षा में 2022 में चयनित हुआ था।Desert 80 फाउंडेशन ने 4 साल तक अभिषेक को पढ़ाया ,वह लगातार अच्छे अंक लाने की क्षमता रखता था।लेकिन नियमित पढ़ाई नहीं।न क्लास की नियमितता,न टेस्ट की नियमितता,न समय का हिसाब।
उसे लगता था—
“अंत में मेहनत करूँगा और सब कवर कर लूँगा।”
लेकिन जिंदगी में सबसे खतरनाक भ्रम यही होता है—“अभी समय बहुत है।”
समय निकलता रहता है।और एक दिन पता चलता है कि जिस “आखिरी समय” का इंतजार कर रहे थे,वह समय आ चुका है।
NEET 2025 — सिर्फ 15 नंबर की दूरी… लेकिन उसके पीछे पूरी कहानी थी
अभिषेक में काबिलियत की कोई कमी नहीं थी।वह पहला प्रयास ही निकाल सकता था।लेकिन पढ़ाई में अनुशासन की कमी, दोस्तों के साथ इधर-उधर का समय, क्लास से दूरी और अपनी दूसरी दुनिया में उलझे रहने के कारण NEET 2025 में वह चयन से सिर्फ 15 नंबर दूर रह गया।
सोचिए—
सिर्फ 15 नंबर।मतलब लगभग 3 सवाल।
एक ऐसा बच्चा जिसकी क्षमता 720/720 तक जाने की थी,वह सिर्फ तीन सवालों की दूरी पर रह गया।
यह कहानी उसकी काबिलियत की कमी की नहीं थी ,यह कहानी उसकी आदतों की थी।
और फिर बुरे दोस्तों ने उसे उस जगह पहुँचा दिया, जहाँ से निकलना आसान नहीं था
बाद में बीकानेर में अभिषेक कुछ ऐसे लड़कों के संपर्क में आया, जिन्होंने उसे जुए की आदत लगा दी।धीरे-धीरे वह इस जाल में फँसता चला गया।
सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि वह किसी को बता भी नहीं पा रहा था।
डरता था।उसे डर था कि अगर सबको पता चल गया तो क्या होगा?
और यही डर उसे और अंदर ले जा रहा था।जुआ, गेमिंग और गलत संगत केवल पैसा नहीं बिगाड़ते।वे दिमाग पर कब्जा कर लेते हैं।पढ़ने बैठो तो ध्यान वहाँ नहीं रहता।लाइब्रेरी जाओ तो मन पढ़ाई में नहीं लगता।और धीरे-धीरे इंसान अपनी ही जिंदगी से झूठ बोलने लगता है।
अभिषेक भी झूठ बोलने लगा।
लेकिन एक बात ध्यान देने वाली थी—
वह सिर्फ इस एक चीज को छिपाने के लिए झूठ बोल रहा था।
हम सबको लग रहा था कि यह लड़का पढ़ाई को लेकर गंभीर नहीं है…
मैनेजमेंट और शिक्षकों को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर अभिषेक पढ़ाई में इतना अनियमित क्यों है।उसकी क्षमता देखकर लगता था कि यह लड़का बहुत आगे जा सकता है।लेकिन उसका व्यवहार कुछ और कहानी बता रहा था।
एक समय ऐसा आया जब उसके पिता ओम जी को बुलाया गया।
किसान आदमी है,कुछ समय तक बेटे के साथ रहे।सुबह जगाना,क्लास भेजना,टेस्ट के लिए भेजना,समय का ध्यान रखना—
और अभिषेक ठीक चलने लगा।
लेकिन पिता कितने दिन बेटे के साथ रह सकते थे?घर था।खेती थी।सामाजिक जिम्मेदारियाँ थीं।काम था।
उन्हें वापस जाना ही था।
और जैसे ही पिता वापस गए—
अभिषेक फिर उसी रास्ते पर लौटने लगा।
असल समस्या अब भी हमारी नजरों से छिपी हुई थी ,उधर जुए में उसका कर्ज भी हो चुका था।जिन लोगों से वह जुड़ गया था, उनसे पूरी तरह पीछा छुड़ाना उसके लिए आसान नहीं था।वे उसे पढ़ने बैठने के बाद भी बुलाने आ जाते।वह मना नहीं कर पाता।एक तरफ पढ़ाई छूट रही थी।
दूसरी तरफ कर्ज था अधिक नहीं था पर बच्चे के लिए वो खूब होता है ,और तीसरी तरफ डर।वह किसी को बता नहीं पा रहा था कि आखिर उसके साथ हो क्या रहा है।यही वजह थी कि ऊपर से हमें एक लापरवाह बच्चा दिखाई दे रहा था, जबकि अंदर से वह एक ऐसे जाल में फँसा हुआ था जिसके बारे में किसी को पता ही नहीं था।
⸻
NEET 2026 से सिर्फ दो महीने पहले… एक बातचीत ने पूरी कहानी बदल दी
एक दिन मैंने उसे बुलाया।
डाँटने के लिए नहीं।
प्यार से।
कंधे पर हाथ रखा और पूछा— अभिषेक, आखिर बात क्या है?”
पहले वह चुप रहा।डरा हुआ था।
फिर धीरे-धीरे उसने अपनी पूरी बात बता दी।ये बात मैंने किसी को नहीं बतायी
जब मुझे पूरी बात पता चली तो मैं उसके कमरे तक गया।वह वहाँ नहीं था।
फिर मैनेजमेंट स्टाफ से कहा कि अब इसकी दिनचर्या को बारीकी से देखा जाए।तब असली तस्वीर सामने आई।
लाइब्रेरी जाता था… लेकिन पढ़ने नहीं पहुँच पाता थाअभिषेक जब लाइब्रेरी के लिए निकलता, तो वही लड़के लाइब्रेरी के बाहर उसे पकड़ लेते।उसे अपने साथ ले जाते।वह मजबूरी में उनके साथ चला जाता।अब बात केवल आदत की नहीं थी।
वह उस चक्र से बाहर निकलना चाहता था, लेकिन अकेले निकल नहीं पा रहा था।फिर उसे बुलाया गया।प्यार से समझाया गया।मैंने उससे सिर्फ एक बात कही—“तू ईमानदारी से पढ़ाई करेगा तो उन लड़कों से तेरा पीछा छुड़ाने की जिम्मेदारी मेरी।”उसने कहा—
“सर, मैं डर की वजह से किसी को बता नहीं पाया। अगर आप ये कर दें तो मेरी बहुत बड़ी मदद हो जाएगी।”
उसकी जो रकम उन लोगों पर बाकी थी, वह चुकाई गई ,और अभिषेक को उस जाल से बाहर निकाला गया।
अब पहली बार उसके सामने सिर्फ एक रास्ता था—पढ़ाई।
और फिर शुरू हुआ असली अभिषेक…
अब वह रोज लाइब्रेरी आने लगा।
रोज एंट्री करता रोज पढ़ाई।
रोज टेस्ट।नियमित दिनचर्या।
कोई बहाना नहीं।कोई छिपाव नहीं।
कोई दूसरी दुनिया नहीं।बस पढ़ाई।
और फिर वही बच्चा, जिसे कुछ समय पहले तक हम अनियमित और लापरवाह समझ रहे थे—
दो महीने में बदल गया।
NEET जैसी परीक्षा, जिसकी तैयारी में बच्चे सालों लगा देते हैं, उसमें उसने सिर्फ दो महीने की ईमानदार और नियमित मेहनत से ऐसी वापसी की, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
NEET 2026 —परिणाम आया अभिषेक डेलू — 660 अंक।और फिर रीनिट में भी—610 अंक।
चयन हुआ।वह भी अच्छी रैंक के साथ।
जिस बच्चे को लेकर कुछ समय पहले तक सवाल था कि—“इसका होगा भी या नहीं?”वही बच्चा अब अपनी मंजिल के सामने खड़ा था।
कहानी का सबसे बड़ा सबक 660 नंबर नहीं हैंअभिषेक की कहानी को सिर्फ इसलिए मत पढ़िए कि उसने NEET में 660 नंबर हासिल किए।
इस कहानी की असली ताकत 660 नंबरों से कहीं ज्यादा बड़ी है।क्योंकि अभिषेक ने सिर्फ एक परीक्षा नहीं निकाली।उसने अपने भटकाव से वापसी की।उसने अपनी गलती स्वीकार की।मदद माँगी।
गलत संगत से बाहर निकला।और फिर अपने अंदर की उस प्रतिभा को, जिसे वह वर्षों से बर्बाद कर रहा था, सही दिशा में लगाया,कभी-कभी कारण बहुत छोटा होता है… लेकिन उसे ढूँढना बहुत मुश्किल,किसी बच्चे के नंबर गिर रहे हों तो हम तुरंत कह देते हैं—“पढ़ता नहीं है।”क्लास में नहीं आता तो—“सीरियस नहीं है।”टेस्ट खराब हो तो—“इससे नहीं होगा।”लेकिन हर बार समस्या इतनी सीधी नहीं होती।कभी कारण दोस्त होते हैं।कभी मोबाइल।कभी गेमिंग।कभी जुआ।कभी डर।
कभी कोई ऐसा कर्ज या परेशानी जिसे बच्चा किसी को बता नहीं पा रहा।और कभी-कभी बच्चा खुद अपनी परेशानी से बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूँढ पाता।
इसलिए किसी बच्चे को सुधारने से पहले उसकी समस्या को समझना जरूरी है
और अब यह कहानी उन बच्चों के लिए है जो सोचते हैं— “अब बहुत देर हो गई।”
जिस बच्चे ने पढ़ाई छोड़ दी है…
जिसने कुछ साल बर्बाद कर दिए हैं…
जिसके नंबर कभी अच्छे आए, कभी बहुत खराब…जिसे अब लगता है कि दूसरे बच्चे उससे बहुत आगे निकल चुके हैं…
जो रात में बैठकर सोचता है—“काश मैंने पहले पढ़ लिया होता…”“काश मैंने समय बर्बाद नहीं किया होता…”
“काश मैं नियमित रहता…”
और फिर खुद से कहता है—
“अब क्या फायदा? अब तो बहुत देर हो चुकी है।”उन बच्चों से मैं सिर्फ इतना कहूँगा—अभिषेक की कहानी याद रखना।
उसने अपना खोया हुआ समय वापस नहीं पाया ,उसने बस बचे हुए समय को ईमानदारी से इस्तेमाल किया।और वही उसके लिए काफी था।
**समय वापस नहीं आता।
लेकिन इंसान वापस आ सकता है।**
बीते हुए दो साल वापस नहीं आएँगे।
बर्बाद हुई कक्षाएँ वापस नहीं आएँगी।
छूटे हुए टेस्ट वापस नहीं आएँगे।
NEET का पहला प्रयास वापस नहीं आएगा।लेकिन अगर आज भी मन में एक आवाज है—“मुझे वापस पढ़ना है।”तो उस आवाज को दबाना मत।हो सकता है तुम देर से शुरू करो।हो सकता है तुम्हें दूसरों से ज्यादा मेहनत करनी पड़े।
हो सकता है तुम्हें अपनी कई पुरानी आदतें छोड़नी पड़ें।
लेकिन यह मत मान लेना कि—
“अब कुछ नहीं हो सकता।”
क्योंकि अभिषेक की कहानी यही बताती है—काबिलियत अगर बची हुई है और इरादा ईमानदार है, तो वापसी की कोई तय उम्र नहीं होती।और शायद सबसे जरूरी बात—बच्चे को उसकी गलती से पहचान मत दो।क्योंकि कभी-कभी एक बच्चा गलत रास्ते पर इसलिए नहीं होता कि उसमें क्षमता नहीं है…
बल्कि इसलिए होता है क्योंकि उसे सही समय पर उसकी असली समस्या समझने वाला कोई नहीं मिला।अभिषेक को भी सिर्फ डाँट की जरूरत नहीं थी।
उसे समझे जाने की जरूरत थी।
उसे रास्ता दिखाने की जरूरत थी।
और जब रास्ता मिला—
उसने चलना शुरू किया।
फिर परिणाम ने खुद बता दिया कि उस बच्चे के अंदर कितना दम था।
**यह अभिषेक की NEET की कहानी नहीं है।यह एक भटके हुए बच्चे की वापसी की कहानी है।**
और हर उस बच्चे के नाम है जो आज भी मन ही मन कहता है—
काश मैं फिर से शुरू कर पाता…”
हाँ, कर सकते हो।
आज से रिस्टार्ट !