Dr. Priti Rajpurohit

Dr. Priti Rajpurohit प्रसूति, स्त्री रोग, फीटल मेडिसिन एवं इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ, लैप्रोस्कोपिक एवं स्त्री रोग कैंसर सर्जन
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प्रसूति, स्त्री रोग, फीटल मेडिसिन एवं इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ, लैप्रोस्कोपिक एवं स्त्री रोग कैंसर सर्जन

- डॉ. प्रीति IVF एंड फर्टिलिटी सेंटर
- श्रीराम वूमेन एंड चाइल्ड हॉस्पिटल
( पी.बी.एम. शिशु अस्पताल के सामने , बीकानेर )

MBBS, MS, DNB, MRCOG, FMAS, DARM, FART, FGO

पूर्व कार्य अनुभव :

सहायक आचार्य , पी.बी.एम. अस्पताल , बीकानेर
स्त्री रोग लैप्रोस्कोपिक फ़ेलोशिप, के.ई.एम अस्पताल , मुंबई
स्त्री रोग कैंसर फ़ेलोशिप , सिविल अस्पताल , अहमदाबाद
स्त्री रोग विशेषज्ञ , सैफ़ी अस्पताल , मुंबई
सहायक आचार्य , यशवंतराव सिविल अस्पताल , पुणे
स्त्री रोग विशेषज्ञ, जीवन रक्षा अस्पताल, बीकानेर
सह -आचार्य , प्रमुखस्वामी अस्पताल , आनंद
स्त्री रोग विशेषज्ञ , फोर्टिस अस्पताल , बीकानेर
स्त्री रोग विशेषज्ञ , महाराजा यशवंत राव अस्पताल, इंदौर
स्त्री रोग विशेषज्ञ, भाभा अस्पताल , मुंबई

16/08/2026

जब सावन की रिमझिम फुहारों के साथ हवाओं में तीज की मिठास घुलती है, तब झूलों पर छाई यह उमंग हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज के पावन बंधन को और खूबसूरत बना देती है।

सावन-भादों में तीनों तीज के इस झूले की हर पेंग के साथ, आप सभी को सुख-समृद्धि और खुशियों की हार्दिक शुभकामनायें !!

सभी को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं व देश के शूरवीरों को नतमस्तक सलाम !!लहू बहा जो, रगों में आज भी उबलता ...
15/08/2026

सभी को 80वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं व देश के शूरवीरों को नतमस्तक सलाम !!

लहू बहा जो, रगों में आज भी उबलता है,
आँखों के कोरों में, वो दर्द अभी भी सिमटा है।

स्वतंत्रता दिवस साहस और पराक्रम का उत्सव है।

उठो सपूतों वतन के, आँसू अब न बहाओ,
उन्नति से लिखो इतिहास नया, जय भारत गाओ।

स्वतंत्रता दिवस पर संविधान के उच्च आदर्शों को स्मरण करते हुए देश की एकता, अखण्डता एवं संप्रभुता को बनाये रखने का संकल्प लें एवं श्रेष्ठ भारत के निर्माण में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें।

जय माँ भारती, जय हिंद, जयकारा गूँजे हर गाँव,
तेरे चरणों में बलिदान हमारा, अमर रहे ये भाव।

हर घर तिरंगा, हर दिल तिरंगा, लहराते हुए तिरंगे से सुंदर कुछ भी नहीं।

सभी को पुनः स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !

जय हिन्द !!
जय भारत !!

डॉक्टर वही जो दर्द हरै, मन का हरै क्लेश।आर्थिक भार न दे सके, सुखी रहे परिवेश॥ ☞ संभाग में पहली बार कम कीमत में महिलाओं क...
19/07/2026

डॉक्टर वही जो दर्द हरै, मन का हरै क्लेश।
आर्थिक भार न दे सके, सुखी रहे परिवेश॥

☞ संभाग में पहली बार कम कीमत में महिलाओं के उन्नत 3D लैप्रोस्कोपी उपचार !!

इलाज का खर्च परिवारों के लिए कई बार आर्थिक बोझ बन जाता है जो इलाज़ को तनाव पूर्ण बना देता है।

प्रयास है की महिलाओं के उन्नत उपचार कम कीमत में होते रहें।

इसी प्रयास में संभाग में पहली बार, कम कीमत में 3D लैप्रोस्कोपी द्वारा महिलाओं के उन्नत उपचार किये जा रहे हैं।

समाज के प्रति दायित्व एवं कर्तव्यों का निर्वहन करना एवं सुनिश्चित करना की इलाज के दौरान, मरीज़ एवं उनके परिवार पर आर्थिक भार कम पढ़ें, चिकित्सक की एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में नैतिक जिम्मेदारी है।

सिर्फ दवा देना ही, डॉक्टर का काम नहीं,
मरीज़ के चेहरे पर हँसी हो, इससे बड़ा कोई इनाम नहीं।

मरीज एवं उनके प्रियजनों की मुस्कुराहट वास्तविक पुरस्कार है। सभी के स्नेह व प्रोत्साहन का बहुत बहुत आभार।

स्वस्थ रहे हर नारी, यही है जिम्मेदारी हमारी।

स्वस्थ्य रहें !! मुस्कुराते रहें !!

18/07/2026

हुनर का यह सफ़र कभी थमने ना पाए...

कहते हैं, दवा की खुराक तो बस एक जिस्म को आराम देती है, मगर ज्ञान की रोशनी पूरी नस्लों को संभाल लेती है।

चिकित्सा के क्षेत्र में अपने हुनर को लगातार तराशना और आधुनिक तकनीकों में महारत हासिल करना बेहद जरुरी है।

​अगर आप भी गाइनक लैप्रोस्कोपी (Gynaec Laparoscopy) के क्षेत्र में अपने कदम आगे बढ़ाना चाहते हैं और एडवांस सर्जिकल स्किल्स जैसे 3D लेप्रोस्कोपी सीखना चाहते हैं, तो यह बेहतरीन अवसर आपके लिए है।

​🏥 6 Months Gynaec 3D Laparoscopy Fellowship Training for MD/MS OBGY Doctors

यह 6 महीने की ट्रेनिंग आपको लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की बारीकियों, लाइव ओटी एक्सपोज़र और हैंड्स-ऑन एक्सपीरियंस से रूबरू कराएगी, ताकि आप आत्मविश्वास के साथ जटिल से जटिल केसेज को हैंडल कर सकें।

​इस फैलोशिप की मुख्य विशेषताएँ:

​- लाइव ओटी एक्सपोज़र (Live OT Exposure)
​- हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग और बारीकियों को समझने का मौका
​- एडवांस 3D लैप्रोस्कोपिक तकनीक का गहन व्यावहारिक ज्ञान

​सीखने के इस बेहतरीन सफर का हिस्सा बनें ।

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प्रसूति, स्त्री रोग, फीटल मेडिसिन एवं इनफर्टिलिटी विशेषज्ञ, लैप्रोस्कोपिक एवं स्त्री रोग कैंसर सर्जन

दर्द, दवा और दुआ का गहरा रिश्ता है..." लकीरें हाथ की मेरी, किसी के काम आएँ,दुआ करना कि हाथ मेरे, कभी थकने न पाएँ "तकनीके...
01/07/2026

दर्द, दवा और दुआ का गहरा रिश्ता है...

" लकीरें हाथ की मेरी, किसी के काम आएँ,
दुआ करना कि हाथ मेरे, कभी थकने न पाएँ "

तकनीकें बदल रही है, चिकित्सा की दुनिया में नित नए आविष्कार हो रहे हैं, लेकिन जो अचल और अटल है...वह है चिकित्सकों का समर्पण।

​चाहे कोरोना काल हो या कोई और विपदा, चिकित्सकों के समर्पण ने मानवता के लिए हमेशा अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किये हैं।

खुद के घर में चाहे कितना भी अंधेरा हो मगर, दूसरों के आँगन में उजाला करने का चिकित्सक हौसला रखते हैं।

युद्ध के मैदान में शस्त्र विहिन खड़े हैं,
अनदेखे दुश्मनों से लड़ने की जिद पर अड़े हैं;
त्यौहार, छुट्टी, दिन हो या रात,
जीवन मृत्यु बीच सदैव डटे हैं;
कितने त्योहार बिन परिवारों के बिताएं,
रातों में कितनी बार जागें, गिन भी न पाए;
जानते हैं, थक गए तो गुनहगार कहलायेंगे,
अपनी ही नज़रों में गिर जायेंगे;
हाँ ! हम डॉक्टर हैं, कोई भगवान नहीं,
पर डॉक्टर का डॉक्टर होना, इतना भी आसान नहीं...

इसी उम्मीद के साथ की जीवन जो मिला है हमें, उसमें जीवनपर्यंत हम सदकर्म करें, सभी को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!

☞ Placenta Accreta : जब ईश्वर ने थाम लीं उँगलियाँ !!हर चिकित्सक के जीवन में कुछ रातें ऐसी आती हैं, जो नींद छीन लेती हैं,...
28/06/2026

☞ Placenta Accreta : जब ईश्वर ने थाम लीं उँगलियाँ !!

हर चिकित्सक के जीवन में कुछ रातें ऐसी आती हैं, जो नींद छीन लेती हैं, लेकिन जब सुबह होती है, तो वो एक नया जीवन देकर जाती हैं।

ऑपरेशन थिएटर के बंद दरवाजों के पीछे की दुनिया बाहर के शोर से बिल्कुल अलग होती है।

वहाँ सिर्फ मॉनिटर की 'बीप-बीप' की आवाज़ और सामने लेटी एक ज़िंदगी होती है, जिसका पूरा दारोमदार आपके हाथों की उंगलियों और आपके फैसलों पर होता है।

हाल ही में मेरी सर्जिकल टेबल पर एक ऐसा ही पल था, जहाँ चुनौती सिर्फ एक सर्जरी की नहीं, बल्कि एक माँ के संपूर्ण मातृत्व को सुरक्षित रखने की थी।

​मेरे सामने बेहद नाज़ुक अवस्था में एक युवा माँ थी। केस था 'प्लेसेंटा एक्रीटा' (Placenta Accreta) का।

यानी एक ऐसी भयानक स्थिति जहाँ बच्चे की नाल, माँ की बच्चेदानी की दीवार को चीरते हुए किसी पेड़ की जड़ों की तरह उसे जकड़ लेती है।

चिकित्सा जगत में इसे एक दुःस्वप्न की तरह देखा जाता है।

गर्भनाल माँ के गर्भाशय की दीवार में इतनी गहराई तक धंस जाती है कि बच्चा होने के बाद उसे अलग करना नामुमकिन हो जाता है।

डिलीवरी के बाद बच्चे की नाल को अलग करने की कोशिश का मतलब होता है— बेतहाशा, अनियंत्रित खून का बहना। डिलीवरी के चंद मिनटों में इतना खून बह जाता है कि माँ की जान बचाना नामुमकिन होने लगता है।

चिकित्सा विज्ञान से जुड़े लोग जानते हैं कि यह कितनी खौफनाक स्थिति है। ऐसी हालत में एक ही रास्ता अपनाया जाता है— गर्भाशय को काटकर शरीर से अलग कर देना।

लेकिन एक महिला के लिए उसका गर्भाशय सिर्फ एक अंग नहीं, उसकी सृजन शक्ति का प्रतीक, उसकी पूर्णता का अहसास होता है।

सर्जरी शुरू होने से ठीक पहले, उस युवा माँ ने अपनी काँपती हुई उंगलियों से मेरा हाथ पकड़ा था। उसने बेहद धीमी, टूटती आवाज़ में मुझसे कहा था— "दीदी, मेरी कोख मत उजड़ने देना, मुझे अधूरा मत करना।"

जब मैं उस युवा माँ की आँखों में देख रही थी, तो मुझे सिर्फ एक मरीज नहीं, बल्कि उसके भीतर का वो मातृत्व दिखा जो अपनी पूर्णता के लिए मुझसे मूक प्रार्थना कर रहा था।

​उस एक जुमले ने ऑपरेशन थिएटर के सन्नाटे को और भारी कर दिया था।

ऑपरेशन थिएटर की लाइटों के नीचे, धड़कनें तेज थीं और समय रेत की तरह फिसल रहा था, ​जोखिम बहुत बड़ा था व राह बेहद संकरी थी।

अपनी टीम की काबिलियत और परमपिता परमेश्वर पर भरोसा रख कर हमने एक बेहद चुनौतीपूर्ण रास्ता चुना — हमने सिर्फ जान बचाने की नहीं, बल्कि उस माँ के मातृत्व के उस आँचल को अक्षुण्ण रखने की ठानी।

​घंटों तक सुई की नोंक जैसी बारीक सर्जिकल ब्लेड से मैं और मेरी टीम उस मौत के चक्रव्यूह से लड़ते रहे।

हर सेकंड ऐसा लग रहा था जैसे वक्त थम गया हो। मॉनिटर की 'बीप' जैसे हमारे दिलों की धड़कन बन चुकी थी। ​

काँप सकते थे जो हाथ, वो हुनर बन कर चले और जब आख़िरी टांका लगा, तो चमत्कार हो चुका था।

बिना गर्भाशय निकाले, वो कोख भी मुस्कुरा रही थी, माँ की साँसें भी सलामत थीं और कमरे में गूंजती नन्ही किलकारी उस जीत का जश्न मना रही थी।

​हुनर को सौंप कर ईश्वर को,
मैंने हाथ बढ़ाया था,
लहू के समंदर में जैसे,
कोई तिनका तैर कर आया था,
बचा ली कोख भी उसकी,
बचा ली साँस भी उसकी,
लगा जैसे विधाता ने स्वयं,
मेरा हाथ चलाया था...

एक चिकित्सक के रूप में, जब मैं ऑपरेशन के बाद परिवारों के चेहरों पर सुकून देखती हूँ, तो लगता है सालों की तपस्या सफल हो गई।

हर माँ, हर बहन को मेरा वचन है — जब तक मेरी साँसें और मेरा हुनर सलामत है, आपके विश्वास और आपके मातृत्व पर कभी आँच नहीं आने दूँगी।

आपकी दुआओं की कर्जदार,
✨ डॉ. प्रीति राजपुरोहित

21/06/2026

"बधाइयों का कारवां"

किसी ने गले मिलकर ख़ुशी जताई,
किसी ने दूर से फोन पर दुआएं बरसायीं,
​कोई नज़र उतारने आया,
कोई खिलौने साथ लाया,
किसी ने मन्नत का धागा खोला,
किसी ने थाल सजाया,
मिठाइयों के डिब्बे खुशियों से भर गए,
जो कभी अजनबी थे, वो सभी अपने से हो गए,
वो प्यार, वो दुलार मन को भाता गया,
और बधाइयों का कारवां यूँ ही आता गया....

☞ जब ज़िम्मेदारी बड़ी हो, तो कामयाबी का सुकून भी बड़ा होता है !!​एक डॉक्टर के रूप में, ऐसे कई मामले आते हैं जो सिर्फ हुनर...
21/06/2026

☞ जब ज़िम्मेदारी बड़ी हो, तो कामयाबी का सुकून भी बड़ा होता है !!

​एक डॉक्टर के रूप में, ऐसे कई मामले आते हैं जो सिर्फ हुनर की नहीं, बल्कि धैर्य की भी परीक्षा लेते हैं। ऐसा ही एक केस पिछले दिनों आया।

9 महीने की गर्भवती महिला में प्रेगनेंसी के साथ-साथ गर्भाशय में 4 किलो का बेहद बड़े आकार का फाइब्रॉइड (बच्चादानी की रसौली) भी था।

गर्भावस्था में इतने बड़े फाइब्रॉइड का होना डिलीवरी के दौरान कई तरह की सर्जिकल पेचीदगियां खड़ी करता है।

ऐसे मामलों में सिजेरियन डिलीवरी के साथ फाइब्रॉइड को निकालना अत्यधिक जोखिम भरा होता है, क्योंकि इसमें भारी रक्तस्राव का खतरा रहता है।

चुनौती सिर्फ एक स्वस्थ बच्चे को दुनिया में लाने की ही नहीं थी, बल्कि डिलीवरी के साथ उस विशाल फाइब्रॉइड को निकालने की भी थी।

गर्भावस्था के साथ इतने बड़े फाइब्रॉइड को निकालना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। माँ और बच्चे दोनों को ही सुरक्षित रखना प्राथमिकता थी।

लेकिन जब खुद पर विश्वास हो और टीम के पास क़ाबलियत व अनुभव की ताकत हो, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है।

ऑपरेशन थिएटर के वो घंटे तनाव से भरे थे, लेकिन टीम का सिर्फ एक ही लक्ष्य था—माँ और बच्चे को सुरक्षित बाहर लाना।

जब नवजात की पहली किलकारी गूंजी और कुछ ही देर बाद माँ ने भी मुस्कुराकर अपनी आँखें खोलीं, तो ऑपरेशन थिएटर में मौजूद टीम की थकान पल भर में गायब हो गई।

आज माँ की गोद में चहकता हुआ स्वस्थ बच्चा है और परिवार के चेहरों पर सुकून के आँसू हैं, तो हमें अपने इस पेशे पर गर्व महसूस होता है।

एक डॉक्टर के रूप में, जब हम ऑपरेशन थिएटर की लाइट्स के नीचे खड़े होते हैं, तो हमारे सामने सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि एक परिवार की उम्मीदें और दो जिंदगियों का भविष्य होता है।

​चिकित्सा विज्ञान हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है, किन्तु चिकित्सा विज्ञान सिर्फ दवाईयां या सर्जरी नही है, यह अटूट विश्वास, समर्पण और जिम्मेदारी का नाम भी है।

सरल नहीं मंजिल को पाना,
हर पल नई कसौटी है;
जब विश्वास है अपने ऊपर,
जलती संकल्पों की ज्योति है।।

जो कल नामुमकिन था,
आज वो कर दिखाना है;
हुनर और होंसले से,
नया इतिहास रचाना है।।

☞ नि:संतानता व बार-बार गर्भपात उपचार : संभाग में पहली बार दुर्लभ Porphyria व जटिल गर्भाशय सेप्टम उपचार !!काँच सरीखे ख्वा...
24/05/2026

☞ नि:संतानता व बार-बार गर्भपात उपचार : संभाग में पहली बार दुर्लभ Porphyria व जटिल गर्भाशय सेप्टम उपचार !!

काँच सरीखे ख्वाब सब, बिखरे बारम्बार,
सुबक रही थी चेतना, थम गया था संसार।
​संकट की आँधी चली, डोला हर विश्वास,
टूटी ना पर कोख से, सृजन की वो​ आस॥

4 बार गर्भपात से पीड़ित महिला उपचार के लिए आयीं। गहन जांचों से उन्हें Porphyria जैसे दुर्लभ विकार व जटिल गर्भाशय सेप्टम से पीड़ित पाया गया।

☞ Porphyria एक दुर्लभ विकार है जो अधिकतर आनुवंशिक होता है और शरीर में पोर्फिरिन नामक प्राकृतिक रसायनों के जमाव के कारण होता है।

तीव्र Porphyria से गंभीर दौरे पड़ते हैं जो कई दिनों या हफ्तों तक चल सकते हैं।

Porphyria प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन होर्मोनेस के उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है, जो गर्भावस्था के दौरान चरम पर होता है।

गर्भावस्था, Porphyria के खतरें को बढ़ाती है, जिससे गर्भपात, मातृ उच्च रक्तचाप और भ्रूण के विकास में रुकावट का खतरा बढ़ जाता है।

Porphyria विकार के साथ गर्भाशय सेप्टम एक दुर्लभ व बेहद जटिल समस्या है।

गर्भाशय सेप्टम, महिला में गर्भाशय को दो भागों में बाँट देता है व बार-बार गर्भपात का प्रमुख कारण बनता है।

☞संभाग में पहली बार Porphyria से पीड़ित महिला में करी गयी दूरबीन द्वारा हिस्टेरोस्कोपिक सेप्टल रिसेक्शन सर्जरी से गर्भाशय में विभाजित ऊतक को हटाया गया और एक एकल गर्भाशय को बहाल किया गया।

Porphyria की स्थिति में सर्जरी व गर्भावस्था में जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इस गंभीर विकार में कई प्रसूति और शल्य चिकित्सा संबंधी दवाएं भी Porphyria के खतरे को और बड़ा देती हैं।

पीड़ित महिला में गर्भाशय सेप्टम सर्जरी से पहले और बाद की अवधि में अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

यह बताते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है की Porphyria से पीड़ित महिला में गर्भाशय सेप्टम सर्जरी के बाद महीनो चले सफल चिकित्सीय प्रबंधन से सफल प्रसव संभव हुआ व वर्षों बाद उनके आँगन में शिशु की किलकारियां गूंज उठीं।

प्रसूति के कुछ समय पश्चात, उनका अपने शिशु के साथ आगमन दिल को सुकून दे गया। इस बच्चे की मोहक मुस्कान और इस माँ की अटूट हिम्मत हमें प्रेरणा देती है।

विश्वास की लौ को मन मेरे,
तू मंद कभी मत होने देना,
इस घोर निराशा के सागर में,
ख़ुद को तू ओझल मत होने देना।

तूफ़ान अगर भारी है तो क्या,
तेरी भी मुकम्मल तैयारी है,
हौसलों के तरकश से अब,
हर मुश्किल पर वार जारी है॥

जब भी लगे कि मुश्किलें बहुत बड़ी हैं, तो याद रखें कि हमारी ताकत उन मुश्किलों से कहीं ज़्यादा बड़ी है।

23/05/2026

पग छोटे, जादू बड़ा, पुलकित है परिवार,
लो संभालो, सौंपती मैं, ईश्वर का उपहार...

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Dr. Priti IVF & Fertility Center/Shriram Women And Child Hospital
Bikaner

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